AV-18/23-03-1988-“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”
“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”
आज दिलाराम बाप अपने दिलरुबा बच्चों से मिलने आये हैं। दिलाराम बाप के हर एक दिलरुबा अर्थात् जिसकी दिल में सदा दिलाराम की याद के मधुर साज स्वत: ही बजते रहते, ऐसे दिलरुबा दिलाराम बाप की दिल को अपने स्नेह के साज से जीतने वाले हैं। दिलाराम बाप भी ऐसे बच्चों के गुण गाते हैं। तो बाप के दिल-जीत सो स्वत: मायाजीत, जगत-जीत हैं ही। जैसे कोई हद के राज्य के तख्त को जीतते हैं तो जीतना अर्थात् तख्तनशीन बनना। ऐसे जो बाप के दिलतख्त को जीत लेते हैं, वह स्वत: ही सदा तख्तनशीन रहते हैं। उनकी दिल में सदा बाप है और बाप की दिल में सदा ऐसा विजयी बच्चा है। ऐसे दिल-जीत बच्चे श्वाँसों श्वाँस अर्थात् हर सेकेण्ड सिवाए बाप और सेवा के और कोई गीत नहीं गाते हैं। सदा एक ही गीत बजता कि ‘मेरा बाबा और मैं बाप का’। इसको कहते हैं दिलाराम बाप के दिलतख्त जीत दिलरूबा।
बापदादा हर एक दिलरूबा बच्चों के सदा मधुर साज सुनते रहते हैं कि भिन्न-भिन्न साज है या एक ही साज है? कभी कोई अपनी कमजोरी के भी गीत गाते हैं और कभी बाप के बजाए अपने गीत भी गाते हैं। बाप की महिमा के साथ अपनी महिमा भी आप करते हैं। बाप में आप हैं अर्थात् बाप की महिमा में आप की महिमा है ही। यथार्थ साज बाप के गीत गाना ही श्रेष्ठ साज है। जो दिलतख्त-जीत बच्चे हैं उनके हर कदम में, दृष्टि में, बोल में, सम्बन्ध-सम्पर्क में हर एक को बाप ही दिखाई देगा। चाहे मुख उसका हो लेकिन शक्तिशाली स्नेह भरे बोल स्वत: ही बाप को प्रत्यक्ष करेंगे कि यह बोल आत्मा के नहीं हैं। लेकिन श्रेष्ठ अथॉरिटी अर्थात् सर्वशक्तिमान के बोल हैं। इनके दृष्टि की रुहानियत रूहों को बाप की अनुभूति कराने वाली हैं, इनके कदम में परमात्म श्रेष्ठ मत के कदम हैं, यह साधारण व्यक्ति नहीं लेकिन अव्यक्त फरिश्ते है – ऐसी अनुभूति कराने वाले को कहते हैं दिल-जीत सो जगत-जीत।
वाणी से अनुभव कराना यह साधारण विधि है। वाणी से प्रभाव डालने वाले दुनिया में भी अनेक हैं। लेकिन आपके वाणी की विशेषता यही है कि आपका बोल बाप की याद दिलाये। बाप को प्रत्यक्ष करने की सिद्धि आत्माओं को सद्गति की राह दिखाये। यह न्यारापन है। अगर आपकी महिमा कर ली कि बहुत अच्छा है, बोलने का आर्ट है या अथॉरिटी के बोल हैं – यह तो और आत्माओं की भी महिमा होती है। लेकिन आपके बोल बाप की महिमा अनुभव करायें। यही विशेषता प्रत्यक्षता का पर्दा खोलने का साधन है। तो जिसकी दिल में सदा दिलाराम है, उनके मुख द्वारा भी दिल का आवाज दिलाराम को स्वत: ही प्रत्यक्ष