(12)Who are demons? What is the difference between demons and demons? Are demons still active today?

भूत ,प्रेत:-(12)असुर कौन होते हैं? राक्षस और असुर में फर्क क्या है? क्या असुर आज भी सक्रिय हैं?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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प्रस्तावना — असुर कौन है? मिथक या मन?

हम भूत, प्रेत, राक्षस आदि विषयों का अध्ययन कर रहे थे।
आज 12वां विषय है— असुर कौन होते हैं?

  • राक्षस और असुर में क्या अंतर है?

  • क्या असुर आज भी सक्रिय हैं?

  • क्या यह वास्तविक प्राणी है या मन की ऊर्जा?

धर्म-ग्रंथों में असुरों को देवताओं के विरोधी,
अर्थात् दिव्य गुणों के विरोधी बताया गया है।

लेकिन असुर केवल भौतिक शरीर वाले नहीं होते।
असल में असुर = चेतना का एक गिरा हुआ रूप।


 1. असुर का असली अर्थ — चेतना का विकृति रूप

असुर = Asur = “A-Sur”
अर्थ: जिसमें सुरत्व (दिव्यता) न हो।

  • यह कोई अलग जाति नहीं

  • न ही कोई सींग वाला जीव

  • बल्कि आत्मा की चेतना का दूषित स्तर

असुरी गुण कैसे बनते हैं?

चेतना → संस्कार → चित्त → वृत्ति
जहां संस्कार विकारी हैं, वहां चित्त और वृत्ति भी आसुरी बन जाते हैं।

उदाहरण:

एक व्यक्ति सबके साथ अच्छा है, सम्मान देता है,
लेकिन किसी एक व्यक्ति से बदला, क्रोध, वैर रखता है—
तो वह पूरा असुर नहीं है,
बल्कि उस आत्मा का वही हिस्सा असुरी है।


 2. Murli Notes — असुर कौन?

Murli: 08 मई 2023

“असुर और राक्षस कोई अलग जाति नहीं।
जब आत्मा काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार में जाती है,
तो उसकी चेतना आसुरी कहलाती है।”

असुर = अवगुण
असुर = विकारी चेतना का subtle form


 3. असुर और राक्षस में अंतर

आधार असुर राक्षस
स्वरूप चेतना, संस्कार, subtle ऊर्जा प्रैक्टिकल में हिंसा, क्रोध, आक्रमण
अभिव्यक्ति मन के अंदर आचरण में बाहर
मूल कारण अवगुण, अहंकार हिंसा, दमन, रक्तपात
वृत्ति आसुरी चेतना राक्षसी वृत्ति

➤ सरल भाषा में:

असुर = अवगुण
राक्षस = उन्हीं अवगुणों का प्रैक्टिकल रूप

उदाहरण:

  • रावण – विद्वान था (असुर गुण)
    लेकिन वासना + अहंकार प्रैक्टिकल हुआ → राक्षस कहलाया

  • महिषासुर – रक्तपात में आनंद लेता था → राक्षस


 4. वेदों में असुर — आरंभिक इतिहास

वेदों में असुरों को पहले देवताओं जैसा माना गया था।
बाद में “असुर” का अर्थ बदल गया:
✔ अहंकारी
✔ अधर्म से जुड़े
✔ शक्ति का दुरुपयोग करने वाले

पहले आत्माएं देवता थीं।
दिव्य गुण थे।
धीरे-धीरे अवगुण आए → असुर
विकार बढ़े → राक्षस


 5. आधुनिक विज्ञान: क्या असुर आज भी हैं?

आज असुर कोई प्राणी नहीं—
बल्कि मन में जन्म लेने वाले अवगुण और destructive thoughts हैं।

आज के असुर:

  • काम

  • क्रोध

  • लोभ

  • मोह

  • अहंकार

ये पाँच विकार ही आसुरी शक्तियां हैं।


 6. Murli Notes — असुर आत्माओं का प्रभाव

Murli: 25 जून 2024

“आत्मा का कोई सींग या पूँछ नहीं होती।
असुर रूप मन की स्थिति है।”

असुर हमला नहीं करते,
विचारों में प्रवेश करते हैं।

यदि मन:

✔ स्थिर
✔ शक्तिशाली
✔ अचल

तो कोई आसुरी शक्ति प्रभावित नहीं कर सकती।


 7. असुर आत्माएं मनुष्य को कैसे प्रभावित करती हैं?

असुर बाहर नहीं—
मन के अंदर जन्म लेते हैं।

  • डर

  • नफरत

  • बदला

  • तुलना

  • लालच

  • अहंकार

ये आसुरी प्रवेश द्वार हैं।

असुर:

✘ शरीर में प्रवेश नहीं करते
✔ केवल विचारों में प्रवेश करते हैं

उदाहरण:

गुस्सा = असुर का प्रवेश
वासना = असुरी चेतना
लोभ = आत्मा की गिरावट
बदला = राक्षसी वृत्ति


 8. असुर हमेशा बुरे क्यों नहीं?

असुर अनेक बार महान भी रहे:

  • रावण — शिव भक्त

  • हिरण्यकश्यप — महान तपस्वी

  • शुक्राचार्य — महान आचार्य

परंतु ज्ञान के बिना शक्ति, विनाश बन जाती है।


 9. असुरों से सुरक्षा — कैसे?

