AAT.(30)दुनिया कहती है बदलो धीरे-धीरे। पर परमात्मा कहते हैं जीते जी मरो। अभी बदलो।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
दुनिया कहती है बदलो धीरे-धीरे।
पर परमात्मा कहते हैं जीते जी मरो। अभी बदलो।
अब किसकी माने भाई?
दुनिया कहती है बदलो धीरे-धीरे। हां जी।
परमात्मा की मानेंगे भाई जी?
जी मान लो भाई, हम क्या कहें… हमें तो अच्छा लग रहा था—धीरे-धीरे बदलो।
धीरे-धीरे नानका, धीरे सब कुछ होए।
अब आप बाबा की बात मानते हो तो मानो।
आम दुनिया कैसे समझती है?
दुनिया कहती है लोग मरने के बाद बदलते हैं।
पाप खत्म होते हैं। नई शुरुआत होती है।
यानी परिवर्तन मृत्यु के बाद होता है।
लेकिन परमात्मा शिव बाबा कहते हैं—
वास्तविक रूपांतरण जीते जी होता है।
यही है जीते जी मरना—
पुराने को त्याग कर श्रेष्ठ जीवन स्वीकारना।
मुरली 12 अप्रैल 2024
बच्चे,
जीते जी पुरानी दुनिया और पुरानी स्वभाव को त्यागो।
नया जन्म यही इसी शरीर में लेना है।
3 दिसंबर 2023 मुरली:
पुरानी बातें, पुराना स्वभाव, पुरानी आदतें—सब खत्म।
यही जीते जी मरना है।
क्या है जीते जी मरना?
पुरानी बातें, पुराना स्वभाव, पुरानी आदतें—सब खत्म।
अव्यक्त वाणी 19 जनवरी 1997:
बापदादा बच्चों को मरजीवा जीवन देते हैं।
मरजीवा वही, जो पुरानी दुनिया से लगाव त्याग दे।
मृत्यु और पुनर्जन्म — दुनिया की नजर
दुनिया समझती है कि
जब व्यक्ति मरता है, आत्मा नया शरीर लेती है।
पुरानी स्मृतियां खत्म, नई शुरुआत।
यह प्रक्रिया शरीर बदलकर होती है।
लेकिन परमात्मा कहते हैं—
शरीर बदले बिना भी नया जन्म लिया जा सकता है।
वह है जीते जी मरना।
उदाहरण:
जैसे पुराने कपड़े बदलकर नए पहने जाते हैं,
वैसे ही आत्मा पुराने संस्कारों को त्यागकर नए संस्कार धारण कर सकती है।
जीते जी मरने का वास्तविक अर्थ
यह शरीर छोड़ना नहीं,
यह पुराने स्वभाव को छोड़ना है।
पुरानी सोच से मृत्यु,
पुराने संस्कारों से मृत्यु,
पुराने दुखों से मृत्यु।
पुरानी सोच नहीं करनी—मर गए हम।
पुराने संस्कार: “मेरी पुरानी आदत है”—अब नहीं।
पुराने दुख—याद करके दुखी रहना—नो।
पुराने रोल-रिलेशन के बोझ से भी मृत्यु।
और नए प्रकाश, नए विचार—नए जन्म की शुरुआत।
उदाहरण:
वाल्मीकि—जो डाकू था—संतों की शिक्षा से भीतर मर गया
और बाहर नया जन्म लिया, एक महामर्षि के रूप में।
परमात्मा की दृष्टि – परिवर्तन का सटीक तरीका
परमात्मा शिव बाबा कहते हैं—
जैसे शरीर छोड़ने पर पुरानी बातें याद नहीं रहतीं,
वैसे ही पुरानी बातों को अभी समाप्त करो।
जीते जी मरने का अर्थ—
पुराना आत्मबोध,
पुरानी आदतें,
पुराने बोझ,
पुराने रिश्ते-नाते की आसक्ति—सब त्याग देना।
उदाहरण:
मरने के बाद व्यक्ति से कोई पूछे—
“तुमने किससे झगड़ा किया?”
क्या आत्मा याद रखेगी? नहीं।
हाँ, यदि कोई कार्मिक अकाउंट जुड़ा हो, तो स्मृति रह सकती है।
वरना सामान्यतः आत्मा नहीं याद रखती।
परमात्मा कहते हैं—
अभी से यह स्थिति धारण करो।
रिश्तों और पहचान का पुनर्परिभाषण
दुनिया कहती है—
यह मेरा बेटा, मेरा परिवार, मेरा घर।
परमात्मा कहते हैं—
सभी आत्माएं परमात्मा की संतान हैं।
हम सब आत्माएं एक परमात्मा की संतान हैं।
चाहे कोई धर्म, मजहब, पंथ, लिंग—
सब आत्माएं ईश्वर की संतान हैं।
मातृ-पित संबंध भी नाटक का रोल है।
जब आत्मा यह सत्य पहचान लेती है
तो बाहर से जुड़े रहते हुए भी अंदर से निर्लेप हो जाती है।
यही है—रिलेशन रहते हुए मृत समान होकर रहना।
जीवन में जीते जी मरने का अभ्यास
पुरानी बातों को समाप्त करना
बीती बातें क्यों याद रखें?
वर्तमान को सुंदर बनाने के लिए भूतकाल को भूलना होगा।
जो बीत गया, उसे दफना दो—बार-बार याद न करो।
नई आदतें विकसित करना
शांति, पवित्रता, शक्ति, स्नेह—
यही नए संस्कार जागृत करने हैं।
परमात्मा से संबंध जोड़ना
जब बाप से जुड़ते हैं तो दुनिया के पुराने रूप से नाता टूट जाता है।
अभ्यास—मैं आत्मा हूँ
चलते-फिरते, काम करते, स्मृति में लाओ—
“मैं आत्मा हूँ।”
देह-अभिमान खत्म—नया जीवन शुरू।
वाल्मीकि — जीते जी मरने का महान उदाहरण
वाल्मीकि डाकू था।
उसे सत्य ज्ञात हुआ कि पापों का फल स्वयं भुगतना है।
और उसी क्षण वह भीतर से मर गया।
उसी क्षण—
नया जन्म, नया जीवन, नया रूपांतरण।
निष्कर्ष
जीते जी मरने का वास्तविक अर्थ:
शरीर छोड़ना नहीं—
पुराना जीवन छोड़ना है।
यह आत्मा की सफाई है।
पुराने बोझ से मुक्ति और नए दिव्य जीवन की शुरुआत।
परिवर्तन केवल परमात्मा की शिक्षाओं से संभव है।
संदेश:
हर आत्मा यह संकल्प ले—
“मैं आज ही जीते जी मरकर अपने पुराने जीवन को समाप्त कर
एक श्रेष्ठ जीवन का आरंभ करूंगा।”

