Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
| 04-01-26 |
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
|
रिवाइज: 30-11-08 मधुबन |
फुलस्टॉप लगाकर, सम्पूर्ण पवित्रता की धारणा कर, मनसा सकाश द्वारा सुख-शान्ति की अंचली देने की सेवा करो
आज बापदादा चारों ओर के महान बच्चों को देख रहे हैं। क्या महानता की? जो दुनिया असम्भव कहती है उसको सहज सम्भव कर दिखाया, वह है पवित्रता का व्रत। आप सभी ने पवित्रता का व्रत धारण किया है ना! बापदादा से परिवर्तन के दृढ़ संकल्प का व्रत लिया है। व्रत लेना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना। क्या वृत्ति परिवर्तन की? संकल्प किया हम सब भाई-भाई हैं, इस वृत्ति परिवर्तन के लिए भक्ति में भी कितनी बातों में व्रत लेते हैं लेकिन आप सबने बाप से दृढ़ संकल्प किया क्योंकि ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है पवित्रता और पवित्रता द्वारा ही परमात्म प्यार और सर्व परमात्म प्राप्तियां हो रही हैं। महात्मा जिसको कठिन समझते हैं, असम्भव समझते हैं और आप पवित्रता को स्वधर्म समझते हो। बापदादा देख रहे हैं कई अच्छे अच्छे बच्चे हैं जिन्होंने संकल्प किया और दृढ़ संकल्प द्वारा प्रैक्टिकल में परिवर्तन दिखा रहे हैं। ऐसे चारों ओर के महान बच्चों को बापदादा बहुत-बहुत दिल से दुआयें दे रहे हैं।
आप सभी भी मन-वचन-कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् हर एक आत्मा प्रति शुभ भावना, शुभ कामना। दृष्टि द्वारा हर एक आत्मा को आत्मिक स्वरुप में देखना, स्वयं को भी सहज सदा आत्मिक स्थिति में अनुभव करना। ब्राह्मण जीवन का महत्व मन-वचन-कर्म की पवित्रता है। पवित्रता नहीं तो ब्राह्मण जीवन का जो गायन है – सदा पवित्रता के बल से स्वयं भी स्वयं को दुआ देते हैं, क्या दुआ देते? पवित्रता द्वारा सदा स्वयं को भी खुश अनुभव करते और दूसरों को भी खुशी देते। पवित्र आत्मा को तीन विशेष वरदान मिलते हैं – एक स्वयं स्वयं को वरदान देता, जो सहज बाप का प्यारा बन जाता। 2- वरदाता बाप का नियरेस्ट और डियरेस्ट बच्चा बन जाता इसलिए बाप की दुआयें स्वत: प्राप्त होती हैं और सदा प्राप्त होती हैं। 3- जो भी ब्राह्मण परिवार के विशेष निमित्त बने हुए हैं, उन्हों द्वारा भी दुआयें मिलती रहती। तीनों की दुआओं से सदा उड़ता रहता और उड़ाता रहता। तो आप सभी भी अपने से पूछो, अपने को चेक करो तो पवित्रता का बल और पवित्रता का फल सदा अनुभव करते हो? सदा रूहानी नशा, दिल में फलक रहती है? कभी-कभी कोई-कोई बच्चे जब अमृतवेले मिलन मनाते हैं, रूहरिहान करते हैं तो मालूम है क्या कहते हैं? पवित्रता द्वारा जो अतीन्द्रिय सुख का फल मिलता है वह सदा नहीं रहता। कभी रहता है, कभी नहीं रहता क्योंकि पवित्रता का फल ही अतीन्द्रिय सुख है। तो अपने से पूछो मैं कौन हूँ? सदा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति में रहते वा कभी-कभी? अपने को कहलाते क्या हो? सभी अपना नाम लिखते तो क्या लिखते हो? बी.