यीशु का संदेश:-(02)शांति का राजकुमार कौन?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय : यीशु का संदेश – सच्चा क्रिसमस भीतर
(आध्यात्मिक मंथन | क्रिसमस विशेष)
भूमिका : क्रिसमस – बाहर या भीतर?
आज का विषय केवल क्रिसमस मनाने का नहीं,
बल्कि क्रिसमस को समझने का है।
आज पूरी दुनिया
रोशनी, सजावट, केक और उपहारों में व्यस्त है।
मार्केट सजे हुए हैं,
ग्रीटिंग कार्ड्स भेजे जा रहे हैं।
लेकिन एक गहरा प्रश्न है —
क्या क्रिसमस का सम्बन्ध बाहरी सजावट से है
या भीतर की स्थिति से?
आज दुनिया शांति की बातें तो बहुत करती है,
लेकिन शांति दिखाई नहीं देती।
तो प्रश्न उठता है —
शांति का राजकुमार कौन?
और
सच्चा क्रिसमस भीतर कैसे मनाया जाए?
नंबर 1 : शांति का राजकुमार कौन?
बाइबल में ईसा मसीह को कहा गया है —
Prince of Peace (शांति का राजकुमार)
लेकिन इसका अर्थ क्या है?
शांति का राजकुमार कोई
राजनीतिक राजा नहीं,
बल्कि वह आत्मा है
जो स्वयं शांति में रहती है
और दूसरों को भी शांति का मार्ग सिखाती है।
उदाहरण:
अगर कोई व्यक्ति
अशांत भीड़ में भी शांत रह सके,
तूफानों, कष्टों, अपमान और दुख के बीच भी
अंदर से स्थिर रह सके —
वही वास्तव में शांति का राजकुमार है।
मुरली नोट – 24 दिसंबर 1969
“धर्मपिता आत्माओं को शांति का मार्ग बताते हैं।
परमात्मा स्वयं शांति का सागर है।”
नंबर 2 : यीशु का असली संदेश
यीशु मसीह ने स्पष्ट कहा —
“Kingdom of God is within you.”
ईश्वर का राज्य बाहर नहीं,
आपके भीतर है।
शांति —
वस्तुओं में नहीं
परिस्थितियों में नहीं
संबंधों में भी नहीं
शांति आत्मा की मूल प्रकृति है।
उदाहरण:
समुद्र की सतह पर लहरें अशांत होती हैं,
लेकिन गहराई में सदा शांति रहती है।
शरीर = लहर
आत्मा = गहराई (जहाँ शांति है)
मुरली नोट – 25 दिसंबर 1971
“यीशु ने आत्माओं को देहभान से ऊपर उठने की शिक्षा दी।”
नंबर 3 : फिर दुनिया अशांत क्यों है?
क्योंकि क्रिसमस —
कैलेंडर में है
बोर्डों पर है
कार्ड्स में है
शब्दों में है
लेकिन
चेतना में नहीं है।
दुनिया ने यीशु का जन्मदिन मनाया,
लेकिन
उनके संदेश को जन्म नहीं लेने दिया।
उदाहरण:
अगर बाहर दीपक जले
और घर के अंदर अंधेरा हो,
तो रोशनी किस काम की?
मुरली नोट – 26 दिसंबर 1976
“जब आत्मा अपने स्वरूप को भूलती है,
तो उत्सव भी अशांति बन जाता है।”
नंबर 4 : सच्चा क्रिसमस क्या है?
