Creaate YouTube वीडियो & disclamer, डिस्क्रिप्शन और हैशटैग्स “तीसरा विश्व युद्ध
सृष्टि परिवर्तन।
आज पाँचवाँ विषय करेंगे।
परमाणु युद्ध।
पृथ्वी का शुद्धिकरण।
परमाणु युद्ध जिसके द्वारा क्या होगा?
पृथ्वी का शुद्धिकरण।
क्या परमाणु युद्ध से होगा पृथ्वी का शुद्धिकरण?
बीके ज्ञान का गहरा रहस्य, ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान का गहरा रहस्य।
न्यूक्लियरवाद और सृष्टि परिवर्तन।
परमाणु युद्ध से सृष्टि का परिवर्तन होगा।
क्या परमाणु युद्ध ड्रामा का भाग है?
मुरली क्या कहती है?
वर्ल्ड ड्रामा में परमाणु युद्ध होना ड्रामा का एक हिस्सा है।
मुरली क्या कहती है?
डिस्क्लेमर है। यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन और चिंतन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
इसमें व्यक्त विचार ब्रह्मा कुमारी शिक्षाओं, मुरली बिंदुओं और वक्ता की आध्यात्मिक समझ पर आधारित हैं।
इस वीडियो का उद्देश्य किसी भी प्रकार की भय उत्पन्न करने वाली भविष्यवाणी करना नहीं है।
भय उत्पन्न करने वाली भविष्यवाणी करना या किसी देश, समाज या राजनीतिक घटना पर टिप्पणी करना हमारा उद्देश्य नहीं है।
परमाणु युद्ध अथवा सृष्टि परिवर्तन का उल्लेख केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्व परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने के लिए किया गया है।
यदि परमाणु युद्ध हुआ तो क्या यह पृथ्वी शुद्धिकरण की प्रक्रिया का भाग होगा?
शुद्धिकरण की प्रक्रिया का भाग होगा।
तो क्या यह पृथ्वी शुद्धिकरण की प्रक्रिया का भाग होगा?
शुद्धिकरण की प्रक्रिया का भाग होगा।
नंबर एक — आधुनिक दुनिया का सबसे बड़ा डर।
आज के समय में यदि किसी बात से दुनिया सबसे अधिक डरती है तो वह है परमाणु युद्ध।
दुनिया में कई देशों के पास अत्यंत शक्तिशाली परमाणु हथियार हैं।
लोग सोचते हैं —
क्या पूरी पृथ्वी नष्ट हो जाएगी?
क्या यह मानव सभ्यता का अंत हो जाएगा?
लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान हमें इस विषय को एक अलग दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।
वह अलग दृष्टि क्या है?
आज हम इस प्रश्न को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझेंगे।
सृष्टि परिवर्तन का नियम है —
चेंज इज द लॉ ऑफ नेचर।
चेंज जो है, प्रकृति का नियम है।
नंबर दो — सृष्टि परिवर्तन का नियम क्या है?
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार सृष्टि एक नियत चक्र के अनुसार चलती है।
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार सृष्टि एक नियत चक्र है।
चार युगों का चक्र है —
सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग, कलयुग और फिर संगम युग।
जब पुरानी दुनिया समाप्त होती है और नई दुनिया की स्थापना होती है।
साकार मुरली — 19 जनवरी 1969
ये पुरानी दुनिया खत्म होनी है।
नई दुनिया की स्थापना होनी है।
इसका अर्थ है कि परिवर्तन निश्चित है।
लेकिन यह प्रश्न अभी भी है —
पुरानी दुनिया समाप्त कैसे होगी?
क्या सृष्टि परिवर्तन अचानक होता है?
सृष्टि परिवर्तन कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है।
यह एक क्रमिक प्रक्रिया है जो लंबे समय तक चलती रहती है।
साकार मुरली — 3 फरवरी 1969
विनाश के कई साधन बनेंगे।
प्राकृतिक आपदाएं भी आती रहेंगी।
विनाश के कई साधन बनेंगे।
प्राकृतिक आपदाएं भी होंगी और आपस की लड़ाई भी होगी।
इसका अर्थ है कि परिवर्तन कई माध्यमों से होगा।
प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध, सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक अस्थिरता।
इन सभी को मिलाकर परिवर्तनकारी प्रभाव होता है।
नंबर चार — परमाणु हथियार विज्ञान की चरम शक्ति।
आज विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि मनुष्य ने ऐसे हथियार बना लिए हैं जो कुछ ही क्षणों में बड़े क्षेत्रों को नष्ट कर सकते हैं।
यह विज्ञान की शक्ति का एक उदाहरण है।
लेकिन जब शक्ति के साथ आध्यात्मिकता नहीं होती, तब वही शक्ति विनाश का कारण बन सकती है।
उदाहरण —
जैसे बिजली का उपयोग प्रकाश के लिए भी हो सकता है और विनाश के लिए भी।
वैसे ही विज्ञान और ज्ञान का उपयोग मनुष्य की चेतना पर निर्भर करता है।
क्या परमाणु युद्ध पृथ्वी शुद्धिकरण का माध्यम हो सकता है?
