2-4: Is God merely a pure spirit, or is He the father of all souls?

J.D.BK ज्ञान 2-4:क्या परमात्मा केवल शुद्ध आत्मा है,या वे सब आत्माओं का पिता है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय — परमात्मा की सच्ची पहचान

(जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान — दूसरा दिन, चौथा पार्ट)


अध्याय 1 : भूमिका — ईश्वर की पहचान का सबसे बड़ा प्रश्न

आज संसार में ईश्वर की पहचान को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है —

क्या परमात्मा केवल एक शुद्ध आत्मा हैं?
या
क्या परमात्मा सभी आत्माओं के पिता हैं?

यह प्रश्न साधारण नहीं है, क्योंकि —

यदि परमात्मा केवल एक शुद्ध आत्मा हैं
तो वे हमारे समान हो गए — जैसे हम वैसे वो।

लेकिन यदि वे पिता हैं
तो उनकी भूमिका सृष्टि में बिल्कुल अलग हो जाती है।

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 27 मार्च 1967

बाप की पहचान स्पष्ट ना होने से सारा ज्ञान उल्टा हो जाता है।


अध्याय 2 : आत्मा क्या है? — पहले यह स्पष्ट करें

जब तक आत्मा को नहीं समझेंगे,
तब तक परमात्मा को भी नहीं समझ पाएँगे।

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 18 जनवरी 1965

तुम आत्मा हो। यह शरीर तुम्हारा रथ है।

आत्मा की पहचान

• आत्मा सूक्ष्म बिंदु स्वरूप है
• आत्मा शरीर को चलाने वाली चेतन शक्ति है
• आत्मा जन्म-मरण के चक्र में आती है

उदाहरण

जैसे ड्राइवर गाड़ी बदलता है,
वैसे आत्मा शरीर बदलती है।


अध्याय 3 : आत्मा के पाँच मूल गुण

आत्मा के मूल गुण हैं —

  1. शांति

  2. प्रेम

  3. सुख

  4. शक्ति

  5. पवित्रता

जैन दर्शन में भी आत्मा के इन्हीं गुणों को स्वीकार किया गया है।
आनंद को सुख में और ज्ञान को आधार माना जाता है।

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 4 जून 1966

आत्मा मूलतः शांत स्वरूप है।


अध्याय 4 : क्या आत्मा सदा शुद्ध रहती है?

उत्तर है — नहीं।

आत्मा —

• शुद्ध भी बनती है
• अपवित्र भी बनती है
• कर्म बंधन में भी आती है

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 23 सितंबर 1967

आत्मा पवित्र से पतित बनती है और परमात्मा आकर पतित से पावन बनाते हैं।

इसलिए आत्मा की शुद्धता स्थायी नहीं है।


अध्याय 5 : परमात्मा कौन हैं?

अब प्रश्न उठता है —

क्या परमात्मा भी केवल एक शुद्ध आत्मा हैं?
या उनकी भूमिका इससे कहीं अधिक है?

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 2 अक्टूबर 1966

परमात्मा कहते हैं — मैं आत्माओं का बाप हूं।

आत्मा का पिता परमात्मा है
और शरीर का पिता लौकिक पिता।

हम दो हैं — आत्मा और शरीर।

परमात्मा भी बिंदु स्वरूप हैं
लेकिन वे सुप्रीम हैं, समान आत्मा नहीं।


अध्याय 6 : बाप सदा बाप ही रहता है

 अव्यक्त मुरली — 15 फरवरी 1973

बाप सदा बाप ही रहता है। वे कभी बच्चे के रूप में नहीं आते।

परमात्मा कभी जन्म नहीं लेते,
वे आत्माओं की तरह कर्म बंधन में नहीं आते।


अध्याय 7 : परमात्मा के विशेष दिव्य गुण

परमात्मा —

• अजन्मा हैं
• अकर्ता हैं
• अभोक्ता हैं
• सदा पवित्र हैं
• सदा मुक्त हैं

वे शरीर से कर्म नहीं करते
लेकिन ज्ञान देने के लिए परकाया प्रवेश करते हैं
और काया से न्यारे रहते हैं।

उनका निवास स्थान है —
परमधाम (शांति धाम, निर्वाण धाम, ब्रह्मलोक)


अध्याय 8 : परमात्मा का अवतरण क्यों होता है?