करेगा। तो यह चेक करो कि हर कदम में, बोल में मेरे द्वारा बाप की प्रत्यक्षता होती है, मेरा बोल बाप से सम्बन्ध जोड़ने वाला बोल है? क्योंकि अभी लास्ट सेवा का पार्ट ही है प्रत्यक्षता का झण्डा लहराना। मेरा हर कर्म श्रेष्ठ कर्म की गति सुनाने वाले बाप को प्रत्यक्ष करने वाला है? जिसकी दिल में सदा बाप है, वह स्वत: ही ‘सन शोज फादर’ (बाप को प्रत्यक्ष करने वाला बच्चा) करने वाला समीप अर्थात् समान बच्चा है।
चारों ओर अभी यह आवाज गूँजे कि ‘हमारा बाबा’; ब्रह्माकुमारियों का बाबा नहीं, हमारा बाबा। जब यह आवाज गूँजेगा तभी स्वीट-होम (परमधाम) का गेट खुलेगा क्योंकि जब हमारा बाबा कहें तब मुक्ति का वर्सा मिले और आपके व बाप के साथ-साथ चाहे बाराती बनके चलें लेकिन सबको वापिस जाना ही है, ले ही जाना है। ‘हमारा बाबा आ गया’ – कम से कम यह आवाज कानों से सुनने, बुद्धि से जानने के अधिकारी तो बनें। कोई भी वंचित न रह जाये। विश्व का बाप है, तो विश्व की आत्माओं को इतनी अंचली तो देनी है ना। आपने सागर को हप किया लेकिन वह एक बूँद के प्यासे, उन्हों को बूँद तो प्राप्त करायेंगे ना। इसके लिए क्या करना पड़े? हर कदम, हर बोल, बाप को प्रत्यक्ष करने वाले हों, तब यह आवाज गूँजेगा। तो ऐसे बाप को प्रत्यक्ष करने वाले बच्चों को ही दिलाराम के दिलरूबा कहते हैं जिसकी दिल से एक ही बाप के साज बजते हैं। तो ऐसे दिलरूबा बने हो ना?
एक गीत गाओ तो दूसरे गीत स्वत: ही समाप्त हो जायेंगे। सिर्फ दो शब्दों में खुशखबरी सुनाओ – ओ.के.। रुहारिहान करो। और गीत सुनाने लिए टाइम न दो, न लो। खुशखबरी सुनाने में समय नहीं लगता है लेकिन रामकथा सुनाने में टाइम लगता है। बापदादा ऐसी बातों को राम कथा कहते हैं, कृष्ण कथा नहीं कहते। यह 14 कला वालों की कथा है, 16 कला वालों की नहीं। राम-कथा करने वाले तो नहीं हो ना?
अभी सेवा बहुत रही हुई है। अभी किया ही क्या है? सोचो, साढ़े पांच सौ करोड़ आत्मायें हैं, कम से कम एक बूँद ही दो लेकिन देना तो है। चाहे आपके भक्त बनें, चाहे आपकी प्रजा बनें। देवता बनेंगे तो भी देना ही है। भक्ति में देव बनके पूजे जायेंगे ना। तो देंगे तब तो देवता समझ पूजेंगे। प्रजा भी तब मानेगी जब कोई प्राप्ति होगी। ऐसे ही कैसे मानेगी कि आप मात-पिता हो? राजा भी मात-पिता ही हैं। दोनों ही रीति से ‘दाता’ के बच्चे दाता बन देना है। लेकिन देते हुए दाता की याद दिलानी है। समझा, क्या करना है? यह नहीं समझो विदेश में अथवा देश में इतने सेन्टर्स खुल गये, बहुत हो गया। लेकिन रहमदिल बाप के बच्चे हो ना। सभी अपने प्यासे, भटकते हुए भाई-बहनों के ऊपर रहम करना है, किसी का उल्हना नहीं रहना चाहिए। अच्छा!
