(30)31-31-1986 “The method of making the past, present and future better”

AV-(30)31-31-1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”

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(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”

आज ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर और गॉड-फादर अपने अति मीठे, अति प्यारे बच्चों को दिल से दुआओं की ग्रीटिंग्स दे रहे हैं। बापदादा जानते हैं कि एक-एक सिकीलधा बच्चा कितना श्रेष्ठ, महान आत्मा हैं! हर बच्चे की महानता-पवित्रता – बाप के पास नम्बरवार पहुँचती रहती है। आज के दिन सभी विशेष नया वर्ष मनाने के उमंग-उत्साह से आये हुए हैं। दुनिया के लोग मनाने के लिए बुझे हुए दीप वा मोमबत्तियाँ जगाते हैं। वह जगाकर मनाते हैं और बापदादा जगे हुए अनगिनत दीपकों से नया वर्ष मना रहे हैं। बुझे हुए को जगाते नहीं और जगाकर फिर बुझाते नहीं। ऐसा लाखों की अन्दाज में जगे हुए रूहानी ज्योति के संगठन का वर्ष मनाना – यह सिवाए बाप और आपके कोई मना नहीं सकता। कितना सुन्दर जगमगाते दीपकों के रूहानी संगठन का दृश्य है! सबकी रूहानी ज्योति एकटिक, एकरस चमक रही है। सबके मन में ‘एक बाबा’ – यही लगन रूहानी दीपक को जगमगा रही है। एक संसार है, एक संकल्प है, एकरस स्थिति है – यही मनाना है, यही बनकर बनाना है। इस समय विदाई और बधाई दोनों का संगम है। पुराने की विदाई है और नये को बधाई है। इस संगम समय पर सभी पहुँच गये हैं। इसलिए, पुराने संकल्प और संस्कार के विदाई की भी मुबारक है और नये उमंग-उत्साह से उड़ने की भी मुबारक है।

जो प्रेजेन्ट है, वह कुछ समय के बाद पास्ट हो जायेगा। जो वर्ष चल रहा है, वह 12.00 बजे के बाद पास्ट हो जाएगा। इस समय को प्रेजेन्ट कहेंगे और कल को फ्यूचर (भविष्य) कहते हैं। पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर-इन तीनों का ही खेल चलता रहता है। इन तीनों शब्दों को इस नये वर्ष में नई विधि से प्रयोग करना। कैसे? पास्ट को सदा पास विद् ऑनर होकर के पास करना। “पास्ट इज पास्ट” तो होना ही है लेकिन कैसे पास करना है? कहते हो ना – समय पास हो गया, यह दृश्य पास हो गया। लेकिन पास विद् ऑनर बन पास किया? बीती को बीती किया लेकिन बीती को ऐसी श्रेष्ठ विधि से बीती किया जो बीती को स्मृति में लाते ‘वाह! वाह!’ के बोल दिल से निकलें? बीती को ऐसे बीती किया जो अन्य आपकी बीती हुई स्टोरी से पाठ पढ़ें? आपकी बीती यादगार-स्वरूप बन जाये, कीर्तन अर्थात् कीर्ति गाते रहें। जैसे भक्ति-मार्ग में आपके ही कर्म का कीर्तन गाते रहते हैं। आपके कर्म के कीर्तन से अनेक आत्माओं का अब भी शरीर निर्वाह हो रहा है। इस नये वर्ष में हर पास्ट संकल्प वा समय को ऐसी विधि से पास करना। समझा, क्या करना है?

