(19)Did God create the world? Science vs God vs Murli

विश्व नाटक :-(19)क्या ईश्वर ने जगत बनाया?।विज्ञान vs ईश्वर vs मुरली

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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“नाटक
जिसके अंदर

यह संसार कैसे बना?

इसको हम अध्ययन कर रहे हैं।
क्या ईश्वर ने जगत बनाया?

विज्ञान कहता है जगत ऐसे ही अचानक बन गया।
बाबा कहते जो ईश्वर भक्ति मार्ग वाले

ईश्वर या धर्म ग्रंथों में बताया गया कि
ईश्वर ने संसार बनाया।

हर एक का बताने का समय अपना अपना है।
तरीका अपना अपना है। परंतु उन्होंने कहा

यह संसार बनाया ईश्वर ने।

और तीसरा अब परमपिता परमात्मा आकर संसार
कैसे बना यह समझा रहे हैं। तो हमने इन

तीनों बातों को एक साथ आज देखना है।
विज्ञान को भी

ईश्वर को भी और मुरली को भी

क्या जगत नश्वर सॉरी जगत ईश्वर ने बनाया
ये प्रश्न है क्या जगत ईश्वर ने बनाया

क्योंकि इसमें डिजाइन है
ऐसा डिजाइन अपने आप नहीं बन सकता।

इतना सुंदर,
इतना आकर्षक

यह संसार अपने आप नहीं बन सकता।

या क्या डिजाइन का तर्क आज भी अधूरा है?
डिजाइन

सुंदर दृश्य को सुंदर चित्र को आकर्षक
चित्र को कहा जाता है।

क्या डिजाइन का तर्क आज भी अधूरा है?

नंबर एक रचना का प्रश्न मानव बुद्धि का
सबसे पुराना रहस्य है।

जब से बुद्धि समझ में आई है तब से वह
सोचता आ रहा है कि आखिर यह संसार बना

क्यों?
किसने बनाया?

कैसे बनाया?
क्या हुआ होगा?

क्या किया होगा और वंडरफुल बात यह है कोई
भी नहीं जानता

और वह जानता है तो वह जानता है जो
पुस्तकों में लिखा गया

धर्म ग्रंथों में लिखा गया
सभी धर्म ग्रंथों में

परमात्मा का परिचय देने का प्रयास किया
गया है।

परंतु
कमाल की बात यह है

कि कोई भी

कोई भी
परमात्मा का परिचय

सृष्टि की रचना का परिचय
नहीं दे पाए

क्योंकि

उनकी जितनी बुद्धि है
वह उतना ही तो बताएंगे।

जब हम चारों ओर देखते हैं आप दुनिया के
अंदर देखो किसी भी चीज को एक चीज को पकड़

कर देख लो
अनार को देखो

क्या कमाल है
दाने का इतना पतला छिलका है एक एक अनार के

दाने का

मजा जो उसका रस दूसरे को मिल जाए।

इतने पतले छिलके होते हुए कितना
मतलब जो है ना कलर गुणों का डिवीजन कैसे

मतलब उसको रोका हुआ है।

कैसे बन जाते हैं?

