1-5 Five Fundamental Qualities of the Soul

J.D.BK BK ज्ञान-1-5 क्या आत्मा मर सकती है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 5

क्या आत्मा मर सकती है?

(जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान के दृष्टिकोण से)


 भूमिका

आज हम बीके बेसिक कोर्स – प्रश्न पाँच पर विचार कर रहे हैं,
जो विशेष रूप से हमारे जैन भाई-बहनों के लिए तैयार किया गया है।

आज का विषय है —
क्या आत्मा मरती है या केवल शरीर बदलती है?

दुनिया में यदि सबसे बड़ा डर है,
तो वह है — मृत्यु का डर।

लेकिन प्रश्न यह है —
क्या वास्तव में हम मरते हैं?
या केवल देह का परिवर्तन होता है?

इसी रहस्य को आज हम
जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान — दोनों के प्रकाश में समझेंगे।


 जैन दर्शन क्या कहता है?

जैन दर्शन का बहुत स्पष्ट सिद्धांत है —

“जीव न मरता है, न जन्म लेता है —
केवल शरीर बदलता है।”

 जीव किसे कहते हैं?

सामान्य भाषा में लोग शरीर को जीव कह देते हैं,
लेकिन जैन धर्म के अनुसार

  • आत्मा = जीव

  • शरीर = पुद्गल

अर्थात् —
✔ आत्मा चेतन है
✔ शरीर जड़ है

इसलिए जैन दर्शन कहता है —

जीव (आत्मा) अनादि है, अविनाशी है।

हिंदी डिक्शनरी में भी
जीव का अर्थ आत्मा ही बताया गया है।


 ब्रह्मा कुमारी ज्ञान क्या सिखाता है?

ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान में
शिव बाबा भी यही सत्य बताते हैं

“बच्चे, आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है।”

 Murli Note

साकार मुरली – 27 जनवरी 1974

“आत्मा कभी मरती नहीं है।
यह तो शरीर रूपी वस्त्र बदलती रहती है।”

बाबा कहते हैं —

आत्मा अमर नट है।

नट अर्थात् अभिनेता,
जो इस सृष्टि रूपी नाटक में
अधिकतम 84 जन्मों का पार्ट बजाता है।


 आत्मा और शरीर का अंतर

आत्मा शरीर
चेतन अचेतन (जड़)
अविनाशी नाशवान
सदा रहने वाली बदलने वाला

जब आत्मा शरीर में रहती है —

  • शरीर चलता है

  • बोलता है

  • हँसता है

जैसे ही आत्मा निकलती है —

  • शरीर जड़ हो जाता है

  • पंचतत्वों में विलीन हो जाता है


 उदाहरण से समझें

 उदाहरण 1 — बिजली और बल्ब

जैसे —

  • बिजली से बल्ब जलता है

  • बिजली हटते ही बल्ब बुझ जाता है

बिजली नहीं मरती — केवल कनेक्शन टूटता है।

वैसे ही —
आत्मा अमर है
 केवल शरीर से कनेक्शन समाप्त होता है


 पुनर्जन्म का रहस्य

 जैन दर्शन

जीव अनादि है और कर्मों के अनुसार
बार-बार जन्म लेता है।

 ब्रह्मा कुमारी ज्ञान

साकार मुरली – 18 अक्टूबर 1968

“जैसे मनुष्य पुराने कपड़े छोड़ नया कपड़ा पहनता है,
वैसे आत्मा एक देह छोड़ दूसरी देह लेती है।”

✔ आत्मा वही रहती है
✔ शरीर बदल जाता है

इसी को पुनर्जन्म कहते हैं।


 मृत्यु का असली अर्थ

मृत्यु कोई अंत नहीं है।
यह केवल एक परिवर्तन है।

जब आत्मा —

  • एक देह का पाठ पूरा करती है
    तो —

  • अगले जन्म का नया सीन शुरू होता है

 उदाहरण

जैसे सूर्य अस्त होता है
पर समाप्त नहीं होता —

वैसे ही आत्मा —

  • शरीर छोड़ती है

  • पर नष्ट नहीं होती


 मृत्यु का भय क्यों होता है?

