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(08)Why are relationships breaking down? Shiv Baba reveals the real reason.

December 15, 2025December 15, 2025omshantibk07@gmail.com

PR:-(08)क्यों टूट रहे हैं रिश्ते? शिव बाबा बताता है असली कारण

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 8

क्यों टूट रहे हैं रिश्ते? — परमात्मा की दृष्टि से असली कारण


 भूमिका : परमात्मा क्या कहते हैं?

इस श्रृंखला में आज हम आठवां विषय ले रहे हैं —
“क्यों टूट रहे हैं रिश्ते?”

मुरली – 09 दिसंबर 2025
बापदादा कहते हैं –

“मीठे बच्चे, बाबा आए हैं तुम्हें बेहद की जागीर देने।”

परमपिता परमात्मा शिव बाबा इस संगमयुग पर हमें शांति, सुख और शक्ति की विरासत देने आए हैं।


 पावन बनने का अर्थ क्या है?

बाबा कहते हैं —

“ऐसे मीठे बाबा को प्यार से याद करो, तो पावन बन जाएंगे।”

पावन बनने का अर्थ
पावन बनने का मतलब केवल शुद्ध रहना नहीं,
बल्कि जीवन से सारे दुखों का समाप्त हो जाना।

मुरली नोट (09-12-2025):
सारे दुखों का मूल कारण है — अज्ञानता।
और आज परिवारों के टूटने का भी यही कारण है।


 परमात्मा को याद करने का सच्चा अर्थ

परमात्मा को याद करना सिर्फ नाम जप नहीं है।
परमात्मा को याद करना = श्रीमत पर चलना

जो परमात्मा समझा रहे हैं,
उसे अपने विचार, बोल और कर्म में लाना — यही सच्ची याद है।


 आज के रिश्तों की सच्ची स्थिति

आज हर घर में एक ही प्रश्न गूंज रहा है —

 रिश्तों में इतनी दूरियाँ क्यों आ रही हैं?

 माता-पिता और बच्चों में अविश्वास
 पति-पत्नी के बीच विश्वास की कमी
 एक घर, एक परिवार — फिर भी मतभेद

उदाहरण:
एक ही घर में रहने वाले लोग,
एक-दूसरे से बात करने से बचते हैं।
यही आज की पारिवारिक सच्चाई है।


 संपत्ति, अपेक्षा और भावनात्मक बिखराव

इतिहास गवाह है —
सत्ता और स्वार्थ के लिए
अपने ही अपनों के दुश्मन बने।

🔹 संपत्ति के लिए रिश्ते टूटे
🔹 प्रेम में अपेक्षाएँ बढ़ीं
🔹 हर आत्मा अपनी-अपनी भावना में उलझ गई

लोग कहते हैं — “समय बदल गया है”
पर बाबा कहते हैं — यह ड्रामा का पार्ट है।


 ड्रामा की गहरी समझ

मुरली सिद्धांत:

“ड्रामा में जो होना है वही होगा, ड्रामा में कोई गलती नहीं होती।”

आज आत्माएँ तमोप्रधान अवस्था के अंतिम चरण में हैं।
संस्कारों की भिन्नता चरम पर पहुँच चुकी है।

मुरली नोट:
हर आत्मा यूनिक है,
और हर आत्मा का पार्ट ड्रामा अनुसार एक्यूरेट है।


 संस्कारों का टकराव और कार्मिक अकाउंट

अंतिम जन्म में
संस्कारों का टकराना स्वाभाविक है।

क्यों?
क्योंकि हर आत्मा को
घर जाने से पहले
अपना कार्मिक अकाउंट क्लियर करना है।

 रिश्तों का टूटना वास्तव में
संस्कारों की थकान
और कर्मबंधनों की पूर्णता का संकेत है।


 लेने की आदत — टूटते रिश्तों की जड़

आज हर कोई लेने आया है, देने नहीं।

 माता-पिता मान चाहते हैं
 बच्चे समझे जाना चाहते हैं
 पति-पत्नी अपेक्षा रखते हैं

पर देने वाला कोई नहीं।

📖 बाबा कहते हैं —

“चाह खत्म होगी तो चैन आएगा।”


 अपेक्षा बनाम स्वीकृति

 रिश्ते अपेक्षा से चलते हैं — तो टूटते हैं
 रिश्ते स्वीकृति से चलते हैं — तो टिकते हैं

 बाबा का स्पष्ट वाक्य —

“दिल नहीं टूटता, मोह टूटता है।”


 रिश्तों की टूटन और आत्मिक लाभ

रिश्तों की टूटन आत्मा को
सेल्फ-लव की ओर मोड़ती है।

क्योंकि —
 घर अकेले जाना है।

 वैराग्य के दो मार्ग:
 ज्ञान से
 परिस्थितियों से


 सच्चा योग कब बनता है?