संतरा देख लो, मौसमी देख लो और भी कोई चीज
देख लो।

पहाड़ों को देख लो। बाबा कहते

सागर को जाके देख लो कितना लंबा चौड़ा
सागर कितनी ऊंची उड़ती हुई लहरें

कैसे ज्वार आता है

तारामंडल
कितनी दूर तारे हैं जिनके प्रकाश की किरण

को इस पृथ्वी तक पहुंचने के लिए

हजारों साल लग जाते हैं।
कितने लाइट व

इतनी व्यवस्था संयोग से कैसे बन सकती है?
अचानक

इतना जटिल शरीर कैसे बन सकता है
फुल प्रूफ

किसकी नस बंद हो जाए हार्ट की
उसके साथ एक नई नस बना के पहले रखी हुई है

कि यदि उसकी ये नस ब्लॉक हो जाए तो दूसरी
रनस से ब्लड जाना शुरू कर दे।

इतनी व्यवस्था सहयोग से कैसे बन सकती है?
जरूर

इस पीछे कोई बुद्धिमान शक्ति है जिसने
इसको बनाया।

यही तर्क इतिहास में डिजाइन आर्गुमेंट
कहलाता है। ये जो हम चर्चा कर रहे थे कि

इतना वंडरफुल शरीर बनाया वंडरफुल
वेजिटेबल्स बनाए। वंडरफुल हर चीज को जिधर

देखो आप वंडर ही वंडर देखते हो। खुद बैठ
के एक एक चीज को देखो कितना वंडर है

उसमें।

डिजाइन आर्गुमेंट के समर्थक मतलब डिजाइन
पहले हमने देखा डिजाइन आर्गुमेंट क्या है

कि सुंदर दुनिया है यह क्या चर्चा के का
विषय है और अब है डिजाइन आर्गुमेंट के

समर्थक। समर्थक का मतलब जिन्होंने डिजाइन
आर्गुमेंट पर अपना मत दिया।

वर्णन किया, साहित्य लिखा।

इसे किसने बनाया है?
इसे किसी ने बनाया है।

दाता चिंतक जो मतलब जिन्होंने इसके बारे
में वर्णन किया है अपनी बुक्स के अंदर

विलियम पैली एफआरटी ने
ए ई टाइलर

थॉमस एक्वस

कणाद और गौतम ये दो जो है इंडियंस है
नए वैशषिक

ये पुस्तक का नाम है सभी कहते रहे
यह सब लोग कहते रहे कि संसार वंडरफुल है

एक एक चीज वंडरफुल है। क्या कमाल है।

जग में डिजाइन है। संसार के अंदर डिजाइन
है। इसलिए डिजाइनर है

यानि ईश्वर।
क्योंकि और कोई मनुष्य नहीं जो दिखाई देता

हो और वह संसार को इतना सुंदर बना सके।

पेरे ड नई भी कहते थे कि प्रोटीन तक संयोग
से नहीं बन सकता। एक प्रोटीन का कण

अचानक नहीं बन सकता। इतनी सुंदर दुनिया
अचानक कैसे बन सकती है?

इसलिए वह मानते थे कि जगत किसी बुद्धिमान
सत्ता के द्वारा

रचा गया है।
नंबर तीन

डिज़ आर्गुमेंट का विरोध

वालिस मसन का तक
मैसन ने कहा प्रोटीन एक बार में नहीं बना।

वो धीरे-धीरे सरल यौगिक के रूप में बना।
यह प्राकृतिक विकास की दीर्घ प्रक्रिया का

परिणाम है।
उनके अनुसार दो

नाव ने
संयोग की गणना गलत ढंग से की।

संयोग की गलत गणना गलत ढंग से की।
वह कहते हैं प्रकृति में धीरे-धीरे

संश्लेषण हुआ होगा
और लाखों वर्षों में पदार्थ से जीवन निकला

होगा।
लेकिन

समस्या कहां है?

विकासवादी तर्क स्वयं ही अधूरा है।
डार्विन के द्वारा दिया गया विकासवादी

तर्क स्वयं ही अधूरा है।

वैज्ञानिक बता ही नहीं पाते। बता ही नहीं
सक रहे।

सरल यौगिक कहां से आए?

प्राइम वेल
सूप किसको कहते हैं? प्राइमवल सूप

कैसे बना? कब बना?

कौन सी परिस्थितियां थी?
वो पहला वातावरण कैसे बना? जहां अणु

जुड़ते गए।
वे कौन सी स्थितियां थी जो सरल अणुओं का

जटिल
जैव मॉलिक्यूल

में बदलती थी।
कितना समय

लगा?
किस गति से विकास हुआ?

इन सभी प्रश्नों का
कोई निश्चित वैज्ञानिक तर्क नहीं है।

कोई निश्चित
वैज्ञानिक

तर्क नहीं है।

इन सभी प्रश्नों का निश्चित वैज्ञानिक
उत्तर नहीं है।

ए ओपेरिन और सिडनी फोक्स ने प्रयोग किए।
लेकिन वे भी यह नहीं बता पाए

कि आखिर यह सब प्रक्रिया शुरू कैसे हुई?
आखिर यह सब प्रक्रिया शुरू कैसे हुई?

प्राइम वाल सूप की समस्या यह सूप आया कहां
से? वो कहते हैं कि प्राइम वाल सूप बन

गया। सूप का मतलब होता है कि कुछ ऐसे तत्व
मिलते गए मिलते गए। सूप जैसे आपने लिया

होगा टेस्ट किया होगा। पीते हैं गाजर का
सूप है, टमाटर का सूप है या किसी और चीज

का। पालक का सूप है उनको बनाने के लिए। तो
इस प्रकार से उन्होंने नाम दिया है

प्राइमवेल सूप। प्राइमवल सूप।

ये अचानक ऐसे मिलते मिलते कुछ कुछ मिलते
मिलते बन गया। गाढ़ा हो गया। अब प्रश्न ये

उठा कि ये सूप आया कहां से?
वो कहते अपने आप धीरे-धीरे कई सालों में

बन गया। विकासवादी कहते हैं अमीनो एसिड
समुद्र में बने। फिर वे जुड़कर प्रोटीन

बने। फिर जीवन बना।
लेकिन प्रश्न यह है

वे समुद्र कैसा था?
वह वातावरण कैसा बना?

उन रासायनिक पदार्थों की उत्पत्ति कहां से
हुई?

यह सब आज भी एक कल्पना,
परिकल्पना

या फिलॉसफिकल
अनुमान है।

प्रमाण नहीं है।
विज्ञान में तो प्रमाण चाहिए होता है।

इसमें प्रमाण नहीं।

समय का प्रश्न भी
असंभवता को और बढ़ाता है।

वैज्ञानिक खुद मानते हैं कि पृथ्वी की
उम्र 4 बिलियन वर्ष से ज्यादा नहीं।

जबकि जैव संरचनाओं के बनने में
लगने वाला समय

जैव संरचनाओं के बनने में लगने वाला समय

खरबों खरबों वर्ष चाहिए।

इतना समय पृथ्वी के पास कभी था ही नहीं।
इतना समय पृथ्वी के पास कभी था ही नहीं।

तो धीरे-धीरे भी
संभव नहीं।

धीरे-धीरे भी संभव नहीं।

सात उदाहरण क्यों डिजाइन आर्गुमेंट भी
अधूरा है?

