AV-(20)16-03-1986 “रुहानी ड्रिल”
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
16-03-1986 “रुहानी ड्रिल”
बापदादा सभी बच्चों की स्वीट साइलेन्स की स्थिति को देख रहे हैं। एक सेकेण्ड में साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो जाना यह प्रैक्टिस कहाँ तक की है? इस स्थिति में जब चाहें तब स्थित हो सकते हैं वा समय लगता है? क्योंकि अनादि स्वरूप स्वीट साइलेन्स है। आदि स्वरूप आवाज में आने का है। लेकिन अनादि अविनाशी संस्कार साइलेन्स है। तो अपने अनादि संस्कार, अनादि स्वरूप को, अनादि स्वभाव को जानते हुए जब चाहो तब उस स्वरूप में स्थित हो सकते हो? 84 जन्म आवाज में आने के हैं इसलिए सदा अभ्यास आवाज में आने का है। लेकिन अनादि स्वरूप और फिर इस समय चक्र पूरा होने के कारण वापिस साइलेन्स होम में जाना है। अब घर जाने का समय समीप है। अब आदि मध्य अन्त तीनों ही काल का पार्ट समाप्त कर अपने अनादि स्वरूप, अनादि स्थिति में स्थित होने का समय है। इसलिए इस समय यही अभ्यास ज्यादा आवश्यक है। अपने आपको चेक करो कि कर्मेन्द्रिय-जीत बने हैं? आवाज में नहीं आने चाहें तो यह मुख का आवाज अपनी तरफ खींचता तो नहीं है। इसी को ही रूहानी ड्रिल कहा जाता है।
जैसे वर्तमान समय के प्रमाण शरीर के लिए सर्व बीमारियों का इलाज एक्सरसाइज सिखाते हैं, तो इस समय आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए यह रूहानी एक्सरसाइज का अभ्यास चाहिए। चारों ओर कैसा भी वातावरण हो, हलचल हो लेकिन आवाज में रहते आवाज से परे स्थिति का अभ्यास अभी बहुतकाल का चाहिए। शान्त वातावरण में शान्ति की स्थिति बनाना यह कोई बड़ी बात नहीं है। अशान्ति के बीच आप शान्त रहो यही अभ्यास चाहिए। ऐसा अभ्यास जानते हो? चाहे अपनी कमजोरियों की हलचल हो, संस्कारों के व्यर्थ संकल्पों की हलचल हो। ऐसी हलचल के समय स्वयं को अचल बना सकते हो वा टाइम लग जाता है? क्योंकि टाइम लगना यह कभी भी धोखा दे सकता है। समाप्ति के समय में ज्यादा समय नहीं मिलना है। फाइनल रिजल्ट का पेपर कुछ सेकेण्ड और मिनटों का ही होना है। लेकिन चारों ओर की हलचल के वातावरण में अचल रहने पर ही नम्बर मिलना है। अगर बहुतकाल हलचल की स्थिति से अचल बनने में समय लगने का अभ्यास होगा तो समाप्ति के समय क्या रिजल्ट होगी? इसलिए यह रूहानी एक्सरसाइज का अभ्यास करो। मन को जहाँ और जितना समय स्थित करने चाहें उतना समय वहाँ स्थित कर सको। फाइनल पेपर है बहुत ही सहज। और पहले से ही बता देते हैं कि यह पेपर आना है। लेकिन नम्बर बहुत थोड़े समय में मिलना है। स्टेज भी पावरफुल हो।
देह, देह के सम्बन्ध, देह संस्कार, व्यक्ति या वैभव, वायब्रेशन, वायुमण्डल सब होते हुए भी आकर्षित न करे – इसी को ही कहते हैं नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप। तो ऐसी प्रैक्टिस है? लोग चिल्लाते रहें और आप अचल रहो। प्रकृति भी, माया भी सब लास्ट दाँव लगाने लिए अपने तरफ कितना भी खींचे लेकिन आप न्यारे और बाप के प्यारे बनने की स्थिति में लवलीन रहो, इसको कहा जाता – देखते हुए न देखो, सुनते हुए न सुनो… ऐसा अभ्यास हो। इसी को ही स्वीट साइलेन्स स्वरूप की स्थिति कहा जाता है। फिर भी बापदादा समय दे रहा है। अगर कोई भी कमी है तो अब भी भर सकते हो क्योंकि बहुतकाल का हिसाब सुनाया। तो अभी थोड़ा चांस है, इसलिए इस प्रैक्टिस की तरफ फुल अटेन्शन