(49)गीता के ज्ञान को ठीक से समझने की आवश्यकता-13
( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“गीता का ज्ञानदाता कौन? | श्रीकृष्ण नहीं, परमात्मा शिव सुनाते हैं सच्चा गीता ज्ञान |
गीता – धर्म ग्रंथ या परमात्म वाणी?
गीता को हम एक धार्मिक ग्रंथ समझते आए हैं, लेकिन वास्तव में यह परमात्मा की वाणी है। यह उस समय बोली गई जब विश्व एक महान धर्मयुद्ध से गुज़र रहा था।
परंतु आज गीता को लेकर एक सबसे बड़ा भ्रम यही है कि गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण ने दिया, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
गीता का ज्ञानदाता – श्रीकृष्ण नहीं, परमात्मा शिव
श्रीकृष्ण सतयुग का पहला जन्म लेने वाले देवता हैं — सुंदर, निर्मल, पूर्ण 16 कला सम्पन्न। लेकिन गीता का ज्ञान एक देवता नहीं दे सकता। “परम ज्ञान” केवल परमात्मा ही दे सकते हैं।
मुरली प्रमाण (18 जनवरी 2025):
“बच्चे, श्रीकृष्ण तो देवता है, लेकिन गीता ज्ञानदाता मैं परमपिता परमात्मा हूँ। मैं ब्रह्मा तन में प्रवेश कर के तुम आत्माओं को ज्ञान सिखाता हूँ।”
यह वाणी स्पष्ट करती है कि गीता का सच्चा वक्ता परमात्मा शिव हैं, जो ब्रह्मा बाबा के तन में प्रवेश कर गीता जैसा ज्ञान देते हैं — जिसे आज हम “मुरली” कहते हैं।
गीता के अध्याय और मुरली से उसका सार
द्वादश अध्याय – भक्तियोग
संस्कृत श्लोक:
भक्तियोगो नाम द्वादशोऽध्यायः॥
हिंदी अर्थ:
‘भक्तियोग’ का मतलब है — वह योग जिसमें आत्मा परमात्मा को याद करती है।
परमात्मा शिव सिखाते हैं —
“बच्चे, मुझे याद करो और पाप विनाश करो। यही है भक्तियोग की सच्ची विधि।”
त्रयोदश अध्याय – क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का विभाग
संस्कृत श्लोक:
क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगो नाम त्रयोदशोऽध्यायः॥
हिंदी अर्थ:
‘शरीर’ (क्षेत्र) और ‘आत्मा’ (क्षेत्रज्ञ) का भेद।
आज मुरली में रोज़ समझाया जाता है —
“तुम आत्मा हो, यह शरीर तुम्हारा वस्त्र है।”
यह सत्य ज्ञान श्रीकृष्ण ने नहीं, परमात्मा शिव ने संगम युग पर दिया है।
श्रीकृष्ण के नाम से क्यों जोड़ा गया?
श्रीमद्भागवत की कथाओं में कृष्ण का जीवन अत्यधिक आकर्षक है। चित्रण इतने प्रभावशाली रहे कि गीता के वक्ता को भी उन्हीं के साथ जोड़ दिया गया।
लेकिन गीता में स्वयं वक्ता कहते हैं:
“मैं अजन्मा हूँ, सर्वश्रेष्ठ हूँ।”
श्रीकृष्ण तो जन्म लेते हैं, बाल्यावस्था से लीलाएं करते हैं।
यही संकेत करता है — गीता का वक्ता कोई देवता नहीं, बल्कि निर्लेप परमात्मा है।
मुख्य निष्कर्ष – कौन है गीता ज्ञानदाता?
-
श्रीकृष्ण सतयुग के प्रथम जन्म लेने वाले देवता हैं।
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गीता का ज्ञान किसी बालक, राजकुमार या लीलाधारी के माध्यम से नहीं आया।
-
सच्चा वक्ता है – परमात्मा शिव, जो ब्रह्मा तन में प्रवेश कर हमें “मुरली” द्वारा वही ज्ञान फिर से सुनाते हैं।
आज की गीता: मुरली – परमात्मा की पुनः वाणी
मुरली कोई मनुष्यमन की रचना नहीं है। यह है –
“शिव बाबा की डायरेक्ट वाणी – आत्मा से आत्मा को, परमात्मा की सच्ची स्मृति।”
आज पुनः वही ज्ञान यज्ञ चला है —
जिसे पहले महाभारतकाल में “गीता” कहा गया और आज “मुरली” कहा जाता है।
निष्कर्ष में संदेश:
गीता का रहस्य तब तक नहीं खुल सकता, जब तक मुरली की चाबी न लगे।
मुरली वह कुंजी है जो गीता के प्रत्येक श्लोक को अर्थवती बना देती है।
आइए — मुरली के माध्यम से जानें परमात्मा की सच्ची वाणी को,
और बनें पुनः देवता स्वरूप।
“गीता का ज्ञानदाता कौन? | श्रीकृष्ण नहीं, परमात्मा शिव सुनाते हैं सच्चा गीता ज्ञान |
प्रश्न–उत्तर शैली (Q&A Format)
प्रश्न 1: क्या गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ है या परमात्मा की वाणी?