आध्यात्मिक दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि पृथ्वी का शुद्धिकरण कई स्तरों पर होता है।
यह केवल एक घटना से नहीं होता।
मुरलियों में बार-बार बताया गया है कि पुरानी दुनिया को समाप्त होना है ताकि नई दुनिया की स्थापना हो सके।
साकार मुरली — 18 जनवरी 1973
पहले मनुष्य के विकारों का विनाश होगा, तब नई दुनिया बनेगी।
इसका अर्थ है कि सबसे बड़ा शुद्धिकरण मानव चेतना का है।
असली शुद्धिकरण क्या है?
लोग समझते हैं कि शुद्धिकरण का अर्थ केवल भौतिक विनाश है।
लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से शुद्धिकरण का अर्थ है —
आत्मा को पवित्र बनाना।
विकारों का अंत और दिव्य संस्कारों का विकास।
उदाहरण —
जैसे सोने को शुद्ध करने के लिए उसे आग में तपाया जाता है।
उसी प्रकार आत्मा भी कठिन परिस्थितियों में अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानती है।
परमाणु युद्ध का डर क्यों है?
आज मनुष्य का अहंकार बहुत बढ़ गया है।
राष्ट्र अपनी शक्ति दिखाना चाहते हैं।
संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा है।
तकनीकी हथियार अत्यधिक शक्तिशाली हो चुके हैं।
जब अहंकार बढ़ता है तो संघर्ष भी बढ़ता है।
बीके के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा क्या है?
मुरलियों में बार-बार बताया गया है कि अंतिम समय में सबसे बड़ी सुरक्षा परमात्म स्मृति है।
साकार मुरली — 17 जनवरी 1969
अंत समय में बाप की याद ही पार लगाएगी।
बाबा की श्रीमत पर चलेंगे तो सफलता निश्चित मिलेगी।
इसका अर्थ है कि बाहरी परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि आत्मा परमात्मा की याद में स्थिर है तो वह भय से मुक्त हो जाती है।
बीके और नॉन-बीके दोनों के लिए संदेश —
यदि हम लोगों को केवल विनाश की बातें बताएंगे तो वे डर जाएंगे।
इसलिए हमें संतुलित दृष्टिकोण देना चाहिए।
उन्हें बताना चाहिए कि दुनिया परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और हमें अपने जीवन को शुद्ध बनाना चाहिए।
आध्यात्मिकता ही स्थायी समाधान है।
सबसे बड़ा पुरुषार्थ क्या है?
इस समय सबसे बड़ा पुरुषार्थ है —
आत्म चेतना में स्थित होना।
परमात्म स्मृति का अभ्यास करना और विश्व में शांति का संदेश फैलाना।
निष्कर्ष —
यह कहना उचित नहीं होगा कि पृथ्वी का शुद्धिकरण केवल परमाणु युद्ध से होगा।
लेकिन यह संभव है कि वैश्विक संघर्ष भी परिवर्तन की प्रक्रिया का एक भाग बन जाए।
सृष्टि परिवर्तन एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें शामिल हो सकते हैं —
सामाजिक परिवर्तन,
प्राकृतिक घटनाएं,
और संभावित युद्ध।
लेकिन सबसे बड़ा शुद्धिकरण मानव चेतना का शुद्धिकरण है।
अंतिम संदेश —
यदि हम आने वाले समय के लिए तैयार होना चाहते हैं तो हमें डरने की आवश्यकता नहीं है।
हमें करना है —
ज्ञान को समझना,
राजयोग का अभ्यास करना,
और दुनिया में शांति का संदेश फैलाना।
क्योंकि सृष्टि परिवर्तन अंत नहीं है।
यह एक नई दिव्य दुनिया की शुरुआत है।
