अव्यक्त मुरली-(07)18-01-1985 “प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
आज 1985 की सातवीं अव्यक्त मुरली है।
जो बाबा ने 18 जनवरी 1985 को सुनाई।
आज की मुरली का विषय है — प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता।
आप प्रतिज्ञा करेंगे, तब प्रत्यक्षता होगी।
आज स्मृति दिवस, समर्थी दिवस, अव्यक्त दिवस, शक्ति दिवस — जो भी कहो, ब्रह्मा बाबा आज के दिन अव्यक्त हुए।
इस समय बाबा ने विशेष यह मुरली चलाई है।
आज समर्थ दिवस पर समर्थ बाप अपने समर्थ बच्चों को देख रहे हैं।
आज का दिन विशेष ब्रह्मा बाप द्वारा बच्चों को समर्थी का वरदान अर्पित करने का दिन है।
आज के दिन बाप-दादा अपनी शक्ति सेना को विश्व की स्टेज पर लाते हैं।
साकार स्वरूप में शिव शक्तियों को प्रत्यक्ष स्वरूप में पाठ बजाने का दिन है।
शक्तियों द्वारा शिव बाप प्रत्यक्ष होते हैं; स्वयं गुप्त रूप में पार्ट बजाते रहते हैं।
शक्तियों को प्रत्यक्ष रूप में विश्व के आगे विजय प्रत्यक्ष करते हैं।
आज का दिन बच्चों को बाप द्वारा समान भाव के वरदान का दिन है।
आज का दिन विशेष स्नेही बच्चों को नैनों में स्नेह स्वरूप से समाने का दिन है।
बाप-दादा आज समर्थ और स्नेही बच्चों को मधुर मिलन द्वारा अविनाशी मिलन का वरदान देते हैं।
आज के दिन अमृतवेले से सर्व बच्चों के दिल का पहला संकल्प — बाप से मिलन मनाने का।
मीठे-मीठे महिमा के दिल के गीत गाने का, विशेष स्नेह की लहर का दिन।
अमृतवेला अनेक बच्चे स्नेह की मोतियों की मालाएं — हर एक मोती के बीच “मीठा बाबा” का बोल — चमकता हुआ देख रहे थे।
इस पुरानी दुनिया में नौ रत्नों की माला कहते हैं, लेकिन बाप-दादा के पास अनेक अलौकिक, अनोखी, अमूल्य रत्नों की मालाएं थीं।
ऐसी मालाएं सतयुग में भी नहीं पहनेंगे।
यह मालाएं सिर्फ बाप-दादा ही इस समय बच्चों द्वारा धारण करते हैं।
आज का दिन अनेक बंधन वाली गोपिकाओं के दिल के वियोग और स्नेह से भरे मीठे गीत सुनने का दिन है।
बाप-दादा ऐसे लगन में मगन रहने वाली स्नेही आत्माओं को खुशखबरी सुनाते हैं कि अब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजने वाला है।
इसलिए हे सहज योगी और मिलन के वियोगी बच्चे —
यह थोड़े से दिन समाप्त हुए कि हुए।
बस आखरी समय आया कि आया।
साकार स्वीट होम में मधुर मिलन होगा — वह दिन समीप आ रहा है।
साकार स्वीट होम मतलब —
निराकार स्वीट होम (परमधाम) तो अपना घर हुआ,
साकार स्वीट होम जहां हम आत्माएं बाबा से मिलन मनाती हैं — यानी मधुबन।
आज का दिन हर बच्चे के दिल से दृढ़ संकल्प करने से सहज सफलता का प्रत्यक्ष फल पाने का है।
ऐसे महान दिवस पर सभी बच्चे, जहां भी हैं, दूर होकर भी दिल के समीप हैं।
बाप-दादा हर एक बच्चे को स्नेह और सहयोग, तथा बाप-दादा को प्रत्यक्ष करने की सेवा के उमंग-उत्साह के रिटर्न में स्नेह भरी बधाई देते हैं।
क्योंकि मेजॉरिटी बच्चों की रूह-रूहान में स्नेह और सेवा के उमंग की लहरें विशेष थीं।
प्रतिज्ञा और प्रत्यक्षता — दोनों बातें विशेष हैं।
सुनते-सुनते बाप-दादा क्या करते?
सुनाने वाले कितने होते हैं, लेकिन दिल की आवाज — दिलाराम बाप — एक समय में अनेकों को सुन सकते हैं।
प्रतिज्ञा करने वालों को बाप-दादा बधाई देते हैं,
लेकिन यह प्रतिज्ञा अमृतवेला रिवाइज करते रहना।
प्रतिज्ञा कर छोड़ देना नहीं — प्रतिज्ञा करनी है, और उसे बनना है।
सिर्फ प्रतिज्ञा से नहीं बनेंगे — उमंग और उत्साह सदा साथ रखना होगा।
जैसे ट्रैफिक कंट्रोल की विधि द्वारा याद की स्थिति को निरंतर बनाने में सफलता पा रहे हो,
वैसे ही कर्म करते अपने आप को चेक करने के लिए समय निश्चित करो।
वह समय प्रतिज्ञा को सफलता स्वरूप बनाता रहेगा।
प्रत्यक्षता के उमंग-उत्साह वाले बच्चों को बाप-दादा अपने राइट-हैंड रूप से स्नेह की हैंड-शेक कर रहे हैं।
सदा मर्यादित बच्चे सो बाप समान बन उमंग-हिम्मत से पदम गुणा बाप-दादा की मदद के पात्र हैं ही हैं — पात्र भी और सुपात्र भी।
तीसरे प्रकार के बच्चे —
जो दिन-रात स्नेह में समाए रहते हैं।
स्नेह को ही सेवा समझते हैं।
मैदान पर नहीं आते, लेकिन “मेरा बाबा, मेरा बाबा” यह गीत गाते रहते हैं।
बाप को भी मीठे रूप से रिझाते हैं।
बाबा से कहते हैं — “जो हूँ जैसी हूँ, बाबा आप ही जैसी हो…”
ऐसी स्नेही आत्माएं — बाप-दादा स्नेह का रिटर्न तो देते ही हैं,
लेकिन साथ ही हिम्मत भी दिलाते हैं कि राज्य अधिकारी बनना है।
यदि सिर्फ सतयुग में आना है तो स्नेही काफी है,
लेकिन अच्छा पद पाना है तो स्नेह के साथ ज्ञान की शक्ति और सेवा की शक्ति भी आवश्यक है।
बाप मददगार है ही —
स्नेह के रिटर्न में सहयोग मिलता ही है।
थोड़ी हिम्मत और अटेंशन से राज्य अधिकारी बन सकते हो।
आज रूह-रूहान का रेस्पॉन्स —
देश-विदेश के बच्चों की वतन में रौनक देखी।
विदेशी बच्चे भी “लास्ट सो फास्ट” जाकर “फर्स्ट” आने के उमंग-उत्साह में हैं।

