(86)Determined wisdom and victory – the attainment of divinity through firm faith

(86)निश्र्धय-बुध्दि विजयन्ति-ट्टढ विश्वास से दिव्यता की प्राप्ति

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“निश्चय बुद्धि विजयंती | दृढ़ विश्वास से दिव्यता की प्राप्ति | Geeta Gyan by Shiv Baba”


 प्रारंभ

ओम शांति।
आज हम गीता ज्ञान का 86वाँ पाठ करेंगे।
विषय है — “निश्चय बुद्धि विजयंती – दृढ़ विश्वास से दिव्यता की प्राप्ति।”


 1. निश्चय आत्मा की विजय

भगवान कहते हैं —
“निश्चय आत्मा की ही विजय होती है।”
जिस आत्मा को दृढ़ निश्चय है, वही सफल होती है।
संशय आत्मा का हमेशा विनाश होता है।


 2. जीवन का आधार — दृढ़ विश्वास

निश्चय ही जीवन का आधार है।
बिना दृढ़ विश्वास के कोई भी आध्यात्मिक यात्रा सफल नहीं हो सकती।
परिवर्तन का पहला कदम है — स्वयं में विश्वास।

 मैं अपनी पुरानी आदतें छोड़ सकता हूं।
 मैं अपने संस्कार बदल सकता हूं।
 मैं योगी बनकर दिव्यता को प्राप्त कर सकता हूं।


 3. उदाहरण — विद्यार्थी

एक विद्यार्थी सोचता है कि वह कभी प्रथम नहीं आएगा।
लेकिन जब दृढ़ निश्चय कर मेहनत करता है, तो वह टॉप कर जाता है।
उसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन में भी निश्चय से मनोबल बढ़ता है।


 4. परमात्मा में निश्चय

परमात्मा में दृढ़ निश्चय ही निर्भयता का आधार है।
जब तक भगवान के अस्तित्व में विश्वास नहीं, स्थिरता संभव नहीं।

विश्वास होना चाहिए कि:
 परमात्मा सर्वशक्तिमान है।
 मैं उसकी संतान हूं।
 इसलिए मैं भी पवित्र, शांत और शक्तिशाली हूं।


 5. ज्ञान के तथ्यों में निश्चय

ज्ञान का आधार है —
 परमधाम का अस्तित्व
 आत्मा का पुनर्जन्म
 कर्म और संस्कार का सिद्धांत

जो जैसा करेगा, वैसा ही फल पाएगा।
बुरे का अंत बुरा और भले का अंत भला।


 6. मुरली का संदेश (16 मई 2025)

शिव बाबा ने कहा:
“बच्चे, दृढ़ निश्चय बुद्धि बनो।
निश्चय बुद्धि बनोगे तो विजय तुम्हारी है।
संशय बुद्धि बनोगे तो हार निश्चित है।”


 निष्कर्ष

निश्चय आत्मा को महान बनाता है।
दृढ़ निश्चय ही आचरण को श्रेष्ठ और दिव्य बनाता है।

“निश्चय बुद्धि विजयंती – प्रश्न और उत्तर | Geeta Gyan”


प्रश्न 1: निश्चय आत्मा की विजय क्यों कहलाता है?

उत्तर: क्योंकि जिस आत्मा को दृढ़ निश्चय होता है, वही जीवन और आध्यात्मिक साधना में सफल होती है। संशय आत्मा हमेशा विनाश की ओर जाती है।


प्रश्न 2: आध्यात्मिक यात्रा में विश्वास का महत्व क्या है?

 उत्तर: बिना दृढ़ विश्वास के कोई भी आध्यात्मिक यात्रा सफल नहीं हो सकती। आत्मा में निश्चय ही परिवर्तन और प्रगति का पहला कदम है।


 प्रश्न 3: स्वयं में दृढ़ विश्वास से क्या लाभ होता है?

उत्तर:

  • पुरानी आदतें छोड़ी जा सकती हैं।

  • संस्कार बदले जा सकते हैं।

  • आत्मा योगी बनकर दिव्यता को प्राप्त कर सकती है।


 प्रश्न 4: एक विद्यार्थी का उदाहरण क्यों दिया गया है?

 उत्तर: जैसे विद्यार्थी निश्चय कर मेहनत करता है तो टॉप कर जाता है, वैसे ही आध्यात्मिक जीवन में निश्चय से मनोबल बढ़ता है और सफलता मिलती है।


 प्रश्न 5: परमात्मा में निश्चय क्यों आवश्यक है?

 उत्तर: परमात्मा में विश्वास से आत्मा को निर्भयता और स्थिरता मिलती है। जब तक भगवान के अस्तित्व पर निश्चय नहीं, तब तक जीवन में शांति और शक्ति स्थिर नहीं रहती।


 प्रश्न 6: ज्ञान के कौन-कौन से तथ्य निश्चय करने योग्य हैं?

 उत्तर:

  1. परमधाम का अस्तित्व

  2. आत्मा का पुनर्जन्म

  3. कर्म और संस्कार का सिद्धांत


 प्रश्न 7: शिव बाबा ने मुरली (16 मई 2025) में क्या संदेश दिया?

 उत्तर: शिव बाबा ने कहा —
“बच्चे, दृढ़ निश्चय बुद्धि बनो। निश्चय बुद्धि बनोगे तो विजय तुम्हारी है। संशय बुद्धि बनोगे तो हार होगी।”

Disclaimer

यह वीडियो केवल आध्यात्मिक शिक्षा और ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, मत, संप्रदाय या व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।
कृपया इस ज्ञान को आत्म-विकास और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण के लिए ही ग्रहण करें।

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