अब आओ प्रेजन्ट (वर्तमान), प्रेजन्ट को ऐसे प्रैक्टिकल में लाओ जो हर प्रेजन्ट घड़ी वा संकल्प से आप विशेष आत्माओं द्वारा कोई न कोई प्रेजेन्ट (सौगात) प्राप्त हो। सबसे ज्यादा खुशी किस समय होती है? जब किससे प्रेजेन्ट (सौगात) मिलती है। कैसा भी अशान्त हो, दु:खी हो या परेशान हो लेकिन जब कोई प्यार से प्रेजेन्ट देता है तो उस घड़ी खुशी की लहर आ जाती है। दिखावे की प्रेजेन्ट नहीं, दिल से। सभी प्रेजेन्ट (सौगात) को सदा स्नेह की सूचक मानते हैं। प्रेजेन्ट दी हुई चीज़ में वैल्यू ‘स्नेह’ की होती है, ‘चीज़’ की नहीं। तो प्रेजन्ट देने की विधि से वृद्धि को पाते रहना। समझा? सहज है या मुश्किल है? भण्डारे भरपूर हैं ना या प्रेजेन्ट देते-देते भण्डारा कम हो जायेगा? स्टॉक जमा है ना? सिर्फ एक सेकेण्ड के स्नेह की दृष्टि, स्नेह का सहयोग, स्नेह की भावना, मीठे बोल, दिल के श्रेष्ठ संकल्प का साथ – यही प्रेजेन्ट्स बहुत हैं। आजकल चाहे आपस में ब्राह्मण आत्मायें हैं, चाहे आपकी भक्त आत्मायें हैं, चाहे आपके सम्बन्ध-सम्पर्क वाली आत्मायें हैं, चाहे परेशान आत्मायें हैं – सभी को इन प्रेजेन्ट्स की आवश्यकता है, दूसरी प्रेजेन्ट की नहीं। इसका स्टॉक तो है ना? तो हर प्रेजन्ट घड़ी को दाता बन प्रेजन्ट को पास्ट में बदलना, तो सर्व प्रकार की आत्मायें दिल से आपका कीर्तन गाती रहेंगी। अच्छा।

फ्यूचर क्या करेंगे? सभी आप लोगों से पूछते हैं न कि आखिर भी फ्यूचर क्या है? फ्यूचर को अपने फीचर्स से प्रत्यक्ष करो। आपके फीचर्स फ्यूचर को प्रकट करें। फ्यूचर क्या होगा, फ्यूचर के नैन क्या होंगे, फ्यूचर की मुस्कान क्या होगी, फ्यूचर के सम्बन्ध क्या होंगे, फ्यूचर की जीवन क्या होगी – आपके फीचर्स इन सब बातों का साक्षात्कार करायें। दृष्टि फ्यूचर की सृष्टि को स्पष्ट करे। ‘क्या होगा’ – यह क्वेश्चन समाप्त हो ‘ऐसा होगा’, इसमें बदल जाये। ‘कैसा’ बदल ‘ऐसा’ हो जाये। फ्यूचर है ही देवता। देवतापन के संस्कार अर्थात् दातापन के संस्कार, देवतापन के संस्कार अर्थात् ताज, तख्तधारी बनने के संस्कार। जो भी देखे, उनको आपका ताज और तख्त अनुभव हो। कौनसा ताज? सदा लाइट (हल्का) रहने का लाइट (प्रकाश) का ताज। और सदा आपके कर्म से, बोल से रूहानी नशा और निश्चिन्तपन के चिन्ह अनुभव हों। तख्तधारी की निशानी है ही ‘निश्चिन्त’ और ‘नशा’। निश्चित विजयी का नशा और निश्चिन्त स्थिति – यह है बाप के दिलतख्तनशीन आत्मा की निशानी। जो भी आये, वह यह तख्तनशीन और ताजधारी स्थिति का अनुभव करे – यह है फ्यूचर को फीचर्स द्वारा प्रत्यक्ष करना। ऐसा नया वर्ष मनाना अर्थात् बनकर बनाना। समझा, नये वर्ष में क्या करना है? तीन शब्दों से मास्टर त्रिमूर्ति, मास्टर त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बन जाना। सब यही सोचते हैं कि अब क्या करना है? हर कदम से चाहे याद से, चाहे सेवा के हर कदम से इन तीनों ही विधि से सिद्धि प्राप्त करते रहना।

