“Make every virtue, every power your personal form and become like the Father”

अव्यक्त मुरली-(01) “हर गुण, हर शक्ति को निजी स्वरूप बनाओ बाप समान बनो”03-01-1982

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“आज बापदादा विशेष डबल विदेशियों से मिलने आये – देखिए उनके भाग्य की कमाल!”


“बापदादा की विशेष मुलाक़ात – डबल विदेशी बच्चों की चमत्कारी कहानी”


1. स्वागत: भाग्यशाली आत्माओं की सभा

  • आज बापदादा विशेष रूप से डबल विदेशी बच्चों से मिलने पधारे हैं।

  • सभी बच्चे अपने-अपने स्थानों से “स्वीट होम” यानी मधुबन में पहुँच चुके हैं।

  • यहाँ हर आत्मा स्वतः ही सर्व प्राप्तियों का अनुभव करती है, क्योंकि यह है वरदान भूमि।


2. समीप और दूर का उल्टा समीकरण

  • भारत में नजदीक रहने वाली कई आत्मायें अभी तक खोज में हैं।

  • लेकिन जो डबल विदेशी आत्मायें हैं, उन्होंने सुदूर रहते हुए भी बाप को पहचान लिया।

  • दूर रहने वाले समीप हो गए और समीप रहने वाले दूर – यह भाग्य की कमाल है।


3. त्याग और प्राप्ति का सौदा: सबसे श्रेष्ठ व्यापार

  • डबल विदेशी बच्चों ने पहले प्राप्ति को अनुभव किया, फिर त्याग किया।

  • व्यर्थ बातों का त्याग कर पदमों की प्राप्ति की – छोड़ा क्या और पाया क्या!

  • यह त्याग नहीं, श्रेष्ठ व्यापार है – त्याग भी चतुराई से किया गया।


4. धर्म से देवता बनने की यात्रा

  • कई बच्चे क्रिश्चियन थे, अब कृष्णपुरी के निवासी बन गये।

  • जो तने से अलग थे, अब वैरायटी कल्प वृक्ष के आदि सनातन धर्म के बन गये – फाउंडेशन बन गये।

  • अल्पकालीन नींद छोड़ी और स्वयं ‘सोना’ (गोल्ड) बन गये।


5. नींद और खान-पान का त्याग: स्वास्थ्य और शक्ति की प्राप्ति

  • नींद का त्याग किया, क्योंकि अमृतवेला का अलौकिक अनुभव उससे बड़ा था।

  • खानपान में संयम बरता और बीमारियों से मुक्ति पाई – हेल्थ और वेल्थ दोनों मिली।


6. तीव्र गति और माया की परीक्षा

  • विदेशी आत्मायें जिस दिशा में लगती हैं, पूर्ण समर्पण के साथ लगती हैं।

  • कभी-कभी माया की थोड़ी भी रुकावट उन्हें हिला देती है, परन्तु लगन के कारण वे पार हो जाती हैं।

  • वे महावीर हैं, नाज़ुक नहीं – ड्रामा में माया को भगाने के साधन भी जानती हैं।


7. मुहब्बत या मेहनत – आप कहां खड़े हैं?

  • क्या आप सदा बाप की याद में समाए रहते हैं या बार-बार याद करने की मेहनत करते हैं?

  • बाप समान बनना है तो “याद स्वरूप, गुण स्वरूप, शक्ति स्वरूप” बनना होगा।

  • जैसे अवगुण नेचर बन जाते हैं, वैसे ही दिव्य गुण भी स्वभाव बन जाएं।


8. सूर्यवंशी या चन्द्रवंशी?

  • लक्ष्य क्या है? थोड़े में राजी हो जाना या सम्पूर्ण प्राप्ति करना?

  • सूर्यवंशी बनने का संकल्प ही आपको सदा उमंग-उत्साह में रखेगा।


9. अब विश्व की आत्माओं की पुकार – “हमें हमारे देव चाहिए”

  • दुनिया सिर्फ भगवान को नहीं, अपने पूज्य आत्माओं को पुकार रही है।

  • हर आत्मा अपने पैगंबर, मसीहा, देवता को याद कर रही है।

  • अब वे पूज्य आत्मायें कौन हैं? आप सभी ब्राह्मण आत्मायें।


10. आत्माओं की पुकार का उत्तर: “अब देवता प्रत्यक्ष होंगे”

  • इस कॉन्फ्रेंस के बाद देवता प्रत्यक्ष होंगे।

  • अब इस से पहले सभी ब्राह्मण आत्मायें स्वयं को देवता रूप में प्रत्यक्ष करें।


11. एकता का संकल्प: कार्य की सफलता का आधार

  • हर ब्राह्मण आत्मा इस सेवा को “मेरी ज़िम्मेवारी” माने।

  • ब्राह्मण परिवार के इस महाकिले की हर ईंट मजबूत हो – यही संकल्प हो।


12. बापदादा का प्यार और वरदान

  • बापदादा कहते हैं – जितना बच्चे याद करते हैं, उतना बाप भी याद प्यार देते हैं।

  • ब्राजील जैसी दूर देशों से भी जो बच्चे आये हैं – वे दिल से समीप हैं।

  • उन्हें बापदादा की विशेष मुबारक और विजयी भव का वरदान।

“आज बापदादा विशेष डबल विदेशियों से मिलने आये – देखिए उनके भाग्य की कमाल!”