मृत्यु का भय होता है —
देह-स्मृति के कारण

जब हम स्वयं को शरीर समझते हैं —
तो डर लगता है।

लेकिन —
✔ जब हम स्वयं को आत्मा समझते हैं
तो मृत्यु केवल ड्रेस-चेंज लगती है।

 Murli Note

🗓 साकार मुरली – 2 मई 1970

“जब बच्चे आत्म-स्मृति में रहते हैं,
तो मृत्यु भी खेल लगती है।”


 कर्म और अगला जन्म

अगला जन्म —
कर्मों के अनुसार मिलता है।

आत्मा —

  • अपने कर्म

  • अपने संस्कार
    साथ लेकर जाती है।

 उदाहरण

जैसे छात्र —

  • अपनी पढ़ाई का परिणाम

  • अगली कक्षा में लेकर जाता है

वैसे ही आत्मा —

  • कर्मों का परिणाम

  • अगले जन्म में लेकर जाती है।


 निष्कर्ष

✔ आत्मा कभी नहीं मरती
✔ वह केवल देह रूपी वस्त्र बदलती है

जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान —
दोनों एक ही सत्य बताते हैं

  • आत्मा अमर है

  • अविनाशी है

  • चेतन है

जब हम आत्म-स्मृति में रहते हैं —
तो मृत्यु —
भय का विषय नहीं
 ज्ञान का विषय बन जाती है।

क्या आत्मा मर सकती है?

(जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान के दृष्टिकोण से)
BK Basic Course – प्रश्न 5


 भूमिका से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1: आज का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर:
आज का मुख्य विषय है —
क्या आत्मा मरती है या केवल शरीर बदलती है?
यह विषय विशेष रूप से जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के दृष्टिकोण से समझाया जा रहा है।


प्रश्न 2: दुनिया में सबसे बड़ा डर कौन-सा माना जाता है?

उत्तर:
दुनिया में सबसे बड़ा डर मृत्यु का डर माना जाता है।
लेकिन यह डर इस कारण होता है क्योंकि हम मृत्यु को अंत समझ लेते हैं।


प्रश्न 3: क्या वास्तव में मनुष्य मरता है?

उत्तर:
नहीं।
वास्तव में मनुष्य नहीं मरता,
केवल शरीर का परिवर्तन होता है।
आत्मा बनी रहती है।


 जैन दर्शन से संबंधित प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 4: जैन दर्शन आत्मा के बारे में क्या कहता है?

उत्तर:
जैन दर्शन का स्पष्ट सिद्धांत है —

“जीव न मरता है, न जन्म लेता है —
केवल शरीर बदलता है।”


प्रश्न 5: जैन दर्शन में ‘जीव’ किसे कहा गया है?

उत्तर:
जैन दर्शन के अनुसार —

  • आत्मा = जीव

  • शरीर = पुद्गल

अर्थात् आत्मा चेतन है और शरीर जड़ है।


प्रश्न 6: क्या जीव (आत्मा) नश्वर है?

उत्तर:
नहीं।
जैन दर्शन के अनुसार जीव अनादि और अविनाशी है,
वह कभी नष्ट नहीं होता।


 ब्रह्मा कुमारी ज्ञान से संबंधित प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 7: ब्रह्मा कुमारी ज्ञान आत्मा के बारे में क्या सिखाता है?

उत्तर:
ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान में शिव बाबा सिखाते हैं —

“आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है।”


प्रश्न 8: मुरली में आत्मा के बारे में क्या कहा गया है?

उत्तर:
🗓 साकार मुरली – 27 जनवरी 1974

“आत्मा कभी मरती नहीं है।
यह तो शरीर रूपी वस्त्र बदलती रहती है।”


प्रश्न 9: ‘आत्मा अमर नट है’ — इसका क्या अर्थ है?

उत्तर:
नट का अर्थ है अभिनेता
आत्मा इस सृष्टि रूपी नाटक में
अधिकतम 84 जन्मों का पार्ट बजाती है,
लेकिन स्वयं नष्ट नहीं होती।


 आत्मा और शरीर के अंतर पर प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 10: आत्मा और शरीर में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर:

आत्मा शरीर
चेतन अचेतन (जड़)
अविनाशी नाशवान
सदा रहने वाली बदलने वाला

प्रश्न 11: आत्मा के शरीर छोड़ते ही क्या होता है?

