30-07-2025/Read today’s Murli in big letters, listen and contemplate

30-07-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षरों में पढ़े सुनें और मंथन करे

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( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

“डबल शांति का दिव्य रहस्य – आत्मा को जाग्रत करने वाली अमर कथा | ज्ञान का तीसरा नेत्र | 


 1. ओम् शांति: आत्मा का स्वधर्म

“ओम् शांति” केवल एक शब्द नहीं, आत्मा की पहचान है। यह हमारा स्वधर्म है।
हम शांति के लिए कहीं बाहर नहीं जाते, क्योंकि शांति हमारे अंदर है।
मन और बुद्धि आत्मा के अंग हैं — जैसे शरीर के हाथ-पैर।
शांति प्राप्त करने का मार्ग भी मन-बुद्धि से होकर ही निकलता है।


 2. आत्मा और परमात्मा का बन्धन

परमात्मा कोई साधु-संत नहीं, बल्कि हमारा सर्वोच्च पिता है — शिवबाबा
वे कहते हैं, “मैं परमात्मा, तुम्हारा पिता हूँ।”
शिव का अर्थ है — कल्याणकारी।
वे हमें मुरली के माध्यम से पढ़ाते हैं, मार्गदर्शन देते हैं।


 3. ज्ञान का तीसरा नेत्र: अंधकार से प्रकाश की ओर

हमारी दोनों आँखें शरीर की हैं, लेकिन ज्ञान का तीसरा नेत्र आत्मा के लिए है।
यह तीसरा नेत्र जब खुलता है, तब आत्मा जागरूक होती है —
तब हम कहते हैं, “हम आत्मा हैं, यह शरीर हमारा वस्त्र है।”


 4. भक्ति और ज्ञान का फ़र्क

भक्ति में पुकार होती है — “हे प्रभु, राह दिखाओ।”
ज्ञान में उत्तर होता है — “मनमनाभव।”
भक्ति मार्ग अंधश्रद्धा का, और ज्ञान मार्ग प्रकाश और विवेक का मार्ग है।


 5. स्वराज्य की यात्रा: नर से नारायण

परमात्मा हमें नर से नारायण बनाते हैं, मनुष्य से देवता
जैसे IAS बनने के लिए पढ़ाई होती है, वैसे ही यह है राजयोग की पढ़ाई
जिससे आत्मा देवत्व को प्राप्त करती है।


 6. आत्मा का श्रृंगार नहीं, गुणों की सजावट

बाप कहते हैं — आत्मा की कोई भौतिक सजावट नहीं होती।
शरीर की सजावट विनाशी है,
पर आत्मा की सजावट है — गुण, ज्ञान और योगबल


 7. तुम हो फूलों का बगीचा

बाबा कहते हैं — “तुम बच्चे फूल हो, इस दुनिया के गार्डन में।”
कोई गुलाब है, कोई चमेली, कोई किंग ऑफ फ्लावर।
बगीचे का एक ही बागवान है — शिवबाबा।
और तुम हो वह माली, जो सेवा में लगे हैं।


 8. तीज़री की कथा: ज्ञान से अमरत्व की ओर

तीसरा नेत्र खुलते ही आत्मा अमर कथा सुनने लगती है।
वही कथा जो अमरनाथ ने पार्वती को नहीं, तुम बच्चों को सुनाई है।
यह है सच्चा अमर ज्ञान — जो आत्मा को नाशवान से नव जीवन देता है।


 9. आत्म स्मृति और विश्व सेवा

अब तुम्हारी जिम्मेदारी है — स्व को जानो, और सेवा करो
जो आत्मा स्वयं जाग्रत होती है, वही दूसरों को भी जगा सकती है।
बाबा बार-बार कहते हैं — “मनमनाभव” — मुझ बाप को याद करो।
यही है डबल शांति का मार्ग
आत्मा की शांति और विश्व की शांति।


 समापन (Conclusion)

तुम बच्चे सर्वोच्च सौभाग्यशाली हो, जिन्हें बाप ने ज्ञान का तीसरा नेत्र दिया।
अब यह नारायणी नशा चढ़ाना है —
“मैं आत्मा, शिवबाबा की संतान, विश्व की सेवा में निमित्त हूँ।”

डबल शांति का दिव्य रहस्य – प्रश्न और उत्तर


Q1: “ओम् शांति” का वास्तविक अर्थ क्या है?

