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शिव बाबा और ब्रह्मा बाबा का रिश्ता
मनु ने अपनी बेटी इड़ा से प्रथा प्रथम मानव को जन्म दिया।

हम यहां पर देख रहे हैं कि मनु को भी प्रथम मानव कहा गया है और ब्रह्मा को भी प्रथम मानव कहा गया है। आदम को भी, नोवा को भी — जो परमात्मा को निराकार समझते…

मनु ने अपनी बेटी इड़ा से प्रथम मानव का जन्म दिया।
पौराणिक कहानी और आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
मनु ने अपनी बेटी इड़ा से प्रथम मानव को जन्म दिया — क्यों?

प्रथम मानव की उत्पत्ति का रहस्य

सनातन परंपरा में मनु को प्रथम मानव या सृष्टि के आदि पुरुष के रूप में जाना जाता है।

सृष्टि की शुरुआत, मानव सभ्यता की स्थापना और परिवार व्यवस्था के गुणों का रहस्य मनु की कथा में प्रकट होता है। मनुस्मृति में इस कथा के अंदर मानव सभ्यता की शुरुआत और परिवार व्यवस्था के मूल सिद्धांत समझाए गए हैं।

मनु – इड़ा / इला – कथा व प्रतीक

पुराणों के अनुसार ब्रह्मा से स्वयंभू मनु और शतरूपा उत्पन्न हुए।
कहीं इड़ा, कहीं इला, कहीं श्रद्धा, कहीं श्रुति — अनेक स्त्रियों के नाम मिलते हैं जो स्वयंभू मनु के संपर्क में आए।

अनेक नाम मिलते हैं। जैसे–जैसे किसी को लगा, उसने नाम दे दिया।
मनु और इड़ा के संयोग से मानव सभ्यता की आधारशिला रखी गई।

इड़ा भी ब्रह्मा की बेटी है।
इसलिए मनु को प्रथम पुरुष और इड़ा को प्रथम स्त्री या कभी पुत्री के रूप में वर्णित किया गया है।
कहीं उसे पत्नी कहा गया है, तो कहीं प्रथम स्त्री। दोनों रूपों में वर्णन मिलता है।

समझने के लिए एक उदाहरण

जैसे बीज और भूमि का संगम होता है, तब वृक्ष की उत्पत्ति होती है—
उसी तरह मनु (बीज) और इड़ा (भूमि) के मिलन से मानव जाति का जन्म हुआ।

यह संयोग क्यों आवश्यक था?

सृष्टि विस्तार के लिए ब्रह्मा ने मनु के साथ एक नारी शक्ति की रचना की ताकि प्रजनन और जीवन चक्र संभव हो सके।

पीड़ा से संतान उत्पन्न करने का तात्पर्य —
सृष्टि में स्त्री–पुरुष के सहयोग से नई चेतना, समाज और सभ्यता का जन्म देना है।

20 नवंबर 2025 की मुरली में भी स्पष्टीकरण मिलता है:
“सृष्टि विस्तार के लिए परमात्मा द्वारा साकार रूप को रचा गया ताकि मानवता आगे बढ़ सके।”
ब्रह्मा, मनु, इड़ा — सभी जर्नी के प्रतीक हैं।


पौराणिक और प्रतीकात्मक दृष्टि

इस कथा को शाब्दिक रूप में न लेकर इसके भीतर छिपे आध्यात्मिक अर्थ को समझना चाहिए।

मनु–इड़ा की कथा सृष्टि के मूल चेतना के विस्तार और आदर्श गृहस्थ जीवन को दर्शाती है, जहां परिवार और समाज का जन्म हुआ।

उदाहरण:
जैसे दो नदियां मिलकर एक नई धारा बनाती हैं, वैसे ही मानव जाति का विस्तार मनु और इड़ा के संगम से हुआ।

मतभेद और विविध कथाएं

कहीं मनु की संतान के लिए शतरूपा का नाम लिखा है, कहीं इड़ा, कहीं इला, कहीं श्रुति।
भिन्न–भिन्न नाम हैं, पर मूल उद्देश्य वही — मानव सृष्टि की निरंतरता।

मानव सृष्टि लगातार चलती रहती है।

पश्चिमी ग्रंथों में समानता

बाइबल में भी प्रथम पुरुष Adam और प्रथम स्त्री Eve / Yahova की कथा मिलती है।
दोनों कथाओं का आशय मिलता–जुलता है — मानवता की उत्पत्ति।


निष्कर्ष एवं मुख्य संदेश

मनु–इड़ा–इला की कथा का मुख्य उद्देश्य मानवता के जन्म, परिवार और समाज की नींव को समझाना है।
यह केवल जैविक सृष्टि नहीं, बल्कि चेतना और मूल्यों के विकास का प्रतीक है।

इस रहस्य को समझने के लिए गहरे अध्यात्म का अध्ययन करें तथा अपने नजदीकी ब्रह्मा कुमारी सेवा केंद्र से संपर्क करें।


मुख्य प्रश्न–उत्तर

1. मनु ने इड़ा से प्रथम मानव को क्यों जन्म दिया?

मानव जाति के विस्तार, समाज और परिवार की स्थापना हेतु।
यह एक प्रतीकात्मक कथा है।

2. क्या यह कहानी शाब्दिक है या प्रतीकात्मक?

यह मुख्यतः प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक अर्थों में समझी जाती है।

3. क्या अन्य धर्मों में भी ऐसी कथाएं मिलती हैं?

हाँ, बाइबल में Adam–Eve की कथा भी मानवता की उत्पत्ति दर्शाती है।

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