Life changes as soon as the third eye opens. Why?

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प्रश्न का मन्थन:तीसरा नेत्र खुलते ही बदल जाती है जिंदगी। क्यों?

अध्याय: तीसरा नेत्र खुलते ही बदल जाती है जिंदगी


 भूमिका

लोग कहते हैं – “तीसरा नेत्र खुलते ही जीवन बदल जाता है।”
लेकिन सवाल उठता है:

  • तीसरा नेत्र क्या है?

  • यह कहाँ होता है?

  • इसे कैसे पाया जा सकता है?

इस अध्याय में हम इन प्रश्नों के उत्तर ब्रह्मा कुमारी मुरली ज्ञान और उदाहरणों के माध्यम से जानेंगे।


 प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: तीसरा नेत्र क्या है?

उत्तर: तीसरा नेत्र कोई भौतिक आँख नहीं है। यह ज्ञान का नेत्र है।
जब परमात्मा आत्मा को सत्य ज्ञान देते हैं, तब आत्मा की नींद खुलती है।
इसी जागरण को “ज्ञान का तीसरा नेत्र खुलना” कहा जाता है।

साकार मुरली – 19 जुलाई 1968
“मैं आकर बच्चों का तीसरा नेत्र खोलता हूँ। यह कोई शारीरिक आँख नहीं, यह ज्ञान की आँख है।”


प्रश्न 2: तीसरा नेत्र कहाँ है?

उत्तर: लोग इसे भृकुटी के बीच मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह आत्मा में है।

आत्मा का स्थान: भृकुटी के पीछे, मस्तिष्क के भीतर रीढ़ की हड्डी के ऊपरी जोड़ पर।
जब परमात्मा से ज्ञान मिलता है, तब आत्मा का तीसरा नेत्र खुलता है।


प्रश्न 3: तीसरे नेत्र का अर्थ क्या है?

उत्तर: तीसरा नेत्र = ज्ञान की दृष्टि
यह हमें तीन महत्वपूर्ण बातें दिखाता है:

  1. आत्मा की पहचान

    • मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं।

    • आत्मा अजर-अमर है, शरीर नाशवान है।

    साकार मुरली – 15 मार्च 1965
    “बच्चे, तुम आत्मा हो, शरीर तुम्हारा वेश है।”

  2. परमात्मा की पहचान

    • परमात्मा निराकार, अजन्मा और सर्वज्ञ है।

    • वे शरीर नहीं बनाते, परकाया प्रवेश से ही ज्ञान देते हैं।

    साकार मुरली – 22 जून 1966
    “देहधारी को सर्वज्ञ नहीं कहा जाता। परमात्मा निराकार है, अजन्मा है।”

  3. ड्रामा का रहस्य

    • सृष्टि चक्र 5000 वर्ष का हूबहू रिपीट होने वाला ड्रामा है।

    • इसमें एक सेकंड भी आगे-पीछे नहीं हो सकता।

    साकार मुरली – 5 जुलाई 1971
    “यह ड्रामा इतना एक्यूरेट है कि परमात्मा भी इसमें परिवर्तन नहीं कर सकते।”


प्रश्न 4: तीसरा नेत्र कैसे जीवन में लाभ देता है?

उत्तर:

  • प्रश्न समाप्त हो जाते हैं।

  • आत्मा निश्चय, संतुष्टि और शांति में रहती है।

  • जीवन प्रसन्न और निश्चिंत हो जाता है।

अव्यक्त मुरली – 21 जनवरी 1970
“जहाँ प्रश्न है वहाँ अशांति है। जहाँ निश्चय है वहाँ प्रसन्नता।”


 उदाहरण से स्पष्टता

दीपक और अंधेरा:
अंधेरे कमरे में दीपक जलते ही सब वस्तुएँ साफ़ दिखने लगती हैं।
इसी तरह तीसरा नेत्र खुलते ही आत्मा, परमात्मा और ड्रामा का रहस्य स्पष्ट हो जाता है।


 निष्कर्ष

  • तीसरा नेत्र = जीवन का टर्निंग पॉइंट

  • यह आत्मा की सच्ची पहचान है

  • परमात्मा से मिलन है

  • ड्रामा का गहरा रहस्य है

मुरली कहती है:
“जिसका तीसरा नेत्र खुल गया, उसे मुक्ति और जीवन-मुक्ति मिलना निश्चित है।”

डिस्क्लेमर: यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ के ईश्वरीय ज्ञान और मुरली के आधार पर बनाया गया है। इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक समझ देना है, न कि किसी धर्म, मत या परंपरा की आलोचना करना। कृपया इसे अपनी आत्मिक उन्नति और ज्ञान वृद्धि के लिए ही ग्रहण करें।

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