(11) Inflation, is the problem external or internal?

PR:-(11)महंगाई, समस्या बाहर या भीतर।

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय : परमात्मा क्या कहते हैं?

महंगाई – समस्या बाहर या भीतर?

 भूमिका : आज हर घर की एक ही आवाज

आज हर घर, हर व्यक्ति की एक ही चिंता है —
महंगाई
आर्थिक तनाव
भविष्य का डर

कमाई सीमित है, खर्च बढ़ते जा रहे हैं।
पर प्रश्न यह नहीं है कि सब कुछ महंगा क्यों हो गया,
प्रश्न यह है —

परमात्मा इस महंगाई और आर्थिक तनाव को कैसे देखते हैं?


 भाग 1 : क्या महंगाई सच में पैसों की समस्या है?

आम दुनिया मानती है —

  • हमारे पास पर्याप्त पैसा नहीं है

  • इसलिए तनाव है

  • इसलिए डर है

लेकिन परमात्मा कहते हैं —

“मन का सम्बन्ध धन से नहीं, आत्मा से है।”

यदि मन आत्मा से जुड़ा है,
तो स्थूल धन की कमी भी मन को तोड़ नहीं सकती।


 भाग 2 : पैसे का डर या आत्मिक गरीबी?

महंगाई क्यों लगती है?

परमात्मा की दृष्टि से —

  • समस्या पैसे की कमी नहीं

  • समस्या है आत्मिक गरीबी

 आत्मा जब अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाती है
 जब स्वयं को अजर-अमर-अविनाशी आत्मा नहीं समझती
 तब देह-अभिमान से असुरक्षा पैदा होती है

यही असुरक्षा आगे चलकर
➡ डर
➡ चिंता
➡ तनाव
➡ घबराहट बन जाती है।


 मुरली प्रमाण – आत्मिक खालीपन

मुरली – 24 फरवरी 1967

“मनुष्य के पास बहुत कुछ है, फिर भी वह खाली है।”

➡ परमात्मा स्पष्ट करते हैं —
दुख धन की कमी से नहीं,
शांति और ज्ञान की कमी से है।


 भाग 3 : ज्ञान आए तो क्या महंगाई खत्म हो जाएगी?

प्रश्न उठता है —

यदि आत्मिक ज्ञान आ जाए
तो क्या सामान सस्ता हो जाएगा?

उत्तर है — नहीं

लेकिन —

  • मन सस्ता हो जाएगा

  • डर समाप्त हो जाएगा

  • संतोष आ जाएगा

और जहाँ संतोष है,
वहाँ महंगाई भी बोझ नहीं बनती।


 उदाहरण : झोपड़ी और महल का अंतर

यदि कोई आत्मा झोपड़ी में रहकर यह अनुभव करे —

“मेरा यही महल है”

तो उसे महल की आवश्यकता नहीं।

पर जो महल में रहकर भी असंतुष्ट है,
वह झोपड़ी से भी दुखी रहेगा।

 इसलिए परमात्मा कहते हैं —
महंगाई बाहर नहीं, मन में है।


 भाग 4 : परमात्मा की दृष्टि से यह आर्थिक नहीं, आत्मिक संकट है

जहाँ —

  • शांति नहीं

  • संतोष नहीं

  • आत्मिक पहचान नहीं

वहाँ धन भी दुख देने लगता है

 मुरली भावार्थ

परमात्मा कहते हैं —

“जिसके पास भय नहीं, वही सच्चा धनवान है।”

जिसे आत्म-स्मृति है —

मैं अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूँ

उसे भविष्य का डर नहीं लगता।


 भाग 5 : आर्थिक तनाव बढ़ने के गहरे कारण

1️⃣ भविष्य का डर

“कल क्या होगा?”