नये वर्ष का उमंग-उत्साह तो बहुत है ना। डबल विदेशियों को डबल उमंग है ना। न्यू-इयर मनाने में कितने साधन अपनायेंगे? वे लोग साधन भी विनाशी अपनाते और मनोरंजन भी अल्पकाल का करते। अभी-अभी जलायेंगे, अभी-अभी बुझायेंगे। लेकिन बापदादा अविनाशी विधि से अविनाशी सिद्धि प्राप्त करने वाले बच्चों से मना रहे हैं। आप लोग भी क्या करेंगे? केक काटेंगे, मोमबत्ती जलायेंगे, गीत गायेंगे, ताली बजायेंगे। यह भी खूब करो, भले करो। लेकिन बापदादा सदा अविनाशी बच्चों को अविनाशी मुबारक देते हैं और अविनाशी बनाने की विधि बताते हैं। साकार दुनिया में साकारी सुहेज मनाते देख बापदादा भी खुश होते हैं क्योंकि ऐसा सुन्दर परिवार जो पूरा ही परिवार ताजधारी, तख्तधारी है और इतनी लाखों की संख्या में एक परिवार है, ऐसा परिवार सारे कल्प में एक ही बार मिलता है। इसलिए खूब नाचो, गाओ, मिठाई खाओ। बाप तो बच्चों को देख करके, भासना लेकर के ही खुश होते हैं। सभी के मन के गीत कौनसे बजते हैं? खुशी के गीत बज रहे हैं। सदा ‘वाह! वाह!’ के गीत गाओ। वाह बाबा! वाह तकदीर! वाह मीठा परिवार! वाह श्रेष्ठ संगम का सुहावना समय! हर कर्म ‘वाह-वाह!’ है। ‘वाह! वाह! के गीत गाते रहो। बापदादा आज मुस्करा रहे थे – कई बच्चे ‘वाह! के गीत के बजाय और भी गीत गा लेते हैं। वह भी दो शब्द का गीत है, वह जानते हो? इस वर्ष वह दो शब्दों का गीत नहीं गाना। वह दो शब्द हैं – ‘व्हाई’ और ‘आई’ (क्यों और मैं) बहुत करके बापदादा जब बच्चों की टी.वी. देखते हैं तो बच्चे ‘वाह-वाह!’ के बजाये ‘व्हाई-व्हाई’ बहुत करते हैं। तो ‘व्हाई’ के बजाय ‘वाह-वाह! कहना और ‘आई’ के बजाये ‘बाबा-बाबा’ कहना। समझा?

जो भी हो, जैसे भी हो फिर भी बापदादा के प्यारे हो, तब तो सभी प्यार से मिलने के लिए भागते हो। अमृतवेले सभी बच्चे सदा यही गीत गाते हैं – ‘प्यारा बाबा, मीठा बाबा’ और बापदादा रिटर्न में सदा ‘प्यारे बच्चे, प्यारे बच्चे’ का गीत गाते हैं। अच्छा। वैसे तो इस वर्ष न्यारे और प्यारे का पाठ है, फिर भी बच्चों के स्नेह का आह्वान बाप को भी न्यारी दुनिया से प्यारी दुनिया में ले आता है। आकारी विधि में यह सब देखने की आवश्यकता नहीं है। आकारी मिलन की विधि में एक ही समय पर अनेक बेहद बच्चों को बेहद मिलन की अनुभूति कराते हैं। साकारी विधि में फिर भी हद में आना पड़ता। बच्चों को चाहिए भी क्या – मुरली और दृष्टि। मुरली में भी मिलना ही तो है। चाहे अलग में बोलें, चाहे साथ में बोलें, बोलेंगे तो वही बात। जो संगठन में बोलते हैं वही अलग में बोलेंगे। फिर भी देखो पहला चान्स डबल विदशियों को मिला है। भारत के बच्चे 18 ता. (18 जनवरी) का इन्तजार कर रहे हैं और आप लोग पहला चान्स ले रहे हो। अच्छा। 35-36 देशों के आये हुये हैं। यह भी 36 प्रकार का भोग हो गया। 36 का गायन है ना। 36 वैराइटी हो गई है।

