(27)Did God create the first man?

विश्व नाटक :-(27)क्या ईश्वर ने प्रथम मनुष्य बनाया?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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विश्व नाटक

हम अध्ययन कर रहे हैं।
आज उसका 27वा विषय है।

क्या ईश्वर ने प्रथम मनुष्य बनाया?

पहला पहला मनुष्य परमात्मा ने बनाया।

विज्ञान, धर्म और तर्क की पड़ताल करें।
तर्क से इसको पड़ताल करेंगे कि क्या परमात्मा ने पहला मनुष्य बनाया?

क्या ईश्वर ने प्रथम मनुष्य का निर्माण किया?

नंबर एक — धार्मिक ग्रंथों में जैसे बाइबल या अन्य धार्मिक पुस्तकें बताती हैं कि
ईश्वर ने मनुष्य को बनाया।
सबने यही कहा है पहले एक मनुष्य था। जैसे:

ब्रह्मा, एडम, आदम, मनु, नोवा — ऐसे हर एक ने अपना-अपना नाम दिया।
हाँ, परंतु एक मनुष्य बनाया। और वह भी बड़ी उम्र वाला।

फिर उससे एक कन्या बनाई, स्त्री बनाई।

तो पहला मनुष्य ईश्वर ने बनाया — यह प्रश्न उठता है।

अब कुरान कहती है ईश्वर ने “कुन” कहा।
कुन का मतलब होता है “हो जा”

उनकी भाषा में कुन का हिंदी अर्थ है — हो जा, बन जा।
जैसे चित्र बनाया और कहा — हो जा; और वह बन गया।
मुर्गे का चित्र बनाया और कहा — हो जा, और मुर्गा बन गया।
पुरुष का चित्र बनाया, कहा — हो जा, और वह भी बन गया।

हर एक ने अपने-अपने तरीके से बताया कि ईश्वर ने बनाया।

जैसे यहाँ शिव बाबा भी कहते हैं कि —
मेरे को संकल्प उठा कि मुझे सृष्टि रचना के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शंकर चाहिए।
तो मैंने सूक्ष्म वतन में इन तीनों को बनाया —
क्योंकि मेरे संकल्प की रचना है।

अब बाबा ने ब्रह्मा को अडॉप्ट कर लिया।
अब सवाल यह है कि सब क्या कहते हैं —
ईश्वर ने मनुष्य को बनाया।

लेकिन क्या हम यह समझ सकते हैं कि
ईश्वर ने प्रथम मनुष्य का निर्माण किस प्रकार किया?
कैसे बनाया होगा?

यही प्रश्न सत्यार्थ प्रकाश में स्वयं दयानंद से भी पूछा गया।

पूछा गया —
सृष्टि के आदि में एक मनुष्य था या अनेक?

स्वामी दयानंद जी ने आठवें समुलास में उत्तर दिया — अनेक थे।

फिर पूछा गया —
पहले बच्चे थे, बूढ़े थे या जवान?

उत्तर दिया — जवान थे।
क्योंकि बच्चे हों तो पालेगा कौन?
और बूढ़े हों तो किस काम के?

लेकिन उनसे यह किसी ने नहीं पूछा कि
जवान कहाँ से आ गए?
युवा कहां से आए?
इसका उत्तर उनके पास नहीं था, इसलिए सत्यार्थ प्रकाश में लिखा नहीं गया।

अब बाबा क्या कहते हैं?
जब सतयुग शुरू होता है तो क्या होते हैं —
बच्चे? बूढ़े? या जवान?

बाबा कहते हैं —
सभी जवान होते हैं।
बच्चे नहीं होते, बूढ़े नहीं होते।

बाबा ने क्लियर बताया —
जवान इसलिए होते हैं क्योंकि वे पहले जन्म लेते हैं,
पवित्रता से जन्म लेते हैं, सुरक्षित रहते हैं।

एकदम जवान कहाँ से आ गए?
यह बात केवल बाबा ही स्पष्ट कर सकते हैं।

फिर दयानंद जी से पूछा गया —
पहले पृथ्वी थी के नहीं? पहले संसार था के नहीं?

उन्होंने उत्तर दिया —
हां, पृथ्वी भी थी, संसार भी था, सब थे।

सत्यार्थ प्रकाश के आठवें समुलास में
सृष्टि पर ढेर सारे प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हर कल्प की सृष्टि एक जैसी होती है।
जैसे हमारे बाबा 5000 साल का चक्र बताते हैं।

परंतु स्वामी दयानंद करोड़ों-लाखों वर्षों के चक्कर में पड़ गए।

स्वामी दयानंद के गुरु बृजानंद ने कहा था —
“वेद सत्य हैं, पुराण असत्य।”
इसलिए वे केवल वेद मानते थे, पुराण नहीं।
रामायण, महाभारत, गरुड़ पुराण — सभी को पुराण कहा और अस्वीकार किया।

लेकिन स्वामी दयानंद स्वयं पुराणों के प्रभाव से बच नहीं सके।
उन्होंने भी पुराणों की कई बातों को मान लिया।

अब मुख्य प्रश्न फिर वही आता है —
क्या उस समय भी प्रजनन के नियम जैसे पुरुष–स्त्री की आवश्यकता नहीं थी?
मनुष्य कैसे बना दिया? बिना स्त्री के?

यह सोचने योग्य प्रश्न है।

मनुस्मृति कहती है —
मनु इस जन्म में जानकारी पाता है, नाव बनाता है, पहाड़ पर चला जाता है।

नोवा को भी जानकारी मिलती है —
प्रकाश आता है, बताता है कि नाव बनाओ।
वह नाव बनाता है, लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं।

फिर वर्षा शुरू होती है।
फिल्मों में दिखाया है कि मंदिर, चर्च, मस्जिद —
सब डूबते जाते हैं।
पानी इतना बढ़ता है कि नाव तैरने लगती है।

इसके पहले उसे बताया गया था कि
हर पशु का एक-एक जोड़ा नाव पर चढ़ाना है,
खाने-पीने की व्यवस्था करनी है।

फिर 40 दिन बाद पक्षी भेजा जाता है।
वह एक तिनका लेकर लौटता है —
यानि सृष्टि पुनः बनने लगी है।