रखो। पास विद ऑनर बनना या पास होना यह आधार इसी अभ्यास पर है। ऐसा अभ्यास है? समय की घण्टी बजे तो तैयार होंगे या अभी सोचते हो तैयार होना है? इसी अभ्यास के कारण अष्ट रत्नों की माला विशेष छोटी बनी है। बहुत थोड़े टाइम की है। जैसे आप लोग कहते हो ना सेकेण्ड में मुक्ति वा जीवनमुक्ति का वर्सा लेना सभी का अधिकार है। तो समाप्ति के समय भी नम्बर मिलना थोड़े समय की बात है। लेकिन जरा भी हलचल न हो। बस बिन्दी कहा और बिन्दी में टिक जायें। बिन्दी हिले नहीं। ऐसे नहीं कि उस समय अभ्यास करना शुरू करो – मैं आत्मा हूँ… मैं आत्मा हूँ… यह नहीं चलेगा क्योंकि सुनाया, वार भी चारों ओर का होगा। लास्ट ट्रायल सब करेंगे। प्रकृति में भी जितनी शक्ति होगी, माया में भी जितनी शक्ति होगी, ट्रायल करेगी। उनकी भी लास्ट ट्रायल और आपकी लास्ट कर्मातीत, कर्मबन्धन मुक्त स्थिति होगी। दोनों तरफ की बहुत पॉवरफुल सीन होगी। वह भी फुल फोर्स, यह भी फुलफोर्स। लेकिन सेकेण्ड की विजय, विजय के नगाड़े बजायेगी। समझा लास्ट पेपर क्या है। सब शुभ संकल्प तो यही रखते भी हैं और रखना भी है कि नम्बरवन आना ही है। तो जब चारों ओर की बातों में विन होंगे तभी वन आयेंगे। अगर एक बात में जरा भी व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ समय लग गया तो नम्बर पीछे हो जायेगा। इसलिए सब चेक करो। चारों ही तरफ चेक करो। डबल विदेशी सबमें तीव्र जाने चाहते हैं ना। इसलिए तीव्र पुरूषार्थ वा फुल अटेन्शन इस अभ्यास में अभी से देते रहो। समझा! क्वेश्चन को भी जानते हो और टाइम को भी जानते हो। फिर तो सब पास होने चाहिए। अगर पहले से क्वेश्चन का पता होता है तो तैयारी कर लेते हैं। फिर पास हो जाते हैं। आप सभी तो पास होने वाले हो ना! अच्छा।
यह सीजन बापदादा ने हरेक से मिलने का खुला भण्डारा खोला है। आगे क्या होना है, वह फिर बतायेंगे। अभी खुले भण्डार से जो भी लेने आये हैं वह तो ले ही लेंगे। ड्रामा का दृश्य सदा बदलता ही है लेकिन इस सीजन में चाहे भारतवासियों को, चाहे डबल विदेशियों को, सभी को विशेष वरदान तो मिला ही है। बापदादा ने जो वायदा किया है वह तो निभायेंगे। इस सीजन का फल खाओ। फल है मिलन, वरदान। सभी सीजन का फल खाने आये हो ना। बापदादा को भी बच्चों को देख खुशी होती है। फिर भी साकारी सृष्टि में तो सब देखना होता है। अभी तो मौज मना लो। फिर सीजन की लास्ट में सुनायेंगे।
सेवा के स्थान भले अलग-अलग हैं लेकिन सेवा का लक्ष्य तो एक ही है। उमंग-उल्हास एक ही है इसलिए बापदादा सभी स्थानों को विशेष महत्व देते हैं। ऐसे नहीं एक स्थान महत्व वाला है, दूसरा कम है। नहीं। जिस भी धरनी पर बच्चे पहुँचे हैं उससे कोई न कोई विशेष रिजल्ट अवश्य निकलनी है। फिर चाहे कोई की जल्दी दिखाई देती, कोई की समय पर दिखाई देगी। लेकिन विशेषता सब तरफ की है। कितने अच्छे-अच्छे रत्न निकले हैं। ऐसे नहीं समझना कि हम तो साधारण हैं। सब विशेष हो। अगर कोई विशेष न होता तो बाप के पास नहीं पहुँचता। विशेषता है लेकिन कोई विशेषता को सेवा में लगाते हैं, कोई सेवा में लगाने के लिए अभी तैयार हो रहे हैं, बाकी हैं सब विशेष आत्मायें। सब महारथी, महावीर हो। एक-एक की महिमा शुरू करें तो लम्बी-चौड़ी माला बन जायेगी। शक्तियों को देखो तो हर एक शक्ति महान आत्मा, विश्व कल्याणकारी आत्मा दिखाई देगी। ऐसे हो ना या सिर्फ अपने-अपने स्थान के कल्याणकारी हो?
