(14)When and how does the soul enter the body?

AAT.(14)आत्मा कब और कैसे शरीर में प्रवेश करती है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

अध्याय – जीव आत्मा का अद्भुत रहस्य

“आत्मा कब और कैसे शरीर में प्रवेश करती है?”


1. आत्मा और शरीर का गूढ़ संबंध

आत्मा एक सूक्ष्म, दिव्य ऊर्जा बिंदु है।
जब यह आत्मा शरीर में प्रवेश करती है, तब शरीर को “जीव” कहा जाता है।

सूत्र:
जीव + आत्मा = जीवात्मा (सजीव)
शरीर – आत्मा = निर्जीव

Murli Note (Sakar Murli):

“आत्मा के बिना यह शरीर क्या है? निर्जीव।” – (मुरली, 10 जुलाई 2025)

उदाहरण:
जैसे बल्ब बिना बिजली के सिर्फ काँच है—
वैसे शरीर बिना आत्मा के केवल मिट्टी है।


2. आत्मा कब प्रवेश करती है?

शास्त्र और मुरली दोनों बताते हैं—
आत्मा समय-चक्र के अनुसार, अपने नियत रिकॉर्ड के अनुसार शरीर में प्रवेश करती है।

कब?

  • गर्भधारण के समय

  • या उसके कुछ समय बाद, रिकॉर्ड के अनुसार

  • आत्मा का प्रवेश पूर्व जन्म के संस्कारों के हिसाब से होता है

उदाहरण:
जैसे निर्धारित समय आने पर अलार्म अपने-आप बज जाता है।
वैसे ही आत्मा समय आने पर नए शरीर में सक्रिय होती है।


3. जीव आत्मा क्या है?

जब आत्मा शरीर में प्रवेश करती है तो उसे “जीव आत्मा” कहते हैं—
यही चलती, बोलती, सोचती और अनुभव करती है।

बीके ज्ञान:
“आत्मा सहित जीव = सजीव
आत्मा रहित जीव = निर्जीव।”


4. पेड़-पौधे – इनमें जीव है या आत्मा?

ये विषय बड़ा सूक्ष्म है।
पेड़-पौधों में जीव तत्व है लेकिन चेतन आत्मा नहीं
इसलिए वे सजीव-क्रियाशील भी नहीं कहलाते।

उदाहरण:
पौधा बढ़ता है—पर सोचता, निर्णय नहीं कर सकता।


5. आत्मा की तीन सूक्ष्म शक्तियाँ – मन, बुद्धि, संस्कार

आत्मा स्वयं एक प्रकाश बिंदु है, जिसके पास तीन अदृश्य विभाग हैं:

1. मन – संकल्प करने वाली शक्ति

  • विचार बनाता है

  • विकल्प निर्मित करता है

2. बुद्धि – निर्णय करने वाली शक्ति

  • मन के संकल्पों में से चयन करती है

  • दिशा निर्धारित करती है

3. संस्कार – अनुभवों का अविनाशी रिकॉर्ड

  • बार-बार के कर्मों से बनी आदतें

  • 5000 वर्ष का डेटा (ड्रामा रिकॉर्ड)

Murli Note:

“मन-बुद्धि-संस्कार आत्मा के तीन विभाग हैं।” – (अव्यक्त मुरली, 16 नवंबर 2025)


6. कंप्यूटर का उदाहरण

  • प्रोसेसर = बुद्धि

  • इनपुट सिस्टम = मन

  • डेटाबेस = संस्कार
    आत्मा इस तीनों को उपयोग करके शरीर का संचालन करती है।


7. बुद्धि निर्णय कैसे लेती है?

यह एक गहरा प्रश्न है।

उत्तर:

बुद्धि मन और संस्कार दोनों से प्रभावित होती है।

कभी-कभी मन और संस्कार में टकराव होता है—
तभी भीतर “डबल माइंड” बनती है:

  • करूँ या न करूँ?

  • सही क्या? गलत क्या?

बुद्धि उसी क्षण निर्णय लेकर नया संस्कार भी बनाती है।

उदाहरण:
बार-बार सत्य बोलना → नया संस्कार बन जाता है।


8. आत्मा के संस्कार पहले से कैसे होते हैं?

