31-07-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षरों में पढ़े सुनें और मंथन करे
“बाप कहते हैं: तत्वम् – तुम आत्माएँ शान्त स्वरूप हो | दिव्य ज्ञान और याद की शक्ति”
प्रवचन – मुख्य हेडिंग्स सहित:
1. आत्मा का मूल स्वभाव: शांति
बाप कहते हैं – “तत्वम् अर्थात् तुम आत्मायें भी शान्त स्वरूप हो।”
हर आत्मा का मूल स्वभाव है शांति। हम सभी शान्तिधाम से आए हैं — यह शरीर और कर्मेन्द्रियाँ हमें केवल पार्ट बजाने के लिए मिली हैं।
ना आत्मा छोटी है ना बड़ी — शरीर का भेद है।
2. परमधाम से बाप का आगमन
यह एक नई और गहरी बात है —
शिवबाबा परमधाम से स्वयं आते हैं। कोई शरीरधारी नहीं, बल्कि परमात्मा, ज्ञान का सागर बनकर आकर कहते हैं —
“मैं पढ़ाने आता हूँ, राजयोग सिखाने आता हूँ।”
3. संगम युग का सुनहरा अवसर
तुम बच्चे अभी संगम युग पर हो, जहाँ से लौटकर जाना है अपने घर – शान्तिधाम।
यही वह समय है जब आत्मा को सतोप्रधान बनना है।
याद की यात्रा ही वह माध्यम है जिससे आत्मा पुनः अपनी स्थिति में आती है।
4. याद से मिलती है बाप की करेन्ट
जब हम अक्यूरेट और प्यार से याद करते हैं तो बाप की करेन्ट आत्मा को प्राप्त होती है।
इससे:
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आत्मा सतोप्रधान बनती है
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आयु बढ़ती है
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स्वास्थ्य सुधरता है
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और आत्मा में खुशी का पारा चढ़ता है।
5. सवेरे की याद: दिन की शुरुआत बाप से
बाप कहते हैं —
“सवेरे उठकर मुझसे गुडमार्निंग करो।”
इस याद और ज्ञान-चिंतन से दिनभर आत्मा ऊर्जावान रहती है।
6. स्वदर्शन चक्रधारी और लाइट हाउस बनो
बाप की आज्ञा है —
“गफलत मत करो। स्वदर्शन चक्रधारी बनो। लाइट हाउस बनो।”
जिस आत्मा ने स्वयं को जाना, वही दूसरों को भी ज्ञान दे सकती है।
7. कांटों से फूल बनने की यात्रा
आज की दुनिया कांटों से भरी है —
बाप कहते हैं “तुम अब फूल बन रहे हो।”
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जो योग में रहकर क्रोध, दु:ख, अवगुण को त्यागते हैं
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वही फूल बनकर दूसरों को भी सुगंध देते हैं।
8. सेवा का वरदान – ज्ञान रत्नों का दान
जो ज्ञान सागर से रत्न लेते हैं, और दान करते हैं —
वही सच्चे सेन्सीबुल बच्चे कहलाते हैं।
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जितनी सेवा करेंगे
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उतनी ही ऊजूरा (respect) और आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
9. अंत में बाप का सन्देश
बाप कहते हैं —
“तुम बच्चों के बिना मुझे भी बेचैनी होती है।”
बाप दुनिया के दु:खी बच्चों की पुकार सुनकर आते हैं —
पतित से पावन बनाने, घर वापसी कराने।
“बाप कहते हैं: तत्वम् – तुम आत्माएँ शान्त स्वरूप हो | दिव्य ज्ञान और याद की शक्ति”
(प्रश्नोत्तर रूप में आत्म-ज्ञान एवं ईश्वरीय याद की समझ)
1. आत्मा का मूल स्वभाव क्या है?
प्रश्न: बाप कहते हैं “तत्वम्” — इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: “तत्वम्” का अर्थ है तुम आत्माएँ भी शान्त स्वरूप हो। आत्मा का स्वधर्म ही शान्ति है। हम शान्तिधाम से आए हैं और शरीर व कर्मेन्द्रियाँ केवल पार्ट बजाने के लिए मिली हैं।
2. शिवबाबा कहाँ से आते हैं और क्यों?
