(25)Prajapati Brahma and Mama Saraswati—the divine father-daughter relationship. Cat.

S-B:-(25)प्रजापिता ब्रह्मा और मम्मा सरस्वती — पिता पुत्री का दिव्य रिश्ता। बिल्ली।

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प्रजापिता ब्रह्मा और मम्मा सरस्वती — पहला दिव्य पिता-पुत्री संबंध

  1. 1. प्रस्तावना — वह दिव्य संबंध जो सृष्टि की जड़ है

    शिव बाबा जब इस पुराने, दुखी जगत में नए “आध्यात्मिक विश्व” (ब्राह्मण दुनिया) की स्थापना करते हैं—
    तो इसके लिए कोई लौकिक शरीर नहीं चुनते।
    वे चुनते हैं—
    ब्रह्मा बाबा (प्रजापिता), परमात्मा के प्रथम माध्यम।

    और इस नई आध्यात्मिक सृष्टि की
    पहली आत्मा, पहली संतान बनीं— मम्मा सरस्वती (ओम राधे)।

    यही था सृष्टि का पहला आध्यात्मिक (Spiritual Father–Daughter) रिश्ता


    2. ब्रह्मा बाबा — ईश्वर द्वारा चुना गया प्रथम माध्यम

    शिव बाबा का ज्ञान जब पहली बार बोलना शुरू हुआ—
    तो वह ब्रह्मा बाबा के मुख द्वारा बोला गया।

    ✔ मुरली प्रमाण

    साकार मुरली 8 मार्च 1968
    “मैं निराकार हूँ। मैं ब्रह्मा के द्वारा ब्राह्मण सृष्टि रचता हूँ। इसलिए यह हुआ प्रजापिता ब्रह्मा।”

    इसलिए ब्रह्मा बाबा कहलाते हैं—
    प्रजापिता (Father of Humanity).

    ✔ उदाहरण

    जैसे बीज से पूरा वृक्ष निकलता है,
    वैसे ही परमात्मा के ज्ञान-बीज से
    ब्रह्मा बाबा वह जड़ बने
    जिससे पूरा ब्राह्मण परिवार निकला।


    3. मम्मा — ब्रह्मा बाबा की पहली आध्यात्मिक संतान

    इस नए आध्यात्मिक परिवार में
    सबसे पहले जिस आत्मा ने ज्ञान को पूर्ण निष्ठा से स्वीकार किया—
    वह थीं ओम राधे मम्मा, जिन्हें “सरस्वती” कहा गया।

    ✔ मुरली प्रमाण

    साकार मुरली 1 फरवरी 1969
    “ब्रह्मा बाबा है प्रजापिता और सरस्वती उनकी पहली संतान।”

    साकार मुरली 25 मई 1969
    “सरस्वती ज्ञान की देवी है। वह ब्रह्मा की प्रथम संतान है।”

    ✔ उदाहरण

    जैसे पिता अपनी सम्पूर्ण रीति-नीति पुत्री में देखते हैं,
    वैसे ही ब्रह्मा बाबा को लगा कि
    इस ज्ञान को आगे ले जाने की अधिकारता मम्मा में है।


    4. यह रिश्ता देह का नहीं — आत्मा का था

    यह कोई लौकिक रिश्ता नहीं था।
    न रक्त संबंध, न परिवार संबंध।

    यह रिश्ता था—
    ज्ञान, योग, मर्यादा और परमात्म सेवा का संबंध।

    ✔ अव्यक्त मुरली

    अव्यक्त मुरली 21 जनवरी 1969
    “ब्रह्मा और सरस्वती का संबंध देह का नहीं, ज्ञान और योग का आध्यात्मिक संबंध है।”

    यह संबंध “कर्म” से नहीं,
    बल्कि “ईश्वर-कार्य” से जुड़ा था।


    5. मम्मा — माताओं की मुखिया, शक्ति स्वरूप

    यज्ञ के प्रारंभ (1937) में
    महिलाओं को आगे लाने की ज़िम्मेदारी मम्मा ने ली।

    ✔ मुरली प्रमाण

    साकार मुरली 14 जुलाई 1968
    “माताएं शक्ति हैं। मम्मा जगदंबा ही माताओं की मुखिया है।”

    मम्मा ने महिलाओं को
    लौकिक सीमाओं से निकालकर
    सशक्त, आत्मनिष्ठ, ईश्वरीय कर्मयोगी बनाया।

    ✔ उदाहरण

    जैसे एक दीपक कई दीपक जलाता है,
    वैसे ही मम्मा ने हजारों माताओं में
    शक्ति, प्रेम और मर्यादा का प्रकाश फैलाया।


    6. शिव बाबा का कार्य — ब्रह्मा बाबा व मम्मा के संयुक्त सहयोग से

    सृष्टि की स्थापना तीन चरणों में हुई—

    • संकल्प — शिव बाबा

    • सृष्टि-रचना — ब्रह्मा बाबा

    • पालन और सेवा विस्तार — मम्मा सरस्वती

    ✔ मुरली प्रमाण

    साकार मुरली 16 फरवरी 1969
    “ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचाई जाती है। सरस्वती द्वारा पालन किया जाता है।”

    मम्मा ने ब्रह्मा बाबा की शुद्धता, आज्ञापालन, मर्यादा को
    जीवन में प्रैक्टिकल कर दिखाया।


    7. यह पिता–पुत्री का रिश्ता हमें क्या सिखाता है?


