S-B:-(33)कौन बनते हैं पहले लक्ष्मी नारायण?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
ब्रह्मा बाबा और मम्मा के रिश्तों को हम देख रहे हैं। शिव बाबा साथ हैं। कौन बनते हैं पहले लक्ष्मी नारायण? सबसे पहला पहला लक्ष्मी नारायण कौन बनते हैं?
ब्रह्मा बाबा मम्मा का भविष्य राजा रानी संबंध
भविष्य में मम्मा और ब्रह्मा बाबा का
ब्रह्मा बाबा बाबा मम्मा का भविष्य राजा रानी संबंध के भविष्य में यह राजा रानी बनेंगे।
राजा रानी के रूप में भविष्य संबंध — भविष्य में राजा रानी के रूप में इनका संबंध हो।
संगम युग से सतयुग तक की दिव्य यात्रा
ईश्वर का ज्ञान केवल आज के जीवन को नहीं बदलता।
केवल आज के जीवन को नहीं बदलता बल्कि हमें भविष्य के उच्च भाग्य की झलक भी देता है।
संगम युग पर परमपिता शिव दो आत्माओं को चुनते हैं।
कौन सी दो आत्माएं हैं जिनको चुनते हैं?
ब्रह्मा बाबा और मम्मा सरस्वती ताकि वे इस यज्ञ के आधार बने।
ब्रह्मा बाबा और मम्मा सरस्वती ताकि वे इस यज्ञ के आधार बने।
यही दो आत्माएं सतयुग में प्रथम राजा रानी बनते हैं।
ये राजकुमार राजकुमारी नहीं बनेंगे क्या?
फिर राजकुमारी राजकुमार कब बनेंगे?
साकार मुरली – 1 फरवरी 1969
ब्रह्मा सरस्वती ही सतयुग के लक्ष्मी नारायण बनते हैं।
संगम युग सहयोगी – सतयुग शासक
भाई जी राजकुमार राजकुमारी कब बनते हैं?
राजा रानी बनते हैं। राजकुमार राजकुमारी कब बनते हैं?
ये दो आत्माएं सतयुग में प्रथम राजा रानी बनते हैं और इनसे ही वन-वन-वन शुरू होता है।
श्री कृष्ण सतयुग का प्रथम राजकुमार है।
इनके आगे तो राजा रानी ही लिखा है।
साकार मुरली – 11 फरवरी 1969:
ब्रह्मा सरस्वती ही सतयुग के लक्ष्मी नारायण बनते हैं।
राजा राजकुमारी कब बनेंगे? संगम पर।
राधा और कृष्ण के रूप में।
संगम युग — हां, संगम पर राधा और कृष्ण होती है ना, तो राजकुमार संगम पर।
राजकुमार राजकुमारी संगम पर बनेंगे।
उस समय के सतयुग में वे बनते हैं।
इस सतयुग में तो वन-वन-वन शुरू होगा।
संगम युग पर ब्रह्मा मम्मा का संबंध।
ब्रह्मा और मम्मा का संबंध।
सहयोगी आत्माओं का, जो परमात्मा के साथ मिलकर विश्व परिवर्तन का बीज बोते हैं।
मां-बाप संगम पर बाप के कार्य में सहयोगी भी हैं।
सहयोगी हैं। मां-बाप संगम पर बाप के कार्य को…
परंतु वही आत्माएं सतयुग में पहले विश्व राजा रानी बनती हैं।
संगम में मां-बाप बाप के कार्य में सहयोगी बनती हैं।
परंतु वही आत्माएं सतयुग में पहले विश्व राजा रानी बनती हैं।
ये कोई कल्पना नहीं बल्कि एक्यूरेट मुरली ज्ञान है।
यह कल्पना नहीं है।
भविष्य का रूप – लक्ष्मी नारायण।
सतयुग में जो दो आत्माएं पहली पवित्र, पूर्ण और श्रेष्ठ बनती हैं
वे हैं श्री लक्ष्मी और श्री नारायण।
साकार मुरली – 15 मई 1968
पहले-पहले लक्ष्मी नारायण का राज्य होता है।
ये लक्ष्मी नारायण कौन? वही ब्रह्मा सरस्वती की आत्माएं
जिन्होंने संगम युग में सबसे अधिक योग, सेवा और मर्यादाएं अपनाई।
उदाहरण — जैसे किसान पहले बीज बोता है, फिर वही बीज फल बनकर मिलता है।
वैसे ही ब्रह्मा-मम्मा का संगम युग का पुरुषार्थ सतयुग में पूर्ण फल बनकर
लक्ष्मी नारायण का राज्य देता है।
क्यों कहा जाता है लक्ष्मी नारायण के बीज रूप?
