सृष्टि चक्र :-(01)क्या सृष्टि चक्र बार-बार बनता है? यह रहस्य खुला है।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
ध्याय : सृष्टि चक्र का पहला प्रश्न
क्या सृष्टि केवल एक बार बनी है या बार-बार बनती है?
🌍 भूमिका : मानव इतिहास का सबसे पुराना प्रश्न
हम सृष्टि चक्र को जानने का प्रयास कर रहे हैं।
आज हम उसका पहला विषय, पहला प्रश्न उठा रहे हैं —
क्या सृष्टि चक्र बार-बार बनता है?
यह कोई नया प्रश्न नहीं है।
यह प्रश्न मनुष्य के मन में हजारों वर्षों से चलता आ रहा है।
क्या यह दुनिया एक बार बनी और समाप्त हो जाएगी?
या यह सृष्टि बार-बार बनती और मिटती रहती है?
आज का विषय गूढ़ भी है और अत्यंत रोचक भी।
विज्ञान बनाम ईश्वरीय ज्ञान
विज्ञान कहता है —
ब्रह्मांड की एक शुरुआत थी (Big Bang)।
ईश्वरीय ज्ञान कहता है —
सृष्टि एक महान चक्र है, जो बार-बार हूबहू रिपीट होता है।
यहीं से सृष्टि चक्र का रहस्य खुलता है।
सृष्टि चक्र की मूल भावना
मुरली संकेत – 18 सितंबर 2025
बाबा कहते हैं —
“मीठे बच्चे, यह नई सृष्टि रचने का समय कलयुग के अंत में ही आता है।
यह चक्र ऐसे ही घूमने वाला है, जैसे नाटक की रिपीटेशन होती है।”
अर्थात सृष्टि की रचना कलयुग के अंत में होती है,
और फिर वही चक्र पुनः आरंभ होता है।
चार युग – एक सटीक क्रम
यह सृष्टि चक्र चार युगों में बँटा हुआ है —
-
सतयुग
-
त्रेता
-
द्वापर
-
कलयुग
जब कलयुग के अंत में आत्माएँ तमोप्रधान,
गुणहीन और शक्तिहीन हो जाती हैं —
तब वे परमात्मा को पुकारती हैं।
परिवर्तन का समय – संगमयुग
जब परिवर्तन का समय आता है —
✔️ परमात्मा स्वयं अवतरित होते हैं
✔️ आत्माओं को पुनः पावन बनने की विधि सिखाते हैं
✔️ आत्मा और प्रकृति दोनों को उनकी मूल अवस्था में पहुँचाते हैं
इसी समय को रचना काल कहा गया है।
हर कल्प – एक मास्टर कॉपी
हर कल्प नया नहीं होता,
बल्कि मास्टर कॉपी की तरह हूबहू रिपीट होता है।
हर 5000 वर्ष बाद
सतयुग → त्रेता → द्वापर → कलयुग
और फिर वही क्रम।
सतयुग की पुनः स्थापना
हर चक्र के आरंभ में —
✔️ लक्ष्मी-नारायण का राज्य
✔️ सम्पूर्ण पवित्रता
✔️ कोई विकार नहीं
फिर धीरे-धीरे द्वापर और कलयुग आता है।
अंत में फिर परमात्मा आकर नवीनीकरण करते हैं।
ज्ञान का मूल आधार
“आप यहाँ पहली बार नहीं आए हैं।”
आप 5000 वर्ष पूर्व भी यहाँ थे।
आप वही पार्ट हर कल्प में निभाते हैं।
क्योंकि यह सृष्टि रूपी नाटक —
हर 5000 वर्ष बाद हूबहू रिपीट होता है।
उदाहरण : टीवी सीरियल
जैसे कोई टीवी सीरियल —
✔️ वही स्क्रिप्ट
✔️ वही क्रम
✔️ वही सीन
वैसे ही यह सृष्टि नाटक।
लेकिन अंतर यह है —
टीवी नाटक हद का है,
और यह बेहद का नाटक है।
न बदला जा सकने वाला नाटक
टीवी नाटक को बदला जा सकता है,
पर इस वर्ल्ड ड्रामा को परमात्मा भी नहीं बदल सकते।
5000 वर्ष के भीतर कुछ भी दोबारा नहीं हो सकता।
5000 वर्ष बाद सब कुछ हूबहू रिपीट होगा।
पार्ट किसने लिखा?
प्रश्न — यह नाटक कौन तय करता है?
उत्तर —
हर आत्मा ने अपना पार्ट स्वयं लिखा है।
इसीलिए ज्ञान मिलने पर —
शिकायत समाप्त हो जाती है।
विज्ञान की अप्रत्यक्ष पुष्टि
विज्ञान भी मानता है —
✔️ ब्रह्मांड फैलता है (Big Bang)
✔️ ब्रह्मांड सिमटता है (Big Crunch)
गीता कहती है —
“जन्म के बाद मृत्यु और मृत्यु के बाद जन्म निश्चित है।”
मुरली संकेत – 12 अगस्त 2025 (निर्मल संसार)
बाबा कहते हैं —
“बच्चे, हर युग का अपना समय और स्वरूप होता है।
सतयुग को नई सृष्टि इसलिए कहा जाता है क्योंकि वहाँ कोई विकार नहीं।”
जैसे नया मकान —
वैसे ही सतयुग।
मकान का उदाहरण
जैसे-जैसे मकान पुराना होता है —
कमियाँ आने लगती हैं।
वैसे ही संसार भी —
पवित्र से पतित बनता है।
फिर शिव बाबा आकर
ज्ञान से नई सृष्टि की शुरुआत करते हैं।
परमधाम – ब्रिज की तरह
परमधाम ऐसा ब्रिज है —
✔️ आत्मा जैसी जाती है
✔️ वैसी ही लौटती है
न बढ़ोतरी, न कमी।
ताकि अगले कल्प में वही भूमिका निभा सके।
ऋतु चक्र से समझो
जैसे ऋतुएँ —
✔️ सटीक
✔️ नियमित
✔️ अविनाशी
वैसे ही सृष्टि चक्र भी
सटीक रूप से घूमता रहता है।
निष्कर्ष
सृष्टि न तो एक बार बनी है,
न ही कभी समाप्त होगी।
यह एक अविनाशी, सटीक और हूबहू रिपीट होने वाला विश्व नाटक है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ईश्वरीय ज्ञान, मुरली बिंदुओं और आध्यात्मिक चिंतन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, विज्ञान या मान्यता का खंडन नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और ज्ञान की समझ बढ़ाना है।
यह प्रस्तुतिकरण व्यक्तिगत अध्ययन और चिंतन हेतु है।
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