    (1) आज्ञापालन — ज्ञान में पहला कदम

    जैसे मम्मा ने बाप की प्रत्येक रीति को माना—
    वैसे ही ब्रह्मा कुमारियों का मूल संस्कार
    आज्ञा पालन बनता है।

    ✔ मुरली प्रमाण

    मुरली 18 जनवरी 1970
    “सच्ची संतान वही जो बाप के कार्य में सहयोगी बने।”


    (2) सेवा — बाप के संकल्प को आगे बढ़ाना

    मम्मा ने हर आत्मा को यह महसूस कराया—
    “तुम ईश्वर की संतान हो। तुम श्रेष्ठ हो।”

    उनकी यह सेवा
    आज विश्व-स्तर पर BK परिवार की पहचान है।


    (3) पवित्रता — शक्ति और सौम्यता का संतुलन

    मम्मा सिखाती हैं—
    पवित्रता कमजोरी नहीं,
    बल्कि परम शक्ति है।

    उनका जीवन उदाहरण था—
    शांति + शक्ति + मर्यादा।


    8. निष्कर्ष — पहली दिव्य पिता–पुत्री जोड़ी

    • ब्रह्मा बाबा — सृष्टि के आध्यात्मिक पिता

    • मम्मा — ज्ञान की देवी, पहली संतान

    • शिव बाबा — परमपिता, सबका Father of Souls

    तीनों का संयुक्त कार्य बनता है—
    ईश्वरीय विश्व-परिवार का आरंभ।

    यह पहला आध्यात्मिक संबंध
    हमें भी सिखाता है—
    आत्मा बनो, पवित्र बनो, ईश्वरीय सेवा में लगो।

  2. प्रजापिता ब्रह्मा और मम्मा सरस्वती — पहला दिव्य पिता–पुत्री संबंध

    (Questions & Answers Format)


    1. प्रश्न : सृष्टि का पहला आध्यात्मिक संबंध कौन-सा था?

    उत्तर :
    जब शिव बाबा ने इस पुराने दुखी जगत में आध्यात्मिक सृष्टि की स्थापना की, तो
    उन्होंने प्रथम माध्यम के रूप में ब्रह्मा बाबा (प्रजापिता) को चुना।
    और इस नई सृष्टि की पहली आत्मा और पहली संतान बनीं — मम्मा सरस्वती (ओम राधे)।

    यही संबंध बना—
    सृष्टि का पहला आध्यात्मिक पिता–पुत्री संबंध।


    2. प्रश्न : शिव बाबा ने ब्रह्मा बाबा को ही प्रथम माध्यम क्यों चुना?

    उत्तर :
    क्योंकि ब्रह्मा बाबा वह आत्मा थीं जो

    • सरल

    • पवित्रता के योग्य

    • पूर्ण आज्ञाकारी

    • परमात्म-संस्कारों को धारण करने वाली
      और परमात्म संदेश को आगे ले जाने की क्षमता रखने वाली थीं।

    Murli प्रमाण :

    साकार मुरली – 8 मार्च 1968
    “मैं निराकार हूँ। मैं ब्रह्मा के द्वारा ब्राह्मण सृष्टि रचता हूँ। इसलिए यह हुआ प्रजापिता ब्रह्मा।”


    3. प्रश्न : ब्रह्मा बाबा को “प्रजापिता” क्यों कहा जाता है?

    उत्तर :
    क्योंकि वे सारे मानव जगत के
    आध्यात्मिक पिता (Father of Humanity)
    बनते हैं।
    उनके माध्यम से ही परमात्मा ने
    ब्राह्मण कुल की नई सृष्टि रची।

    उदाहरण :

    जैसे बीज से पूरा वृक्ष निकलता है,
    वैसे ही ज्ञान-बीज के आधार पर
    ब्रह्मा बाबा से संपूर्ण ब्राह्मण परिवार निकला।


    4. प्रश्न : मम्मा सरस्वती को पहली आध्यात्मिक संतान क्यों कहा जाता है?