परमात्मा स्वयं शुद्ध हैं,
लेकिन वे केवल अपनी शुद्धता के लिए नहीं आते।

 मुरली प्रमाण

मैं स्वयं के लिए नहीं आता,
मैं बच्चों को पावन बनाने आता हूं।

यदि परमात्मा केवल शुद्ध आत्मा होते
तो उनका आना ही व्यर्थ हो जाता।

वे पवित्रता का सागर हैं
और सबको पवित्र बनाने वाले हैं।


अध्याय 9 : परमात्मा पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक

परमात्मा हमें जन्म नहीं देते,
लेकिन ज्ञान देकर नया जीवन देते हैं।

वे —

• पालना देते हैं
• पढ़ाते हैं
• मुक्ति का मार्ग बताते हैं

इसलिए वे पिता भी हैं और शिक्षक भी।

मुरली प्रमाण

साकार मुरली — 10 जुलाई 1966

जो स्वयं बंधन में हो वह दूसरे को मुक्त नहीं कर सकता।

इसलिए परमात्मा कभी कर्म बंधन में नहीं आते
और सब आत्माओं के पिता हैं।


अध्याय 10 : आत्मा और परमात्मा — स्पष्ट तुलना

आत्मा परमात्मा
बिंदु स्वरूप बिंदु स्वरूप
अनेक आत्माएं एक परमात्मा
जन्म लेती है अजन्मा
शुद्धता घटती-बढ़ती सदा शुद्ध
साधक मार्गदर्शक
कर्म बंधन में आती सदा मुक्त

 निष्कर्ष

आत्मा साधक है
और परमात्मा मार्गदर्शक हैं।

आत्मा यात्री है
और परमात्मा मंज़िल का रास्ता दिखाने वाले हैं।

आत्मा खोज में है
और परमात्मा सत्य हैं।

प्रश्न 1: आज संसार में ईश्वर को लेकर सबसे बड़ा भ्रम क्या है?

उत्तर:

आज संसार में ईश्वर की पहचान को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि —

क्या परमात्मा केवल एक शुद्ध आत्मा हैं?
या क्या परमात्मा सभी आत्माओं के पिता हैं?

यदि परमात्मा केवल एक शुद्ध आत्मा हैं तो वे हमारे समान हो गए।
लेकिन यदि वे पिता हैं, तो उनकी भूमिका सृष्टि में बिल्कुल अलग हो जाती है।

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 27 मार्च 1967

बाप की पहचान स्पष्ट ना होने से सारा ज्ञान उल्टा हो जाता है।


 प्रश्न 2: आत्मा क्या है? पहले आत्मा को समझना क्यों जरूरी है?

उत्तर:

जब तक आत्मा को नहीं समझेंगे, तब तक परमात्मा को भी नहीं समझ पाएँगे।

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 18 जनवरी 1965

तुम आत्मा हो। यह शरीर तुम्हारा रथ है।

आत्मा की पहचान —
• आत्मा सूक्ष्म बिंदु स्वरूप है
• आत्मा शरीर को चलाने वाली चेतन शक्ति है
• आत्मा जन्म-मरण के चक्र में आती है

उदाहरण:
जैसे ड्राइवर गाड़ी बदलता है, वैसे आत्मा शरीर बदलती है।


 प्रश्न 3: आत्मा के मूल गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

आत्मा के पाँच मूल गुण हैं —

  1. शांति

  2. प्रेम

  3. सुख

  4. शक्ति

  5. पवित्रता

जैन दर्शन में भी इन्हीं गुणों को आत्मा का मूल स्वरूप माना गया है।

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 4 जून 1966

आत्मा मूलतः शांत स्वरूप है।


 प्रश्न 4: क्या आत्मा सदा शुद्ध रहती है?

