(27)The world says endure, but God says face.

AAT.(27)दुनिया कहती है सहन करो। पर परमात्मा कहते हैं सामना करो।

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 27 : आत्मा का रहस्य — सहन करो या सामना करो?

 प्रस्तावना — सबसे बड़ा Confusion

हम आत्मा के रहस्यों का अध्ययन कर रहे हैं।
आज 27वां विषय है—
दुनिया कहती है: “सहन करो।”
पर परमात्मा कहते हैं: “सामना करो।”

तो असली प्रश्न है—

**किसे सहन करना है?

किसका सामना करना है?**

यही गलतफहमी जीवन भर दुख बन जाती है।


 1. सहन शक्ति बनाम सहनशीलता

सहनशक्ति = आत्मा की शक्ति

सहनशीलता = आत्मा का गुण

दोनों अलग हैं, पर हम इन्हें मिला बैठते हैं।


 2. दुनिया का नजरिया vs परमात्मा का नजरिया

दुनिया कहती है—

  • बस सहन करो

  • इग्नोर करो

  • टाइम सब ठीक कर देगा

लोग कहते हैं—
“जिंदगी में सब झेलते रहो।”

 पर परमात्मा कहते हैं—

  • किसी को इग्नोर मत करो।
    क्योंकि जिसको आप इग्नोर करेंगे, वह भी आपको इग्नोर करेगा।
    आपको पसंद नहीं—तो औरों को भी मत दो।

  • झेलना नहीं, सामना करना है।

  • टाइम को टीचर मत बनाओ।
    ज्ञान को टीचर बनाओ।


 3. बाबा का स्पष्ट मत — झेलना नहीं, सामना करना

दुनिया:

“सब झेलते रहो।”

बाबा:

“झेलना कमजोरी है,
सामना आत्मा की शक्ति है।

दुनिया कहती है—
“टाइम सब ठीक कर देगा।”

बाबा कहते हैं—
“ज्ञान और स्थिति सब ठीक करते हैं।”


 4. सामना कैसे करें?

बाबा की तीन मुख्य बातें—

1️⃣ आत्मा-स्वरूप में आओ।

स्थिति बदलेगी।

2️⃣ ड्रामा का ज्ञान अप्लाई करो।

जो आया—हमारा ही दिया हुआ लौटकर आया है।

3️⃣ दुख = Return of Karma

इसलिए दुख नहीं होता,
सच्चा सामना होता है।


 5. एक्शन कब और कैसे लेना है?

पहले मन को शांत करें।

  • यदि दुखी होकर कदम उठाया → 100% गलती

  • यदि शांत होकर उठाया → 100% सही

यदि कोर्ट / पुलिस / पंचायत जाना पड़े—

  • शांत मन से जाओ

  • फैसला आपके पक्ष में न आए
    → तब भी ड्रामा में न्याय हुआ समझो

क्योंकि ड्रामा कभी पक्षपाती नहीं होता।


 6. सहन करना बनाम सामना करना — जीवन के उदाहरण

 सहन करना (गलत तरीका)

“मेरी किस्मत खराब है…”
“ऐसा पति मिला… ऐसी पत्नी मिली…”
“मेरे साथ ही क्यों होता है…”

यह सहन करना है।

✔ सामना करना (सही तरीका)

“रोटी नहीं मिली? ठीक है।
एक मिल गई—वो भी ठीक।
बासी मिली? मैंने भी कभी दी होगी।”

यह है
ड्रामा को समझकर प्रतिक्रिया नहीं—प्रयोग करना।


 7. सच्ची खुशी का राज

यदि सूखी रोटी खाकर भी खुशी बनी रहे
तो आपने सामना किया।

यदि खुशी गायब हो जाए—
तो आप सहन कर रहे हैं।


 8. सहनशक्ति = आत्मा की पावर

 Murli Note 1 — 12 मार्च 2024 (Sakar Murli)

“सहनशक्ति विकसित करो।
दुख-संकट को सहन नहीं करना—
ज्ञान से सामना करना है।”

 Murli Note 2 — Avyakt Vani

21 जनवरी 1995**

“सहनशक्ति आत्मा की शक्ति है।
सहनशीलता आत्मा का स्वभाव बन जाती है।”

जितना सामना कर सकते हो—
वहीं आपकी सहनशक्ति है।


 9. बच्चे का उदाहरण — शक्ति कैसे बढ़ती है?

बच्चा गिरता है—
अगर कोई नहीं देख रहा → खुद उठ जाता है
यदि कोई देख ले → रोता है कि कोई उठाए

जब बच्चा खुद उठना सीख लेता है
तब उसकी सहनशक्ति बढ़ती है।

इसी तरह—
हर परिस्थिति में खुद खड़े होना
= आध्यात्मिक शक्ति का विकास


 निष्कर्ष — सहन नहीं, सामना ही आत्मा की पहचान है

जो आत्मा
आत्मस्वरूप + ड्रामा ज्ञान + शांति
से स्थिति बदल देती है—

वह कभी डूबती नहीं,
हमेशा उठती है।

Q1: दुनिया कहती है सहन करो, पर परमात्मा कहते हैं सामना करो — क्यों?

✔ उत्तर:
क्योंकि सहन करने से दुख जमा होता है,
और सामना करने से दुख बदल जाता है।
दुनिया का मत है—“झेलते रहो।”
पर बाबा कहते हैं—“आत्मा शक्ति से स्थिति बदलो।”


 Q2: असली confusion क्या है? किसे सहन करना है, किसका सामना करना है?

