गीता का भगवान कौन?
गीता का असली गायक कौन?
गीता को किसने गाया?
भगवान शिव या श्री कृष्ण?
भगवान और गीता के महात्म्य में कमी का कारण।
भगवान और गीता का महात्म्य – महात्म्य का मतलब होता है महत्व।
गीता का महत्व कम क्यों हो गया?
कारण क्या? गीता का भगवान और गीता के महत्तम का कम होने का कारण क्या है?
क्यों उठता है यह प्रश्न?
गीता को विश्व का सबसे पवित्र शास्त्र माना जाता है।
इसमें बार-बार “भगवानो वाच” – भगवान ने कहा है, लिखा है।
लेकिन लोग गीता के गायक को लेकर भ्रमित हैं।
क्या श्रीकृष्ण ने कहा है या स्वयं भगवान शिव ने कहा?
किसने कहा यह ज्ञान? यह गीता किसने गाई?
उदाहरण – जैसे कि किसी किताब पर लेखक का नाम गलत लिखा हो,
तो पाठक असली लेखक को लेकर भ्रमित हो सकते हैं।
यही हाल गीता के साथ हुआ है।
गीता शब्द का अर्थ और महत्व
“गीता” शब्द का अर्थ है कहा हुआ या गाया हुआ।
क्योंकि यह श्लोक हैं। जितना भी प्राचीन साहित्य मिलता है,
मध्यकाल तक गद्य नहीं मिलता – सिर्फ पद्य मिलता है।
हिंदी गद्य का जन्म लगभग 200 वर्ष पूर्व अंग्रेजों ने किया,
जब उन्होंने भारत में लॉर्ड पोर्ट विलियम कॉलेज स्थापित किया।
इससे पहले सब पद्य ही मिलता है।
इसीलिए इसका नाम रखा गया – गीता।
भगवान वाच कहा है – अर्थात् भगवान ने कहा।
इसलिए गाई हुई वाणी = गीता।
श्रीमद्भगवद्गीता =
श्रेष्ठ मत, भगवान की गाई हुई श्रेष्ठ वाणी।
तो भगवान के द्वारा कही हुई है,
इसलिए वह स्वतः ही श्रेष्ठ है।
गीता में भगवान का स्वरूप
गीता में कहा गया है –
भगवान अव्यक्त हैं।
अव्यक्त का अर्थ = अशरीरी।
व्यक्ति और अव्यक्त में अंतर यही है –
जिसका शरीर नहीं है।
उसे कहा जाता है – ज्योति बिंदु स्वरूप।
आत्मा ज्योति है – उसका सूक्ष्म रूप बिंदु है।
बिंदु = जिसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई न हो।
उसे हम किसी सूक्ष्मदर्शी यंत्र से भी नहीं देख सकते।
वह अजन्मा है – जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता।
जिसने जन्म लिया, शरीर धारण किया, कर्म किया –
उसे कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा।
लेकिन परमात्मा कर्मातीत है।
वह कोई स्थूल कर्म नहीं करते।
सिर्फ ज्ञान सुनाने और मार्गदर्शन करने का कार्य करते हैं।
परमपिता – सभी आत्माओं का पिता है।
प्रश्न उठता है –
क्या श्रीकृष्ण इन गुणों में खरे उतरते हैं?
जवाब है – नहीं।
श्रीकृष्ण जन्मे, बड़े हुए, कर्म किए।
इसलिए वे अव्यक्त, अजन्मा, कर्मातीत और सर्व आत्माओं के पिता नहीं हो सकते।
गीता का असली गायक कौन?
गीता का ज्ञान युद्धभूमि में दिया गया,
जब अर्जुन भ्रमित था।
भगवान ने कहा –
“मैं अजन्मा हूँ।
मैं अव्यक्त रूप में आता हूँ।”
इसलिए गीता का गायक है शिव परमात्मा –
जो ब्रह्मा के तन में प्रवेश कर ज्ञान सुनाते हैं।
गीता के महात्म्य में कमी क्यों आई?
क्योंकि गीता को श्रीकृष्ण से जोड़ दिया गया।
कुछ लोग इसे केवल एक देवता की वाणी मानते हैं।
दूसरे धर्मों के लोग इसे स्वीकार ही नहीं करते।
लेकिन जब गीता को शिव की वाणी माना जाए,
तो यह सार्वभौमिक शास्त्र बन जाता है –
पूरी दुनिया में लागू।
मुरली प्रमाण
🔹 मुरली – 25 दिसम्बर 2024
“भगवानो वाच” का अर्थ है – स्वयं शिव बाबा की वाणी।
श्रीकृष्ण को गायक मानने से सारा सत्य छिप जाता है।
🔹 मुरली – 10 फरवरी 2024
“गीता ज्ञान से ही स्वर्ग की स्थापना होती है।
गायक है स्वयं शिव,
जो ब्रह्मा के तन द्वारा बोलते हैं।”
निष्कर्ष
गीता का असली गायक शिव परमात्मा है, न कि श्रीकृष्ण।
जब यह सत्य स्पष्ट होगा,
तब गीता का महात्म्य विश्व में पुनः सर्वोच्च स्थान प्राप्त करेगा।