MURLI 29-03-2026 |BRAHMA KUMARIS

Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below

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29-03-26
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
रिवाइज: 25-10-09 मधुबन

सर्व खजानों से सम्पन्न अपने चेहरे वा चलन से अलौकिकता का साक्षात्कार कराओ

आज सर्व खजानों के दाता अपने खजानों के मालिक बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चा सर्व खजानों से सम्पन्न है क्योंकि बाप ने सर्व बच्चों को एक जैसे एक ही समय में सर्व खजाने दिये हैं। तो बापदादा अपने बालक सो मालिक बच्चों से मिलने आये हैं। बच्चों ने बुलाया तो बाप बच्चों के स्नेह में पहुंच गये हैं। खजाने तो बहुत हैं, सबसे पहला खजाना है ज्ञान धन, जिस ज्ञान धन से मालामाल हो गये, महादानी बन औरों को भी बांटते रहते हो। जिस ज्ञान के खजाने से भिन्न-भिन्न बंधनों में फंसी हुई आत्मा, उन सब बंधनों से मुक्त हो गई। बन्धनयुक्त से बन्धनमुक्त हो गये। साथ में योग अर्थात् याद का खजाना, जिससे अनेक शक्तियां प्राप्त की हैं। ऐसे ही धारणा द्वारा सर्व गुणों की अनुभूति अर्थात् खजाना मिला है। साथ में धारणा की शक्ति से सर्व के स्नेह की शक्ति, सर्व के प्यारे और न्यारेपन की शक्ति का खजाना प्राप्त किया, सर्व के स्नेह का खजाना अनुभव किया। साथ में सर्व ब्राह्मण सम्बन्ध से अपार खुशी का खजाना अनुभव किया। लेकिन सर्व खजानों के साथ जो विशेष खजाना है वह है संगम के समय का खजाना। जिस आत्मा को समय के खजाने का महत्व है वह सदा अनेक प्राप्तियों के मालिक बन जाते हैं क्योंकि संगमयुग का समय बहुत छोटा है लेकिन समय से प्राप्तियां ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा संगमयुग की श्रेष्ठ से श्रेष्ठ प्राप्ति है स्वयं भगवान बाप रूप में, शिक्षक रूप में, सतगुरू के रूप में प्राप्त होता है। संगमयुग में छोटे से जन्म में 21 जन्म की प्राप्ति, जिसमें तन, मन, धन, जन सर्व प्राप्ति हैं और गैरन्टी है 21 जन्म फुल, आधा नहीं, पौना नहीं लेकिन फुल 21 जन्म की गैरन्टी है। तो सबसे ज्यादा जो महत्व है वह है संगमयुग का एक-एक सेकण्ड अनेक वर्षों के समान है। तो बोलो, सर्व खजानों से सम्पन्न तो हैं? सम्पन्न है ना? इसलिए बापदादा सदा समय की स्मृति दिला रहे हैं। कई बच्चे समझते हैं कि एक दो मिनट अगर और कुछ सोच लिया, तो 2 मिनट ही तो हैं। लेकिन जितना समय का महत्व है उस अनुसार तो 2 मिनट नहीं, 2 मास भी नहीं, दो वर्ष के समान हैं। इतना महत्व है संगम के समय का। सर्व शक्तियों की, सर्व गुणों की, परमात्म प्यार की, ब्राह्मण परिवार के प्यार की और कल्प पहले वाले ईश्वरीय हक की, यह सर्व प्राप्तियाँ इस छोटे से युग में हैं और कोई भी युग में यह सर्व प्राप्ति नहीं। राज्य भाग्य होगा, आप सबका राज्य होगा, सुख शान्ति सब होगा लेकिन परमात्म मिलन का, अतीन्द्रिय सुख का, सर्व ब्राह्मण परिवार के प्यार का, आदि मध्य अन्त की नॉलेज का भाग्य अब संगम पर ही मिला है, हर कल्प मिलता रहेगा।