जब आत्मा
सभी लौकिक संबंध छोड़
परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ लेती है —
तभी सच्चा योग बनता है।

 शिव बाबा —
माता, पिता, भाई, सखा, गुरु — सर्व संबंधी


 BK ज्ञान अनुसार रिश्तों में तनाव के कारण

 संस्कारों का टकराव
 कार्मिक अकाउंट
 आत्मिक शक्ति की कमी

 शक्तिहीन आत्मा जल्दी नाराज़ होती है
 शक्तिशाली आत्मा सदा शांत रहती है


 समाधान : संबंधों की सच्ची हीलिंग

✔️ सेल्फ-लव
✔️ साक्षी भाव
✔️ परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ना

 बाबा की शिक्षा —

“दिल मेरे से लगाओ, बाकी संबंध ड्रामा अनुसार निभाओ।”


 निष्कर्ष : शांति का सूत्र

🔹 मोह खत्म
🔹 अपेक्षा कम
🔹 शांति स्थापित

प्रश्न 1: इस श्रृंखला का आज का विषय क्या है?

उत्तर:
इस श्रृंखला में आज हम आठवां विषय ले रहे हैं —
“क्यों टूट रहे हैं रिश्ते?”

यह विषय केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक है, जिसे स्वयं परमात्मा ने मुरली में स्पष्ट किया है।


प्रश्न 2: बापदादा मुरली (09-12-2025) में क्या कहते हैं?

उत्तर:
बापदादा कहते हैं —

“मीठे बच्चे, बाबा आए हैं तुम्हें बेहद की जागीर देने।”

परमपिता परमात्मा शिव बाबा इस संगमयुग पर आत्माओं को
👉 शांति, सुख और शक्ति की विरासत देने आए हैं।


 प्रश्न 3: पावन बनने का सच्चा अर्थ क्या है?

उत्तर:
बाबा कहते हैं —

“ऐसे मीठे बाबा को प्यार से याद करो, तो पावन बन जाएंगे।”

पावन बनने का अर्थ केवल बाहरी शुद्धता नहीं है,
बल्कि जीवन से सभी प्रकार के दुखों का समाप्त हो जाना।

मुरली नोट (09-12-2025):
सारे दुखों का मूल कारण है — अज्ञानता,
और आज परिवारों के टूटने का भी यही कारण है।


 प्रश्न 4: परमात्मा को याद करने का सच्चा अर्थ क्या है?

उत्तर:
परमात्मा को याद करना सिर्फ नाम जप या शब्दों की याद नहीं है।

परमात्मा को याद करना = श्रीमत पर चलना

जो परमात्मा समझा रहे हैं,
उसे अपने विचार, बोल और कर्म में लाना —
यही सच्ची और सजीव याद है।


 प्रश्न 5: आज के रिश्तों की वास्तविक स्थिति क्या है?

उत्तर:
आज हर घर में एक ही प्रश्न गूंज रहा है —
रिश्तों में इतनी दूरियाँ क्यों आ रही हैं?

🔹 माता-पिता और बच्चों में अविश्वास
🔹 पति-पत्नी के बीच विश्वास की कमी
🔹 एक घर, एक परिवार — फिर भी मतभेद

उदाहरण:
एक ही घर में रहने वाले लोग,
एक-दूसरे से बात करने से बचते हैं।
यही आज की पारिवारिक सच्चाई है।


 प्रश्न 6: संपत्ति और अपेक्षाएँ रिश्तों को कैसे तोड़ती हैं?