उदाहरण घड़ी और घड़ी साज
पहले की प्रसिद्ध पहले का प्रसिद्ध उदाहरण

घड़ी मिले तो घड़ी साज
मानते हैं। यदि घड़ी है तो घड़ी को बनाने

वाला घड़ी साज भी होगा उसको भी मानते हैं।

ठीक है? क्योंकि घड़ी है तो घड़ी को बनाने
वाला जरूर है। बिना किसी के घड़ी बनी नहीं

है। लेकिन यदि हम ये पूछे
उस घड़ी साज का निर्माण कैसे हुआ?

उदाहरण
रुक जाता है। उदाहरण

रुक जाता है।
उदाहरण दो

पौधा और बीज। उदाहरण दो पौधा और बीज। हर
पौधा बीज से आता है। हर पौधा कहां से आता

है? बीज से आता है।
बीज पौधे से

लेकिन पौधा
पहला बीज

लेकिन
पहला पौधा पहला बीज ये कहां से आया?

पहले अंडा कि पहले मुर्गी? पहले बीज कि
पहले पेड़?

क्या पहले था?
यह प्रश्न खड़ा हो जाता है। दोनों को

समझाने में भी डिजाइन आर्गुमेंट सीमित
पड़ता है। वो यह बात समझा नहीं सकता।

मुरली के अनुसार
सच्चाई क्या है?

ना डिजाइन
ना चांस

बल्कि इटरनल ड्रामा
बल्कि क्या है इटरनल ड्रामा

मुरली कहती है
जगत नया नया नहीं बना

यह अनादि बना बनाया ड्रामा है यह रिपीट
होता रहता है पुनरावृत होता रहता है।

पुनरावर्तन होता रहता है। ना कोई संयोग है
कि अचानक कुछ चीजें मिली और यह बन गया

ना कोई पहली बार का निर्माण है। परमात्मा
ने कभी बैठ के चलो सोचा हो हम एक संसार

बना देते हैं। ऐसा भी नहीं है।
संसार बना बनाया है।

बल्कि एक स्टक
अनंत

पूर्व नियत पहले से ही निश्चित चक्र में
चलने वाला

जो हर 5000 वर्ष
समान रूप से दोहरा दोहराता है।

सामान्य रूप से दोहराता है।
डिजाइन इसलिए है

क्योंकि ड्रामा की हर सीन पहले से तय है।

ईश्वर निर्माता नहीं
ज्ञान दाता है।

ईश्वर निर्माता नहीं ज्ञान दाता है।
ईश्वर क्या है? निर्माता नहीं। वह बनाता

नहीं है संसार को। वह संसार बनाने का
संसार को पावन बनाने का क्या करता है?

मार्गदर्शन
करता है, ज्ञान देता है, समझ देता है।

ज्ञान का तीसरा नेत्र देता है।
बाबा कहते हैं यह रचना नई नहीं है।

यह चक्र
5000 साल का चक्र

अनादि काल से चला आ रहा है।

और

अनादि और अनंत है।
28 अप्रैल 2023 की मुरली में बाबा ने कहा

संयोग से कुछ नहीं होता।

वैसे कोई चीज अचानक मिल जाए और कुछ हो
जाए। ऐसा नहीं होता।

ड्रामा एक्यूरेट रिपीट होता है।
क्रिया की प्रतिक्रिया एक्यूरेट होती है।

13 जनवरी 2024 अव्यक्त मुरली है।
ईश्वरीय सृजन नहीं करते।

ईश्वर रचना नहीं करता, सृजन नहीं करते। वे
सिर्फ ज्ञान देते हैं कि ड्रामा कैसे चलता

है।
ड्रामा कैसे चलता है।

21 जून 2024 की मुरली में बाबा ने कहा बीज
भी अनादि

वृक्ष भी अनादि।
यह जगत का वृक्ष कल्प का वृक्ष कोई पहली

बार नहीं बना।
पहली बार नहीं बना।

अंतिम निष्कर्ष सिद्धांत समस्या डिजाइन
आर्गुमेंट की क्या समस्या है? क्रिएटर का

उद्भव नहीं बताता। इवोल्यूशन थ्योरी

प्रक्रिया का आरंभ और परिस्थितियां अज्ञात
चांस थ्योरी वैज्ञानिक रूप से असंभव है।

चांस थ्योरी के अचानक जो है ना
क्या बोलते हैं? परिस्थिति ऐसी बनी और

सृष्टि की रचना हो गई। ऐसा नहीं होता।
वैज्ञानिक रूप से भी असंभव।

मुरली का एटरनल ड्रामा पूर्ण तर्क तार्किक
विरोधाभास रहित

अंतिम सत्य
ना संयोग ना पहली रचना।

संयोग भी नहीं पहली रचना भी नहीं।

यह जगत अनादि अनश्वर पुनरावृत
होने वाला ड्रामा है।

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