अध्याय : रूहानी ड्रिल – स्वीट साइलेन्स की अंतिम तैयारी
(अव्यक्त मुरली 16-03-1986)
1. बापदादा का अवलोकन – स्वीट साइलेन्स की स्थिति
मुरली – 16-03-1986
बापदादा सभी बच्चों की स्वीट साइलेन्स की स्थिति को देख रहे हैं।
सबसे पहला प्रश्न—
क्या एक सेकेण्ड में साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो सकते हो?
या अभी भी टाइम लगता है?
उदाहरण:
जैसे स्विच दबाते ही लाइट जलती है,
वैसे ही स्मृति होते ही आत्मा साइलेन्स में स्थित हो जाए —
यही परफेक्ट अभ्यास है।
2. आत्मा का अनादि स्वरूप – साइलेन्स
मुरली नोट:
आवाज़ में आना आत्मा का आदि स्वरूप नहीं है।
अनादि, अविनाशी संस्कार — साइलेन्स है।
84 जन्म आवाज में अभ्यास हुआ
अब चक्र पूरा होने पर वापसी साइलेन्स होम में है
निष्कर्ष:
अब समय है —
आदि, मध्य, अन्त का पार्ट समाप्त कर
अनादि स्वरूप में स्थित होने का
3. रूहानी ड्रिल क्या है?
मुरली – 16-03-1986
आवाज में रहते हुए
आवाज से परे स्थिति में स्थित रहना
इसी को कहा जाता है रूहानी ड्रिल
उदाहरण:
जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोज़ एक्सरसाइज जरूरी है,
वैसे ही आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए
रूहानी एक्सरसाइज जरूरी है।
4. अशान्ति के बीच शान्त रहने की परीक्षा
शान्त वातावरण में शान्त रहना — आसान है
लेकिन—
हलचल में अचल रहना
व्यर्थ संकल्पों के बीच स्थिर रहना
कमजोरियों की हलचल में भी न हिलना
यही असली अभ्यास है।
चेकिंग प्रश्न:
क्या हलचल में अचल बनने में
सेकेण्ड लगता है
या मिनट?
क्योंकि समय लगना धोखा दे सकता है।
5. फाइनल पेपर – बहुत थोड़े समय का
मुरली – 16-03-1986
फाइनल रिजल्ट का पेपर
कुछ सेकेण्ड
कुछ मिनटों का होगा
चारों ओर—
प्रकृति
माया
वायुमण्डल
लोग — सब फुल फोर्स से ट्रायल करेंगे
और आत्मा को
बिन्दी में टिके रहना है
उदाहरण:
उस समय यह नहीं चलेगा—
“मैं आत्मा हूँ… मैं आत्मा हूँ…”
बस—
बिन्दी कहा
बिन्दी में टिक गए
6. नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप की पहचान
मुरली नोट:
देह, सम्बन्ध, वैभव, वायब्रेशन, वातावरण
होते हुए भी आकर्षित न करें
इसी को कहते हैं—
नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप
स्थिति:
देखते हुए न देखो
सुनते हुए न सुनो
सब कुछ होते हुए भी — न्यारे और बाप के प्यारे
7. पास या पास विद ऑनर?
मुरली – 16-03-1986
पास होना या पास विद ऑनर
इसी अभ्यास पर निर्भर है।
समय की घण्टी बजे—
तब तैयार होंगे
या
अभी से तैयार हैं?