सच्चा क्रिसमस —
सिर्फ चर्च जाना नहीं
सिर्फ केक काटना नहीं
सिर्फ शुभकामनाएं देना नहीं
सच्चा क्रिसमस है —
आत्मा में शांति का जन्म
विकारों का अंत
नई चेतना की शुरुआत
जिस दिन
-
क्रोध कम हुआ
-
अहंकार टूटा
-
क्षमा आई
-
प्रेम जागा
वही आपका सच्चा क्रिसमस है।
मुरली नोट – 25 दिसंबर 1990
“सच्चा उत्सव तब है
जब आत्मा पवित्रता और शांति धारण करे।”
शांति का राजकुमार बनने का मार्ग
यीशु ने स्वयं अपने जीवन से सिखाया —
| संसार की आदत | यीशु का मार्ग |
|---|---|
| प्रतिक्रिया | सहनशीलता |
| बदला | क्षमा |
| अधिकार | सेवा |
| अहंकार | नम्रता |
जिसने अपने विकारों पर विजय पाई,
वही सच्चा राजकुमार है।
मुरली नोट – 24 दिसंबर 1983
“जो आत्मा शांत और पवित्र रहती है,
वही ईश्वरीय राज्य की अधिकारी बनती है।”
आज शांति का राजकुमार कैसे बनें? (प्रैक्टिकल अभ्यास)
डेली अभ्यास:
-
मैं आत्मा हूँ
-
मैं शरीर नहीं हूँ
-
मैं शांत स्वरूप आत्मा हूँ
-
शांति मेरा स्वधर्म है
-
मैं शांति धाम से आई हूँ
-
शांति का सागर परमात्मा मेरा पिता है
दिन में:
हर आत्मा को भाई समझो।
रात में:
सोने से पहले चेक करो —
आज मैंने कितनी शांति फैलाई?
उदाहरण:
घर में अगर एक व्यक्ति भी शांत हो जाए,
तो पूरा वातावरण बदल सकता है।
सच्चा क्रिसमस भीतर मनाएँ
आत्मा को पहचानो
परमात्मा को याद करो
पुराने स्वभाव को विदाई दो
नई दिव्य चेतना को जन्म दो
यही असली उपहार है।
मुरली नोट – 24 दिसंबर 1978
“जब आत्मा नई स्थिति धारण करती है,
वही नया जन्म कहलाता है।”
समापन संदेश
क्रिसमस कोई तारीख नहीं,
क्रिसमस एक स्थिति है।
जब आत्मा
शांत बनती है,
पवित्र बनती है,
प्रेम स्वरूप बनती है —
तभी शांति का राजकुमार जन्म लेता है।
इस बार क्रिसमस बाहर नहीं,
भीतर मनाएँ।
प्रश्न 1: आज के समय में क्रिसमस को समझने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
आज क्रिसमस एक बाहरी उत्सव बन गया है—रोशनी, सजावट, केक और उपहारों तक सीमित।
लेकिन यीशु का संदेश बाहरी नहीं, भीतरी परिवर्तन से जुड़ा है।
इसलिए आज क्रिसमस को मनाने से अधिक उसे समझने की आवश्यकता है।
प्रश्न 2: क्या क्रिसमस का सम्बन्ध बाहरी सजावट से है या भीतर की स्थिति से?
उत्तर:
क्रिसमस का वास्तविक सम्बन्ध भीतर की आत्मिक स्थिति से है।
बाहरी सजावट कुछ समय के लिए खुशी देती है,
लेकिन आत्मा की शांति ही सच्चा क्रिसमस है।
प्रश्न 3: यदि दुनिया क्रिसमस मनाती है, तो फिर शांति क्यों नहीं है?
उत्तर:
क्योंकि क्रिसमस कैलेंडर, कार्ड और शब्दों में है—
लेकिन चेतना में नहीं।
दुनिया ने यीशु का जन्मदिन मनाया,
लेकिन उनके संदेश को जीवन में जन्म नहीं दिया।
प्रश्न 4: “शांति का राजकुमार” किसे कहा गया है?
उत्तर:
बाइबल में यीशु मसीह को Prince of Peace कहा गया है।
इसका अर्थ कोई राजनीतिक राजा नहीं,
बल्कि वह आत्मा जो स्वयं शांति में रहती है
और दूसरों को भी शांति का मार्ग सिखाती है।
प्रश्न 5: शांति का राजकुमार होने की पहचान क्या है?
उत्तर:
जो व्यक्ति
-
अशांति के वातावरण में भी शांत रह सके
-
दुख, अपमान और कष्ट में भी स्थिर रहे
-
प्रतिक्रिया की जगह सहनशीलता दिखाए
वही वास्तव में शांति का राजकुमार है।
प्रश्न 6: यीशु का असली संदेश क्या था?