के. फलाना.., बी.के. फलानी और अपने को मास्टर सर्वशक्तिवान कहते हो। सब मास्टर सर्वशक्तिवान हैं ना! जो समझते हैं हम मास्टर सर्वशक्तिवान हैं, सदा, कभी-कभी नहीं, वह हाथ उठाओ। सदा? देखना, सोचना, सदा हैं? डबल फारेनर्स नहीं हाथ उठा रहे हैं, थोड़े उठा रहे हैं। टीचर्स उठाओ, हैं सदा? ऐसे ही नहीं उठाओ, जो सदा हैं, वह सदा वाले उठाओ। बहुत थोड़े हैं। पाण्डव उठाओ, पीछे वाले, बहुत थोड़े हैं। सारी सभा नहीं हाथ उठाती। अच्छा मास्टर सर्वशक्तिवान हैं तो उस समय शक्तियां कहाँ चली जाती? मास्टर हैं, इसका अर्थ ही है, मास्टर तो बाप से भी ऊंचा होता है। तो चेक करो – अवश्य प्युरिटी के फाउण्डेशन में कुछ कमजोर हो। क्या कमजोरी है? मन में अर्थात् संकल्प में कमजोरी है, बोल में कमजोरी है या कर्म में कमजोरी है, या स्वप्न में भी कमजोरी है क्योंकि पवित्र आत्मा का मन-वचन-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क, स्वप्न स्वत: शक्तिशाली होता है। जब व्रत ले लिया, वृत्ति को बदलने का, तो कभी कभी क्यों? समय को देख रहे हो, समय की पुकार, भक्तों की पुकार, आत्माओं की पुकार सुन रहे हो और अचानक का पाठ तो सबको पक्का है। तो फाउण्डेशन की कमजोरी अर्थात् पवित्रता की कमजोरी। अगर बोल में भी शुभ भावना, शुभ कामना नहीं, पवित्रता के विपरीत है तो भी सम्पूर्ण पवित्रता का जो सुख है अतीन्द्रिय सुख, उसका अनुभव नहीं हो सकता क्योंकि ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य ही है असम्भव को सम्भव करना। उसमें जितना और उतना शब्द नहीं आता। जितना चाहिए उतना नहीं है। तो कल अमृतवेले विशेष हर एक अपने को चेक करना, दूसरे को नहीं सोचना, दूसरे को नहीं देखना, लेकिन अपने को चेक करना कि कितनी परसेन्टेज़ में पवित्रता का व्रत निभा रहे हैं? चार बातें चेक करना – एक वृत्ति, दूसरा – सम्बन्ध-सम्पर्क में शुभ भावना, शुभ कामना, यह तो है ही ऐसा, नहीं। लेकिन उस आत्मा प्रति भी शुभ भावना। जब आप सबने अपने को विश्व परिवर्तक माना है, हैं सभी? अपने को समझते हैं कि हम विश्व परिवर्तक हैं? हाथ उठाओ। इसमें तो बहुत अच्छे हाथ उठाये हैं, मुबारक हो। लेकिन बापदादा आप सभी से एक प्रश्न पूछते हैं? प्रश्न पूछें? जब आप विश्व परिवर्तक हो तो विश्व परिवर्तन में यह प्रकृति, 5 तत्व भी आ जाते हैं, उन्हों को परिवर्तन कर सकते और अपने को या साथियों को, परिवार को परिवर्तन नहीं कर सकते? विश्व परिवर्तक अर्थात् आत्माओं को, प्रकृति को, सबको परिवर्तन करना। तो अपना वायदा याद करो, सभी ने बाप से वायदा कई बार किया है लेकिन बापदादा यही देख रहे हैं कि समय बहुत फास्ट आ रहा है, सबकी पुकार बहुत बढ़ रही है, तो पुकार सुनने वाले और परिवर्तन करने वाले उपकारी आत्मायें कौन हैं? आप ही हो ना!