बापदादा हर बच्चे के चेहरे से देखते हैं कि खजाने जमा कितने हैं? खजाने तो मिले लेकिन हर एक ने कितना जमा का खाता बढ़ाया है, वह हर एक के चेहरे से, चलन से दिखाई देता है और आप सब भी अपने आपको जानते हो कि मैंने कितना जमा किया है! अभी बापदादा के दिल की यही आश है कि खजाने मिले तो हैं लेकिन अब समय सिर्फ वर्णन करने का नहीं है लेकिन आपका चेहरा और चलन प्रत्यक्ष अनुभव कराये कि यह आत्मायें कोई विशेष हैं, न्यारे हैं और परमात्म प्यारे हैं क्योंकि आगे चलकर समय परिवर्तन होने से आपकी सेवा सिर्फ वर्णन करने से नहीं, समय नाजुक होने से इतना समय कोई निकाल नहीं सकेगा लेकिन आपके खजाने सम्पन्न चेहरे से, चलन से आपकी अलौकिकता का दूर से ही साक्षात्कार होगा। तो ऐसा पुरुषार्थ अभी अपना प्रत्यक्ष करो। जैसे ब्रह्मा बाप को देखा, चाहे संगठन के बीच में भी रहा तो भी दूर से वह पर्सनैलिटी, चमक अनुभव हुई। ऐसे अभी डबल विदेशी विशेष डबल पुरुषार्थ करो। बापदादा डबल पुरुषार्थी कहते हैं तो बापदादा निमित्त आज डबल विदेशी बच्चों को देख खुश है। वृद्धि का पुरुषार्थ अच्छा कर रहे हैं, निमित्त बनी हुई आत्माओं से पालना भी सभी को बहुत अच्छी मिल रही है और बापदादा को एक बात सभी की बहुत अच्छी लगती है कि सर्व आत्मायें हर वर्ष अपना संगठन का मिलन मधुबन में विशेष करते हैं क्योंकि मधुबन का वायुमण्डल रिफ्रेशमेंट में बहुत सहयोग देता है और एक ही जिम्मेवारी है – स्व-परिवर्तन, मन्सा सेवा, एक दो के अनुभवों का भी अच्छा चांस मिलता है। तो बापदादा इस बात पर मुबारक देते हैं।

अभी कुछ कमाल अपने-अपने स्थान पर जाकर करना, कुछ न्यारापन जो बाप को प्यारा है वह प्रैक्टिकल में अनुभव कराना जिससे मधुबन की रिफ्रेशमेंट का सहयोग वहाँ भी अनुभव करते रहेंगे। तो आज विशेष डबल पुरुषार्थी ग्रुप का मिलन है और देखो आप सभी से इन्डिया वाले बच्चों का इतना प्यार है जो पहला चांस आपको ही देते हैं। तो पहले चांस की रिजल्ट पहला नम्बर लेना है। अच्छा लगता है, बापदादा ने पहले भी सुनाया है कि डबल विदेशी या डबल पुरुषार्थी बच्चों ने बाप का एक विशेष टाइटिल प्रत्यक्ष किया है। जो विदेश में मैजारिटी तरफ के बाप के बच्चों को निकाल उनकी भी तकदीर की तस्वीर बना दी है, इसीलिए लगन से जो चारों ओर मेहनत कर रहे हैं, उससे बाप का विश्व कल्याणकारी कर्तव्य प्रसिद्ध किया है इसीलिए बापदादा हर बच्चे को वाह! बच्चा वाह! की मुबारक देते हैं। अभी भी जैसे भारत में कोने-कोने में सन्देश देने की सेवा चलती रहती है ऐसे वहाँ भी उमंग-उत्साह है कि रहे हुए देश में सन्देश दे दें क्योंकि समय पर कोई भरोसा नहीं। बापदादा ने पहले से ही कहा है कि अचानक क्या भी हो सकता है इसलिए सन्देश देने का वा अपने प्रोग्रेस का अभी-अभी, कभी-कभी नहीं, बापदादा ने कहा ही है कि वास्तव में ब्राह्मणों की डिक्शनरी में कभी-कभी शब्द शोभता नहीं है, अभी-अभी, संकल्प किया करना ही है। देखेंगे, करेंगे, यह गे-गे का शब्द ही नहीं है इसलिए आपकी मम्मा ने भी यही लक्ष्य रखा और सबको याद दिलाया कि “अब नहीं तो कब नहीं”।