✔ उत्तर:
हम हर परिस्थिति को “सहन” मान लेते हैं।
जबकि बाबा का ज्ञान कहता है—

  • कर्म का फल → सामना करना है।

  • व्यर्थ प्रतिक्रिया, गुस्सा, अहंकार → सहन नहीं, परिवर्तन करना है।

गलत decision इसलिए होते हैं क्योंकि हम दोनों में फर्क नहीं समझते।


 Q3: सहनशक्ति और सहनशीलता में क्या अंतर है?

✔ उत्तर:

  • सहनशक्ति = आत्मा की शक्ति (Power)

  • सहनशीलता = आत्मा का गुण (Virtue)

दोनों बहुत अलग हैं, लेकिन लोग इन्हें एक समझ लेते हैं।
सहनशक्ति बढ़ती है—अभ्यास से।
सहनशीलता आती है—स्वभाव से।


 Q4: दुनिया का नजरिया और परमात्मा का नजरिया अलग कैसे है?

✔ उत्तर:

दुनिया कहती है:

  • बस सहन करो

  • इग्नोर करो

  • टाइम सब ठीक कर देगा

परमात्मा कहते हैं:

  • किसी को इग्नोर मत करो, क्योंकि जो आप देते हैं वही लौटकर आता है।

  • झेलना नहीं, ज्ञान से सामना करना है।

  • टाइम नहीं, ज्ञान और योग सब ठीक करता है।


 Q5: इग्नोर करना क्यों गलत है?

✔ उत्तर:
क्योंकि इग्नोर = रिजेक्शन।
आप जिसे इग्नोर करेंगे, वह भी आपको इग्नोर करेगा।
और जो आपको पसंद नहीं—वह किसी और को मत दो।
बाबा कहते हैं—
इग्नोर नहीं, समझकर बदलो।


 Q6: बाबा का स्पष्ट मत क्या है—सहन या सामना?

✔ उत्तर:

बाबा कहते हैं—

झेलना कमजोरी है,
सामना शक्ति है।

दुनिया कहती है—“टाइम ठीक करेगा।”
बाबा कहते हैं—
ज्ञान + आत्म-स्थिति = समाधान।”


 Q7: सामना कैसे करें? इसका तरीका क्या है?

✔ उत्तर (3 Steps):

 आत्मा-स्वरूप में आओ

स्थिति तुरंत हल्की हो जाएगी।

 ड्रामा का ज्ञान अप्लाई करो

जो परिस्थिति आई है—
हमारा अपना कर्म-फिलिंग है।

 दुख को Return of Karma समझो

दुख नहीं होता—
कर्म का हिसाब बंद होता है।

यही सच्चा सामना है।


 Q8: जीवन में एक्शन कब लेना चाहिए?

✔ उत्तर:
पहले मन को शांत करें।

  • दुखी होकर लिया गया कदम = 100% गलत

  • शांत होकर लिया गया कदम = 100% सही

कोर्ट, पुलिस या पंचायत में जाना हो—
शांत मन से जाएं।
यदि निर्णय आपके पक्ष में न भी आए—
फिर भी “ड्रामा में न्याय हुआ” समझो।


 Q9: सहन करना और सामना करना का वास्तविक अंतर क्या है? (उदाहरण सहित)

✔ उत्तर:

सहन करना

  • “मेरी किस्मत खराब है…”

  • “ऐसा जीवनसाथी मिला…”

  • “मेरे साथ ही क्यों?”

सामना करना

  • “रोटी नहीं मिली? ठीक। एक मिली—वो भी ठीक।”

  • “बासी मिली? मैंने भी कभी दी होगी।”

ज्ञान से स्थिति हल्की कर देना = सामना करना।


 Q10: सच्ची खुशी क्या है?

✔ उत्तर:
यदि सूखी रोटी खाकर भी खुशी बनी रहे—
आपने सामना किया है।

यदि खुशी गायब हो जाए—
आप सहन कर रहे हैं।


 Q11: Murli क्या कहती है सहनशक्ति के बारे में?

✔ उत्तर:

Sakar Murli — 12 मार्च 2024

“सहनशक्ति विकसित करो।
दुख-संकट को सहन नहीं करना—
ज्ञान से सामना करना है।


 Q12: अव्यक्त वाणी में सहनशक्ति को कैसे परिभाषित किया है?

✔ उत्तर:

🕊 Avyakt Vani — 21 जनवरी 1995

सहनशक्ति आत्मा की पावर है।
सहनशीलता आत्मा का स्वभाव बन जाता है।

जितना सामना कर सकते हो—
वहीं आपकी वास्तविक सहनशक्ति है।


 Q13: बच्चा गिरता है और खुद उठ जाता है—इससे क्या सीखते हैं?

✔ उत्तर:
जब बच्चा खुद उठना सीखता है—
उसकी सहनशक्ति बढ़ती है

इसी तरह—
हर परिस्थिति में खुद खड़े होना
= आत्मिक शक्ति का विकास


 Q14: अंतिम निष्कर्ष क्या है—सहन या सामना?

✔ उत्तर:
आत्मा का स्वभाव सहनशीलता है,
पर आत्मा की शक्ति सामना है।

जो आत्मा
आत्मस्वरूप + ड्रामा ज्ञान + शांति
से परिस्थितियों को बदलती है—
वह हमेशा आगे बढ़ती है।

Disclaimer 

यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक सिद्धांतों, साकार मुरली एवं अव्यक्त मुरली शिक्षाओं पर आधारित है।
इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान, स्व-परिवर्तन, और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण प्रदान करना है।
यह किसी भी धर्म, संप्रदाय, व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं है।
दर्शक अपने विवेक अनुसार इसका उपयोग करें।

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