बापदादा ने पहले भी सुनाया है, पर उपकारी वा विश्व उपकारी बनने के लिए तीन शब्द को खत्म करना पड़ेगा – जानते तो हो। जानने में तो होशियार हो, बापदादा जानता है सभी होशियार हैं। एक पहला शब्द है परचिंतन, दूसरा है परदर्शन और तीसरा है परमत, इन तीनों ही पर शब्द को खत्म कर, पर उपकारी बनेंगे। यह तीन शब्द ही विघ्न रूप बनते हैं। याद हैं ना! नई बात नहीं है। तो कल चेक करना अमृतवेले, बापदादा भी चक्कर लगाता है, देखेंगे क्या कर रहे हो? क्योंकि अभी आवश्यकता है – समय प्रमाण, पुकार प्रमाण हर एक दु:खी आत्मा को मन्सा सकाश द्वारा सुख शान्ति की अंचली देने का। कारण क्या है? बापदादा कभी-कभी बच्चों को अचानक देखते हैं, क्या कर रहे हैं? क्योंकि बच्चों से प्यार तो है ना, और बच्चों के साथ जाना है, अकेला नहीं जाना है। साथ चलेंगे ना! साथ चलेंगे? यह आगे वाले नहीं उठा रहे हैं? नहीं चलेंगे? चलना है ना! बापदादा भी बच्चों के कारण इन्तजार कर रहे हैं, एडवांस पार्टी आपकी दादियां, आपके विशेष पाण्डव, आप सबका भी इन्तजार कर रहे हैं, उन्होंने भी दिल में पक्का वायदा किया है कि हम सब साथ में चलेंगे। थोड़े नहीं, सबके सब साथ चलेंगे। तो कल अमृतवेले अपने को चेक करना कि किस बात की कमी है? क्या मन्सा की, वाणी की वा कर्मणा में आने की। बापदादा ने एक बारी सभी सेन्टर्स का चक्कर लगाया। बतायें क्या देखा? कमी किस बात की है? तो यही दिखाई दिया कि एक सेकण्ड में परिवर्तन कर फुलस्टॉप लगाना, इसकी कमी है। जब तक फुलस्टॉप लगाओ तब तक पता नहीं क्या क्या हो जाता है। बापदादा ने सुनाया है कि एक लास्ट टाइम की लास्ट एक घड़ी होगी जिसमें फुलस्टॉप लगाना पड़ेगा। लेकिन देखा क्या? लगाना फुलस्टॉप है लेकिन लग जाता है क्वामा, दूसरों की बातें याद करते, यह क्यों होता, यह क्या होता, इसमें आश्चर्य की मात्रा लग जाती। तो फुलस्टॉप नहीं लगता लेकिन क्वामा, आश्चर्य की निशानी और क्यूं, क्वेश्चन की क्यू लग जाती है। तो इसको चेक करना। अगर फुलस्टॉप लगाने की आदत नहीं होगी तो अन्त मते सो गति श्रेष्ठ नहीं होगी। ऊंची नहीं होगी इसलिए बापदादा होमवर्क दे रहे हैं कि खास कल अमृतवेले चेक करना और चेंज करना पड़ेगा। तो अभी 18 जनवरी तक सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने का बार-बार अभ्यास करो। जनवरी मास में सभी को बाप समान बनने का उमंग आता है ना, तो 18 जनवरी में सभी को अपनी चिटकी लिख करके बाक्स में डालना है कि 18 तारीख तक क्या रिजल्ट रही? फुलस्टॉप लगा वा और मात्रायें लग गई? पसन्द है? पसन्द है? कांध हिलाओ क्योंकि बापदादा का बच्चों से बहुत प्यार है, अकेला नहीं जाने चाहता, तो क्या करेंगे? अभी फास्ट तीव्र पुरुषार्थ करो। अभी ढीला-ढाला पुरुषार्थ सफलता नहीं दिला सकेगा।