प्रश्नोत्तर श्रंखला |


Q1. बापदादा आज किन विशेष आत्माओं से मिलने आये?
उत्तर:बापदादा आज विशेष रूप से “डबल विदेशी” बच्चों से मिलने मधुबन पधारे। वे आत्माएं जो दूर देशों से आकर भी परमात्मा को पहचान गईं – उनका भाग्य अतुलनीय है।


Q2. समीप और दूर में उल्टा समीकरण क्या है?
उत्तर:जो आत्माएं भारत में समीप रहते हुए भी नहीं पहचान सकीं, वे अब भी खोज में हैं। लेकिन दूर देशों से आई आत्माएं समीप बन गईं। यह उनके भाग्य का चमत्कार है।


Q3. डबल विदेशियों ने त्याग कैसे किया और उन्हें क्या प्राप्त हुआ?
उत्तर:उन्होंने व्यर्थ बातों का त्याग कर पदमों की प्राप्ति की। यह त्याग नहीं, श्रेष्ठ व्यापार था। पहले अनुभव किया, फिर चतुराई से त्याग किया।


Q4. धर्म परिवर्तन से क्या आध्यात्मिक रूपांतरण हुआ?
उत्तर:जो आत्माएं पहले क्रिश्चियन, मुस्लिम या अन्य धर्म में थीं – वे अब आदि सनातन धर्म की फाउंडेशन आत्माएं बन गईं। धर्म से देवता बनने की यात्रा चमत्कारी रही।


Q5. डबल विदेशी बच्चों ने नींद और खान-पान में क्या परिवर्तन किया?
उत्तर:उन्होंने नींद का त्याग कर अमृतवेला का अनुभव लिया। सात्विक खानपान अपनाकर बीमारियों से मुक्ति पाई – हेल्थ और वेल्थ दोनों अर्जित की।


Q6. माया की परीक्षा में वे कैसे पास हुए?
उत्तर:विदेशी आत्माएं नाज़ुक नहीं, महावीर हैं। माया की थोड़ी सी रुकावट उन्हें हिला देती है, लेकिन पूर्ण समर्पण के कारण वे हर परीक्षा में पार हो जाती हैं।


Q7. याद में मुहब्बत है या मेहनत?
उत्तर:यदि आत्मा बाप की याद में समाई हुई है, तो वह मुहब्बत में है। बार-बार याद करने की मेहनत दर्शाती है कि अभी अभ्यास बाकी है। लक्ष्य है – “याद स्वरूप, गुण स्वरूप, शक्ति स्वरूप” बनना।


Q8. क्या आप सूर्यवंशी बनना चाहते हैं या चंद्रवंशी?
उत्तर:संपूर्ण प्राप्ति और सदा उमंग-उत्साह का अनुभव केवल सूर्यवंशी आत्माएं करती हैं। चंद्रवंशी थोड़े में राजी हो जाते हैं। यह आत्मा का अपना चुनाव है।


Q9. विश्व की आत्मायें किसे पुकार रही हैं?
उत्तर:दुनिया सिर्फ भगवान को नहीं, अपने पूज्य देवताओं को पुकार रही है। वे पूज्य आत्माएं आप ब्राह्मण आत्माएं ही हैं – जिन्हें अब देवता रूप में प्रत्यक्ष होना है।


Q10. अब कौन प्रत्यक्ष होंगे?
उत्तर:अब देवता प्रत्यक्ष होंगे। लेकिन इससे पहले, ब्राह्मण आत्माओं को ही देवता स्वरूप में स्वयं को प्रस्तुत करना होगा – सेवा की यह अंतिम पुकार है।


Q11. कार्य की सफलता का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर:“एकता का संकल्प” – हर ब्राह्मण आत्मा को यह सेवा अपनी ज़िम्मेवारी माननी है। जब हर ईंट मजबूत होगी, तभी सेवा भवन मजबूत बनेगा।


Q12. बापदादा का संदेश और वरदान क्या है?
उत्तर:बापदादा कहते हैं – “जितना बच्चे मुझे याद करते हैं, उतना ही मैं भी याद करता हूँ।” ब्राजील जैसे सुदूर देशों से आये बच्चों को विशेष मुबारक और “विजयी भव” का वरदान प्राप्त हुआ है।

Disclaimer (डिस्क्लेमर):

यह वीडियो आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार हेतु है और इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, व्यक्ति या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। यह प्रस्तुति ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की शिक्षाओं पर आधारित है, जो आत्मा, परमात्मा और विश्व परिवर्तन के गूढ़ रहस्यों को उजागर करती है। कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण करें।

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