यह सबसे बड़ा रहस्य है।
जब आत्मा परमधाम से पहली बार आती है, उसके पास अविनाशी रिकॉर्ड होता है।

आत्मा में रिकॉर्ड होता है—

  • 5000 वर्षों का पूरा ड्रामा

  • कर्म

  • अनुभव

  • भूमिका

  • मिलने वाले व्यक्ति

  • द्रष्टा और अनुभूति
    सब कुछ।

Murli Note:

“जो संस्कार एक बार आत्मा में रिकॉर्ड हो जाते हैं, वे सदा साथ रहते हैं।” – (साकार मुरली, 21 मई 2025)


9. परमधाम – आत्मा का मूल निवास

परमधाम वह जगत है जहां—

  • न कोई संकल्प

  • न कोई दृश्य

  • न कोई गति

केवल
शांति, प्रकाश, और अहं-रहित अस्तित्व

ड्रामा शुरू होते ही—
समय-संकेत के अनुसार आत्माएं पृथ्वी पर अवतरित होती हैं।

उदाहरण:
मोबाइल साइलेंट में हो—पर समय आने पर अलार्म अपने-आप बज जाए।
परमधाम की आत्मा भी समय आने पर सक्रिय हो जाती है।


अध्याय का सार

  • आत्मा एक सूक्ष्म ऊर्जा है

  • शरीर में प्रवेश करने पर जीवात्मा बन जाती है

  • मन-बुद्धि-संस्कार आत्मा के तीन विभाग हैं

  • आत्मा का रिकॉर्ड अविनाशी है

  • परमधाम आत्मा का मूल घर है

  • समय के संकेत पर आत्मा नए शरीर में प्रवेश करती है

Disclaimer:
इस वीडियो का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक शिक्षा, आत्म-जागृति और ब्रह्माकुमारीज़ की मुरली-आधारित ज्ञान को सरल रूप में प्रस्तुत करना है।
यह किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं है।
सभी शास्त्रीय, आध्यात्मिक और मुरली बिंदु मूल स्रोतों और आध्यात्मिक अध्ययन पर आधारित हैं।

शीर्षक: जीव आत्मा का अद्भुत रहस्य – “आत्मा कब और कैसे शरीर में प्रवेश करती है?”


 Q1. आत्मा और शरीर का गूढ़ संबंध क्या है?

✔ उत्तर:
आत्मा एक सूक्ष्म, दिव्य ऊर्जा बिंदु है।
जब आत्मा शरीर में प्रवेश करती है, तब शरीर “जीव” कहलाता है।
आत्मा निकल जाए तो वही शरीर “निर्जीव” हो जाता है।

सूत्र:

  • जीव + आत्मा = जीवात्मा (सजीव)

  • शरीर – आत्मा = निर्जीव

मुरली:
“आत्मा के बिना यह शरीर क्या है? निर्जीव।” – साकार मुरली, 10 जुलाई 2025

उदाहरण:
जैसे बिजली के बिना बल्ब सिर्फ काँच है—
वैसे आत्मा के बिना शरीर केवल मिट्टी है।


Q2. आत्मा शरीर में कब प्रवेश करती है?

✔ उत्तर:
आत्मा अपने अविनाशी रिकॉर्ड और समय-चक्र के अनुसार शरीर में प्रवेश करती है।

आत्मा प्रवेश करती है—

  • गर्भधारण के समय, या

  • उसके कुछ समय बाद (आत्मा के रिकॉर्ड के अनुसार)

आत्मा का प्रवेश पूरी तरह पिछले जन्मों के संस्कारों पर आधारित होता है।

उदाहरण:
जैसे निर्धारित समय पर अलार्म अपने-आप बज जाता है—
वैसे ही आत्मा समय संकेत आने पर नए शरीर में सक्रिय हो जाती है।


 Q3. “जीव आत्मा” वास्तव में क्या है?

✔ उत्तर:
जब आत्मा शरीर में प्रवेश करती है, वह “जीव आत्मा” कहलाती है।
यही जीव आत्मा—

  • सोचती है

  • बोलती है

  • निर्णय लेती है

  • अनुभव करती है

बीके ज्ञान:

  • आत्मा सहित जीव = सजीव

  • आत्मा रहित जीव = निर्जीव


 Q4. क्या पेड़-पौधों में भी आत्मा होती है?