प्युरिटी को पर्सनैलिटी, रीयल्टी, रॉयल्टी कहा जाता है। तो अपनी रॉयल्टी को याद करो। अनादि रूप में भी आप आत्मायें बाप के साथ अपने देश में विशेष आत्मायें हो। जैसे आकाश में विशेष सितारे चमकते हैं ऐसे आप अनादि रूप में विशेष सितारा चमकते हो। तो अपने अनादि काल की रॉयल्टी याद करो। फिर सतयुग में जब आते हैं तो देवता रूप की रॉयल्टी याद करो। सभी के सिर पर रॉयल्टी की लाइट का ताज है। अनादि, आदि कितनी रॉयल्टी है। फिर द्वापर में आओ तो भी आपके चित्रों जैसी रॉयल्टी और किसकी नहीं है। नेताओं के, अभिनेताओं के, धर्म आत्माओं के चित्र बनते हैं लेकिन आपके चित्रों की पूजा और आपके चित्रों की विशेषता कितनी रॉयल है। चित्र को देखकर ही सब खुश हो जाते हैं। चित्रों द्वारा भी कितनी दुआयें लेते हैं। तो यह सब रॉयल्टी पवित्रता की है। पवित्रता ब्राह्मण जीवन का जन्म सिद्ध अधिकार है। पवित्रता की कमी समाप्त होना चाहिए। ऐसे नहीं हो जायेगा, उस समय वैराग्य आ जायेगा तो हो जायेगा, बातें बहुत अच्छी-अच्छी सुनाते हैं। बाबा आप फिक्र नहीं करो हो जायेगा। लेकिन बापदादा को इस जनवरी मास तक स्पेशल पवित्रता में हर एक को सम्पन्न करना है। पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं, व्यर्थ संकल्प भी अपवित्रता है। व्यर्थ बोल, व्यर्थ बोल रोब के, जिसको कहते हैं क्रोध का अंश रोब, वह भी समाप्त हो जाए। संस्कार ऐसे बनाओ जो दूर से ही आपको देख पवित्रता के वायब्रेशन लें क्योंकि आप जैसी पवित्रता, जो रिजल्ट में आत्मा भी पवित्र, शरीर भी पवित्र, डबल पवित्रता प्राप्त है।
जब भी कोई भी बच्चा पहले आता है तो बाप का वरदान कौन सा मिलता है? याद है? पवित्र भव, योगी भव। तो दोनों बातें – एक पवित्रता और दूसरा फुलस्टॉप, योगी। पसन्द है? बापदादा अमृतवेले चक्र लगायेंगे, सेन्टरों के भी चक्र लगायेंगे। बाप-दादा तो एक सेकण्ड में चारों ओर का चक्र लगा सकता। तो इस जनवरी, अव्यक्ति मास का कोई नया प्लैन बनाओ। मन्सा सेवा, मन्सा स्थिति और अव्यक्त कर्म और बोल इसको बढ़ाओ। तो 18 जनवरी को बापदादा सभी की रिजल्ट देखेंगे। प्यार है ना, 18 जनवरी को अमृतवेले से प्यार की ही बातें करते हो। सभी उल्हना देते हैं, बाबा अव्यक्त क्यों हुआ? तो बाप भी उल्हना देता है कि साकार में होते बाप समान कब तक बनेंगे?
तो आज थोड़ा सा विशेष अटेन्शन खिंचवा रहे हैं। प्यार भी कर रहे हैं, सिर्फ अटेन्शन नहीं खिंचवा रहे हैं, प्यार भी है क्योंकि बाप यही चाहते हैं कि मेरा एक बच्चा भी रह नहीं जाए। हर कर्म की श्रीमत चेक करना, अमृतवेले से लेके रात तक जो भी हर कर्म की श्रीमत मिली है वह चेक करना। मजबूत है ना! साथ चलना है ना! चलना है तो हाथ उठाओ। चलना है? अच्छा, टीचर्स? पीछे वाले, कुर्सी वाले, पाण्डव हाथ उठाओ। तो समान बनेंगे तब तो हाथ में हाथ देकर चलेंगे ना! करना ही है, बनना ही है, यह दृढ़ संकल्प करो। 15-20 दिन यह दृढ़ता रहती है फिर धीरे-धीरे थोड़ा अलबेलापन आ जाता है। तो अलबेलेपन को खत्म करो। ज्यादा में ज्यादा देखा है एक मास फुल उमंग रहता है, दृढ़ता रहती है फिर एक मास के बाद थोड़ा-थोड़ा अलबेलापन शुरू हो जाता है। तो अभी यह वर्ष समाप्त होगा, तो क्या समाप्त करेंगे? वर्ष समाप्त करेंगे कि वर्ष के साथ जो भी जिस संकल्प में भी धारणा में भी कमजोरी है, उसको समाप्त करेंगे? करेंगे ना! हाथ नहीं उठाते हैं? तो ऑटोमेटिक दिल में यह रिकार्ड बजना चाहिए, अब घर चलना है। सिर्फ चलना नहीं है लेकिन राज्य में भी आना है। अच्छा, जो पहली बारी आये हैं, बापदादा से मिलने, वह हाथ उठाओ, खड़े हो जाओ।
