23-08-2025/Read today’s Murli in big letters, listen and contemplate on it

23-08-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षरों में पढ़े सुनें और मंथन करे

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“मीठे-मीठे बच्चों ने गीत सुना – कौन आया है पढ़ाने? सुप्रीम टीचर की अद्भुत शिक्षा!”


स्पीच हेडिंग्स के साथ

1. गाने के अक्षर और टीचर का आगमन

  • बच्चे गीत सुनते हैं और पूछते हैं – कौन आया पढ़ाने?

  • स्कूल में जैसे टीचर आते हैं, वैसे ही यहाँ सुप्रीम टीचर भगवान आए हैं।

  • समझने की बात है – बाप आते ही हैं और सभी पढ़ाई छोड़कर तुरंत बाप के पास आते हैं।


2. पुरुषोत्तम संगमयुगी और बाप की शिक्षा

  • तुम उत्तम पुरुषों, लक्ष्मी-नारायण, संगमयुग में बने हो।

  • दुनिया नहीं जानती कि यह पद कैसे मिला।

  • भगवान हर 5 हज़ार वर्ष के बाद आते हैं पढ़ाने।

  • इसलिए बाकी पढ़ाई छोड़कर बाप की शिक्षा में ध्यान लगाना चाहिए।


3. माया के तूफान और आत्मा की भूमिका

  • बच्चे बाप के पास आते हैं, पर माया का प्रभाव भी होता है।

  • आत्मा हमेशा सीखने की तैयारी में रहती है।

  • बाप कहते हैं – छोटे बच्चों की तरह आत्मा को भी पढ़ना चाहिए।

  • पढ़ाई में पूरी अटेन्शन जरूरी है।


4. बाप का वरदान – डबल सिरताज और राजाई

  • हम ऊंच ते ऊंच बाप के बच्चे हैं।

  • बाप डबल सिरताज राजा बनाते हैं – मन-मनाभव का ताज और रतन जड़ित ताज।

  • इस पढ़ाई से हम 5 हज़ार साल बाद विश्व के मालिक बनते हैं।

  • बाकी आत्माएं शान्तिधाम चली जाती हैं।


5. परमपिता परमात्मा और नई सृष्टि

  • परमपिता परमात्मा ब्राह्मणों की नई सृष्टि रचते हैं।

  • 84 जन्मों की कहानी आत्मा के पार्ट्स में भरी है।

  • ब्राह्मण और बाप का नाम-निशान मनुष्य भूल चुके हैं।

  • गॉड फादर से कम्यूनियन का योग = आत्मा की शक्ति और ज्ञान।


6. योगबल और सतोप्रधान बनना

  • योगबल से हम विश्व पर विजय पाते हैं।

  • साइंस, बॉम्ब्स, नैचुरल कैलेमिटीज़ सबको मात देने का माध्यम बाप का योग है।

  • सतोप्रधान दुनिया की स्थापना और धर्म का शासन – यही बाप की शिक्षा है।


7. आत्मा की पहचान और बाप का स्मरण

  • आत्मा मूलवतन की रहने वाली है, छोटी-सी है पर ज्ञानपूर्ण है।

  • बाप कहते हैं – मुझे याद करो, कोई देहधारी नहीं।

  • आत्मा को पढ़ाई में लगाना, पुरुषार्थ करना और सेवा करना चाहिए।


8. भारत – तीर्थ और ईश्वरीय परिवार

  • भारत बाप का जन्मस्थल और महान तीर्थ है।

  • बाप के बच्चे, पोत्रे और पोत्रियां – कोई और संबंध नहीं।

  • नई सृष्टि और देवी-देवता क्रमिक रूप से बढ़ते हैं।

  • यह नॉलेज पूरी तरह से समझना बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है।


9. बाप की शिक्षा का प्रभाव और नैतिक संदेश

  • बाप की शिक्षा से आत्मा पवित्र बनती है।

  • रावण राज्य और पतित दुनिया का विनाश होगा।

  • ज्ञान और पुरुषार्थ से हम दुनिया को सतोप्रधान बनाते हैं।

  • यह पूरी शिक्षा बच्चों को जीवन में सफलता, शक्ति और पवित्रता देती है।


10. समापन और बच्चों के प्रति बाप का प्यार

  • मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार।

  • रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते और गुड मॉर्निंग।

  • बच्चों को हमेशा बाप को याद करना चाहिए, यही असली शिक्षा है।

“मीठे-मीठे बच्चों ने पूछा – कौन आता है पढ़ाने? भगवान की अद्भुत शिक्षा!”