विदेश से भी बहुत आशिक आ गये हैं। जब बहुत आते हैं तो बांटना तो पड़ेगा ना। समय भी बांटना पड़े। रात को दिन तो बनाते ही हैं, और क्या करेंगे। इसमें भी महादानी बनो। बाप का स्नेह नम्बरवार होते भी सबसे नम्बरवन है। कभी भी यह नहीं समझना कि मेरे से बाप का प्यार कम है, और किसी से ज्यादा है। नहीं। सबसे ज्यादा है। मुख के बोल में कभी किसी से ज्यादा भी बोल लेते हैं, कभी कम भी होता। लेकिन दिल का प्यार बोल में नहीं बंटता है। बाप की नजरों में हर एक बच्चा नम्बरवन है। अभी नम्बर आउट कहाँ हुए हैं? जब तक आउट हो, तब तक हर एक नम्बरवन है, कोई भी नम्बरवन हो सकता है। सुनाया ना – नम्बरवन तो ब्रह्मा सदा है ही। लेकिन फर्स्ट डिवीजन – बाप के साथ फर्स्ट नम्बर में आना अर्थात् फर्स्ट डिवीजन। उन्हों को भी नम्बरवन कहेंगे। तो जब तक फाइनल रिजल्ट आउट नहीं हुई है, तब तक बापदादा चाहे जानते भी हैं कि वर्तमान समय के प्रमाण लास्ट हैं लेकिन फिर भी लास्ट नहीं समझते। कभी भी लास्ट सो फर्स्ट बन सकता है, मार्जिन है। कभी-कभी क्या होता है – जो बहुत तेज चलते हैं, वह नजदीक पहुंचने पर थक जाते हैं तो रुक जाते हैं और जो धीरे-धीरे चलते हैं, कभी रुकते नहीं, तरीके से चलते हैं। तो वह पहुँच जाते हैं। इसलिए अभी बाप की नज़र में सब नम्बरवन हैं। जब रिजल्ट आउट होगी तब कहेंगे – यह लास्ट है, यह फर्स्ट है। अभी नहीं कह सकते। इसलिए सिर्फ अपने में निश्चय रख उड़ते चलो।
बापदादा का आगे उड़ाने का दिल का प्यार सभी से है। कभी दो शब्द किससे कम बोला तो कम प्यार नहीं है। दिल में भी बाप के प्यार की श्रेष्ठ शुभ कामनायें सदा भरी हुई हैं। दो बोल भी कहते – “उड़ते चलो”, तो इसमें भी प्यार का सागर समाया हुआ है। कोई नहीं कह सकता कि बाबा मुझे ज्यादा प्यार करता। अगर कोई कहता है तो कहो – मुझे आपसे भी ज्यादा करता! और करते हैं, ऐसे ही नहीं कहते। सिर्फ दिल खुश करने के लिए नहीं कहते। बाप तो जानते हैं कि कितने भटके हुए, थके हुए, उलझे हुए फिर से 5000 वर्ष के बाद मिले हैं! बाप ने ढूँढ-ढूँढ कर तो निकाला है। साऊथ, नार्थ, ईस्ट, वेस्ट – सबसे निकाला है। तो जिसको ढूँढ कर निकाला हो तो उससे कितना प्यार होगा! नहीं तो ढूँढते ही नहीं। और सागर के पास प्यार की कमी है क्या? यह तो दिलाराम जाने कि हर एक का दिल से प्यार कितना है! क्या भी हो लेकिन प्यार में सभी पास हो। बाप से प्यार का सर्टीफिकेट तो बाप ने पहले ही दे दिया है। अच्छा!
चारों ओर के अति स्नेह भरे दिल के साज सुनाने वाले दिलाराम के दिलरुबाओं को, सदा हर कर्म में ‘सन शोज फादर’ करने वाले, सदा हर बोल द्वारा, बाप से सम्बन्ध जोड़ने वाले, सदा अपनी रूहानी दृष्टि से रूहों को बाप का अनुभव कराने वाले, ऐसे बाप को प्रत्यक्ष करने वाले, बाप के दिलतख्त-जीत, मायाजीत, जगत-जीत बच्चों को दिलाराम बाप का यादप्यार और नमस्ते।
पार्टियों से पर्सनल मुलाकात:-
याद की शक्ति सदा हर कार्य में आगे बढ़ाने वाली है। याद की शक्ति सदा के लिए शक्तिशाली बनाती है। याद के शक्ति की अनुभूति सर्व श्रेष्ठ अनुभूति है। यही शक्ति हर कार्य में सफलता का अनुभव कराती है। इसी शक्ति के अनुभव से आगे बढ़ने वाली आत्मा हूँ – यह स्मृति में रख जितना आगे बढ़ना चाहो बढ़ सकते हो। इसी शक्ति से विशेष सहयोग प्राप्त होता रहेगा।
अध्याय: दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ
मुरली सन्दर्भ: अव्यक्त मुरली (तिथि: 14 जनवरी 1982) (संदर्भानुसार विषय प्रस्तुति)
🔷 1. दिलरूबा बच्चे कौन हैं?
दिलरूबा बच्चे वे हैं—
जिनकी दिल में सदा दिलाराम बाप की याद का मधुर साज बजता रहता है
जिनके हर श्वांस में एक ही गीत है—
“मेरा बाबा और मैं बाप का”
उदाहरण:
एक आत्मा जो दिनभर कार्य करते हुए भी बार-बार याद में लौट आती है—
काम करते हुए भी भीतर से यही अनुभव करती है:
“मैं अकेला नहीं, बाबा मेरे साथ है”
यही निरंतर स्मृति उसे दिलरूबा बनाती है।
2. दिलतख्त जीतना क्या है?