बापदादा सभी बच्चों के सेवा की उमंग-उत्साह को देख खुश होते हैं। जो सभी ने तन, मन, धन समय-स्नेह और हिम्मत से सेवा में लगाया, उसकी बापदादा पदमगुणा बधाई दे रहे हैं। चाहे इस समय सम्मुख हैं, चाहे आकार रूप में सम्मुख हैं लेकिन बापदादा सभी बच्चों को सेवा में लगन से मगन रहने की मुबारक दे रहे हैं। सहयोगी बने, सहयोगी बनाया। तो सहयोगी बनने की भी और सहयोगी बनाने की भी डबल मुबारक। कई बच्चों के सेवा के उमंग-उत्साह के समाचार और साथ-साथ नये वर्ष के उमंग-उत्साह के कार्ड की माला बापदादा के गले में पिरो गई। जिन्होंने भी कार्ड भेजे हैं, बापदादा कार्ड के रिटर्न में रिगार्ड और लव दोनों देते हैं। समाचार सुन-सुन हर्षित होते हैं। चाहे गुप्त रूप में सेवा की, चाहे प्रत्यक्ष रूप में की लेकिन बाप को प्रत्यक्ष करने की सेवा में सदा सफलता ही है। स्नेह से सेवा की रिजल्ट – सहयोगी आत्मायें बनना और बाप के कार्य में समीप आना – यही सफलता की निशानी है। सहयोगी आज सहयोगी हैं, कल योगी भी बन जायेंगे। तो सहयोगी बनाने की विशेष सेवा जो सभी ने चारों ओर की, उसके लिए बापदादा ‘अविनाशी सफलता स्वरूप भव’ का वरदान दे रहे हैं। अच्छा।

जब आपकी प्रजा, सहयोगी, सम्बन्धी वृद्धि को प्राप्त होंगे तो वृद्धि के प्रमाण विधि को भी बदलना तो पड़ता है ना। खुश होते हो ना, भले बढ़ें।

अध्याय: पास्ट, प्रेज़न्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि

📅 मुरली संदर्भ तिथि: 01-01-1987 (नववर्ष अव्यक्त संदेश)


✨ प्रस्तावना — बापदादा की दिल से शुभकामनाएँ

आज परमपिता और ग्रेट-ग्रेट ग्रैंडफादर अपने मीठे बच्चों को दिल से दुआओं की ग्रीटिंग्स दे रहे हैं। बापदादा हर आत्मा की महानता और पवित्रता को नम्बरवार देखते हैं। नया वर्ष केवल कैलेंडर बदलना नहीं — बल्कि पुराने संस्कारों की विदाई और नए उमंग की बधाई है।

उदाहरण:
जैसे सूर्योदय होते ही अंधकार स्वतः समाप्त हो जाता है, वैसे ही नया संकल्प आते ही पुराने संस्कार मिटने लगते हैं।

🪶 मुरली नोट:

“संगम समय विदाई और बधाई का संगम है।”


🔹 भाग 1 — पास्ट को “पास विद ऑनर” बनाओ

पास्ट तो बीतना ही है, लेकिन प्रश्न यह है कि
👉 क्या हमने उसे सम्मानपूर्वक पास किया?

श्रेष्ठ पास्ट की पहचान

  • याद करने पर पछतावा नहीं — प्रेरणा मिले

  • हमारी कहानी दूसरों को सीख दे

  • बीता हुआ समय कीर्ति बन जाए

उदाहरण:
एक विद्यार्थी परीक्षा में फेल हुआ लेकिन उसने मेहनत कर अगले वर्ष टॉप किया। उसका फेल होना भी सम्मानित पास्ट बन गया।

🪶 मुरली नोट:

“बीती को ऐसी विधि से बीती करो कि स्मृति में लाते ‘वाह! वाह!’ निकले।”


