AAT.(29)जीवन का खेल पुरुषार्थ, भाग्य और ड्रामा का रहस्य।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
आत्मा का रहस्य
यह हम समझने का प्रयास कर रहे हैं।
आज का विषय है — जीवन का खेल
पुरुषार्थ, भाग्य और ड्रामा का रहस्य।
जीवन के खेल में तीन बातें हम देखेंगे:
पुरुषार्थ
भाग्य
ड्रामा का रहस्य
इन तीनों शब्दों का हमें आज रहस्य समझना है।
मानव दृष्टि और परमात्म दृष्टि
आम दुनिया क्या देखती है?
और परमात्मा क्या देखता है?
आज हम बात करने जा रहे हैं —
मानव दृष्टि और परमात्म दृष्टि के अंतर की।
आम मनुष्य दुनिया को उतार-चढ़ाव,
सफलता–असफलता,
सुख–दुख के रूप में देखता है।
लेकिन परमात्मा उसे एक परफेक्ट ड्रामा स्टेज के रूप में देखते हैं।
परमात्मा कैसे देखते हैं?
कि यह पूरा विश्व–ड्रामा एक परफेक्ट स्टेज है
जहाँ हर आत्मा अपना निश्चित, रिकॉर्डेड, ब्यूटीफुल रोल निभा रही है।
अब प्रश्न उठता है—
यदि सब रिकॉर्डेड, ब्यूटीफुल और निश्चित है…
तो फिर दुख क्यों?
यदि दुनिया दुखी है,
तो क्यों?
बाबा पूछते हैं – क्यों?
यही अंतर समझने का अनुभव
हमारे जीवन की दिशा बदल देता है।
भाग 1 — पुरुषार्थ और भाग्य का मेल
Efforts + Destiny
मुरली 18 मार्च 2024 में बाबा कहते हैं—
पुरुषार्थ कभी व्यर्थ नहीं जाता।
हर कर्म का फल निश्चित समय पर मिलता है।
मनुष्य कहता है—
“मैंने मेहनत की पर फल नहीं मिला।”
परमात्मा कहते हैं—
“फल अभी नहीं… पर कभी भी व्यर्थ नहीं।”
उदाहरण:
एक विद्यार्थी साल भर पढ़ता है
लेकिन परीक्षा में बीमार होकर फेल हो जाता है।
क्या उसकी मेहनत व्यर्थ गई?
नहीं।
ज्ञान, अनुशासन, अनुभव—
भविष्य में किसी और रूप में फल देता है।
भाग 2 — भाग्य का रोल
मुरली 12 अप्रैल 2024
बाबा कहते हैं—
भाग्य तुम्हारे अपने ही पिछले कर्मों का हिसाब है।
जो भी सामने आता है—
वे तुम्हारी ही कमाई है।
मनुष्य कहता है—
“मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?”
बाबा कहते हैं—
बच्चे, यह तुम्हारे ही बोए हुए कर्मों का फल है।
यदि वर्तमान में कर्म श्रेष्ठ कर दो
तो भविष्य भी श्रेष्ठ बन जाएगा।
उदाहरण:
जो आज सेवा, स्नेह, शुभ भावना बोता है
वही कल श्रेष्ठ जन्म और श्रेष्ठ उपलब्धि पाता है।
भाग 3 — पुरुषार्थ + धैर्य = जीवन का संतुलन
हर आत्मा का रोल अलग है —
डॉक्टर, शिक्षक, कलाकार, राजा, सेवाधारी…
अव्यक्त मुरली 31 अगस्त 2024
धैर्यवंत आत्मा ही विजय होती है।
मनुष्य तुलना करता है।
परमात्मा कहते हैं—
“तुम्हारा रोल तुम्हारा है—
अद्वितीय, अनोखा, सुंदर।”
निष्कर्ष — परमात्म दृष्टि से जीवन
जीवन एक सुंदर खेल है
जहाँ पुरुषार्थ, भाग्य और ड्रामा
हमारे अनुभवों को परिपक्व बनाते हैं।
परमात्म संदेश बहुत सरल है—
जो हुआ, अच्छा हुआ।
जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है।
जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।
क्योंकि ड्रामा परफेक्ट है।
आत्मा अजर–अमर है
और परमात्मा हमारा साथी है।
ड्रामा में किसी के साथ कभी भी अन्याय नहीं होता।
हर पल बाबा की कोर्ट में
हर आत्मा को न्याय मिलता है।
यदि कोई आपको चीट कर रहा है
तो समझो —
“मैंने कभी ऐसा ही किया था,
हिसाब अभी बराबर हो गया।”
इस दुनिया में ऐसी कोई कोर्ट नहीं
जहाँ हारने वाला भी खुश
और जीतने वाला भी खुश—
परंतु ड्रामा में दोनों खुश होते हैं।