प्रश्न: क्या शिवबाबा शरीरधारी हैं?
उत्तर: नहीं, शिवबाबा शरीरधारी नहीं हैं। वे परमधाम से स्वयं आते हैं। वह ज्ञान का सागर हैं, और राजयोग सिखाने व बच्चों को पढ़ाने आते हैं ताकि आत्माएँ पुनः सतोप्रधान बन सकें।
3. संगम युग का क्या महत्व है?
प्रश्न: संगम युग में आत्मा को क्या करना होता है?
उत्तर: संगम युग आत्मा के पुनः घर वापसी का समय है। यही वह समय है जब आत्मा को सतोप्रधान बनकर शान्तिधाम लौटना होता है, और यह केवल बाप की याद व राजयोग के अभ्यास से सम्भव है।
4. याद से आत्मा को क्या प्राप्त होता है?
प्रश्न: एक्यूरेट याद करने से आत्मा को क्या लाभ होते हैं?
उत्तर: जब आत्मा प्रेमपूर्वक बाप को याद करती है, तो:
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सतोप्रधान बनती है
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आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है
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आन्तरिक खुशी का अनुभव होता है
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बाप की करेन्ट मिलती है जिससे आत्मा शक्तिशाली बनती है।
5. दिन की शुरुआत बाप की याद से क्यों करनी चाहिए?
प्रश्न: सवेरे-सवेरे बाबा को याद करने का क्या लाभ है?
उत्तर: बाप कहते हैं — “सवेरे उठकर मुझसे गुडमार्निंग करो।”
इससे दिन की शुरुआत आध्यात्मिक ऊर्जा से होती है, जिससे आत्मा सकारात्मक और स्थिर रहती है।
6. स्वदर्शन चक्रधारी और लाइट हाउस बनने का क्या अर्थ है?
प्रश्न: स्वदर्शन चक्रधारी बनने का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: इसका अर्थ है स्व-ज्ञान में स्थित होना और दूसरों को प्रकाश देना। जो आत्मा स्वयं को जानती है, वही ज्ञान देने वाला लाइट हाउस बन सकती है। यही चक्रवर्ती बनने की प्रक्रिया है।
7. कांटों से फूल कैसे बनें?
प्रश्न: बाप कहते हैं “कांटों से फूल बनो” — इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है —
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क्रोध, ईर्ष्या, और अन्य अवगुणों को छोड़कर
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योग में रहकर दिव्य गुणों को धारण करना।
ऐसे व्यक्ति सुगंधित फूल बनते हैं, जो दूसरों को भी सुख और शांति देते हैं।
8. ज्ञान रत्नों का दान क्यों ज़रूरी है?
प्रश्न: सेवा का क्या महत्व है?
उत्तर: जो ज्ञान सागर से ज्ञान रत्न लेते हैं और फिर दूसरों को दान करते हैं, वही सच्चे सेन्सीबुल बच्चे कहलाते हैं। इससे उन्हें आशीर्वाद मिलती है और सम्मान भी।
9. बाप बच्चों को इतना प्यार क्यों करते हैं?
प्रश्न: बाप बच्चों के बिना बेचैन क्यों हो जाते हैं?
उत्तर: क्योंकि बाप दुखी आत्माओं की पुकार सुनते हैं।
वह पतित से पावन बनाने और बच्चों को सुखधाम पहुँचाने आते हैं। बच्चों के बिना उन्हें भी बेआरामी होती है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर):
यह वीडियो केवल आध्यात्मिक ज्ञान, आत्म-अनुभूति और राजयोग के अभ्यास हेतु है। इसमें दी गई जानकारी ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक मूल्यों व शिक्षाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी धर्म, मत, व्यक्ति या संगठन की आलोचना करना नहीं है। कृपया इसे सकारात्मक मनोभाव और आत्मकल्याण की दृष्टि से ग्रहण करें।
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