नवरात्रि का असली रहस्य:-(04)नवरात्रि का वास्तविक भावः आदि शक्ति का गूढ़ रहस्य।
“नवरात्रि का वास्तविक भाव | शक्ति स्वरूप आत्मा और विकारों पर विजय का रहस्य”
प्रस्तावना
नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि आत्मा की जागृति और दिव्य शक्तियों के उदय की स्मृति है।
आज हम समझेंगे नवरात्रि का वास्तविक भाव, आदि शक्ति का रहस्य और विकारों पर विजय का संदेश।
नवरात्रि का वास्तविक भाव क्यों समझना ज़रूरी है?
अधिकतर लोग केवल कथाओं का शब्दार्थ समझते हैं और उनके पीछे छिपे गहरे रहस्यों से अंजान रह जाते हैं।
परंतु भावार्थ ही हमें बताता है कि संगम युग पर आत्माओं ने कौन-सा महान कार्य किया था।
तीनों आख्यानों का भावार्थ
नवरात्रि की कथाओं में असुर, राक्षस और युद्ध का वर्णन है।
वास्तविकता में यह संकेत है आत्मा और विकारों के बीच होने वाले धर्मयुद्ध का।
हिंसा, क्रोध, राग, द्वेष—ये ही निशुंभ-शुंभ और महिषासुर जैसे राक्षस हैं जिन्होंने मानवता को कैद कर लिया था।
सतयुग से कलियुग तक की गिरावट
सतयुग में लक्ष्मी-नारायण सतोप्रधान थे।
लेकिन थोड़ा-सा विकार का बीज धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते पूरी दुनिया को अपने कैद में कर गया।
इसलिए 1250 वर्षों में 25% गिरावट आई और मानवता मोह-निद्रा में सो गई।
परमात्मा शिव का कार्य
धर्म-ग्लानी के समय परमपिता शिव अवतरित होकर भारत की कुमारियों को दिव्य ज्ञान और योगबल से सुसज्जित करते हैं।
उनका ज्ञान तीसरा नेत्र बनता है, सहनशीलता और अंतर्मुखता उनकी अष्टभुजाएं बनती हैं।
यही शक्ति-रूपा माताएं विकारों रूपी राक्षसों का नाश करती हैं।
पूजा की परंपराओं का रहस्य
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कलश स्थापना – सृष्टि की नई स्थापना का प्रतीक।
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अखंड दीप – आत्मा में ईश्वरीय ज्ञान की ज्योति।
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कन्या पूजन – उन कुमारियों की याद जिन्होंने आत्माओं को देवत्व की ओर मोड़ा।
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प्रार्थना का भाव – भक्त कहते हैं, “हे अंबे, मेरी ज्योति जगा दो, अंधकार मिटा दो।”
निष्कर्ष
नवरात्रि हमें याद दिलाती है कि आत्मा दिव्य है।
परमात्मा शिव की शक्ति से ही हम विकारों पर विजय पाकर शक्ति स्वरूप बन सकते हैं।
यह पर्व केवल पूजा का नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति और ईश्वरीय शक्ति के दिव्य कार्य की स्मृति है।
“नवरात्रि का वास्तविक भाव | प्रश्न और उत्तर”
प्रश्न और उत्तर
Q1: नवरात्रि का वास्तविक भाव क्यों समझना ज़रूरी है?
उत्तर: क्योंकि अधिकतर लोग केवल कथाओं का शब्दार्थ समझते हैं और उनके पीछे छिपा आत्मिक रहस्य नहीं जान पाते। वास्तविक भाव ही बताता है कि संगम युग पर आत्माओं ने विकारों पर विजय पाकर दिव्य कार्य किया था।
Q2: नवरात्रि की कथाओं में राक्षस किसका प्रतीक हैं?
उत्तर: महिषासुर, मधु-कैटभ, निशुंभ-शुंभ वास्तव में विकारों के प्रतीक हैं। राग, द्वेष, हिंसा और क्रोध ही वे राक्षस हैं जिन्होंने मानवता को कैद कर लिया था।
Q3: सतयुग से कलियुग तक मानवता कैसे गिरी?
उत्तर: सतयुग में लक्ष्मी-नारायण सतोप्रधान थे, परंतु विकार का छोटा बीज धीरे-धीरे बढ़ता गया। 1250 वर्षों में 25% गिरावट आई और मानवता मोह-निद्रा में सो गई। यही गिरावट आगे कलियुग तक पहुँच गई।
Q4: परमात्मा शिव का कार्य नवरात्रि में कैसे स्मरण किया जाता है?
उत्तर: धर्म-ग्लानी के समय परमपिता शिव कुमारियों को दिव्य ज्ञान और योगबल से सुसज्जित करते हैं। वे शक्ति-रूपा बनकर विकारों का नाश करती हैं। पूजा में यह स्मृति कलश स्थापना, अखंड दीप और कन्या पूजन से दिखाई जाती है।
Q5: अखंड दीप और कन्या पूजन का असली अर्थ क्या है?
उत्तर: अखंड दीप आत्मा में ईश्वरीय ज्ञान की ज्योति का प्रतीक है। कन्या पूजन उन कुमारियों की याद है जिन्होंने आत्माओं को देवत्व की ओर मोड़ा और योगबल से विकारों का अंत किया।
Q6: नवरात्रि हमें कौन-सा संदेश देती है?
उत्तर: यह पर्व केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि आत्मा की जागृति और परमात्मा शिव की शक्ति से विकारों पर विजय पाने की प्रेरणा है। यही असली नवरात्रि है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय ज्ञान और मुरली पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आत्मिक जागृति, सकारात्मक जीवन मूल्य और आध्यात्मिक शिक्षा देना है। यह किसी भी धर्म, परंपरा या देवी-देवताओं की निंदा या आलोचना नहीं करता। कृपया इसे केवल आत्मिक दृष्टिकोण से समझें और अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए अपनाएँ।
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