इसीलिए—
अष्ट रत्नों की माला छोटी है
8. सेकेण्ड में विजय का रहस्य
सबका अधिकार है—
सेकेण्ड में मुक्ति
सेकेण्ड में जीवनमुक्ति
लेकिन—
सेकेण्ड में विजय
तभी जब जरा भी हलचल न हो
सूत्र:
चारों ओर विनाश
और आत्मा वन
तभी नम्बर वन
9. बापदादा का खुला भण्डारा
मुरली – 16-03-1986
यह सीजन—
मिलन का
वरदान का
विशेष चांस का है
भारतवासी हों या डबल विदेशी
सभी को विशेष वरदान मिला है
10. सेवा का लक्ष्य – एक
सेवा स्थान अलग-अलग
लेकिन—
लक्ष्य एक
उमंग-उल्हास एक
हर धरनी पर—
कोई न कोई विशेष रिजल्ट निकलेगा
बापदादा का संदेश:
कोई साधारण नहीं
सब विशेष आत्मायें
सब महारथी
सब महावीर
अंतिम संदेश
लास्ट पेपर का प्रश्न भी पता है
टाइम भी पता है
तो—
पास क्यों न हों?
अब सिर्फ एक ही अभ्यास—
रूहानी ड्रिल
स्वीट साइलेन्स
सेकेण्ड में बिन्दी
प्रश्न 1: बापदादा किस स्थिति को देख रहे हैं?
उत्तर:
बापदादा सभी बच्चों की स्वीट साइलेन्स की स्थिति को देख रहे हैं।
वे यह परख रहे हैं कि बच्चे कितनी सहजता से और कितनी जल्दी
साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो जाते हैं।
प्रश्न 2: बापदादा का पहला चेकिंग प्रश्न क्या है?
उत्तर:
बापदादा पूछते हैं—
क्या आप एक सेकेण्ड में साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो सकते हो?
या अभी भी उस स्थिति में जाने के लिए समय लगता है?
उदाहरण:
जैसे स्विच दबाते ही लाइट जल जाती है,
वैसे ही स्मृति आते ही आत्मा साइलेन्स में स्थित हो जाए —
यही परफेक्ट अभ्यास है।
प्रश्न 3: आत्मा का अनादि स्वरूप क्या है—आवाज़ या साइलेन्स?
उत्तर:
आत्मा का अनादि, अविनाशी स्वरूप साइलेन्स है।
आवाज़ में आना आत्मा का आदि स्वरूप नहीं है।
84 जन्म आवाज में अभ्यास हुआ
अब चक्र पूरा होने के कारण वापसी साइलेन्स होम में है
प्रश्न 4: इस समय आत्मा के लिए सबसे आवश्यक अभ्यास क्या है?
उत्तर:
अब समय है—
आदि, मध्य और अन्त का पार्ट समाप्त कर
अपने अनादि स्वरूप, अनादि स्थिति में स्थित होने का
यही इस समय का सबसे आवश्यक अभ्यास है।
प्रश्न 5: रूहानी ड्रिल किसे कहा जाता है?
उत्तर:
रूहानी ड्रिल वह अभ्यास है जिसमें आत्मा—
आवाज में रहते हुए
आवाज से परे स्थिति में स्थित रहती है
यानी कर्म करते हुए भी साइलेन्स में स्थित रहना।
प्रश्न 6: रूहानी ड्रिल को एक्सरसाइज क्यों कहा गया है?
उत्तर:
जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोज़ एक्सरसाइज ज़रूरी है,
वैसे ही आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए
रूहानी एक्सरसाइज (रूहानी ड्रिल) आवश्यक है।
प्रश्न 7: असली परीक्षा शान्ति की कब होती है?
उत्तर:
शान्त वातावरण में शान्त रहना आसान है,
लेकिन असली परीक्षा तब है जब—
हलचल हो और फिर भी अचल रहें
व्यर्थ संकल्प चलें और फिर भी स्थिर रहें
कमजोरियाँ उभरें और फिर भी न हिलें
यही सच्चा अभ्यास है।
प्रश्न 8: बापदादा किस प्रकार की चेकिंग कराते हैं?
