(12) What changes occur in the brain and body when experiencing transcendental pleasure?

AT.S.-(12)अती इंद्रिय सुख आने पर मस्तिष्क और शरीर में क्या अंतर आता है?

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अतींद्रिय सुख – आत्मा से शुरू होकर मस्तिष्क और शरीर तक प्रभाव


 भूमिका : अतींद्रिय सुख क्या केवल अनुभव है?

आज हम अतींद्रिय सुख (Supersensuous Joy) का गहन अध्ययन कर रहे हैं।
अक्सर लोग समझते हैं कि अतींद्रिय सुख केवल एक भावना या अनुभव है,
लेकिन सत्य इससे कहीं अधिक गहरा है।

सच यह है
जब आत्मा अतींद्रिय सुख का अनुभव करती है,
तो मस्तिष्क और शरीर दोनों उसमें प्रतिक्रिया देते हैं।

यह कोई कल्पना नहीं,
बल्कि आत्मिक अनुभव का विज्ञान है।


 उदाहरण : जैसे विज्ञान ने देश को बदला

जैसे —

  • 1887 में बंगाल में पहला पावर प्लांट लगा

  • देश की पहली हाई-राइज बिल्डिंग बनी

  • पहली मेट्रो चली

इन सबने केवल मशीनें नहीं बदलीं,
बल्कि मानव जीवन की कार्यशैली बदल दी।

 उसी प्रकार,
आत्मिक अनुभव का विज्ञान
मनुष्य के मस्तिष्क और शरीर की कार्यप्रणाली बदल देता है।


अतींद्रिय सुख आत्मा को मिलता है, पर असर कहाँ-कहाँ पड़ता है?

  • योग आत्मा करती है

  • अतींद्रिय सुख आत्मा को मिलता है

  • लेकिन उसका प्रभाव दिमाग और शरीर पर पड़ता है

क्यों?

क्योंकि —

  • आत्मा मस्तिष्क और शरीर की चालक शक्ति है

  • आत्मा बदली → सोच बदली → शरीर की प्रतिक्रिया बदली


 आत्मा → बुद्धि → मन → शरीर (पूरा साइकल)

 अतींद्रिय सुख की यात्रा

  1. आत्मा में अनुभव जन्म लेता है

  2. बुद्धि उसे समझती है

  3. मन उसे शरीर तक पहुँचाता है

  4. शरीर उस अनुभव पर प्रतिक्रिया देता है

 मन यहाँ मीडिएटर है
बुद्धि और शरीर के बीच।


 आत्मा कहाँ स्थित है? (सूक्ष्म विज्ञान)

तीनों ग्रंथियाँ जहाँ मिलती हैं, वहीं आत्मा का स्थान माना गया है:

  • Pituitary Gland

  • Hypothalamus Gland

  • Pineal Gland

इन ग्रंथियों के माध्यम से —

  • हार्मोन रिलीज होते हैं

  • भावनाएँ और शांति का अनुभव शरीर तक पहुँचता है

आत्मा अत्यंत सूक्ष्म है,
वह कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र है।


 मुरली प्रमाण

मुरली – 2 फरवरी 1968

“आत्मा जब पवित्र और शक्तिशाली होती है,
तो शरीर भी उसका प्रभाव लेता है।”


मस्तिष्क में होने वाले प्रमुख परिवर्तन

1️⃣ विचारों की गति धीमी हो जाती है

  • जितना योग बढ़ता है, उतने विचार कम होते हैं

  • थॉट्स कम = ब्रेन ठंडा

उदाहरण

  • तेज़ सोच → सिर गर्म → सिर दर्द

  • धीमी सोच → शांति → ब्रेन रिपेयर


2️⃣ भय और तनाव के सर्किट कमजोर पड़ते हैं

  • डर कम होता है

  • चिंता ढीली पड़ती है

मुरली – 18 जनवरी 1969

“पिता को पहचानने से निर्भयता आती है।”


3️⃣ निर्णय शक्ति तेज हो जाती है

  • रिएक्शन कम

  • रिस्पॉन्स बढ़ता है

मुरली – 5 दिसंबर 1971

“शांत बुद्धि सदा सही निर्णय करती है।”