तो पहली बारी आने वालों को विशेष मुबारक दे रहे हैं। लेट आये हो, टूलेट में नहीं आये हो। लेकिन तीव्र पुरुषार्थ का वरदान सदा याद रखना, तीव्र पुरुषार्थ करना ही है। करेंगे, गे गे नहीं करना, करना ही है। लास्ट सो फास्ट और फर्स्ट आना है। अच्छा।
चारों ओर के महान पवित्र आत्माओं को बापदादा का विशेष दिल की दुआयें, दिल का प्यार और दिल में समाने की मुबारक हो। बापदादा जानते हैं कि जब भी पधरामनी होती है तो ईमेल या पत्र भिन्न-भिन्न साधनों से चारों ओर के बच्चे यादप्यार भेजते हैं और बापदादा को सुनाने के पहले कोई देवे, उसके पहले ही सबके यादप्यार पहुंच जाते हैं क्योंकि ऐसे जो सिकीलधे याद करने वाले बच्चे हैं उनका कनेक्शन बहुत फास्ट पहुंचता है, आप लोग तीन चार दिन के बाद सम्मुख मिलते हो लेकिन उन्हों का यादप्यार जो सच्चे पात्र आत्मायें हैं उनका उसी घड़ी बापदादा के पास यादप्यार पहुंच जाता है। तो जिन्होंने भी दिल में भी याद किया, साधन नहीं मिला, उन्हों का भी यादप्यार पहुंचा है, और बापदादा हर एक बच्चे को पदम पदम पदम गुणा यादप्यार का रेसपान्ड दे रहे हैं।
बाकी चारों ओर अभी दो शब्द की लात-तात लगाओ – एक फुलस्टॉप और दूसरा सम्पूर्ण पवित्रता सारे ब्राह्मण परिवार में फैलानी है। जो कमजोर हैं उनको भी सहयोग देके बनाओ। यह बड़ा पुण्य है। छोड़ नहीं दो, यह तो है ही ऐसा, यह तो बदलना ही नहीं है, यह श्राप नहीं दे दो, पुण्य का काम करो। बदलके दिखायेंगे, बदलना ही है। उनकी उम्मीदें बढ़ाओ, गिरे हुए को गिराओ नहीं, सहारा दो, शक्ति दो। तो चारों ओर खुशनसीब खुशमिजाज, खुशी बांटने वाले बच्चों को बहुत-बहुत यादप्यार और नमस्ते।
| वरदान:- | चेकिंग करने की विशेषता को अपना निजी संस्कार बनाने वाले महान आत्मा भव जो भी संकल्प करो, बोल बोलो, कर्म करो, सम्बन्ध वा सम्पर्क में आओ सिर्फ यह चेकिंग करो कि यह बाप समान है! पहले मिलाओ फिर प्रैक्टिकल में लाओ। जैसे स्थूल में भी कई आत्माओं के संस्कार होते हैं, पहले चेक करेंगे फिर स्वीकार करेंगे। ऐसे आप महान पवित्र आत्मायें हो, तो चेकिंग की मशीनरी तेज करो। इसे अपना निजी संस्कार बना दो – यही सबसे बड़ी महानता है। |
| स्लोगन:- | सम्पूर्ण पवित्र और योगी बनना ही स्नेह का रिटर्न देना है। |
अव्यक्त इशारे – इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
अभी जो भी परिस्थितियां आ रही हैं या आने वाली हैं, प्रकृति के पांचों ही तत्व अच्छी तरह से हिलाने की कोशिश करेंगे परन्तु जीवनमुक्त विदेही अवस्था की अभ्यासी आत्मा अचल-अडोल पास विद आनर होकर सब बातें सहज पास कर लेगी इसलिए निरन्तर कर्मयोगी, निरन्तर सहज योगी, निरन्तर मुक्त आत्मा के संस्कार अभी से अनुभव में लाने हैं।
फुलस्टॉप लगाकर सम्पूर्ण पवित्रता की धारणा करो।
मनसा सकाश द्वारा सुख-शान्ति की अंचली देने की सेवा।
प्रश्न 1.
बापदादा आज बच्चों की कौन-सी महानता देख रहे हैं।
उत्तर.
बापदादा उन बच्चों की महानता देख रहे हैं जिन्होंने पवित्रता को असम्भव से सम्भव बना दिया है।
दुनिया जिस पवित्रता को कठिन मानती है, उसे ब्राह्मण आत्माओं ने सहज जीवन बना लिया है।
यही सच्ची महानता है।
प्रश्न 2.
पवित्रता का व्रत लेना वास्तव में किस बात का संकेत है।
उत्तर.
