AT.S.-(10)अतींद्रिय सुख का पहला अनुभव कैसा होता है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय : अतींद्रिय सुख का पहला अनुभव
1️⃣ अतींद्रिय सुख का दूसरा पाठ – पहला अनुभव
अतींद्रिय सुख का पहला अनुभव कैसा होता है?
यह प्रश्न हर साधक के मन में आता है।
जब आत्मा पहली बार परमात्मा को महसूस करती है,
तो वह अनुभव शब्दों से परे होता है।
उसे न तो पूरी तरह बोला जा सकता है,
न ही किसी डायरी में लिखा जा सकता है।
यह आत्मा का भीतर का अनुभव है।
2️⃣ क्या पहली बार आत्मा रो पड़ती है?
अक्सर प्रश्न उठता है –
“क्या पहली बार परमात्मा से मिलने पर आत्मा रो पड़ती है?”
उत्तर है –
हाँ, कई बार आँखों से आँसू आते हैं,
लेकिन वे दुख के नहीं होते।
वे आँसू होते हैं –
पहचान के,
मिलन के,
घर पहुँचने के।
उदाहरण:
जैसे वर्षों बाद बिछड़ा बच्चा
अचानक पिता की गोद में पहुँच जाए।
वह रोता है,
लेकिन वह रोना कमजोरी नहीं,
सुरक्षा का होता है।
मुरली – 18 जनवरी 1969
“यह आत्मा और परमात्मा का मिलन है।”
3️⃣ अतींद्रिय सुख क्या है?
अतींद्रिय सुख वह सुख है
जो इंद्रियों से परे है।
• न देखने से
• न सुनने से
• न छूने से
बल्कि Being से मिलता है।
Being अर्थात आत्मा (Soul)।
Human Being में
Human = शरीर
Being = आत्मा
यह सुख
शरीर को नहीं,
मन को नहीं,
सीधे आत्मा को मिलता है।
मुरली – 2 फरवरी 1968
“यह ईश्वरीय सुख इंद्रियों का नहीं, आत्मिक अनुभूति का सुख है।”
4️⃣ पहला अनुभव कैसे होता है? (बिना प्रयास के)
पहला अनुभव कभी योजना से नहीं आता।
न ज़ोर लगाने से,
न किसी तकनीक से।
यह तब आता है
जब आत्मा ढीली होती है,
बंधनमुक्त होती है।
उदाहरण:
जैसे बच्चा खेलते-खेलते
माँ की गोद में सो जाए।
कोई प्रयास नहीं,
बस समर्पण।
मुरली – 15 अगस्त 1972
“जहाँ प्रयास छोड़ याद में स्थित होते हो, वहाँ अनुभूति होती है।”
5️⃣ पहले अनुभव के सामान्य लक्षण
हर आत्मा का अनुभव अलग होता है,
लेकिन कुछ लक्षण समान होते हैं –
(1) गहरी शांति
ऐसी शांति जो सवाल नहीं पूछती,
जो शब्दों में नहीं आती।
(2) कृतज्ञता के आँसू
दुख के नहीं,
शुक्रिया के आँसू।
(3) हल्कापन
जैसे वर्षों का बोझ उतर गया हो।
मुरली – 1 जनवरी 1970
“याद में रहने से आत्मा हल्की हो जाती है।”
6️⃣ पहला अनुभव भावुक क्यों बना देता है?
क्योंकि आत्मा
बहुत समय बाद
अपने मूल स्रोत को पहचानती है।
वह अनुभव कहता है –
“मैं अकेली नहीं हूँ।”
“मेरा भी कोई अपना है।”
मुरली – 18 जनवरी 1969
“आत्मा अपने परम पिता को पहचानती है।”
7️⃣ पहला अनुभव स्थायी क्यों नहीं रहता?