    उत्तर :
    क्योंकि ज्ञान की सबसे पहली पात्र आत्मा मम्मा थीं—
    जिन्होंने पूर्ण निष्ठा, समर्पण और योग के साथ
    परमात्म-ज्ञान को धारण किया और आगे बढ़ाया।

    Murli प्रमाण :

    1 फरवरी 1969
    “ब्रह्मा बाबा है प्रजापिता और सरस्वती उनकी पहली संतान।”

    25 मई 1969
    “सरस्वती ज्ञान की देवी है। वह ब्रह्मा की प्रथम संतान है।”

    उदाहरण :

    जैसे पिता अपना ज्ञान और रीति-रिवाज
    पहली संतान में आगे बढ़ते हुए देखते हैं,
    वैसे ही ब्रह्मा बाबा ने मम्मा में
    ईश्वरीय ज्ञान की सम्पूर्ण धारणा देखी।


    5. प्रश्न : ब्रह्मा–सरस्वती का रिश्ता लौकिक क्यों नहीं था?

    उत्तर :
    क्योंकि यह संबंध
    शरीर का, जाति का या रक्त-संबंध नहीं था।
    यह संबंध था—
    ज्ञान, योग, पवित्रता, सेवा और ईश्वर-कार्य का।

    Murli प्रमाण :

    अव्यक्त मुरली – 21 जनवरी 1969
    “ब्रह्मा और सरस्वती का संबंध देह का नहीं, ज्ञान और योग का आध्यात्मिक संबंध है।”


    6. प्रश्न : BK इतिहास में मम्मा का इतना ऊँचा स्थान क्यों है?

    उत्तर :
    क्योंकि मम्मा थीं—

    • माताओं की मुखिया

    • जगदंबा शक्ति

    • ईश्वरीय मर्यादा की प्रतिमूर्ति

    • योग, पवित्रता और सेवा का आदर्श

    Murli प्रमाण :

    14 जुलाई 1968
    “माताएं शक्ति हैं। मम्मा जगदंबा ही माताओं की मुखिया है।”

    उदाहरण :

    जैसे एक दीपक अनेक दीपक जलाता है,
    वैसे ही मम्मा ने हजारों माताओं के जीवन में
    शक्ति, मर्यादा और आत्म-विश्वास जागृत किया।


    7. प्रश्न : ब्रह्मा बाबा और मम्मा सरस्वती का संयुक्त कार्य क्या था?

    उत्तर :
    सृष्टि-स्थापना का कार्य तीन भागों में हुआ—

    1. संकल्प — शिव बाबा

    2. सृष्टि-रचना — ब्रह्मा बाबा

    3. पालन और सेवा विस्तार — मम्मा सरस्वती

    Murli प्रमाण :

    16 फरवरी 1969
    “ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचाई जाती है। सरस्वती द्वारा पालन किया जाता है।”


    8. प्रश्न : इस दिव्य पिता–पुत्री संबंध से हमें क्या सीख मिलती है?

    उत्तर :


    (1) आज्ञापालन — ज्ञान का प्रथम कदम

    जैसे मम्मा ने हर रीति का दृढ़ पालन किया,
    वैसे ही एक सच्चे ब्राह्मण की पहचान है—
    बाप की श्रमतों पर चलना।

    Murli — 18 जनवरी 1970
    “सच्ची संतान वही जो बाप के कार्य में सहयोगी बने।”


    (2) ईश्वरीय सेवा — बाप के संकल्प को आगे बढ़ाना

    मम्मा का जीवन था—
    “हर आत्मा को परमात्म-संतान बनाना।”


    (3) पवित्रता — शक्ति व सौम्यता का संतुलन

    मम्मा सिखाती हैं—
    पवित्रता कमजोरी नहीं, परम शक्ति है।

    उनका जीवन था—
    शांति + शक्ति + मर्यादा
    का अद्भुत संयोजन।


    9. प्रश्न : इस पहली पिता–पुत्री जोड़ी का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

    उत्तर :

    • शिव बाबा — सब आत्माओं के परम पिता

    • ब्रह्मा बाबा — सृष्टि के आध्यात्मिक पिता (प्रजापिता)

    • मम्मा सरस्वती — ज्ञान की प्रथम संतान और माताओं की मुखिया

    इन तीनों का संयुक्त कार्य बनता है—
    ईश्वरीय विश्व-परिवार का आरंभ।

    यह संबंध हमें भी प्रेरित करता है—

    • आत्मा बनो

    • पवित्र बनो

    • बाप के काम में सहयोगी बनो

    • ईश्वरीय सेवा में लगो

    • Disclaimer :

      यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की Murlis, Avyakt Vanis व आध्यात्मिक साहित्य पर आधारित एक आध्यात्मिक प्रस्तुति है।
      इसमें व्यक्त विचार किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने हेतु नहीं हैं।
      इसका उद्देश्य केवल आत्म-अनुभूति, आध्यात्मिक शिक्षा और कल्याण है।
      मूल Murli अधिकार Brahma Kumaris Organization के पास सुरक्षित हैं।

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