तो डबल पुरुषार्थी बच्चे अभी-अभी करने वाले हैं या कभी-कभी? जो समझते हैं कि अभी-अभी करके दिखाने वाले हैं, वह हाथ उठाओ। करना ही है। करना ही है। करेंगे नहीं, करना ही है। याद रखना, अपने आपही अपना चार्ट रखना और बाप-दादा ने पहले ही सुनाया है कि हर रात्रि को बापदादा को अपने सारे दिन का चार्ट सुनाने के बाद अपना दिमाग खाली करके सोने से आपको नींद भी अच्छी आयेगी और साथ में रोज़ का हालचाल देने से दूसरे दिन याद रहता है कि बाबा को हमने अपना कहा है, तो वह स्मृति सहयोग देती है। फिर धर्मराजपुरी में जाना नहीं पड़ेगा। दे दिया ना और परिवर्तन कर लिया तो धर्मराजपुरी से बच जायेंगे। अभी दूसरे वर्ष, देखा तो किसने नहीं है लेकिन अभी लक्ष्य रखो, वर्ष को छोड़ो, कम से कम जितने थोड़े समय में बाप की जो आश है कि चेहरा दिखाई दे, चलन दिखाई दे, वह जल्दी से जल्दी प्रैक्टिकल में करके दिखाओ। हिम्मत है, तो हाथ उठाओ। हिम्मत है? हिम्मत है? अच्छा मुबारक हो। बापदादा तो हर बच्चे में निश्चय और हिम्मत का उमंग-उत्साह अभी-अभी देख रहा है। लेकिन जाते-जाते प्लेन में थोड़ा कम नहीं करना। बढ़ाते रहना। बापदादा ने जो दृढ़ संकल्प की चाबी दी है उसको सदा ही कायम रखना। करना ही है, अभी-अभी, गे गे नहीं। वह समय अभी गया। हो जायेगा नहीं, होना ही है। बापदादा ने डबल पुरुषार्थी का टाइटिल जो दिया है, उसको सदा याद रखना।

बाकी बापदादा ने रिजल्ट सुनी, बापदादा ने जो सेवा का प्लैन दिया, उसमें भारत ने भी कम नहीं किया और विदेश ने भी कम नहीं किया। इस वरदान को मैजारिटी स्थानों में उमंग-उत्साह से किया है और रिजल्ट भी अलग-अलग स्थान की आ रही है। तो बापदादा चाहे भारत के बच्चों को, चाहे विदेश के बच्चों को पदम-पदम गुणा प्रैक्टिकल लाने की मुबारक दे रहे हैं।

अभी इस वर्ष में विशेष कौन सी बात प्रैक्टिकल में करनी है, वह सुना दिया कि अभी आपको जो भी देखे उसको आपके चेहरे में चमक दिखाई दे। प्रत्यक्षता के निमित्त बनना है, बाप को प्रत्यक्ष करना है तो क्या करना है? सदा मुस्कराता हुआ चेहरा, कोई चिंतन में, कोई उलझन में नहीं। बापदादा ने सुनाया था कि अभी दो शब्द याद करो – माया को इशारा करो गेट आउट और अपने को गेस्ट हाउस में अनुभव करो। यह दुनिया आपकी नहीं है, गेस्ट हाउस है, अब तो घर जाना ही है। घर के नज़ारे मन में बुद्धि में दिखाई दें। तो आटोमेटिकली घर आया कि आया। आपका एक गीत है – अब घर चलना है। तो यह लहर हर स्थान पर हो, चाहे भारत, चाहे विदेश, अब यह अनुभव प्रत्यक्ष करके दिखाओ। बेहद का वैराग्य, गेस्ट हाउस में दिल नहीं लगती, जाना है, जाना है, याद रहता है। तो यह बेहद का वैराग्य कोई भी प्रकार के मन के संकल्पों को, आपस में संगठन के माया के विघ्नों को एकदम समाप्त कर देगा। यह माया के तूफान आपके लिए तोहफा बन जायेंगे। यह जो छोटे-मोटे पेपर आते हैं यह पेपर नहीं लगेंगे लेकिन एक अनुभव बढ़ाने की लिफ्ट लगेंगे। गिफ्ट और लिफ्ट। समझा। अभी लक्ष्य रखो बेहद के वैरागी और हिम्मत उमंग-उत्साह के पंखों से उड़ते रहो और उड़ाते रहो। अभी उड़ने का समय है। अपने पंख सदा चेक करो कमजोर तो नहीं हो रहे हैं!

बापदादा डबल विदेशियों का विस्तार देख खुश है, अभी क्या देखने चाहते हैं? हर बच्चा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण, सर्व खजानों से सम्पन्न और हर श्रीमत जो मिलती रही है उसमें सम्पूर्ण। पसन्द है? पसन्द है तो ताली बजाओ। अच्छा। यह ताली हर दिन याद करना, अपने आप ही मन में बजाना, बाहर से नहीं मन में बजाना। यह होमवर्क है। अच्छा।

90 देशों से 2300 भाई बहिनें आये हुए हैं:- (पांचों खण्डों के भाई बहिनों को अलग-अलग ग्रुप में खड़ा किया)