✔ उत्तर:
पेड़-पौधों में जीव तत्व है, पर उनमें चेतन आत्मा नहीं होती।
इसलिए वे बढ़ते तो हैं, पर सोचते या निर्णय नहीं लेते।

उदाहरण:
पौधा फूल देता है—लेकिन यह निर्णय नहीं करता कि “आज मुझे क्या करना है।”


 Q5. आत्मा की तीन सूक्ष्म शक्तियाँ कौन-सी हैं?

✔ उत्तर:
आत्मा स्वयं एक प्रकाश बिंदु है, जिसमें तीन अदृश्य विभाग हैं—

मन – संकल्प करने वाली शक्ति

  • विचार बनाता है

  • विकल्प उत्पन्न करता है

बुद्धि – निर्णय करने वाली शक्ति

  • मन के संकल्पों में से चयन करती है

  • दिशा तय करती है

संस्कार – अविनाशी रिकॉर्ड

  • पिछले जन्मों के कर्म

  • आदतें

  • अनुभवों का रिकॉर्ड

मुरली:
“मन-बुद्धि-संस्कार आत्मा के तीन विभाग हैं।” – अव्यक्त मुरली, 16 नवंबर 2025


 Q6. मन–बुद्धि–संस्कार के संबंध को कैसे समझा जाए?

✔ उत्तर:
इसे कंप्यूटर उदाहरण से समझें—

  • इनपुट सिस्टम = मन

  • प्रोसेसर = बुद्धि

  • डेटाबेस = संस्कार

आत्मा इन तीनों का उपयोग करके शरीर का संचालन करती है।


 Q7. बुद्धि निर्णय कैसे लेती है?

✔ उत्तर:
बुद्धि दो चीजों से प्रभावित होती है—

  1. मन के संकल्प

  2. संस्कारों के रिकॉर्ड

कभी-कभी मन और संस्कार में टकराव होता है।
तभी “डबल माइंड” बनती है:

  • करूँ या न करूँ?

  • सही क्या? गलत क्या?

उस समय बुद्धि निर्णय लेती है और नया संस्कार भी बनाती है।

उदाहरण:
यदि आप बार-बार सत्य बोलते हैं—
तो “सत्य बोलने का संस्कार” बन जाता है।


 Q8. आत्मा के संस्कार पहले से कैसे होते हैं?

✔ उत्तर:
यह आत्मा का सबसे बड़ा रहस्य है।
जब आत्मा परमधाम से पहली बार आती है, वह खाली नहीं आती।
उसके पास अविनाशी रिकॉर्ड होता है—

  • 5000 वर्षों का ड्रामा

  • कर्म

  • अनुभव

  • भूमिका

  • मिलने वाले लोग

  • हर दृश्य, हर अनुभूति

मुरली:
“जो संस्कार आत्मा में रिकॉर्ड हो जाते हैं, वे सदा साथ रहते हैं।”
– साकार मुरली, 21 मई 2025


 Q9. परमधाम क्या है और आत्मा वहाँ कैसी रहती है?

✔ उत्तर:
परमधाम आत्माओं का मूल घर है।
यहाँ—

  • न कोई संकल्प

  • न कोई ध्वनि

  • न कोई गति

सिर्फ—
शांति, प्रकाश, स्थिरता और अहं-रहित अस्तित्व।

ड्रामा शुरू होते ही समय के संकेत पर आत्माएं पृथ्वी पर अवतरित होती हैं।

उदाहरण:
मोबाइल साइलेंट में हो, पर समय आने पर अलार्म बज जाए—
ऐसे ही आत्मा समय आने पर सक्रिय हो जाती है।


 अंतिम सार (Conclusion)

  • आत्मा सूक्ष्म दिव्य ऊर्जा है

  • शरीर में प्रवेश करते ही जीवात्मा बनती है

  • मन–बुद्धि–संस्कार आत्मा के तीन विभाग हैं

  • आत्मा का रिकॉर्ड अविनाशी और 5000 वर्ष का है

  • परमधाम आत्मा का मूल घर है

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