ब्रह्मा एक एक सेकंड में विष्णु कब बनता है
ब्रह्मा सो विष्णु सो विष्णु सो ब्रह्मा यह हम सुनते आए। यह भी हमने सुना कि एक सेकंड में ब्रह्मा से विष्णु एक सेकंड में बनता है और विष्णु को ब्रह्मा बनने में 5000 साल लगते हैं। अब प्रश्न उठता है कि वो एक सेकंड कौन सा है जिस समय ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा से विष्णु बनता है।
मुरली है 9 मार्च 2020 की जिसमें हम कॉमन दास सुनते आए ब्रह्मा सो विष्णु विष्णु सो ब्रह्मा बात एक ही है। विष्णु को ब्रह्मा बनने में 5000 वर्ष लगते हैं। जबकि ब्रह्मा को विष्णु बनने में एक सेकंड लगता है।
मनुष्य समझते हैं कि यह कोई जादू या चमत्कार है। जैसे दिखाते हैं कि नारायण की या विष्णु की नाभि से ब्रह्मा निकल आया। परंतु मुरली में बाबा ने इसको बड़ा सरल और गुण उत्तर दिया है। ब्रह्मा कौन है? पहला हम यह डिसाइड करेंगे कि ब्रह्मा कौन है? ब्रह्मा वास्तव में वही आत्मा वही कृष्ण की आत्मा है जिसने 84 जन्म लिए।
ब्रह्मा आत्मा वास्तव में वही कृष्ण आत्मा है जिसने 84 जन्म लिए। यह है कृष्ण का 84वा जन्म। मुरली है 9 मार्च 2020। बाबा कहते हे कृष्ण की पुरानी आत्मा अभी तुम्हारा नाम ब्रह्मा रखा है। कृष्ण की आत्मा का नाम क्या रखा है? ब्रह्मा रखा है। ब्रह्मा रखा है परंतु ब्रह्मा बना नहीं।
तुम कृष्ण थे तो सतो प्रधान थे। 84 जन्म लेने के बाद अभी तुम तमो प्रधान बने हो।
84 जन्म लेने के बाद अभी तुम तमो प्रधान बने हो। तुम्हारा नाम ब्रह्मा रखा है। विष्णु का रोल और विराट रूप विष्णु का अपना कोई पार्ट नहीं। यह केवल एक मॉडल है जो संगम युगी आत्माओं का लक्ष्य है। जो संगम युगी आत्माओं का लक्ष्य है।
मुरली है 9 मार्च 2020 इनको ब्रह्मा को भी बाप कहते हैं। हे कृष्ण की पुरानी तमो प्रधान आत्मा तुम अपने जन्मों को नहीं जानती हो। तुम कृष्ण थे।
तमकेशन थे तो सतो प्रधान थे। फिर 84 जन्म लेते लेते अभी तुम तमो प्रधान बने हो। भिन्नभिन्न नाम तुम्हारे पड़े हैं। ये भिन्न-भिन्न नाम का क्या मतलब होता है?
भिन्नभिन नाम तुम्हारे पड़े हैं। उन्होंने जितने जन्म लिए, जितने जन्म लिए नाम पड़े, उनके हर जन्म में नाम अलग पड़ा।
अब तुम तमो प्रधान बने हो। भिन्न-भिन्न नाम तुम्हारे पड़े हैं। अब भी तुम्हारा नाम ब्रह्मा रखा है। ब्रह्मा सो विष्णु वा श्री कृष्ण बनेगा। बात एक ही है।
ब्रह्मा सो विष्णु विष्णु सो ब्रह्मा।
बात एक ही है। ब्रह्मा सो विष्णु विष्णु सो ब्रह्मा हर आत्मा विष्णु चतुर्भुज अर्थात चारों अलंकार शंख चक्र गदा और पदम को अलंकारों को धारण करती है। जिस स्टेज पर वह धारण करती है उस स्टेज की वे लक्ष्मी या नारायण बनती है।
ये बात समझ में आई है?