उत्तर:
इतिहास गवाह है कि
सत्ता और स्वार्थ के लिए अपने ही अपनों के दुश्मन बने।

🔸 संपत्ति के लिए रिश्ते टूटे
🔸 प्रेम में अपेक्षाएँ बढ़ीं
🔸 हर आत्मा अपनी-अपनी भावना में उलझ गई

लोग कहते हैं — “समय बदल गया है”
लेकिन बाबा कहते हैं — यह ड्रामा का पार्ट है।


 प्रश्न 7: ड्रामा की दृष्टि से रिश्तों की टूटन को कैसे समझें?

उत्तर:
 मुरली सिद्धांत है —

“ड्रामा में जो होना है वही होगा, ड्रामा में कोई गलती नहीं होती।”

आज आत्माएँ तमोप्रधान अवस्था के अंतिम चरण में हैं।
संस्कारों की भिन्नता चरम पर पहुँच चुकी है।

 मुरली नोट:
हर आत्मा यूनिक है,
और हर आत्मा का पार्ट ड्रामा अनुसार एक्यूरेट है।


 प्रश्न 8: संस्कारों का टकराव और कार्मिक अकाउंट क्या भूमिका निभाता है?

उत्तर:
अंतिम जन्म में
संस्कारों का टकराना स्वाभाविक है।

क्योंकि हर आत्मा को घर जाने से पहले
 अपना कार्मिक अकाउंट क्लियर करना है।

इसलिए रिश्तों का टूटना वास्तव में
संस्कारों की थकान
और कर्मबंधनों की पूर्णता का संकेत है।


 प्रश्न 9: आज रिश्तों की सबसे बड़ी जड़ समस्या क्या है?

उत्तर:
आज हर कोई लेने आया है, देने नहीं।

🔹 माता-पिता मान चाहते हैं
🔹 बच्चे समझे जाना चाहते हैं
🔹 पति-पत्नी अपेक्षा रखते हैं

📖 बाबा कहते हैं —

“चाह खत्म होगी तो चैन आएगा।”


 प्रश्न 10: अपेक्षा और स्वीकृति में क्या अंतर है?

उत्तर:
 रिश्ते अपेक्षा से चलते हैं — तो टूटते हैं
 रिश्ते स्वीकृति से चलते हैं — तो टिकते हैं

 बाबा का स्पष्ट वाक्य —

“दिल नहीं टूटता, मोह टूटता है।”


 प्रश्न 11: रिश्तों की टूटन आत्मा को क्या सिखाती है?

उत्तर:
रिश्तों की टूटन आत्मा को
👉 सेल्फ-लव की ओर मोड़ती है।

क्योंकि सत्य यही है —
घर अकेले जाना है।

📘 वैराग्य के दो मार्ग हैं:
1️⃣ ज्ञान से
2️⃣ परिस्थितियों से


 प्रश्न 12: सच्चा योग कब बनता है?

उत्तर:
जब आत्मा
सभी लौकिक संबंध छोड़कर
परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ लेती है —
तभी सच्चा योग बनता है।

 शिव बाबा —
माता, पिता, भाई, सखा, गुरु — सर्व संबंधी


 प्रश्न 13: BK ज्ञान अनुसार रिश्तों में तनाव के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर:
🔹 संस्कारों का टकराव
🔹 कार्मिक अकाउंट
🔹 आत्मिक शक्ति की कमी

 शक्तिहीन आत्मा जल्दी नाराज़ होती है
 शक्तिशाली आत्मा सदा शांत रहती है


 प्रश्न 14: रिश्तों की सच्ची हीलिंग का समाधान क्या है?

उत्तर:
✔️ सेल्फ-लव
✔️ साक्षी भाव
✔️ परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ना

 बाबा की शिक्षा —

“दिल मेरे से लगाओ, बाकी संबंध ड्रामा अनुसार निभाओ।”


 प्रश्न 15: इस अध्याय का निष्कर्ष क्या है?

उत्तर:
🔹 मोह खत्म
🔹 अपेक्षा कम
🔹 शांति स्थापित

Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय ज्ञान, मुरली पॉइंट्स (09 दिसंबर 2025) और आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, परिवार, समाज या धर्म की आलोचना करना नहीं है।
यह प्रस्तुति केवल आत्मिक जागृति, आत्मिक शांति और जीवन सुधार के उद्देश्य से बनाई गई है।
कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टि से सुनें और समझें।

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