पवित्रता का व्रत लेना केवल नियम नहीं, बल्कि वृत्ति परिवर्तन का संकल्प है।
अर्थात् आत्मा-दृष्टि में रहना और सभी को भाई-भाई की भावना से देखना।
प्रश्न 3.
ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन क्या है।
उत्तर.
ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन पवित्रता है।
पवित्रता के आधार पर ही परमात्म प्यार और सर्व प्राप्तियाँ होती हैं।
प्रश्न 4.
पवित्रता की वृत्ति का वास्तविक अर्थ क्या है।
उत्तर.
हर आत्मा के प्रति शुभ भावना और शुभ कामना रखना।
दृष्टि से आत्मिक स्वरूप देखना और स्वयं को सदा आत्मिक स्थिति में अनुभव करना।
प्रश्न 5.
पवित्र आत्मा को कौन-से तीन विशेष वरदान प्राप्त होते हैं।
उत्तर.
-
आत्मा स्वयं को ही वरदान देने वाली बन जाती है।
-
वरदाता बाप का नियरेस्ट और डियरेस्ट बच्चा बनती है।
-
ब्राह्मण परिवार के निमित्त आत्माओं से स्वतः दुआएँ मिलती रहती हैं।
प्रश्न 6.
अतीन्द्रिय सुख सदा क्यों अनुभव नहीं होता।
उत्तर.
क्योंकि पवित्रता में कभी-कभी कमजोरी आ जाती है।
पवित्रता का फल ही अतीन्द्रिय सुख है, और जहाँ पवित्रता में कमी है वहाँ सुख स्थायी नहीं रहता।
प्रश्न 7.
मास्टर सर्वशक्तिवान होते हुए भी शक्तियाँ क्यों अनुभव नहीं होतीं।
उत्तर.
क्योंकि पवित्रता के फाउण्डेशन में कहीं न कहीं कमजोरी होती है।
मन, वचन, कर्म या सम्बन्ध-सम्पर्क में शुद्धता की कमी शक्ति को कम कर देती है।
प्रश्न 8.
बापदादा किस चार बातों की विशेष चेकिंग करने को कहते हैं।
उत्तर.
-
वृत्ति की पवित्रता।
-
सम्बन्ध-सम्पर्क में शुभ भावना।
-
वाणी में पवित्रता।
-
कर्म और संकल्प की शुद्धता।
प्रश्न 9.
विश्व परिवर्तक आत्मा की पहचान क्या है।
उत्तर.
जो पहले स्वयं को और अपने परिवार को परिवर्तन करती है।
विश्व परिवर्तन आत्मा, प्रकृति और सम्बन्धों के परिवर्तन से होता है।
प्रश्न 10.
पर उपकारी बनने के लिए किन तीन शब्दों को समाप्त करना आवश्यक है।
उत्तर.
-
परचिंतन।
-
परदर्शन।
-
परमत।
इन तीनों के समाप्त होने से आत्मा सच्ची विश्व उपकारी बनती है।
प्रश्न 11.
आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता क्या है।
उत्तर.
हर दुखी आत्मा को मनसा सकाश द्वारा सुख-शान्ति की अंचली देना।
यही सच्ची सेवा है।
प्रश्न 12.
फुलस्टॉप लगाने में कमी क्यों दिखाई दे रही है।
उत्तर.
क्योंकि फुलस्टॉप की जगह क्वेश्चन, आश्चर्य और दूसरों की बातें आ जाती हैं।
जिससे सेकण्ड में स्थिति परिवर्तन नहीं हो पाता।
प्रश्न 13.
अगर फुलस्टॉप लगाने की आदत नहीं होगी तो क्या परिणाम होगा।
उत्तर.
अन्त मते सो गति श्रेष्ठ नहीं होगी।
इसलिए अभी से सेकण्ड में फुलस्टॉप का अभ्यास आवश्यक है।
प्रश्न 14.
पवित्रता को पर्सनैलिटी, रीयल्टी और रॉयल्टी क्यों कहा गया है।
उत्तर.
क्योंकि आत्मा की वास्तविक शोभा और दिव्यता पवित्रता से ही प्रकट होती है।
पवित्रता आत्मा की जन्मसिद्ध रॉयल्टी है।
प्रश्न 15.