🔹 भाग 2 — प्रेज़न्ट को प्रेज़ेन्ट (उपहार) बनाओ

हर वर्तमान क्षण एक सौगात है।
सबसे बड़ा गिफ्ट क्या है? — स्नेह

✔ मीठे बोल
✔ स्नेह की दृष्टि
✔ शुभ भावना
✔ सहयोग

उदाहरण:
एक दुखी व्यक्ति को यदि कोई प्रेम से मुस्कुरा कर पूछ ले — “आप ठीक हैं?” — तो उसका दिन बदल जाता है। यह सबसे बड़ा प्रेज़ेन्ट है।

🪶 मुरली नोट:

“प्रेज़ेन्ट की वैल्यू चीज़ में नहीं, स्नेह में होती है।”


🔹 भाग 3 — फ्यूचर को फीचर्स से प्रकट करो

भविष्य बताने की आवश्यकता नहीं — उसे जीने की आवश्यकता है।

कैसे?

  • चेहरा शांति का दर्पण बने

  • आँखें विश्वास दें

  • बोल प्रेरणा दें

देवता समान भविष्य = दातापन + निश्चिन्तता + आत्मविश्वास

उदाहरण:
जब किसी महापुरुष को देखते हैं तो उनके चेहरे से ही दिव्यता झलकती है — यही फीचर्स से फ्यूचर प्रकट करना है।

🪶 मुरली नोट:

“फ्यूचर को अपने फीचर्स से प्रत्यक्ष करो।”


🔹 भाग 4 — दो शब्द जो जीवन बदल देते हैं

 क्यों? और मैं
 वाह! और बाबा

क्यों? = शिकायत
मैं = अहंकार
वाह! = कृतज्ञता
बाबा = समर्पण

मुरली नोट:

“‘व्हाई’ और ‘आई’ छोड़ो — ‘वाह’ और ‘बाबा’ अपनाओ।”


🔹 भाग 5 — सच्चा नया वर्ष कैसे मनाएँ?

दुनिया दीप जलाकर मनाती है,
लेकिन सच्चा उत्सव तब है जब आत्मा स्वयं दीपक बन जाए।

नया वर्ष का वास्तविक सेलिब्रेशन

  • एक संकल्प

  • एक लक्ष्य

  • एक स्मृति

मुरली नोट:

“जगे हुए रूहानी दीपकों का संगठन ही सच्चा उत्सव है।”


🔹 भाग 6 — सहयोगी से योगी बनने की विधि

जो सेवा में लगन से लगे रहते हैं, वही आगे चलकर योगी बनते हैं।

उदाहरण:
जो व्यक्ति पहले दूसरों की मदद करता है, वही बाद में आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करता है।

मुरली नोट:

“सहयोगी आज हैं — कल योगी बनेंगे।”


 अंतिम सार

यदि तीन सूत्र अपना लें —
✔ पास्ट = प्रेरणा
✔ प्रेज़न्ट = उपहार
✔ फ्यूचर = उदाहरण

तो जीवन स्वयं ही दिव्य बन जाएगा।

प्रश्न 1: नया वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से क्या है?
उत्तर: नया वर्ष केवल तारीख बदलना नहीं, बल्कि पुराने संस्कारों की विदाई और नए उमंग-उत्साह का स्वागत है।

प्रश्न 2: संगम समय को विशेष क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि यह विदाई और बधाई का संगम है — पुरानी वृत्तियों का अंत और नए दिव्य संकल्पों की शुरुआत।


🔹 भाग 1 — पास्ट को पास विद ऑनर

प्रश्न 3: पास्ट को “पास विद ऑनर” करने का क्या अर्थ है?
उत्तर: ऐसा जीवन जीना कि बीती हुई बातें पछतावा नहीं, प्रेरणा दें और दूसरों के लिए उदाहरण बनें।

प्रश्न 4: श्रेष्ठ पास्ट की पहचान क्या है?
उत्तर: जब स्मृति में लाने पर दिल से “वाह-वाह” निकले और हमारी कहानी दूसरों के लिए सीख बन जाए।

