अव्यक्त मुरली-(08)21-01-1985 ईश्वरीय जन्मदिन की गोल्डन गिफ्ट बाबा ने हम सबको दी। क्या दी? दिव्य बुद्धि।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
1985 की आठवीं अव्यक्त मुरली है।
जो बाबा ने 21 जनवरी 1985 को चलाई।
ईश्वरीय जन्म
दिन की गोल्डन गिफ्ट
ईश्वरीय जन्मदिन की गोल्डन गिफ्ट बाबा ने
हम सबको दी। क्या दी? दिव्य बुद्धि।
दिव्य बुद्धि – ईश्वरीय जन्मदिन की गोल्डन गिफ्ट।
गिफ्ट दिव्य बुद्धि, जो बाबा ने हम सब बच्चों को दी।
आज विश्व रचता बाप अपने जहान के नूर – नूर जहान –
जहान के नूर को क्या कहा जाएगा?
नूर जहान, जो इस जहान के नूर हैं।
इस जहान का जीवन है, इस जहान की रोशनी है।
बच्चों को देख रहे हैं, जो सारे जहान को रोशन करने वाले हैं।
उन बच्चों को बापदादा देख रहे हैं।
आप श्रेष्ठ आत्माएँ जहान के नूर हो,
अर्थात जहान को रोशनी करने वाले हो।
जहान की रोशनी हो, सारे जहान को आप रोशन करते हो।
जैसे स्थूल नूर नहीं तो जहान नहीं।
यदि प्रकाश न हो तो यह जहान नहीं।
क्योंकि नूर अर्थात रोशनी।
रोशनी नहीं तो अंधकार के कारण जहान नहीं।
तो आप नूर नहीं तो दुनिया में रोशनी नहीं।
आप हैं तो रोशनी के कारण जहान है।
बापदादा ऐसे जहान के नूर बच्चों को देख रहे हैं।
ऐसे बच्चों की महिमा सदा गाई और पूजी जाती है।
ऐसे बच्चे ही विश्व के राज्य भाग्य के अधिकारी बनते हैं।
बापदादा हर ब्राह्मण बच्चे को जन्म लेते ही
विशेष दिव्य जन्मदिन की दिव्य दो सौगात देते हैं।
दुनिया में मनुष्य आत्माएँ मनुष्य आत्मा को गिफ्ट देती हैं,
लेकिन ब्राह्मण बच्चों को स्वयं बाप
इस संगम युग पर दिव्य सौगात देते हैं।
क्या देते हैं?
एक – दिव्य बुद्धि
दूसरा – दिव्य नेत्र अर्थात रूहानी नूर
ये दोनों गिफ्ट हर ब्राह्मण बच्चे को जन्मदिन की गिफ्ट हैं।
इन दोनों गिफ्ट को सदा साथ रखते हुए
इनके द्वारा सदा सफलता स्वरूप रहते हो।
दिव्य बुद्धि ही हर बच्चे को
दिव्य ज्ञान, दिव्य याद, दिव्य धारणा स्वरूप बनाती है।
दिव्य बुद्धि ही धारणा करने की विशेष गिफ्ट है।
जिसने ज्ञान को जीवन में धारण कर लिया, वही दिव्य बुद्धि है।
दिव्य बुद्धि अर्थात सतोप्रधान, गोल्डन बुद्धि।
जैसे ही उसमें रजो-तमो की मिलावट होती है,
तो सहज बात भी मुश्किल लगने लगती है।
जब दिव्य बुद्धि कमजोर होती है,
तो मेहनत अनुभव होती है।
जब भी मुश्किल या मेहनत का अनुभव हो,
तो समझो दिव्य बुद्धि माया से प्रभावित हो गई है।
दिव्य बुद्धि सेकंड में बापदादा की श्रीमत धारण कर
सदा समर्थ, सदा अचल, सदा मास्टर सर्वशक्तिवान
स्थिति का अनुभव कराती है।
श्रीमत अर्थात श्रेष्ठ बनाने वाली मत।
श्रीमत पर चलने वाला कभी मुश्किल अनुभव नहीं करता।
चेक करो –
कहीं माया दिव्य बुद्धि की गिफ्ट छीन तो नहीं लेती?
कहीं भोले बनकर परमात्म गिफ्ट गँवा तो नहीं देते?
ईश्वर के भोले बनो,
लेकिन माया के भोले मत बनो।
दिव्य बुद्धि की गिफ्ट छत्रछाया है।
माया अपनी छाया डाल देती है।
इसलिए सदा चेक करो –
बाप की गिफ्ट कायम है या नहीं।
दिव्य बुद्धि की निशानी है –
यह गिफ्ट “लिफ्ट” का कार्य करती है।
सेकंड में स्थिति पर पहुँचा देती है।
अगर बीच में माया की छाया आ गई,
तो लिफ्ट काम नहीं करेगी।
फिर मेहनत रूपी सीढ़ी चढ़नी पड़ेगी।
सहज को मुश्किल किसने बनाया?
माया के प्रभाव में आकर हमने स्वयं।
दिव्य बुद्धि की गिफ्ट अलौकिक विमान है।
संकल्प उसका स्विच है।
विज्ञान वाले केवल इस लोक का सैर कर सकते हैं,
लेकिन आप तीनों लोकों का सैर कर सकते हो।
दिव्य बुद्धि रूपी विमान द्वारा
ऊँची स्थिति में स्थित होकर
सारे विश्व को लाइट और माइट दे सकते हो।
यह विमान शक्तिशाली है,
बस उसका सही उपयोग आना चाहिए।
बापदादा की श्रेष्ठ मत डबल रिफाइन है।
जरा भी मनमत या परमत का कचरा आया
तो विमान नीचे आ जाएगा।
जिसके पास दिव्य बुद्धि है,
वह सर्व प्रकार के दुख और धोखे से मुक्त है।
दिव्य बुद्धि वाला कभी धोखे में नहीं आता।
इस गॉडली गिफ्ट के महत्व को जानो
और इसे सदा साथ रखो।
सभी को यह गिफ्ट मिली है,
बस संभालना आना चाहिए।
सदा अमृतवेले चेक करो,
कमी हो तो वहीं ठीक कर लो।
दिव्य दृष्टि, दिव्य नेत्र, रूहानी नूर –
तीनों एक ही बात है।
दिव्य बुद्धि वाला आत्मा
सोने का पात्र है –
शुद्ध, स्वर्णिम, सतोप्रधान।
सच्चे सोने में
चाँदी या ताँबा मिक्स नहीं होता।
यह ज्ञान नदियों और सागर का मिलन मेला है।
बापदादा सभी बच्चों को देखकर हर्षित होते हैं।
सदा दिव्य बुद्धि की गोल्डन गिफ्ट को
कार्य में लाने वाले,
माया से दूर रहने वाले,
हर मुश्किल को सहज बनाने वाले
श्रेष्ठ आत्माओं को
बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।
हम बच्चों की भी बापदादा को नमस्ते।
दृष्टि बदलने से सृष्टि बदल गई।
बाप ही हमारा संसार है।
जब बाप साथ है
तो बेफिक्र बादशाह बन जाते हो।
सोचना बाप का काम है,
हमारा काम है साथ में मगन रहना।
सदा बेफिक्र बादशाह रहो –
अभी भी और सदा के लिए।
नंबर दो –
सदा अपने को सफलता का सितारा समझो
और दूसरों को भी सफलता की चाबी देते रहो।

