(24)How to make your child fair and intelligent? Science vs. Self-knowledge.

AAT.(24)बच्चा गोरा और बुद्धिमान कैसे बने? विज्ञान वर्सेस आत्म ज्ञान।

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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आत्मा का रहस्य — आज है आत्मा का 24वा रहस्य।

 

बच्चा गोरा और बुद्धिमान कैसे बने?

विज्ञान वर्सेस आत्म ज्ञान।

 

किस आधार पर आत्मा गोरी बनती है और काली बनती है?

हर माता-पिता की यही इच्छा होती है कि उनका बच्चा सुंदर, बुद्धिमान और स्वस्थ हो।

 

पहले यह भगवान की मर्जी समझा जाता था कि भगवान की मर्जी है —

किसी को स्वस्थ बच्चा दे, किसी को बीमार बच्चा दे, गोरा बच्चा दे, काला बच्चा दे, मंद बुद्धि दे, तेज बुद्धि वाला दे।

यह भगवान की मर्जी।

 

पर अब जरूरत है हम धारणा बदलें और सही ज्ञान समझें कि आत्मा स्वयं अपने शरीर की रचयिता है।

 

भगवान या आत्मा का कर्म

 

लंबे समय से माना जाता रहा कि बच्चे का रंग, स्वास्थ्य या बुद्धि —

ये भगवान की देन हैं।

 

पर मुरली में परमात्मा स्पष्ट कहते हैं —

मैं सभी आत्माओं को समान मानता हूं।

मैं किसी को दुख या असमर्थ क्यों बनाऊं?

किसी को मैं दुखी बनाऊं, असमर्थ बनाऊं, लंगड़ा बनाऊं — मैं क्यों बनाऊं?

 

मुरली (21 नवंबर 2025):

मैं आत्माओं को सुख-दुख देने नहीं आता हूं।

हर आत्मा अपने पूर्व जन्मों के कर्मों से अपने रंग, रूप और बुद्धि का निर्माण करती है।

 

मैं नहीं आता, मैं नहीं देता।

मैं किसी को क्यों मंदबुद्धि बनाऊं?

मेरे लिए तो सारी आत्माएं बराबर हैं।

 

आत्मा अपने पूर्व जन्मों के कर्मों से अपना रंग-रूप बनाती है

 

मात-पिता कितनी भी देखभाल करें, सही पोषण दें —

पर बच्चा वैसा नहीं बनता जैसा अपेक्षित था।

यह आत्मा के कर्मों पर निर्भर है।

 

आत्मा का कार्मिक अकाउंट

 

परमात्मा का ज्ञान बताता है —

बच्चों का स्वभाव और रूप भगवान की मर्जी या माता-पिता की मेहनत से नहीं,

बल्कि आत्मा के संस्कार और कर्मों पर आधारित है।

 

मात-पिता की भूमिका

 

मात-पिता भ्रूण तैयार करते हैं।

आत्मा अपने पूर्व जन्म के पुण्य-पाप अनुसार शरीर का निर्माण करती है।

भ्रूण को चेतना आत्मा ही देती है।

 

उदाहरण:

जैसे बीज अपनी प्रकृति के अनुसार धरती से तत्व चुनता है —

आम का बीज मीठा फल देता है, नीम का बीज कड़वा।

वैसे ही आत्मा अपने संस्कार चुनती है।

 

मात-पिता भ्रूण के लिए पांच तत्वों से शरीर का आधार देते हैं।

उचित वातावरण, पोषण और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

 

उदाहरण

 

मिट्टी के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग बीज उगाएं —

देखभाल समान होने पर भी फल बीज पर निर्भर करते हैं।

 

अगर आत्मा के संस्कार प्रबल हैं,

तो चुनौतीपूर्ण माहौल में भी बच्चा बुद्धिमान और स्वस्थ बन सकता है।

 

गर्भ में आत्मा का प्रवेश

 

परमात्मा बताते हैं —

आत्मा का भ्रूण में प्रवेश गर्भधारण के दो-तीन महीने बाद होता है।

तभी भ्रूण में जीवन और चेतना आती है।

इससे पहले भ्रूण केवल मांस का लोथड़ा होता है।

 

मुरली (21 नवंबर 2025):

आत्मा के आते ही भ्रूण चलायमान होता है।

मां को पहली बार हलचल का एहसास होता है —

यह आत्मा के प्रवेश का संकेत है।

 

आत्मा का निर्णय

 

रंग, बुद्धि, स्वास्थ्य —

सब आत्मा के कर्मों के अनुसार तय होते हैं।

माता-पिता केवल निमित्त बनते हैं।

 

उदाहरण:

दो बीज — आम और नीम —

एक ही खेत में बोए जाएं,

देखभाल एक जैसी हो,

फिर भी फल संस्कार रूपी बीज के अनुसार आते हैं।

 

क्या माता-पिता का प्रयास व्यर्थ है?

 

नहीं।

माता-पिता पोषण, संस्कार और सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पर अंतिम निर्णय आत्मा के कर्मों का होता है।

 

निष्कर्ष

 

आत्मा ही अपनी रचयिता है।

बच्चा गोरा या बुद्धिमान कैसे बनेगा —

यह आत्मा के कर्मों पर आधारित है।

 

माता-पिता श्रेष्ठ वातावरण बनाएं,

सत्य स्वीकारें और परमात्मा के ज्ञान को अपनाएं।

 

मुख्य संदेश

 

माता-पिता अपना कर्तव्य निभाएं,

पर मानें कि आत्मा अपने कर्मों के अनुसार अपना शरीर बनाती है।

 

ज्ञान को अपनाएं, जीवन को समझें।

 

अगर और जानकारी चाहिए तो

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लघु प्रश्न-उत्तर

 

प्रश्न: बच्चा गोरा या बुद्धिमान कैसे बनता है?

उत्तर: आत्मा के पूर्व जन्म के कर्मों और संस्कारों से।

 

प्रश्न: माता-पिता का क्या रोल है?

उत्तर: भ्रूण निर्माण, पोषण और संस्कार देने की भूमिका।

 

प्रश्न: क्या माता-पिता की कोशिश व्यर्थ है?

उत्तर: नहीं। योगदान महत्वपूर्ण है,

पर अंतिम निर्णय आत्मा के कर्मों का होता है।