 A1:“ओम् शांति” आत्मा की पहचान है। यह केवल शब्द नहीं, आत्मा का स्वधर्म है। इसका अर्थ है — “मैं आत्मा हूँ, शांति स्वरूप हूँ।”


Q2: आत्मा और परमात्मा में क्या संबंध है?

 A2:आत्मा परमात्मा की संतान है। परमात्मा शिवबाबा हमारे सुप्रीम फादर हैं, जो हमें मार्गदर्शन देने, सच्चा ज्ञान देने के लिए स्वयं आते हैं।


Q3: ‘ज्ञान का तीसरा नेत्र’ क्या है?

 A3:यह आत्मिक दृष्टि है — जब आत्मा यह अनुभव करती है कि “मैं आत्मा हूँ, यह शरीर मेरा वस्त्र है।” यह बोध ही ज्ञान का तीसरा नेत्र है।


Q4: भक्ति मार्ग और ज्ञान मार्ग में क्या अंतर है?

 A4:भक्ति मार्ग में अंधश्रद्धा और पुकार होती है। ज्ञान मार्ग में उत्तर, विवेक और आत्म-चेतना होती है। भक्ति मार्ग साधनों पर आधारित है, ज्ञान मार्ग आत्मा पर।


Q5: ‘नर से नारायण’ बनने की प्रक्रिया क्या है?

 A5:यह राजयोग की पढ़ाई है। परमात्मा हमें दिव्य ज्ञान व योग के द्वारा मनुष्य से देवता, नर से नारायण बनाते हैं।


Q6: आत्मा का सच्चा श्रृंगार क्या है?

 A6:आत्मा का श्रृंगार भौतिक नहीं, गुणों का होता है — ज्ञान, पवित्रता, प्रेम और योगबल। यही सच्ची सजावट है।


Q7: ‘फूलों का बगीचा’ कहने का भाव क्या है?

 A7:हर आत्मा एक सुंदर फूल है — कोई गुलाब, कोई चमेली। शिवबाबा बागवान हैं, और हम माली हैं, जो इस बगीचे को सेवा द्वारा संवारते हैं।


Q8: ‘तीज़री की कथा’ का अर्थ क्या है?

 A8:तीसरे नेत्र के जागरण के बाद आत्मा जो ज्ञान सुनती है, वही अमर कथा है — जो शिवबाबा हमें सुनाते हैं। यह कथा आत्मा को नाशवान से अमरत्व की ओर ले जाती है।


Q9: डबल शांति का मार्ग क्या है?

 A9:पहली शांति आत्मा की है — आत्म-स्मृति से। दूसरी शांति विश्व की है — सेवा से। जब आत्मा स्वयं शांत होती है, तभी विश्व को भी शांति मिलती है।


Q10: इस ज्ञान का मुख्य उद्देश्य क्या है?

 A10:स्व-परिचय प्राप्त करना, शिवबाबा को याद करना, और विश्व कल्याण में योगदान देना। यही सच्चा पुरुषार्थ है।

Disclaimer (डिस्क्लेमर):

यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक ज्ञान और अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मा और परमात्मा के बीच के वास्तविक संबंध को स्पष्ट करना, और आत्म-चेतना द्वारा विश्व शांति की दिशा में योगदान देना है। यह किसी विशेष धर्म, व्यक्ति या मान्यता का विरोध नहीं करता। कृपया इसे आत्म चिंतन और अध्ययन की दृष्टि से ग्रहण करें।

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