पवित्रता केवल ब्रह्मचर्य तक सीमित क्यों नहीं है।
उत्तर.
क्योंकि व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ बोल और रोब भी अपवित्रता है।
सम्पूर्ण पवित्रता मन, वचन, कर्म सबकी शुद्धता है।
प्रश्न 16.
नये आने वाले बच्चों को बाप का कौन-सा वरदान मिलता है।
उत्तर.
पवित्र भव और योगी भव।
अर्थात् सम्पूर्ण पवित्रता और फुलस्टॉप की शक्ति।
प्रश्न 17.
अव्यक्ति मास का विशेष प्लैन क्या होना चाहिए।
उत्तर.
मन्सा सेवा बढ़ाना।
मन्सा स्थिति को स्थिर करना।
अव्यक्त कर्म और बोल का अभ्यास बढ़ाना।
प्रश्न 18.
बापदादा बच्चों से क्या वायदा पूरा होते देखना चाहते हैं।
उत्तर.
कि कोई भी बच्चा पीछे न रहे।
सब साथ-साथ बाप के साथ चलें और समान बनें।
प्रश्न 19.
वरदान में बताई गई सबसे बड़ी महानता क्या है।
उत्तर.
हर संकल्प, बोल और कर्म में बाप समान चेकिंग करना।
इसे अपना निजी संस्कार बना लेना।
प्रश्न 20.
इस अव्यक्ति मास का अन्तिम लक्ष्य क्या है।
उत्तर.
बन्धनमुक्त रहकर जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करना।
निरन्तर कर्मयोगी, सहज योगी और मुक्त आत्मा बनना।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की अव्यक्त वाणी / मुरली पर आधारित आध्यात्मिक ज्ञान साझा करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस वीडियो में व्यक्त विचार आध्यात्मिक अध्ययन, आत्म-परिवर्तन और राजयोग अभ्यास के लिए हैं। यह किसी भी धर्म, व्यक्ति या विचारधारा के विरुद्ध नहीं है। यह वीडियो केवल आध्यात्मिक जागरूकता, शांति और सकारात्मक जीवन मूल्यों के लिए है। कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टि से देखें और अपने विवेक से ग्रहण करें।
फुलस्टॉप लगाकर पुरुषार्थ, सम्पूर्ण पवित्रता, मनसा सकाश सेवा, सुख शान्ति की सेवा, बापदादा अव्यक्त मुरली, अव्यक्त वाणी, ब्रह्माकुमारी मुरली, BK Murli Hindi, BK Avyakt Murli, पवित्रता का व्रत, ब्राह्मण जीवन, आत्मिक पवित्रता, मन वचन कर्म की पवित्रता, अतीन्द्रिय सुख, मास्टर सर्वशक्तिवान, फुलस्टॉप अभ्यास, सेकण्ड में फुलस्टॉप, विश्व परिवर्तक आत्मा, मनसा सेवा, शुभ भावना शुभ कामना, योगी जीवन, पवित्र भव योगी भव, तीव्र पुरुषार्थ, अव्यक्त मास, जीवनमुक्त अवस्था, विदेही स्थिति, कर्मयोगी जीवन, सहज राजयोग, राजयोग मेडिटेशन हिंदी, BK Spiritual Gyan, BK Hindi Video, Spiritual Motivation Hindi, Positive Thinking Hindi, Peaceful Mind Meditation, Divine Vibration, Soul Consciousness, आत्मा और परमात्मा ज्ञान,Making full stop effort, complete purity, mansa sakaash service, service of happiness and peace, BapDada Avyakt Murli, Avyakt Vani, Brahma Kumari Murli, BK Murli Hindi, BK Avyakt Murli, vow of purity, Brahmin life, spiritual purity, purity of mind, words and deeds, supersensuous happiness, Master Almighty, full stop practice, full stop in a second, world-transformer soul, mansa service, good feelings and good wishes, Yogi Life, may you be pure, may you be a yogi, intense effort, latent month, life-free state, external state, karmayogi life, sahaja rajyoga, rajyoga meditation Hindi, BK Spiritual Gyan, BK Hindi Video, Spiritual Motivation Hindi, Positive Thinking Hindi, Peaceful Mind Meditation, Divine Vibration, Soul Consciousness, soul and divine knowledge,