जैसे कोई राजा तख्त जीतकर तख्तनशीन बनता है
वैसे ही जो आत्मा बाप के दिल को जीत लेती है
वह सदा के लिए तख्तनशीन (विजयी) बन जाती है
उदाहरण:
एक बच्चा जो हर परिस्थिति में बाप को आगे रखता है—
सफलता मिले या असफलता
वह कहता है: “बाबा जो करता है अच्छा करता है”
ऐसी आत्मा स्वतः मायाजीत और जगतजीत बन जाती है।
🔷 3. “सन शोज फादर” – असली पहचान
दिल-जीत बच्चे की सबसे बड़ी पहचान:
उसके हर कर्म, बोल और दृष्टि से बाप का अनुभव हो
उदाहरण:
कोई व्यक्ति आपसे मिलता है और कहता है—
“आपसे मिलकर शांति मिली”
“आपकी बातों से भगवान की याद आई”
इसका अर्थ है—
आपके द्वारा “सन शोज फादर” हो रहा है
🔷 4. सच्चा साज (गीत) कौन सा है?
बापदादा कहते हैं:
एक ही साज श्रेष्ठ है – बाप की महिमा का गीत
कमजोरी का गीत = “मैं ऐसा हूँ, मैं नहीं कर सकता”
स्वयं की महिमा = “मैंने किया, मैं श्रेष्ठ हूँ”
सच्चा गीत =
“सब कुछ बाबा से है, बाबा ही कर्ता है”
उदाहरण:
जब कोई सेवा सफल होती है—
“मैंने नहीं, बाबा ने कराया”
यही यथार्थ साज है।
🔷 5. वाणी की विशेषता – बाप को याद दिलाना
दुनिया में अच्छे वक्ता बहुत हैं
लेकिन BK आत्मा की वाणी की विशेषता है:
वह बाप का अनुभव कराए
उदाहरण:
दो लोग भाषण देते हैं—
- एक ज्ञान देता है
- दूसरा बोलते समय आत्मा को शांति का अनुभव कराता है
दूसरा व्यक्ति दिल-जीत आत्मा है
🔷 6. अंतिम सेवा – “प्रत्यक्षता का झण्डा”
अभी समय है—
हर आत्मा को यह अनुभव कराने का कि “हमारा बाबा”
सिर्फ “ब्रह्माकुमारियों का बाबा” नहीं बल्कि “सभी आत्माओं का बाबा”
उदाहरण:
जब कोई व्यक्ति पहली बार सुनकर कहे—
“हाँ, यह तो मेरा भी बाबा है”
यही प्रत्यक्षता का झण्डा है।
🔷 7. राम कथा बनाम कृष्ण कथा
बापदादा कहते हैं—
ज्यादा बातें करना = “राम कथा” (समय लेना)
संक्षेप में खुशखबरी देना = “ओ.के.”
उदाहरण:
लम्बी चर्चा: 30 मिनट की कहानी
छोटा संदेश:
“आप आत्मा हैं, आपका बाबा आया है”
सच्ची सेवा सरल और शक्तिशाली होती है।
8. सेवा का लक्ष्य – हर आत्मा तक पहुँचना विश्व में अरबों आत्माएँ हैं
हर एक को कम से कम “एक बूंद” ज्ञान देना है
उदाहरण:
किसी को एक लाइन में संदेश देना
किसी को सिर्फ शांति का अनुभव कराना
देना ही दाता के बच्चों का धर्म है।
🔷 9. बाप का प्यार – सबके लिए नम्बरवन
बापदादा की दृष्टि में:
हर बच्चा नम्बरवन है (जब तक रिजल्ट नहीं आता)
उदाहरण:
कोई तेज चलता है लेकिन रुक जाता है
कोई धीरे चलता है लेकिन निरंतर चलता है
धीरे-धीरे चलने वाला भी आगे निकल सकता है
🔷 10. याद की शक्ति – सफलता का आधार
याद ही सबसे बड़ी शक्ति है
यही हर कार्य में सफलता दिलाती है
उदाहरण:
कोई सेवा शुरू करने से पहले 1 मिनट गहरी याद
परिणाम: कार्य सहज सफल हो जाता है
याद = शक्ति = सफलता
मुख्य सार (Conclusion)
✔️ दिलरूबा वही है जिसकी दिल में सदा बाबा है
✔️ दिलतख्त जीतने वाला स्वतः जगतजीत बनता है
✔️ हर कर्म से “सन शोज फादर” होना चाहिए
✔️ सेवा का लक्ष्य – हर आत्मा को “हमारा बाबा” का अनुभव कराना
प्रश्न 1: दिलरूबा बच्चे कौन होते हैं?