✔ 1. राजयोग

मन को शक्तिशाली और स्वच्छ बनाता है।

✔ 2. Murli सुनना

सत्य ज्ञान भय और भ्रम को समाप्त करता है।

✔ 3. सात्विक भोजन

आभा को शुद्ध करता है।

✔ 4. संगति

शक्तिशाली संगति → दिव्य vibrations

✔ 5. क्रोध, लालच, बदला न रखना

ये आसुरी ऊर्जा का entry point हैं।


 निष्कर्ष — असुर बाहर नहीं, अंदर हैं

असुर कोई भूत-प्रेत नहीं,
न ही कोई सींग वाला जीव।

असुर = अवगुण
राक्षस = अवगुणों का हिंसक रूप

जब मन ईश्वर से जुड़ता है → देवी गुण
जब मन विकारों से जुड़ता है → आसुरी गुण

इसलिए असली युद्ध बाहर के असुरों से नहीं,
अपने मन के विकारों से है।

Q1. असुर शब्द का असली अर्थ क्या है?

A: असुर = “A-Sur” यानी जिसमें सुरत्व या दिव्यता न हो
यह कोई प्राणी नहीं, बल्कि चेतना का विकृत रूप है।


Q2. क्या असुर एक अलग जाति या जीव होते हैं?

A: नहीं। असुर न तो सींग वाले जीव हैं और न कोई विशेष जाति।
यह आत्मा की दूषित मानसिक अवस्था का नाम है।


Q3. असुरी चेतना कैसे बनती है?

A:
चेतना → संस्कार → चित्त → वृत्ति
जब संस्कार विकारी होते हैं, चेतना आसुरी बन जाती है।


Q4. क्या एक व्यक्ति पूरा असुर बन सकता है?

A: नहीं।
कभी-कभी व्यक्ति में केवल कुछ हिस्से असुरी हो जाते हैं
(जैसे बदला, क्रोध, घृणा), बाकी उसका व्यक्तित्व सामान्य रहता है।


Q5. Murli क्या कहती है असुरों के बारे में?

A (Murli: 08 मई 2023):
“जब आत्मा काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार में जाती है,
तो उसकी चेतना आसुरी कहलाती है।”


Q6. असुर और राक्षस में क्या अंतर है?

आधार असुर राक्षस
रूप चेतना, संस्कार हिंसा, आक्रामक व्यवहार
अस्तित्व मन के अंदर आचरण में बाहर
कारण अवगुण, अहंकार दमन, रक्तपात
वृत्ति आसुरी चेतना राक्षसी वृत्ति

सरल भाषा:
असुर = अवगुण
राक्षस = अवगुणों का हिंसक रूप


Q7. उदाहरण से अंतर कैसे समझें?

A:

  • रावण – विद्वान था → असुरी गुण

  • वासना + अहंकार प्रैक्टिकल हुआ → राक्षस व्यवहार


Q8. क्या वेदों में असुर शुरू से नकारात्मक थे?

A: नहीं।
वेद काल में असुरों को देवताओं जैसा माना जाता था।
बाद में अर्थ बदलकर:
अहंकारी, अधर्मी, शक्ति का दुरुपयोग करने वाले बन गया।


Q9. क्या आज भी असुर मौजूद हैं?

A: हाँ – लेकिन मन के अंदर!
आज के असुर हैं:
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार।


Q10. Murli के अनुसार असुरी प्रभाव कैसे काम करता है?

A (Murli: 25 जून 2024):
“असुर रूप मन की स्थिति है।”
असुर शरीर में प्रवेश नहीं करते – केवल विचारों में प्रवेश करते हैं।


Q11. असुर मनुष्य को कैसे प्रभावित करते हैं?

A: जब मन में:
डर, नफरत, लोभ, तुलना, बदला प्रवेश करता है
तो आसुरी ऊर्जा मन को पकड़ लेती है।


Q12. क्या असुर शरीर में प्रवेश करते हैं?

A: नहीं।
यह मिथक है।
असुर = नकारात्मक विचारों का ऊर्जा प्रवेश


Q13. क्या सभी असुर बुरे थे?

A: नहीं।
रावण, ह‍िरण्यकश्यप, शुक्राचार्य — तीनों विद्वान और शक्तिशाली थे।
लेकिन ज्ञान के बिना शक्ति → विनाश बन जाती है।


Q14. असुरी ऊर्जा का Entry Point क्या है?

A:

  • क्रोध

  • लालच

  • वासना

  • बदला

  • भय

ये पाँच मुख्य दरवाजे हैं।


Q15. असुर और देवता में निर्णायक अंतर क्या है?

A:
मन ईश्वर से जुड़ता है → देवी गुण
मन विकारों से जुड़ता है → असुरी गुण


Q16. असुरों से सुरक्षा कैसे मिले?

A:

  1. राजयोग ध्यान – मन शक्तिशाली बनता है

  2. Murli – भ्रम व डर समाप्त

  3. सात्विक भोजन – आभा शुद्ध

  4. अच्छी संगति – दिव्य वाइब्रेशन

  5. क्रोध/बदला न रखना – असुरी प्रवेश बंद


Q17. क्या असुर व्यक्ति को मजबूर कर देते हैं?

A: नहीं।
वे केवल संकेत देते हैं।
निर्णय आत्मा खुद करती है।


Q18. असली लड़ाई किससे है — बाहर के असुरों से या भीतर के?

A:
असुर बाहर नहीं — अंदर हैं।
बाबा कहते हैं:
“मन के विकार ही असली असुर हैं।”

Disclaimer:

यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन आधारित है।
हम भूत, प्रेत, राक्षस जैसे विषयों को भय नहीं,
ज्ञान और आत्मिक दृष्टि से समझने का प्रयास कर रहे हैं।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, ग्रंथ या मत का विरोध नहीं है।
यह केवल Murli ज्ञान, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञान पर आधारित व्याख्या है।

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