उत्तर:
बापदादा पूछते हैं—
हलचल में अचल बनने में
सेकेण्ड लगता है या मिनट?
क्योंकि समय लगना धोखा दे सकता है,
और समाप्ति के समय ज्यादा समय नहीं मिलेगा।
प्रश्न 9: फाइनल पेपर की विशेषता क्या है?
उत्तर:
फाइनल रिजल्ट का पेपर—
बहुत थोड़े सेकेण्ड
या कुछ मिनटों का होगा
चारों ओर से—
प्रकृति
माया
वातावरण
लोग
सब फुल फोर्स से ट्रायल करेंगे।
प्रश्न 10: फाइनल समय आत्मा को किस स्थिति में रहना है?
उत्तर:
उस समय आत्मा को—
बिन्दी में टिके रहना है
उस समय यह अभ्यास नहीं चलेगा—
“मैं आत्मा हूँ… मैं आत्मा हूँ…”
बस—
बिन्दी कहा
बिन्दी में टिक गए
प्रश्न 11: नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप की पहचान क्या है?
उत्तर:
जब—
देह
सम्बन्ध
वैभव
वायब्रेशन
वातावरण
सब होते हुए भी आकर्षित न करें,
तो उसे कहते हैं नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप।
प्रश्न 12: ‘देखते हुए न देखो, सुनते हुए न सुनो’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
अर्थ है—
सब कुछ सामने होते हुए भी
आत्मा न्यारी रहे
बाप के प्यार में लवलीन रहे
यही स्वीट साइलेन्स स्वरूप की स्थिति है।
प्रश्न 13: पास होना और पास विद ऑनर किस पर निर्भर है?
उत्तर:
पास होना या पास विद ऑनर
इसी रूहानी ड्रिल के अभ्यास पर निर्भर है।
प्रश्न यह है—
समय की घण्टी बजे तब तैयार होंगे
या
अभी से तैयार हैं?
प्रश्न 14: अष्ट रत्नों की माला छोटी क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि—
सेकेण्ड में स्थिति में टिकने वाले
बहुत थोड़े होते हैं
इसलिए अष्ट रत्नों की माला
बहुत छोटी है।
प्रश्न 15: सेकेण्ड में विजय का रहस्य क्या है?
उत्तर:
सबका अधिकार है—
सेकेण्ड में मुक्ति
सेकेण्ड में जीवनमुक्ति
लेकिन—
सेकेण्ड में विजय
तभी मिलती है जब जरा भी हलचल न हो।
सूत्र:
चारों ओर विनाश
और आत्मा वन
तभी नम्बर वन
प्रश्न 16: बापदादा ने इस समय कौन-सा विशेष अवसर दिया है?
उत्तर:
बापदादा ने इस सीजन में—
मिलन
वरदान
विशेष चांस
का खुला भण्डारा खोला है।
भारतवासी हों या डबल विदेशी—
सभी को विशेष वरदान मिला है।
प्रश्न 17: सेवा का लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
सेवा स्थान अलग-अलग हो सकते हैं,
लेकिन—
लक्ष्य एक
उमंग-उल्हास एक
हर धरनी पर
कोई न कोई विशेष रिजल्ट अवश्य निकलेगा।
प्रश्न 18: बापदादा बच्चों के बारे में क्या संदेश देते हैं?
उत्तर:
बापदादा कहते हैं—
कोई भी साधारण नहीं
सब विशेष आत्मायें हैं
सब महारथी
सब महावीर हैं
अंतिम प्रश्न: जब प्रश्न और समय दोनों पता हैं, तो पास क्यों न हों?
उत्तर:
अब केवल एक ही अभ्यास चाहिए—
रूहानी ड्रिल
स्वीट साइलेन्स
सेकेण्ड में बिन्दी
Disclaimer
यह वीडियो अव्यक्त मुरली दिनांक 16-03-1986 पर आधारित है,
जो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं का भाग है।
इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म, सरकार या व्यवस्था की आलोचना करना नहीं है।
यह वीडियो केवल आत्मिक अभ्यास, पुरुषार्थ और आत्म-चिंतन के लिए है।
दर्शक इसे आध्यात्मिक ज्ञान के रूप में ग्रहण करें।
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