क्योंकि वे नई दुनिया के बीज हैं — नए संस्कारों के प्रथम धारक।
साकार मुरली – 9 मार्च 1968
ब्रह्मा सरस्वती ही लक्ष्मी नारायण के बीज हैं।
इसका अर्थ —
ईश्वर नई दुनिया की शुरुआत ब्रह्मा सरस्वती की आत्माओं से करते हैं।
वे नई सृष्टि के प्रथम पिता-माता भी हैं और पहले राजा-रानी भी।
साधारण भाषा में — नई दुनिया उन्हीं से शुरू होती है।
और उन्हीं के हाथों में उसका पहला राज्य होता है।
ब्रह्मा बाबा – भविष्य में श्री नारायण
ब्रह्मा बाबा का स्वभाव, उनकी विनम्रता, उनकी मर्यादा और उनकी करुणा
उन्हें नारायण समान आत्मा बनाती है।
साकार मुरली – 12 जुलाई 1968
ब्रह्मा पूरा बनने से नारायण बनता है।
उनका संगम युग का त्याग, सेवा
और कमल-फूल समान जीवन
उनके भविष्य के रूप को निखारता है।
भविष्य रूप को निश्चित करता है।
मम्मा सरस्वती – भविष्य में श्री लक्ष्मी
मम्मा का जीवन – ज्ञान स्वरूप, योगबल, मर्यादा-पूर्ति।
ममता और शक्ति का अद्भुत संगम था।
साकार मुरली – 25 मई 1969
सरस्वती ही लक्ष्मी बनती है।
उनका योग, उनका तप, उनकी मातृभावना
उन्हें सतयुग की प्रथम देवी श्री लक्ष्मी बनाता है।
भविष्य का यह संबंध संगम युग में क्यों प्रकट होता है?
क्योंकि संगम युग ही बीज बोने का युग है।
अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1970
संगम की रीति ही सतयुग का भाग्य बनाती है।
जो यहां योग में सच्चा, सेवा में उत्तम, मर्यादाओं में आदर्श
और शिवबाबा में निष्ठावान है
वही सतयुग में राजा-रानी बनता है।
हम क्या सीखें?
वे तो बनेंगे। हमें क्या लाभ?
संगम युग का पुरुषार्थ ही भविष्य का राज्य है।
जो संगम पर पुरुषार्थ करेगा वही सतयुग का राजा-रानी बनेगा।
ज्ञान-योग-सेवा
भविष्य की महारानी और महाराजा सीट के लिए।
ब्रह्मा-मम्मा हमारे रोल-मॉडल हैं।
उनके आदर्शों का अनुसरण — लक्ष्मी-नारायण के बीज तत्व।
अव्यक्त मुरली – 12 मार्च 1971
जैसा संगम युग का पुरुषार्थ, वैसा सतयुग का राज्य।
निष्कर्ष – भविष्य का दिव्य संबंध
सार यही है —
आज ब्रह्मा-मम्मा ईश्वर के सहयोगी हैं।
कल वही आत्माएं लक्ष्मी-नारायण बनेंगी।
जो आज सहयोगी हैं, वही कल विश्व के राजा-रानी बनते हैं।
साकार मुरली – 1 फरवरी 1969
पहले-पहले इनका ही राज्य चलता है।
यह केवल आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, बल्कि निश्चित भविष्य है
जो आत्मा परमात्मा से प्राप्त होता है।

