1-4 Five Fundamental Qualities of the Soul

जैन दर्शनऔर BK ज्ञान-1-4 आत्मा के पांच मूल गुण

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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आत्मा के पांच मूल गुण — जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान से

आत्मा के पांच मूल गुण
जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान से

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आत्मा के मूल गुण कौन-कौन से हैं?
हर धर्म में आत्मा का महत्व बताया गया है।
जैन दर्शन में कहा गया — जीव का धर्म है ज्ञान, दर्शन, सुख और शक्ति।

जैन धर्म के अनुसार आत्मा में ये गुण कार्य करते हैं —
जीव का धर्म, ज्ञान, दर्शन, सुख और शांत शक्ति।

और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान में भी शिव बाबा हमें यही सिखाते हैं —
कि आत्मा परमात्मा की संतान है और उसके पांच मूल गुण हैं।

कौन से पांच गुण हैं?
शांति, पवित्रता, प्रेम, आनंद और शक्ति।

आज हम इन्हीं पांच गुणों को मुरली के प्रकाश में गहराई से समझेंगे।


आत्मा का स्वाभाविक धर्म

आत्मा का स्वाभाविक धर्म क्या है?
उत्तर — शांति।

आत्मा शरीर से नहीं, अपनी चेतन शक्ति से पहचानी जाती है।
शरीर का धर्म है खाना, सोना, बोलना, चलना।
पर आत्मा का धर्म है — शांति, प्रेम और पवित्रता।

मुरली 20 सितंबर 2024 —
बाबा कहते हैं: बच्चे, आत्मा का स्वधर्म है शांति।

जब आत्मा देह-स्मृति में जाती है तो अशांत हो जाती है।

उदाहरण —
जल का धर्म ठंडक है।
आग के संपर्क में आने से वह उबलता है, पर आग से दूर होते ही फिर ठंडा हो जाता है।

वैसे ही आत्मा जब क्रोध, चिंता या अहंकार में जाती है तो अपने शांत स्वरूप से गिर जाती है।


आत्मा का पहला गुण — शांति

शांति आत्मा का पहला धर्म भी है और पहला गुण भी।

जब हम “मैं आत्मा हूं” की स्मृति में आते हैं,
तो मन तुरंत स्थिर हो जाता है।

शांति बाहर खोजने से नहीं, भीतर अनुभव करने से मिलती है।

मुरली 15 मई 2024 —
तुम शांति के सागर परमपिता परमात्मा की संतान हो,
इसलिए स्वभाव से तुम्हारा धर्म भी शांति है।

उदाहरण —
समुद्र की लहरें ऊपर-नीचे होती हैं,
पर गहराई में सदा शांति रहती है।
वैसे ही आत्मा की गहराई में भी पूर्ण शांति है।


दूसरा गुण — पवित्रता

पवित्रता आत्मा का सबसे ऊंचा गुण है।
आत्मा अपने आप में पवित्र है।
देह-संपर्क में आने से आत्मा अपवित्र बनती है।

जैन धर्म में प्रयूषण आत्मा के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य है —
आत्मा की शुद्धि
कर्मों की निर्जरा
संयम, तप और क्षमा का अभ्यास

प्रयूषण आत्मा को उसके मूल स्वरूप की ओर लौटाता है।

मुरली 2 अक्टूबर 2024 —
बाबा कहते हैं: पवित्रता ही सच्चा योग है।

पवित्रता से ही सुख, शांति और शक्ति का अनुभव होता है।


तीसरा गुण — प्रेम

प्रेम आत्मा का स्वभाव है।
लेकिन आज वह आसक्ति बन गया है।

सच्चा प्रेम तब होता है जब हम आत्मा से आत्मा को देखें।

मुरली 10 जून 2024 —
सच्चा प्रेम वही है जिसमें कोई अपेक्षा नहीं।

प्रेम परमात्मा का वरदान है, जिससे सबको शक्ति मिलती है।

उदाहरण —
सूरज सभी पर समान रूप से प्रकाश देता है।
वैसे ही आत्मा को भी सभी के प्रति समान प्रेम रखना है।


चौथा गुण — आनंद

आनंद आत्मा का सहज गुण है।
बाहरी वस्तुएं क्षणिक सुख देती हैं,
पर आत्मिक आनंद स्थाई होता है।

मुरली 29 जुलाई 2024 —
बच्चे, तुम्हारा असली नाम ही आनंद स्वरूप आत्मा है।

जब देह-स्मृति छोड़ते हैं,
तो स्वभाव से आनंद की अनुभूति होती है।


पांचवां गुण — शक्ति

हर आत्मा में अनेक शक्तियां निहित हैं —
सहन शक्ति, निर्णय शक्ति, सहयोग शक्ति आदि।

जब आत्मा परमात्मा से योग लगाती है,
तो ये शक्तियां पुनः जागृत होती हैं।

मुरली 1 सितंबर 2024 —
बच्चे, तुम शक्तिशाली आत्माएं हो।
परमात्मा से योग लगाकर अपनी शक्तियों को भरपूर करो।

उदाहरण —
जैसे मोबाइल चार्जर से चार्ज होकर शक्ति पाता है,
वैसे आत्मा योग से शक्तिशाली बनती है।


निष्कर्ष

आत्मा के पांच मूल गुण हैं —
शांति
पवित्रता
प्रेम
आनंद
शक्ति

इन गुणों की पुनः स्थापना ही राजयोग का उद्देश्य है।
और यह राजयोग केवल परमपिता परमात्मा ही सिखा सकते हैं।

जब आत्मा इन गुणों में स्थित रहती है,
तो वही सच्चा प्रयूषण और सच्ची साधना है।