प्रश्न 5: असफलता भी सम्मानित पास्ट कैसे बन सकती है?
उत्तर: जब हम उससे सीख लेकर आगे बढ़ते हैं और वही असफलता भविष्य की सफलता की सीढ़ी बन जाती है।


🔹 भाग 2 — प्रेज़न्ट को प्रेज़ेन्ट बनाना

प्रश्न 6: वर्तमान को “प्रेज़ेन्ट” क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि हर क्षण ईश्वर की दी हुई सौगात है जिसे हम दूसरों को खुशी देकर सार्थक बना सकते हैं।

प्रश्न 7: सबसे बड़ा उपहार क्या है?
उत्तर: स्नेह — मीठे बोल, प्रेमभरी दृष्टि, शुभ भावना और सहयोग।

प्रश्न 8: सच्चे उपहार की असली वैल्यू किसमें होती है?
उत्तर: वस्तु में नहीं, भावना में।


🔹 भाग 3 — फ्यूचर को फीचर्स से प्रकट करना

प्रश्न 9: भविष्य को जानने की आवश्यकता है या बनाने की?
उत्तर: बनाने की — क्योंकि हमारा वर्तमान ही भविष्य का निर्माण करता है।

प्रश्न 10: भविष्य को फीचर्स से प्रकट करने का अर्थ क्या है?
उत्तर: ऐसा व्यक्तित्व बनाना कि हमारे चेहरे, बोल और व्यवहार से दिव्यता झलके और लोग हमारे भविष्य की महानता अनुभव करें।

प्रश्न 11: देवता समान भविष्य किन गुणों से बनता है?
उत्तर: दातापन, निश्चिन्तता और आत्मविश्वास से।


🔹 भाग 4 — जीवन बदलने वाले दो शब्द

प्रश्न 12: कौन से दो शब्द जीवन में बाधा बनते हैं?
उत्तर: “क्यों?” और “मैं” — क्योंकि ये शिकायत और अहंकार को बढ़ाते हैं।

प्रश्न 13: कौन से दो शब्द जीवन को सुखमय बनाते हैं?
उत्तर: “वाह!” और “बाबा” — क्योंकि ये कृतज्ञता और समर्पण का अनुभव कराते हैं।


🔹 भाग 5 — सच्चा नया वर्ष मनाने की विधि

प्रश्न 14: सच्चा आध्यात्मिक उत्सव क्या है?
उत्तर: जब आत्मा स्वयं प्रकाशमान दीपक बन जाए और दूसरों को भी रोशनी दे।

प्रश्न 15: नया वर्ष मनाने के तीन वास्तविक संकल्प क्या हैं?
उत्तर:

  1. एक श्रेष्ठ संकल्प

  2. एक लक्ष्य

  3. एक परम स्मृति


🔹 भाग 6 — सहयोगी से योगी

प्रश्न 16: सहयोगी आत्मा योगी कैसे बनती है?
उत्तर: जब वह सेवा में लगन से लगी रहती है, तो सेवा से योग की शक्ति स्वतः मिलती है।

प्रश्न 17: सफलता की सच्ची निशानी क्या है?
उत्तर: दूसरों को सहयोगी बनाना और ईश्वरीय कार्य के समीप लाना।


 अंतिम सार प्रश्नोत्तर

प्रश्न 18: जीवन को दिव्य बनाने का सरल सूत्र क्या है?
उत्तर:

  • पास्ट को प्रेरणा बनाओ

  • प्रेज़न्ट को उपहार बनाओ

  • फ्यूचर को उदाहरण बनाओ

प्रश्न 19: त्रिकाल को जीतने वाला कौन है?
उत्तर: जो तीनों काल — भूत, वर्तमान और भविष्य — को श्रेष्ठ बना लेता है।

 Disclaimer

यह आध्यात्मिक सामग्री ब्रह्माकुमारी शिक्षाओं और मुरली ज्ञान पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मिक उत्थान, सकारात्मक चिंतन और जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। यह किसी धर्म, मत या संस्था की आलोचना नहीं है। दर्शक अपने विवेक और श्रद्धा के अनुसार विचार ग्रहण करें।

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