 शरीर में होने वाले प्रमुख परिवर्तन

🔹 श्वास और ऊर्जा

  • श्वास गहरी और स्थिर

  • ऑक्सीजन संतुलन बेहतर

  • थकान कम महसूस होती है


🔹 मांसपेशियाँ और नर्वस सिस्टम

  • कंधे हल्के

  • गर्दन और जबड़ा रिलैक्स

  • मांसपेशियों का तनाव ढीला


🔹 नींद और हार्मोन

  • नींद की गुणवत्ता बेहतर

  • हार्मोनल संतुलन सुधरता है

  • क्रोध और चिड़चिड़ापन कम


🔹 चेहरे पर प्रभाव

  • सौम्यता

  • दिव्यता

  • शांति की झलक

मुरली – 28 जुलाई 1967

“आत्मिक स्थिति का प्रभाव चेहरे पर दिखाई देता है।”


 ये परिवर्तन स्थाई कब होते हैं?

ये परिवर्तन —

  • तब स्थाई होते हैं
    जब आत्म-स्मृति निरंतर बनती है

  • योग केवल अनुभव न रहकर
    जीवन की स्थिति बन जाए


 निष्कर्ष

अतींद्रिय सुख केवल अनुभव नहीं है
यह —

  • मस्तिष्क की सोच बदलता है

  • शरीर की रचना को प्रभावित करता है

  • जीवन को शांत, शक्तिशाली और स्थिर बनाता है

आत्मा बदली = जीवन बदला


अति इंद्रिय सुख क्या है?

 प्रश्न 1:

अति इंद्रिय सुख का वास्तविक अर्थ क्या है?

 उत्तर:

अति इंद्रिय सुख वह आनंद है जो इंद्रियों से नहीं, आत्मा से अनुभव होता है
यह कोई बाहरी वस्तु या परिस्थिति से मिलने वाला सुख नहीं,
बल्कि आत्मा की अपनी आंतरिक स्थिति से उत्पन्न होने वाला सुख है।


प्रश्न 2:

क्या अति इंद्रिय सुख केवल एक भावना या अनुभव मात्र है?

 उत्तर:

नहीं।
अति इंद्रिय सुख केवल भावना नहीं है।
जब आत्मा यह अनुभव करती है, तो
मस्तिष्क प्रतिक्रिया देता है
शरीर में भी परिवर्तन होते हैं

इसका अर्थ है कि यह अनुभव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डालता है


 अति इंद्रिय सुख आत्मा से शरीर तक कैसे पहुँचता है?

 प्रश्न 3:

अति इंद्रिय सुख की यात्रा कहाँ से शुरू होती है?

 उत्तर:

अति इंद्रिय सुख की शुरुआत आत्मा से होती है
फिर यह
 बुद्धि से होकर
 मन के माध्यम से
 शरीर तक पहुँचता है।

मन यहाँ मीडिएटर (माध्यम) का कार्य करता है।


 प्रश्न 4:

मन, बुद्धि और शरीर का आपसी संबंध क्या है?

 उत्तर:

  • आत्मा – अनुभव करने वाली सत्ता

  • बुद्धि – निर्णय लेने वाली शक्ति

  • मन – संदेशवाहक

  • शरीर – क्रियान्वयन करने वाला साधन

जो अनुभव आत्मा करती है,
वह बुद्धि के निर्णय से
मन द्वारा शरीर में प्रकट होता है।


 आत्मा का स्थान और मस्तिष्क से संबंध

 प्रश्न 5:

आत्मा का स्थान कहाँ माना गया है?

 उत्तर:

जहाँ

  • पिट्यूटरी ग्लैंड

  • हाइपोथैलेमस ग्लैंड

  • पीनियल ग्लैंड

इन तीनों का सूक्ष्म संबंध है,
वहीं आत्मा का कार्य-क्षेत्र माना जाता है।
यहीं से हार्मोनल सिस्टम और मानसिक अवस्था प्रभावित होती है।


 प्रश्न 6:

क्या आत्मा का प्रभाव सीधे मस्तिष्क पर पड़ता है?