2️⃣ तुलना और प्रतिस्पर्धा

दूसरों को देखकर जीने वाला
कभी सुखी नहीं हो सकता।

3️⃣ भरोसे का अभाव

  • सिस्टम पर भरोसा नहीं

  • सरकार पर भरोसा नहीं

  • और सबसे बड़ा — ईश्वर पर भरोसा नहीं

 भरोसा टूटता है
 मन टूट जाता है


 भाग 6 : आर्थिक तनाव के दुष्परिणाम

परमात्मा को सबसे अधिक दुख होता है —

  • आत्महत्या

  • निराशा

  • रिश्तों में तनाव

क्योंकि —

जहाँ धन प्रधान हो जाता है
वहाँ प्रेम घट जाता है।

फिर जन्म लेते हैं —

  • मिलावट

  • धोखा

  • भ्रष्टाचार

लोभ मनुष्य को पाप की ओर ले जाता है।


 भाग 7 : परमात्मा का समाधान – अंदर की समृद्धि

परमात्मा स्पष्ट कहते हैं —

समस्या महंगाई नहीं, निर्भरता है।
एक बाप पर भरोसा कर लो, कमी नहीं रहेगी।

 सूत्र

  • संतोष सबसे बड़ा धन है

  • संतोषी आत्मा सदा सुखी

जरूरत और इच्छा में अंतर समझो
जो चाहिए — उतना लो
जो नहीं चाहिए — छोड़ दो


 भाग 8 : स्वर्णिम भारत की झलक

स्वर्णिम युग में —

  • ना महंगाई

  • ना बेरोजगारी

  • ना डर

क्योंकि —

  • प्रकृति सब कुछ मुफ्त देती है

  • सूर्य फ्री

  • हवा फ्री

जब मनुष्य लालच से मुक्त होगा,
प्रकृति भी सहयोग करेगी।


 आत्मचिंतन प्रश्न

परमात्मा पूछते हैं —

आर्थिक संकट में तुम कितने शांत हो?

रोज़ सिर्फ 10 मिनट

  • आत्मिक अभ्यास

  • परमात्मा की याद

  • कृतज्ञता का अभ्यास

करो और देखो —
तनाव कैसे गलता है।


 अंतिम संदेश

महंगाई
जेब को खाली करती है

डर
आत्मा को खाली करता है

परमात्मा कहते हैं —

“डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

पैसा साधन है,
पर समाधान शांति में है।

प्रश्न 1 : आज हर घर में सबसे बड़ी चिंता क्या है?

उत्तर :
आज हर घर, हर व्यक्ति की एक ही आवाज है —

  • महंगाई

  • आर्थिक तनाव

  • भविष्य का डर

कमाई सीमित है,
लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

पर परमात्मा कहते हैं —
सिर्फ यह पूछना पर्याप्त नहीं कि सब महंगा क्यों हो गया,
असल प्रश्न यह है —

महंगाई को परमात्मा कैसे देखते हैं?


प्रश्न 2 : क्या महंगाई सच में पैसों की समस्या है?

उत्तर :
दुनिया मानती है —

  • पैसा कम है

  • इसलिए तनाव है

  • इसलिए डर है

लेकिन परमात्मा कहते हैं —

“मन का सम्बन्ध धन से नहीं, आत्मा से है।”

यदि मन आत्मा से जुड़ा है,
तो स्थूल धन की कमी भी
मन को तोड़ नहीं सकती।


प्रश्न 3 : फिर महंगाई हमें इतनी भारी क्यों लगती है?

उत्तर :
परमात्मा की दृष्टि से —

 समस्या पैसे की कमी नहीं
 समस्या है आत्मिक गरीबी

जब आत्मा —

  • अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाती है

  • स्वयं को अजर–अमर–अविनाशी नहीं समझती

  • देह-अभिमान में चली जाती है

तब भीतर असुरक्षा जन्म लेती है।

यही असुरक्षा आगे चलकर
➡ डर
➡ चिंता
➡ तनाव
➡ घबराहट बन जाती है।


प्रश्न 4 : क्या इसका कोई Murli प्रमाण है?

उत्तर :
हाँ, परमात्मा Murli में स्पष्ट कहते हैं —

मुरली – 24 फरवरी 1967

“मनुष्य के पास बहुत कुछ है, फिर भी वह खाली है।”

➡ परमात्मा बताते हैं —
दुख धन की कमी से नहीं,
शांति और ज्ञान की कमी से है।


प्रश्न 5 : यदि आत्मिक ज्ञान आ जाए, तो क्या महंगाई खत्म हो जाएगी?

उत्तर :
नहीं।
ज्ञान आने से चीज़ें सस्ती नहीं होंगी,

लेकिन —

  • मन सस्ता हो जाएगा

  • डर समाप्त हो जाएगा

  • संतोष आ जाएगा

और जहाँ संतोष है,
वहाँ महंगाई भी बोझ नहीं बनती।


प्रश्न 6 : क्या इसका कोई सरल उदाहरण है?