जी भाई जो जितना परसेंटेज लास्ट बनाएगा उसी हिसाब से वो लक्ष्मी या नारायण बनेंगे। उसी हिसाब से वह लक्ष्मी या नारायण बनेंगे।
ब्रह्मा सो विष्णु व श्री कृष्ण का पार्ट है 84 जन्मों का संपूर्ण त। विराट रूप और चतुर्भुज विष्णु विष्णु को पा दिखाया जाता है ब्रह्मा का नहीं।
विष्णु को चतुर्भुज विष्णु का दिखाया जाता है ब्रह्मा का नहीं। उदाहरण जैसे फिल्म का नायक शुरुआत और अंत दोनों में आता है वैसे ही आत्मा श्री कृष्ण से ब्रह्मा और फिर विष्णु रूप में आती है।
यह है विष्णु का 7 अगस्त 2020 को बताया। यह है विष्णु का अथवा कृष्ण का अंतिम 84वा जन्म।
जिसका नाम ब्रह्मा रखा जिसके तन में प्रवेश किया है उसका नाम ब्रह्मा रखा है। सिद्ध तो करना ही है कि ब्रह्मा और विष्णु।
ब्रह्मा कब विष्णु बना? ब्रह्मा कब विष्णु बनता है?
जब ब्रह्मा विष्णु चतुर्भुज के चारों अलंकारों को अपने जीवन में धारण कर संपूर्णता को प्राप्त होता है। अब ब्रह्मा की आत्मा ने जब चारों अलंकार धारण किए।
ये विष्णु चतुर्भुज के चारों अलंकार हैं। कमल फूल समान पवित्र बनना है। शंख बजाकर सबको ज्ञान सुनाना है। सुदर्शन चक्र चलाकर हमने अपनी बुराइयों का गला काटना है और गदा से अलर्ट रहना है।
भाई जी ये गदा अलर्ट रहना है या मतलब विजय प्राप्त कर लिया?
अलर्ट रहना चार अलंकार है ना।
जी।
गदा का मतलब है सावधान रहना माया दूर से भाग जाए आए नहीं। इसलिए बेचारे को खड़ा कर रखा है। नहीं तो बिठा देते।
कब से खड़ा हुआ है पता नहीं कब से खड़ा हुआ है ये पता ही नहीं है।
संगम है तब से खड़ा है।
हां और ये ब्रह्मा जो है जब संपूर्णता को प्राप्त करता है जिसके बाद सारी सृष्टि को आग लगना होता है वहां पर दिखाया है कि कमल का फूल जिससे यह स्पष्ट होता है कि ब्रह्मा बाबा बाबा कमल समान कमल फूल समान पवित्र बन गए।
और विष्णु बनते ही श्री कृष्ण के रूप में जन्म ले लिया वो भी विनाश से पहले।
भाई जी ये झाड़ पूरा ड्रामा का भी होता है और संगम का भीड़ होता है ना।
हां जी।
ये संगम में जैसा तैसा संगम कम पड़ता है वैसा 100 वर्ष का एक झाड़ है यानी 5000 वर्ष का एक झाड़।
5000 साल का ये झाड़।
भाई जी ये पिक्चर इतना क्लियर है कि बिना थे मतलब विनाश के पहले कृष्ण का जन्म हो गया पर कोई पर कोई मानता क्यों नहीं है।
मानता इसलिए नहीं है कि मुरलियां कभी कोई मुरली में कभी कुछ आता है कभी कुछ आता है। कभी कुछ आता है कभी कुछ आता है कैसे मान ले उनको आता है पति दुनिया में कृष्ण जन्म ले ही नहीं सकता। उनके दिमाग में बैठी हुई है।
यही बात है भाई जो आप लाइन में अभी बोले ना कि कृष्ण अभी दुनिया में जन्म नहीं ले सकता है। यही पकड़ के सब बैठ गया है। तो उनकी बात सही है ना पतित दुनिया में कैसा कृष्ण लेगा तो लेगा ना। उनको समझाने वाला चाहिए ना।
फिर बाबा ने एक कहा है कुछ पतित रहते हैं जन्म लेता है।