उत्तर:
दिलरूबा बच्चे वे हैं जिनकी दिल में सदा दिलाराम बाप की याद का मधुर साज बजता रहता है।
उनके हर श्वांस में एक ही गीत होता है—
“मेरा बाबा और मैं बाप का”
निष्कर्ष: निरंतर याद ही दिलरूबा बनने की पहचान है।
प्रश्न 2: दिलतख्त जीतना क्या अर्थ रखता है?
उत्तर:
दिलतख्त जीतना अर्थात बाप के दिल को जीत लेना।
जो आत्मा ऐसा कर लेती है, वह सदा के लिए तख्तनशीन (विजयी) बन जाती है।
निष्कर्ष: दिल-जीत = मायाजीत + जगतजीत
प्रश्न 3: “सन शोज फादर” का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर:
“सन शोज फादर” का अर्थ है—
आपके हर कर्म, बोल और दृष्टि से बाप का अनुभव हो।
निष्कर्ष:
जब लोग आपसे मिलकर भगवान को महसूस करें, तब यह स्थिति बनती है।
प्रश्न 4: सच्चा साज (गीत) कौन सा है?
उत्तर:
सच्चा साज केवल बाप की महिमा का गीत है।
“मैं नहीं कर सकता” – कमजोरी का गीत
“मैंने किया” – अहंकार का गीत
“सब कुछ बाबा ने कराया” – सच्चा गीत
निष्कर्ष: बाप को कर्ता मानना ही यथार्थ साज है।
प्रश्न 5: BK आत्मा की वाणी की विशेषता क्या है?
उत्तर:
BK आत्मा की वाणी सिर्फ ज्ञान नहीं देती, बल्कि बाप का अनुभव कराती है।
निष्कर्ष:
आपकी वाणी सुनकर आत्माओं को शांति और परमात्मा की याद आये।
प्रश्न 6: “प्रत्यक्षता का झण्डा” क्या है?
उत्तर:
हर आत्मा को यह अनुभव कराना कि—
“यह हमारा बाबा है”
निष्कर्ष:
जब दुनिया कहे “हमारा बाबा”, तभी सच्ची प्रत्यक्षता होगी।
प्रश्न 7: राम कथा और कृष्ण कथा में क्या अंतर है?
उत्तर:
राम कथा = लंबी, समय लेने वाली बातें
✔️ कृष्ण कथा = संक्षेप, शक्तिशाली खुशखबरी
निष्कर्ष:
सच्ची सेवा कम शब्दों में गहरी अनुभूति कराती है।
प्रश्न 8: सेवा का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
हर आत्मा तक ज्ञान की “एक बूंद” पहुँचाना।
निष्कर्ष:
दाता के बच्चे होने के नाते देना हमारा धर्म है।
प्रश्न 9: क्या सभी बच्चे बाप की दृष्टि में समान हैं?
उत्तर:
हाँ, जब तक अंतिम रिजल्ट नहीं आता, हर बच्चा नम्बरवन है।
निष्कर्ष:
धीरे चलने वाला भी निरंतरता से आगे निकल सकता है।
प्रश्न 10: याद की शक्ति का क्या महत्व है?
उत्तर:
याद ही सबसे बड़ी शक्ति है, जो हर कार्य में सफलता दिलाती है।
निष्कर्ष:
याद = शक्ति = सफलता
अंतिम सार (Quick Recap Q&A)
दिलरूबा कौन?
जो सदा बाबा की याद में रहता है
दिलतख्त कैसे जीतें?
बाप को हर कर्म में आगे रखकर
सबसे बड़ी पहचान क्या?
“सन शोज फादर”
सेवा का लक्ष्य?
हर आत्मा को “हमारा बाबा” का अनुभव कराना


