AAT.(21)मेरा कितनी आत्माओं से कितना पार्ट है?
आत्मा का रहस्य
आत्मा के बारे में हम जानने का प्रयास कर रहे हैं।
आज का 21वा विषय है।
मेरा कितनी आत्माओं से कितना पार्ट
मेरा क्वेश्चन है मेरा कितनी आत्माओं से कितना पार्ट है?
तो बताना मुश्किल है पता नहीं कितनी आदमी
रहस्य
जो केवल समय ही बताता है।
समय ही बताता है।
हम रोज अनगिनत आत्माओं से मिलते हैं, जुड़ते हैं।
कार्मिक लेनदेन करते रहते हैं।
लेकिन प्रश्न उठता है—
आखिर मेरा कितना पार्ट कितनी आत्माओं से?
कितना पार्ट है? कितनी आत्माओं से?
और यह पहले से क्यों नहीं बताया जाता?
क्वेश्चन
क्या परमात्मा हमारा पूरा पार्ट पहले से बता सकता है?
क्या परमात्मा हमारा पूरा पार्ट पहले से बता सकता है?
क्यों भाई कोई बताएगा?
भाई जी नहीं बता सकता।
नहीं बता सकता भाई जी।
परमात्मा नहीं बता सकता।
परमात्मा जाने—
परमात्मा ने मुरली में कई बार क्लियर कर दिया कि मैं किसी के अंदर नहीं…
हाँ परमात्मा कहते हैं हाँ वे जानते हैं—
हाँ भाई जी जानते हैं, पर बता नहीं सकते।
लेकिन समय से पहले नहीं बताते।
जो बताने का समय है उस समय बताएंगे।
समय से पहले नहीं बताते।
शिव बाबा कहते हैं—
जो जितना समय पर बताना है उतना ही बताऊंगा।
नंबर एक — परमात्मा की अटल स्टिकता
Divine Accuracy
परमात्मा स्वयं एक्यूरेट है।
वो कोई भी पार्ट समय से पहले अपना भी नहीं बजा सकता।
परमात्मा समय, सिद्धि और योग्यता के अनुसार ही ज्ञान प्रकट करते हैं।
वे ज्ञान, नेचर, रीति और सीक्रेसी के नियम से देते हैं।
उन्होंने जो कुछ भी बताना है—
किस आधार पर बताना है?
ज्ञान, नेचर, रीति और सीक्रेसी के नियम से देते हैं।
शिव बाबा कहते हैं—
जो मैंने कल बताना है वह आज नहीं बताऊंगा।
एक सेकंड पहले भी नहीं बताऊंगा।
ड्रामा में नेचुरल है न…
वही बात आ जाएगी।
ड्रामा तो गड़बड़ हो जाएगा न। एक्यूरेसी खत्म हो जाएगी न।
नंबर दो — समय से पहले ज्ञान क्यों नहीं बताते?
क्योंकि यदि आत्मा को पहले से यह ज्ञात हो जाए—
1. वह प्राकृतिक व्यवहार नहीं कर पाएगी।
जैसे यदि किसी को बता दें कि आज जाकर तुम्हारी लड़ाई होगी—
तो वह पहले से बचाव करेगा, अंदर की नेचुरलिटी खत्म हो जाएगी।
2. कर्मों का स्वभाव कृत्रिम हो जाएगा।
फिर हर चीज आर्टिफिशियल हो जाएगी, नेचुरल नहीं रहेगी।
3. जीवन कैलकुलेटिव व मैनिपुलेटिव हो जाएगा।
हर कदम गणना से भरा होगा—
यह खाना है, वह नहीं खाना;
यहां नहीं जाना; वहां न जाने से बीमारी नहीं होगी…
फिर ड्रामा एक्यूरेट नहीं रहेगा।
शिव बाबा कहते हैं—
ड्रामा स्वाभाविक है, कृत्रिम नहीं।
बार-बार पूछा जाता है—
ड्रामा किसने बनाया? कब बनाया?
कैसे बनाया?
ड्रामा स्वाभाविक है, बनावटी नहीं।
नंबर तीन — ड्रामा की मिस्ट्री एंड ब्यूटी
1. ड्रामा Reveal Pattern में unfold होता है।
जो जैसे-जैसे खुलता है वैसा ही दिखाई देता है।
पहले नहीं पता लग सकता, वरना ड्रामा ड्रामा नहीं रहेगा।
रहस्य तभी सार्थक है जब समय आए।
समय से पहले सब व्यर्थ हो जाएगा।
यदि रहस्य समय से पहले मिल जाए—
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खेल ड्रामेटिक नहीं रहेगा
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भूमिका का आनंद समाप्त हो जाएगा
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पेपर का अर्थ खत्म हो जाएगा
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जीवन सीख नहीं देगा
नंबर चार — ज्ञान का सही समय (Spiritual Timing Law)
Knowledge = Experience
ज्ञान सिर्फ इंफॉर्मेशन नहीं, अनुभव है।
जब तक अनुभव न हो, ज्ञान की वैल्यू नहीं।
शिव बाबा कहते हैं—
समय आए बिना रहस्य खुल नहीं सकता।
ड्रामा एक्यूरेट है।
पहले बता दिया तो एक्यूरेसी खत्म हो जाएगी।
नंबर पाँच — विश्वास और धैर्य
यदि परमात्मा में विश्वास और धैर्य हो—
यही दिव्य यात्रा है।
विश्वास + धैर्य = जीवन में सुधार
शिव बाबा कहते हैं—
समय पर सब कुछ स्पष्ट।
समय से पहले कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सकता।
जिसको यह समझ आ जाए, उसके जीवन में—
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धैर्य
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संतोष
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शांति
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स्वीकार्यता (Acceptance)
—ये चारों चीजें आ जाती हैं।
उदाहरण
1. सूर्य
सूर्य अपने समय पर निकलता है।
ना एक सेकंड पहले, ना एक सेकंड बाद।
बादल आ जाए तो एक अलग बात है…
लेकिन सूर्य अपने समय पर ही निकलता है।
इसी प्रकार—
आत्मा का पार्ट भी टाइम रिवेलेशन है।
अपने समय पर ही खुलेगा।
2. बीज का अंकुरण
बीज को जबरदस्ती फोड़ नहीं सकते।
स्वाभाविक विकास नष्ट हो जाएगा।
नमी, तापमान, परिस्थितियाँ—
सब मिलकर बीज को उसके समय पर अंकुरित करती हैं।
इसी प्रकार—
हर आत्मा का पार्ट एक्यूरेट है।
पहले नहीं खुल सकता।