Q&A Format

Q1: बच्चों ने गीत सुना – कौन आया पढ़ाने?

A: बिलकुल सही! जैसे स्कूल में टीचर आते हैं, वैसे ही यहां सुप्रीम टीचर भगवान आए हैं। बच्चे सब पढ़ाई छोड़कर तुरंत बाप के पास आते हैं।


Q2: पुरुषोत्तम संगमयुगी कौन होते हैं?

A: तुम उत्तम पुरुषों, लक्ष्मी-नारायण, संगमयुग में बने हो। दुनिया नहीं जानती कि यह पद कैसे मिला। भगवान हर 5 हज़ार साल बाद आते हैं पढ़ाने।


Q3: बच्चों को पढ़ाई में क्यों लगना चाहिए?

A: बाकी पढ़ाई छोड़कर बाप की शिक्षा में पूरी अटेन्शन लगाना चाहिए। बाप कहते हैं – छोटे बच्चों की तरह आत्मा को भी पढ़ाई में लगना चाहिए।


Q4: बाप का वरदान क्या है?

A: बाप हमें डबल सिरताज राजा बनाते हैं – मन-मनाभव का ताज और रतन जड़ित ताज। इस पढ़ाई से हम 5 हज़ार साल बाद विश्व के मालिक बनते हैं।


Q5: परमपिता परमात्मा कौन हैं और नई सृष्टि क्या है?

A: परमपिता परमात्मा ब्राह्मणों की नई सृष्टि रचते हैं। 84 जन्मों की कहानी आत्मा में भरी है। बाप की शिक्षा से हम योगबल प्राप्त करते हैं।


Q6: योगबल का महत्व क्या है?

A: योगबल से हम विश्व पर विजय पाते हैं। बॉम्ब्स, साइंस या नैचुरल कैलेमिटीज़ को भी मात देने का माध्यम बाप का योग है। यह हमें सतोप्रधान बनाने की शक्ति देता है।


Q7: आत्मा की पहचान और बाप का स्मरण क्यों जरूरी है?

A: आत्मा मूलवतन की रहने वाली है। बाप कहते हैं – मुझे याद करो, किसी देहधारी को नहीं। बाप की याद से आत्मा पवित्र बनती है और पुरुषार्थ में सफलता मिलती है।


Q8: भारत का महत्व क्या है?

A: भारत बाप का जन्मस्थल और महान तीर्थ है। बाप के बच्चे, पोत्रे और पोत्रियां – कोई और संबंध नहीं। यही स्थान नई सृष्टि और देवी-देवता के निर्माण का केंद्र है।


Q9: रावण राज्य और पतित दुनिया का क्या अर्थ है?

A: पतित दुनिया वो है जहाँ लोग बाप को भूल गए हैं। बाप की शिक्षा से आत्मा पवित्र बनती है और रावण राज्य का विनाश होता है।


Q10: बाप की शिक्षा से हमें क्या मिलता है?

A: बाप की शिक्षा से हम दुनिया को सतोप्रधान बनाते हैं, डबल सिरताज राजा बनते हैं और पूरी तरह पवित्र बनकर परमपिता परमात्मा की सेवा में लगते हैं।

Disclaimer (डिस्क्लेमर):

इस वीडियो में प्रस्तुत सामग्री ब्रह्मा कुमारीज की आध्यात्मिक शिक्षाओं और आधिकारिक मुरली पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल ज्ञान और आत्मिक विकास के उद्देश्य से साझा की गई है। किसी भी व्यक्ति या संगठन पर व्यक्तिगत या धार्मिक टिप्पणी का उद्देश्य नहीं है। दर्शकों से अनुरोध है कि इसे समझ और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें।

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