 उत्तर:

हाँ।
आत्मा जब शक्तिशाली और पवित्र स्थिति में होती है,
तो उसका प्रभाव मस्तिष्क और शरीर दोनों पर पड़ता है।

मुरली – 2 फरवरी 1968:

“आत्मा जब पवित्र और शक्तिशाली होती है तो शरीर भी उसका प्रभाव लेता है।”


 अति इंद्रिय सुख आने पर मस्तिष्क में क्या परिवर्तन होते हैं?

 प्रश्न 7:

अति इंद्रिय सुख आने पर विचारों में क्या बदलाव आता है?

 उत्तर:

  • विचारों की गति धीमी हो जाती है

  • विचारों की संख्या कम हो जाती है

कम विचार = ठंडा मस्तिष्क = मानसिक शांति


 प्रश्न 8:

तेज़ और धीमी सोच का मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर:

  • तेज़ सोच → सिर गर्म → तनाव, सिरदर्द

  • धीमी सोच → शांति → ब्रेन रिपेयर

योग से मस्तिष्क को आराम और मरम्मत मिलती है।


 प्रश्न 9:

योग और अति इंद्रिय सुख का भय और तनाव पर क्या प्रभाव पड़ता है?

 उत्तर:

योग से

  • डर के सर्किट कमजोर पड़ते हैं

  • चिंता ढीली पड़ती है

  • निर्भयता बढ़ती है

मुरली – 18 जनवरी 1969:

“पिता को पहचानने से निर्भयता आती है।”


 प्रश्न 10:

अति इंद्रिय सुख का निर्णय शक्ति पर क्या असर होता है?

 उत्तर:

  • निर्णय शक्ति तेज होती है

  • रिएक्शन कम हो जाता है

  • व्यक्ति स्थिति को समझकर उत्तर देता है

मुरली – 5 दिसंबर 1971:

“शांत बुद्धि सदा सही निर्णय करती है।”


 अति इंद्रिय सुख का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

 प्रश्न 11:

शरीर की श्वास प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है?

 उत्तर:

  • श्वास गहरी और स्थिर हो जाती है

  • ऑक्सीजन संतुलन बेहतर होता है

  • थकान कम महसूस होती है


 प्रश्न 12:

मांसपेशियों और शरीर के तनाव में क्या बदलाव आता है?

 उत्तर:

  • मांसपेशियों का तनाव ढीला पड़ता है

  • कंधे हल्के लगते हैं

  • गर्दन और जबड़ा रिलैक्स हो जाता है


 प्रश्न 13:

नींद और हार्मोन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

 उत्तर:

  • नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है

  • हार्मोनल संतुलन सुधरता है

  • क्रोध और चिड़चिड़ापन कम होता है


 प्रश्न 14:

अति इंद्रिय सुख का चेहरे पर क्या प्रभाव दिखाई देता है?

 उत्तर:

  • चेहरे पर सौम्यता आती है

  • आँखों में शांति झलकती है

  • आभा (Aura) अनुभव होती है

मुरली – 28 जुलाई 1967:

“आत्मिक स्थिति का प्रभाव चेहरे पर दिखाई देता है।”


 क्या ये परिवर्तन स्थायी हो सकते हैं?

 प्रश्न 15:

अति इंद्रिय सुख से होने वाले परिवर्तन कब स्थायी होते हैं?

 उत्तर:

जब

  • आत्म-स्मृति निरंतर हो

  • योग नियमित हो

  • अनुभव बार-बार साकार जीवन में आए

तब यह परिवर्तन
 अस्थायी नहीं
स्थायी स्वभाव और संस्कार बन जाते हैं


 निष्कर्ष (सार)

 प्रश्न 16:

अति इंद्रिय सुख का संक्षिप्त सार क्या है?

 उत्तर:

अति इंद्रिय सुख

  • आत्मा में जन्म लेता है

  • मन से होकर गुजरता है

  • मस्तिष्क और शरीर को परिवर्तित करता है

यह सुख
 केवल अनुभव नहीं
जीवन को बदलने वाली शक्ति है।

Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय ज्ञान, मुरली संदर्भों और आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मिक जागरूकता और जीवन में शांति का अनुभव कराना है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय या वैज्ञानिक उपचार सलाह का विकल्प नहीं है। दर्शक अपने विवेक से ज्ञान को अपनाएँ।

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