और भाई जी एक मुरली में तो बाबा ने कहा कि कोई दूसरा धर्म होगा ही नहीं तब कृष्ण जन्म लेगा मतलब बाबा इतने सारे अलग-अलग बयान देते हैं।
ऐसा है ना कि बाबा के बयान अलग-अलग समय पर अलग-अलग होते हैं ना जैसे लोग बैठे होते हैं वैसा देना होता है। अब मुरलियां जो है ना आगे पीछे से चलती है जब मुरलियां आगे इनकी कोई सीक्वेंस बना ले मुरलियों की कि पहले ये मुरली पढ़नी है फिर ये फिर ये फिर ये फिर जैसे पहली क्लास का बच्चा दूसरी क्लास हां जी।
एक मुरली में कहा था बाबा ने कृष्ण का बाप निराकार है और माता है साकार। शिव बाबा जो है ना उसका बाप है और गीता जो है माता है।
तो हमें समझ में आया कृष्ण के रूप में जन्म लिया।
ठीक है? क्योंकि यहीं पर यह दिखाया है कि यह जब ब्रह्मा संपूर्णता को प्राप्त करता है तो कमल फूल समान पवित्र बनता है। और कमल के फूल को पेड़ के ऊपर दिखाने का मतलब यही है कि जब यह ब्रह्मा संपूर्ण पवित्र बना तो कमल फूल समान हो गया और उसके बाद वो संगम पर कृष्ण के रूप में दिखाई दिया। जो वहां के रहने वाले लोग होंगे जो उनकी भाषा होगी उनके साथ समन्वय किया और भाई ये जो टार टाली आने के लिए संगम के अनेक पंथ अनेक मत वाले निकले वाले अनेक मत वाली आत्माएं।
चारों अलंकारों को अपने जीवन में धारण कर संपूर्णता को प्राप्त करते हैं। तभी वे सयुग का प्रथम राजकुमार श्री कृष्ण के रूप में जन्म लेते हैं। जिस सेकंड, जिस सेकंड संपूर्णता को प्राप्त किया उसी सेकंड विष्णु बना और उसी सेकंड कृष्ण के रूप में गर्भ में प्रवेश किया और जन्म लिया।
मुरली है 9 मार्च 2020 की ब्रह्मा सो विष्णु वा श्री कृष्ण बनेगा।
ब्रह्मा सो विष्णु व श्री कृष्ण बनेगा।
परंतु ये एक सेकंड कौन सा है? कब आता है? वो एक सेकंड।
मुरली है 164 2019 रात्रि क्लास 15 51 69। ये तो ड्रामा प्लान अनुसार सभी को घर जाना ही है। अनेक बार घर जाते हैं। कोई तो पूरे 5000 वर्ष घर में नहीं रहते। कोई तो पूरे 5000 वर्ष रहते हैं। अंत में आएंगे तो कहेंगे 4999 वर्ष शांति धाम में रहे। हम कहेंगे 4999 वर्ष इस सृष्टि पर रहे। यह तो बच्चों को निश्चय है कि सबके 84 जन्म तो नहीं होते। किसी के 83 होंगे, किसी के 84 होंगे।
मुरली है 6822। संगम युग पुरानी कल्प का संगम युग बड़ा होता है। 68 6 अगस्त 2022 को बाबा कहते हैं संगम युग पुराने कल्प का संगम युग बड़ा होता है और नए कल्प का संगम युग छोटा होता है।
संगम तो एक साथ शुरू होता है। जैसे ही शिव बाबा आया संगम युग शुरू हो गया। एक तरफ कलयुग है तो दूसरी तरफ सतयुग भी है। चाहे वो थोड़ा थोड़ा है। धीरे-धीरे संगम युग बढ़ते-बढ़ते जब ब्रह्मा संपूर्णता को प्राप्त करेंगे तभी तो नए कल्प का संगम युग शुरू होगा।
बड़ा क्लियर मित्रों। इसका मतलब 2000 2000 में प्रमाण संपूर्ण हो ऐसा कह सकते हैं क्या?