उत्तर:
यीशु ने कहा—
“Kingdom of God is within you.”
अर्थात ईश्वर का राज्य बाहर नहीं,
आत्मा के भीतर है।
शांति वस्तुओं, परिस्थितियों या संबंधों में नहीं,
बल्कि आत्मा की मूल प्रकृति है।
प्रश्न 7: समुद्र का उदाहरण शांति को कैसे समझाता है?
उत्तर:
समुद्र की सतह पर लहरें अशांत होती हैं,
लेकिन गहराई में सदा शांति रहती है।
शरीर = लहर
आत्मा = गहराई
जब हम देहभान में रहते हैं, अशांति बढ़ती है।
आत्मा के स्वरूप में स्थित होते ही शांति अनुभव होती है।
प्रश्न 8: दुनिया अशांत क्यों है जबकि यीशु का संदेश मौजूद है?
उत्तर:
क्योंकि आत्मा अपने असली स्वरूप को भूल चुकी है।
जब आत्मिक पहचान नहीं रहती,
तो उत्सव भी अशांति में बदल जाते हैं।
प्रश्न 9: सच्चा क्रिसमस क्या है?
उत्तर:
सच्चा क्रिसमस—
-
केवल चर्च जाना नहीं
-
केवल केक काटना नहीं
-
केवल शुभकामनाएँ देना नहीं
सच्चा क्रिसमस है:
-
आत्मा में शांति का जन्म
-
विकारों का अंत
-
नई चेतना की शुरुआत
जिस दिन भीतर क्रोध कम हुआ,
अहंकार टूटा,
क्षमा और प्रेम जागा—
वही दिन सच्चा क्रिसमस है।
प्रश्न 10: यीशु ने शांति का राजकुमार बनने का मार्ग कैसे सिखाया?
उत्तर:
| संसार की आदत | यीशु का मार्ग |
|---|---|
| प्रतिक्रिया | सहनशीलता |
| बदला | क्षमा |
| अधिकार | सेवा |
| अहंकार | नम्रता |
जिसने अपने विकारों पर विजय पाई,
वही सच्चा राजकुमार बना।
प्रश्न 11: आज के समय में हम शांति का राजकुमार कैसे बन सकते हैं?
उत्तर:
दैनिक आत्मिक अभ्यास द्वारा—
-
मैं आत्मा हूँ
-
मैं शरीर नहीं हूँ
-
मैं शांत स्वरूप आत्मा हूँ
-
शांति मेरा स्वधर्म है
-
परमात्मा शांति का सागर है
दिन में हर आत्मा को भाई समझना,
रात में चेक करना—
आज मैंने कितनी शांति फैलाई?
प्रश्न 12: क्या एक व्यक्ति की शांति से वातावरण बदल सकता है?
उत्तर:
हाँ।
घर में अगर एक व्यक्ति भी शांत हो जाए,
तो पूरा वातावरण बदल सकता है।
शांति संक्रामक होती है—
एक से अनेक में फैलती है।
प्रश्न 13: सच्चा क्रिसमस भीतर कैसे मनाया जाए?
उत्तर:
-
आत्मा को पहचानकर
-
परमात्मा को याद करके
-
पुराने स्वभाव को विदाई देकर
-
नई दिव्य चेतना को जन्म देकर
यही असली उपहार है।
समापन प्रश्न: क्रिसमस तारीख है या स्थिति?
उत्तर:
क्रिसमस कोई तारीख नहीं,
क्रिसमस एक आत्मिक स्थिति है।
जब आत्मा
शांत, पवित्र और प्रेम स्वरूप बनती है—
तभी शांति का राजकुमार जन्म लेता है।
इस बार क्रिसमस बाहर नहीं, भीतर मनाएँ।
Disclaimer
यह वीडियो यीशु मसीह के आध्यात्मिक संदेशों एवं
ब्रह्माकुमारीज़ की आत्मिक शिक्षाओं के अध्ययन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, समुदाय या मान्यता की तुलना या आलोचना करना नहीं,
बल्कि आत्मिक शांति और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणा देना है।
यह सामग्री केवल आध्यात्मिक जागरूकता हेतु है।