पहला अनुभव स्थायी नहीं रहता क्योंकि –
• पुरानी आदतें
• देह-अभिमान
• संस्कार
फिर सक्रिय हो जाते हैं।
लेकिन वह अनुभव बीज बन जाता है।
उदाहरण:
पहली बारिश के बाद
मिट्टी फिर सूख जाती है,
लेकिन बीज जाग जाता है।
अब अभ्यास चाहिए,
स्थिति बनानी है।
8️⃣ अनुभव और भ्रम में अंतर
| भ्रम | अतींद्रिय अनुभव |
|---|---|
| उत्तेजना | शांति |
| कल्पना | स्थिरता |
| थकावट | भरपूरता |
अव्यक्त वाणी – 21 मार्च 1987
“अतींद्रिय सुख के बाद मन थकता नहीं, भरता है।”
9️⃣ अनुभव से पहले आत्मा में परिवर्तन
पहले अनुभव से पहले आत्मा में
सूक्ष्म परिवर्तन आता है –
• अहंकार थोड़ा झुकता है
• मन सुनने लगता है
• आत्मा खुलती है
उदाहरण:
जैसे सूखी ज़मीन
पहली बारिश को स्वीकार करती है।
मुरली – 5 दिसंबर 1971
“जहाँ समर्पण है, वहाँ अनुभूति है।”
🔟 संगम युग और पहला अनुभव
यह अनुभव केवल संगम युग में होता है।
यही समय है –
पहचान का,
अभ्यास का,
मिलन का।
मुरली – 2 अक्टूबर 1966
“अब मैं बच्चों को अनुभव करा रहा हूँ।”
निष्कर्ष
अतींद्रिय सुख का पहला अनुभव कहता है –
• तुम अकेले नहीं हो
• तुम्हारा एक पिता है
• सच्चा सुख संभव है
• यही रास्ता सही है
यह अनुभव मंज़िल नहीं,
लेकिन दिशा अवश्य है।
अंतिम संदेश
यदि अनुभव हुआ है –
तो उसे पकड़ने की कोशिश मत करो।
बस बाबा की याद बढ़ाओ
और श्रीमत पर चलते रहो।
और यदि अभी अनुभव नहीं हुआ –
तो भी चिंता नहीं।
बाबा कहते हैं –
“हर सच्चे बच्चे को एक दिन अनुभव अवश्य होगा।
–
-
पहचान का
-
अभ्यास का
-
मिलन का
मुरली – 2 अक्टूबर 1966
“अब मैं बच्चों को अनुभव करा रहा हूँ।”
निष्कर्ष प्रश्न : पहला अतींद्रिय अनुभव आत्मा को क्या संदेश देता है?
उत्तर :
यह अनुभव कहता है—
-
तुम अकेले नहीं हो
-
तुम्हारा एक पिता है
-
सच्चा सुख संभव है
-
यही रास्ता सही है
यह अनुभव मंज़िल नहीं है,
लेकिन सही दिशा अवश्य देता है।
अंतिम प्रश्न : अगर अनुभव न हुआ हो तो क्या करें?
उत्तर :
चिंता न करें।
अनुभव को पकड़ने की कोशिश न करें।
बस—
-
बाबा की याद बढ़ाते रहें
-
श्रीमत पर चलते रहें
बाबा का वचन है—
“हर सच्चे बच्चे को एक दिन अनुभव अवश्य होगा।”
-
पहचान का
-
अभ्यास का
-
मिलन का
मुरली – 2 अक्टूबर 1966
“अब मैं बच्चों को अनुभव करा रहा हूँ।”
निष्कर्ष प्रश्न : पहला अतींद्रिय अनुभव आत्मा को क्या संदेश देता है?
उत्तर :
यह अनुभव कहता है—
-
तुम अकेले नहीं हो
-
तुम्हारा एक पिता है
-
सच्चा सुख संभव है
-
यही रास्ता सही है
यह अनुभव मंज़िल नहीं है,
लेकिन सही दिशा अवश्य देता है।
अंतिम प्रश्न : अगर अनुभव न हुआ हो तो क्या करें?
उत्तर :
चिंता न करें।
अनुभव को पकड़ने की कोशिश न करें।
बस—
-
बाबा की याद बढ़ाते रहें
-
श्रीमत पर चलते रहें
बाबा का वचन है—
“हर सच्चे बच्चे को एक दिन अनुभव अवश्य होगा।”
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुरली एवं अव्यक्त वाणी पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन है।
इसमें बताए गए अनुभव व्यक्तिगत आत्मिक अनुभूतियों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य आत्म-परिवर्तन, शांति और आध्यात्मिक उन्नति है।
यह वीडियो किसी भी धर्म, व्यक्ति या विचारधारा के विरोध में नहीं है।
कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टि से देखें और अपने विवेक से ग्रहण करें।