हां 2002।
33।
पहले 33 साल 18 जनवरी 1936 से 18 जनवरी 1969।
संगम युग पर छोटा होता है। कल्प का संगम युग छोटा होता है। पूरे दोनों को मिलाकर के ही पूरे 100 साल का संगम होता है। दोनों संत।
दोनों का मतलब थोड़ा है तो भी बड़ा है तो भी।
संगम युग 100 वर्ष 33 वर्ष साकार ब्रह्मा जमा 33 वर्ष शंकर जमा 33 वर्ष विष्णु प्लस एक वर्ष परमधाम कृष्ण की आत्मा और हम उनके साथ जो आत्माएं जाने वाली है।
एक वर्ष में सारी आत्माएं परमधाम रहती है। मुरली 20 जुलाई 2021 कृष्ण की आत्मा भी गर्भ में आई। जैसे ही कृष्ण की आत्मा गर्भ में आती है उसी समय से लेकर 5000 वर्ष का हिसाब शुरू होता है।
उसी सेकंड से हिसाब शुरू होता है।
अगर कम जास्ती हो तो फिर 5000 वर्ष कम हो जाए। 5000 वर्ष में कम हो जाए ना यही मोहब्बत।
यही बड़ी सूक्ष्म समझने की बातें हैं। बच्चे जानते हैं श्री कृष्ण की आत्मा फिर से यह ज्ञान ले रही है। फिर से श्री कृष्ण बनने के लिए। तुम भी कंस पुरी से कृष्णपुरी में जाते हो। यह बातें बाप बैठ बच्चों को समझाते हैं।
उदाहरण कि जैसे रात का अंत और सुबह की शुरुआत।
बीच में कोई लंबा अंतर नहीं।
इस प्रकार ब्रह्मा का अंत और विष्णु की शुरुआत होती है। ब्रह्मा का अंत और विष्णु की शुरुआत होती है। पांच निष्कर्ष।
कृष्ण श्री कृष्ण की आत्मा 84 जन्म लेने के बाद बनती है। अब ब्रह्मा संपूर्ण बनने का में लगभग।
अब ब्रह्मा संपूर्ण बनने में लगभग 60 वर्ष लगते हैं। 66 वर्ष जब वह संपूर्ण बनते हैं तो बनते ही कृष्ण के रूप में जन्म लेते हैं। यही सेकंड है जब ब्रह्मा से विष्णु व श्री कृष्ण बनता है।
भाई जी हम।
बोलो।
भाई मुरली कौन सी है कि नए कल की आयु कम होती है पुराने कल की आयु जाया होती है कौन सी मुरली डेट है भाई जी।
ये मुरली है 6 अगस्त 2022।
जैसे रात का अंत और सुबह की शुरुआत होती है।
ऐसे ही ब्रह्मा सो विष्णु विष्णु सो ब्रह्मा बनते हैं। बीच में कोई लंबा अंतर नहीं। बीच में कोई लंबा अंतर नहीं होता।
उसी प्रकार ब्रह्मा का अंत विष्णु की शुरुआत।
निष्कर्ष है श्री कृष्ण का।
श्री कृष्ण की आत्मा 84 जन्म लेने के बाद ब्रह्मा बनती है। अब ब्रह्मा संपूर्ण बनने में लगभग 66 वर्ष लगते हैं। जब वह संपूर्ण बनते हैं तो कृष्ण बनते हैं।
कृष्ण के रूप में जन्म लेते हैं। यह सेकंड है।
यही सेकंड है जब विष्णु बनते हैं और कृष्ण बनते हैं।