उत्तर :
हाँ।

यदि कोई आत्मा झोपड़ी में रहकर यह अनुभव करे —
“मेरा यही महल है”
तो उसे महल की आवश्यकता नहीं।

पर जो महल में रहकर भी असंतुष्ट है,
वह झोपड़ी में भी दुखी रहेगा।

 इसलिए परमात्मा कहते हैं —
महंगाई बाहर नहीं, मन में है।


प्रश्न 7 : परमात्मा इसे आर्थिक संकट मानते हैं या कुछ और?

उत्तर :
परमात्मा इसे आर्थिक नहीं, आत्मिक संकट मानते हैं।

जहाँ —

  • शांति नहीं

  • संतोष नहीं

  • आत्मिक पहचान नहीं

वहाँ धन भी
दुख देने लगता है।


प्रश्न 8 : परमात्मा के अनुसार सच्चा धनवान कौन है?

उत्तर :
परमात्मा का भावार्थ है —

“जिसके पास भय नहीं, वही सच्चा धनवान है।”

जिसे आत्म-स्मृति है —
“मैं अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूँ”
उसे भविष्य का डर नहीं लगता।


प्रश्न 9 : आर्थिक तनाव बढ़ने के गहरे कारण क्या हैं?

उत्तर :

1️⃣ भविष्य का डर
“कल क्या होगा?”

2️⃣ तुलना और प्रतिस्पर्धा
दूसरों को देखकर जीने वाला
कभी सुखी नहीं हो सकता।

3️⃣ भरोसे का अभाव

  • सिस्टम पर भरोसा नहीं

  • सरकार पर भरोसा नहीं

  • और सबसे बड़ा — ईश्वर पर भरोसा नहीं

 भरोसा टूटता है
 मन टूट जाता है।


प्रश्न 10 : आर्थिक तनाव के दुष्परिणाम क्या होते हैं?

उत्तर :
परमात्मा को सबसे अधिक दुख होता है जब —

  • आत्महत्या बढ़ती है

  • निराशा फैलती है

  • रिश्तों में तनाव आता है

क्योंकि —

जहाँ धन प्रधान हो जाता है,
वहाँ प्रेम घट जाता है।

फिर जन्म लेते हैं —

  • मिलावट

  • धोखा

  • भ्रष्टाचार

लोभ मनुष्य को पाप की ओर ले जाता है।


प्रश्न 11 : परमात्मा का समाधान क्या है?

उत्तर :
परमात्मा स्पष्ट कहते हैं —

 समस्या महंगाई नहीं, निर्भरता है।
 एक बाप पर भरोसा कर लो, कमी नहीं रहेगी।

परमात्म सूत्र

  • संतोष सबसे बड़ा धन है

  • संतोषी आत्मा सदा सुखी

  • जरूरत और इच्छा में अंतर समझो

  • जो चाहिए — उतना लो

  • जो नहीं चाहिए — छोड़ दो


प्रश्न 12 : स्वर्णिम भारत में महंगाई क्यों नहीं होती?

उत्तर :
स्वर्णिम युग में —

  • न महंगाई

  • न बेरोजगारी

  • न डर

क्योंकि —

  • प्रकृति सब कुछ मुफ्त देती है

  • सूर्य फ्री

  • हवा फ्री

जब मनुष्य लालच से मुक्त होगा,
प्रकृति भी सहयोग करेगी।


आत्मचिंतन प्रश्न (Self Check)

परमात्मा पूछते हैं —

  • आर्थिक संकट में तुम कितने शांत हो?

  • क्या तुम्हारा भरोसा परिस्थितियों पर है या परमात्मा पर?

 रोज़ केवल 10 मिनट —

  • आत्मिक अभ्यास

  • परमात्मा की याद

  • कृतज्ञता का अभ्यास

करो और देखो —
तनाव कैसे गलता है।


अंतिम संदेश

महंगाई  जेब को खाली करती है
डर  आत्मा को खाली करता है


Disclaimer

यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ के मुरली ज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक प्रस्तुति है।
इसका उद्देश्य महंगाई, आर्थिक तनाव और मानसिक असुरक्षा के विषय में आत्मिक दृष्टिकोण प्रदान करना है।
यह वीडियो किसी सरकार, व्यवस्था, व्यक्ति या संस्था की आलोचना नहीं करता।
सभी विचार परमात्मा शिव के मुरली महावाक्यों और आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित हैं।

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