उत्तर:गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह परमात्मा शिव की सच्ची वाणी है, जो उन्होंने महाभारतकाल में अर्जुन के माध्यम से पूरी मानवता को सुनाई। यह ज्ञान युद्धकाल में बोला गया, जब धर्म का पतन हो रहा था।
प्रश्न 2: गीता का ज्ञानदाता कौन है — श्रीकृष्ण या परमात्मा शिव?
उत्तर:श्रीकृष्ण सतयुग के पहले जन्म के देवता हैं, लेकिन वह त्रिकालदर्शी नहीं हैं।
परमात्मा शिव ही वह निराकार, अजन्मा सत्ता हैं जिन्होंने गीता का ज्ञान दिया।
मुरली प्रमाण (18 जनवरी 2025):
“बच्चे, श्रीकृष्ण तो देवता है, लेकिन गीता ज्ञानदाता मैं परमपिता परमात्मा हूँ। मैं ब्रह्मा तन में प्रवेश कर तुम आत्माओं को ज्ञान सिखाता हूँ।”
प्रश्न 3: गीता में वर्णित ‘भक्तियोग’ का सही अर्थ क्या है?
उत्तर:गीता द्वादश अध्याय में ‘भक्तियोग’ का उल्लेख है।
भक्तियोग का अर्थ है आत्मा द्वारा परमात्मा से सच्चा योग लगाना।
मुरली वाणी:
“बच्चे, मुझे याद करो और तुम्हारे पाप विनाश होंगे।”
यह है — सच्चा भक्तियोग, जिसमें आत्मा को परमात्मा से जोड़ना सिखाया जाता है।
प्रश्न 4: ‘क्षेत्र’ और ‘क्षेत्रज्ञ’ का रहस्य क्या है?
उत्तर:गीता के त्रयोदश अध्याय में यह स्पष्ट किया गया है:
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क्षेत्र = शरीर
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क्षेत्रज्ञ = आत्मा
मुरली अनुसार:
“यह शरीर क्षेत्र है, और इसमें रहने वाली आत्मा क्षेत्रज्ञ है। तुम आत्मा हो, यह शरीर वस्त्र है।”
प्रश्न 5: गीता के वक्ता को श्रीकृष्ण से क्यों जोड़ दिया गया?
उत्तर:श्रीमद्भागवत में श्रीकृष्ण की लीलाओं, बाल्यकाल व युद्धकालीन छवियों को इतना सुंदर रूप में दर्शाया गया कि गीता के वक्ता को भी उन्हीं से जोड़ दिया गया।
लेकिन गीता में वक्ता स्वयं कहते हैं:
“मैं अजन्मा हूँ, अविनाशी हूँ।”
जबकि श्रीकृष्ण तो जन्म लेते हैं, अतः गीता का वक्ता निराकार परमात्मा है — श्रीकृष्ण नहीं।
प्रश्न 6: क्या गीता का ज्ञान वर्तमान में भी दिया जा रहा है?
उत्तर:हाँ, गीता का ज्ञान आज पुनः दिया जा रहा है — मुरली के रूप में।
परमात्मा शिव ब्रह्मा के तन में प्रवेश कर वही ज्ञान फिर से दे रहे हैं।
मुरली वाणी:
“मैं आया हूँ तुम आत्माओं को पढ़ाने — यह भक्ति नहीं, राजयोग की पढ़ाई है।”
प्रश्न 7: मुरली क्या है और उसका गीता से क्या संबंध है?
उत्तर:मुरली = गीता की पुनः वाणी।
मुरली वह दिव्य वाणी है जो परमात्मा शिव ब्रह्मा के तन में आकर देते हैं।
यह कोई साधारण कथा नहीं, बल्कि वही राजयोग ज्ञान है जो पहले गीता के रूप में जाना गया।
प्रश्न 8: गीता का अंतिम उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
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आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार
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आत्मा को सतोप्रधान बनाना
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विकर्मों से मुक्ति
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जीवनमुक्ति का मार्ग
यही सच्चा राजयोग है, जो परमात्मा सिखाते हैं।
गीता का सच्चा वक्ता श्रीकृष्ण नहीं, परमात्मा शिव हैं।
वर्तमान समय में वही दिव्य ज्ञान मुरली के रूप में पुनः आत्माओं को सुनाया जा रहा है।
संदेश:
मुरली वह चाबी है जो गीता के रहस्य को खोलती है।
आइए, उसे समझें — और स्वयं को आत्मा रूप में जानकर परमात्मा से सच्चा योग लगाएं।
DISCLAIMER:
यह वीडियो आध्यात्मिक शोध, मुरली वाक्यों और गीता श्लोकों के गूढ़ अध्ययन पर आधारित है।
हमारा उद्देश्य किसी धर्म, संप्रदाय, व्यक्ति या आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं है।
प्रस्तुत विचार गीता और ब्रह्माकुमारीज़ मुरली के संदर्भों के आधार पर आत्मज्ञान को प्रोत्साहित करने हेतु साझा किए गए हैं।
कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ही ग्रहण करें।
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