उत्तर:

नहीं। आत्मा सदा शुद्ध नहीं रहती।

आत्मा —
• शुद्ध भी बनती है
• अपवित्र भी बनती है
• कर्म बंधन में भी आती है

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 23 सितंबर 1967

आत्मा पवित्र से पतित बनती है और परमात्मा आकर पतित से पावन बनाते हैं।

इसलिए आत्मा की शुद्धता स्थायी नहीं है।


 प्रश्न 5: परमात्मा कौन हैं?

उत्तर:

परमात्मा केवल एक शुद्ध आत्मा नहीं हैं, बल्कि सभी आत्माओं के पिता हैं।

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 2 अक्टूबर 1966

परमात्मा कहते हैं — मैं आत्माओं का बाप हूं।

आत्मा का पिता परमात्मा है
और शरीर का पिता लौकिक पिता।

परमात्मा भी बिंदु स्वरूप हैं
लेकिन वे सुप्रीम हैं, समान आत्मा नहीं।


 प्रश्न 6: क्या परमात्मा जन्म लेते हैं?

उत्तर:

नहीं। परमात्मा कभी जन्म नहीं लेते।

अव्यक्त मुरली — 15 फरवरी 1973

बाप सदा बाप ही रहता है। वे कभी बच्चे के रूप में नहीं आते।

परमात्मा आत्माओं की तरह कर्म बंधन में नहीं आते।


 प्रश्न 7: परमात्मा के विशेष दिव्य गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

परमात्मा —

• अजन्मा हैं
• अकर्ता हैं
• अभोक्ता हैं
• सदा पवित्र हैं
• सदा मुक्त हैं

वे शरीर से कर्म नहीं करते
लेकिन ज्ञान देने के लिए परकाया प्रवेश करते हैं
और काया से न्यारे रहते हैं।

उनका निवास स्थान है —
परमधाम (शांति धाम, निर्वाण धाम, ब्रह्मलोक)


 प्रश्न 8: परमात्मा पृथ्वी पर क्यों आते हैं?

उत्तर:

परमात्मा स्वयं शुद्ध हैं,
लेकिन वे केवल अपनी शुद्धता के लिए नहीं आते।

मुरली प्रमाण

मैं स्वयं के लिए नहीं आता,
मैं बच्चों को पावन बनाने आता हूं।

वे पवित्रता का सागर हैं
और सबको पवित्र बनाने वाले हैं।


 प्रश्न 9: परमात्मा को पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक क्यों कहा जाता है?

उत्तर:

परमात्मा हमें जन्म नहीं देते,
लेकिन ज्ञान देकर नया जीवन देते हैं।

वे —
• पालना देते हैं
• पढ़ाते हैं
• मुक्ति का मार्ग बताते हैं

मुरली प्रमाण — साकार मुरली 10 जुलाई 1966

जो स्वयं बंधन में हो वह दूसरे को मुक्त नहीं कर सकता।

इसलिए परमात्मा स्वयं सदा मुक्त हैं और सब आत्माओं के पिता हैं।


 प्रश्न 10: आत्मा और परमात्मा में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर:

आत्मा परमात्मा
बिंदु स्वरूप बिंदु स्वरूप
अनेक आत्माएं एक परमात्मा
जन्म लेती है अजन्मा
शुद्धता घटती-बढ़ती सदा शुद्ध
साधक मार्गदर्शक
कर्म बंधन में आती सदा मुक्त

 निष्कर्ष प्रश्न: आत्मा और परमात्मा का संबंध क्या है?

उत्तर:

आत्मा साधक है — परमात्मा मार्गदर्शक हैं।
आत्मा यात्री है — परमात्मा मंज़िल का रास्ता दिखाने वाले हैं।
आत्मा खोज में है — परमात्मा सत्य हैं।

Disclaimer

यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं एवं जैन दर्शन के आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित है।

इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय या परंपरा की आलोचना करना नहीं है।
यह वीडियो केवल आत्म-चिंतन, आत्म-जागृति एवं आत्म-शक्ति के विकास के लिए तैयार किया गया है।

यह ज्ञान सत्र सत्य की खोज, आत्मा-परमात्मा की पहचान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने हेतु है।

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