उत्तर:
जैसे ही आत्मा शरीर छोड़ती है —

  • शरीर जड़ हो जाता है

  • पंचतत्वों में विलीन हो जाता है


 उदाहरण से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 12: बिजली और बल्ब का उदाहरण आत्मा को कैसे समझाता है?

उत्तर:
जैसे —

  • बिजली से बल्ब जलता है

  • बिजली हटते ही बल्ब बुझ जाता है

 बिजली नहीं मरती, केवल कनेक्शन टूटता है।
वैसे ही आत्मा अमर है,
केवल शरीर से उसका संबंध समाप्त होता है।


 पुनर्जन्म से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 13: पुनर्जन्म क्या है?

उत्तर:
आत्मा का एक शरीर छोड़कर
दूसरा शरीर धारण करना ही पुनर्जन्म है।


प्रश्न 14: जैन दर्शन पुनर्जन्म के बारे में क्या कहता है?

उत्तर:
जैन दर्शन कहता है —
जीव अनादि है और कर्मों के अनुसार बार-बार जन्म लेता है।


प्रश्न 15: ब्रह्मा कुमारी ज्ञान पुनर्जन्म को कैसे समझाता है?

उत्तर:
🗓 साकार मुरली – 18 अक्टूबर 1968

“जैसे मनुष्य पुराने कपड़े छोड़ नया कपड़ा पहनता है,
वैसे आत्मा एक देह छोड़ दूसरी देह लेती है।”


 मृत्यु के अर्थ से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 16: मृत्यु का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर:
मृत्यु कोई अंत नहीं है,
यह केवल एक परिवर्तन है —
एक पाठ समाप्त होकर दूसरा पाठ शुरू होना।


प्रश्न 17: सूर्य का उदाहरण मृत्यु को कैसे समझाता है?

उत्तर:
जैसे सूर्य अस्त होता है
लेकिन समाप्त नहीं होता,
वैसे ही आत्मा शरीर छोड़ती है
लेकिन नष्ट नहीं होती।


 मृत्यु के भय से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 18: मृत्यु का भय क्यों होता है?

उत्तर:
मृत्यु का भय देह-स्मृति के कारण होता है।
जब हम स्वयं को शरीर समझते हैं,
तभी डर लगता है।


प्रश्न 19: आत्म-स्मृति में मृत्यु कैसी लगती है?

उत्तर:
आत्म-स्मृति में मृत्यु
केवल ड्रेस-चेंज जैसी लगती है।

🗓 साकार मुरली – 2 मई 1970

“जब बच्चे आत्म-स्मृति में रहते हैं,
तो मृत्यु भी खेल लगती है।”


 कर्म और अगले जन्म से जुड़े प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 20: अगला जन्म किस आधार पर मिलता है?

उत्तर:
अगला जन्म कर्मों के अनुसार मिलता है।
आत्मा अपने कर्म और संस्कार साथ लेकर जाती है।


प्रश्न 21: छात्र का उदाहरण कर्म सिद्धांत को कैसे समझाता है?

उत्तर:
जैसे छात्र अपनी पढ़ाई का परिणाम
अगली कक्षा में लेकर जाता है,
वैसे ही आत्मा कर्मों का परिणाम
अगले जन्म में लेकर जाती है।


 निष्कर्ष से संबंधित प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 22: इस पूरे अध्ययन का निष्कर्ष क्या है?

उत्तर:
✔ आत्मा कभी नहीं मरती
✔ वह केवल देह रूपी वस्त्र बदलती है

जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान
दोनों एक ही सत्य बताते हैं —

  • आत्मा अमर है

  • अविनाशी है

  • चेतन है

जब हम आत्म-स्मृति में रहते हैं,
तो मृत्यु भय का नहीं, ज्ञान का विषय बन जाती है।

Disclaimer (डिस्क्लेमर)

यह वीडियो जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज़ के आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।
यह प्रस्तुति आत्मिक जागरूकता और ज्ञानवर्धन के लिए है।
श्रोताओं से अनुरोध है कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ग्रहण करें।

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