1- अमेरिका, कैनाडा और कैरेबियन के भाई बहिनें, 2- आस्ट्रेलिया, एशिया, न्यूजीलैण्ड, फिजी, 3- यूरोप, यू.के., मिडिल ईस्ट 4- अफ्रीका, साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, 5- रशिया, सी.आई.एस., बाल्टिक कन्ट्रीज़

सभी ने आगे बढ़ने का संकल्प भी किया है और आपस में रूहरिहान भी की है। बापदादा के पास समाचार आता रहता है। अभी एवररेडी ग्रुप बनाओ। जो देश जितने भी आये हैं, उन देशों में बापदादा प्राइज़ देंगे, क्या प्राइज देंगे वह तो देखेंगे उस समय। लेकिन बापदादा डबल पुरुषार्थी बच्चों के हर एरिया के ग्रुप को यही कहते हैं कि कोई भी ग्रुप जो नम्बरवन जायेगा उसको प्राइज देंगे। एक देश के एक-एक शहर में जितने भी सेन्टर हैं, मानो अमेरिका है, अमेरिका के कनेक्शन में जो भी देश हैं, वह सभी देश आपस में राय कर प्रोग्राम बनायें कि यहाँ सभी निर्विघ्न रहेंगे, एवररेडी रहेंगे, मायाजीत रहेंगे, स्नेही और सेवा में सहयोगी रहेंगे। जो नम्बरवन होगा उसको बापदादा प्राइज देगा। चलो, एक नहीं तो तीन को देंगे। एक दो तीन। तीन नम्बर। वैसे तो एक को दिया जाता है लेकिन डबल पुरुषार्थी हैं ना तो तीन को चांस देंगे। पसन्द है? हाँ हाथ हिलाओ। पसन्द है? कितना टाइम चाहिए? यह टीचर सुनावें, कितना टाइम चाहिए प्राइज लेने में? बताओ। (सभी ने कहा फरवरी तक) सभी देशों की टीचर्स हाथ उठाओ। ठीक है? तैयार होंगे ना! फिर बापदादा प्राइज देंगे। बहुत अच्छा। इसकी ताली तो बजाओ। अच्छा। भारत का भी टर्न आयेगा। अभी तो आप लोगों का टर्न है। बापदादा भी खुश होते हैं वाह तीव्र पुरुषार्थी बच्चे वाह! अच्छा।

चारों ओर के तीव्र पुरुषार्थी हिम्मत और उमंग-उत्साह से उड़ने वाले, चलने वाले नहीं, उड़ने वाले, चारों ओर के बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनने वाले बापदादा के दिलतख्तनशीन, सदा बाप के कम्बाइण्ड रूप का अनुभव और सहयोग लेने वाले हर एक बाप के सिकीलधे, स्नेही बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

दादियों से:- बाप के साथ आप सबका भी सहयोग रहा है ना। बच्चे और बाप दोनों के सहयोग से यज्ञ चला है, चलता रहेगा। निमित्त तो आप भी हो ना। साकार में एक ने कहा दूसरे ने किया। एक दो के सहयोगी बन उड़ रहे हो। बाबा उड़ते हुए देख खुश होते हैं। (दादी जानकी ने कहा कमाल है, गुल्जार दादी की) वह तो साथ में है ही। बापदादा की यही शुभ इच्छा है कि आप सभी जो निमित्त हैं वह सदा एक दिखाई पड़ें। भिन्न-भिन्न नहीं, एक दिखाई दें। एक ने कहा दूसरे ने राय दी और एक हो गये। तभी तो यज्ञ चल रहा है। आप सबकी एकता से ही चल रहा है, चाहे बाहर से दिखाई नहीं दे लेकिन संकल्प में, विचारों में एक रह करके और आगे बढ़ाना है क्योंकि अभी आप सबके ऊपर नज़र है। अच्छा।

वरदान:- अपनी श्रेष्ठ वृत्ति द्वारा शुद्ध वायुमण्डल बनाने वाले सदा शक्तिशाली आत्मा भव
जो सदा अपनी श्रेष्ठ वृत्ति में स्थित रहते हैं वे किसी भी वायुमण्डल, वायब्रेशन में डगमग नहीं हो सकते। वृत्ति से ही वायुमण्डल बनता है, यदि आपकी वृत्ति श्रेष्ठ है तो वायुमण्डल शुद्ध बन जायेगा। कई वर्णन करते हैं कि क्या करें वायुमण्डल ही ऐसा है, वायुमण्डल के कारण मेरी वृत्ति चंचल हुई – तो उस समय शक्तिशाली आत्मा के बजाए कमजोर आत्मा बन जाते हैं, लेकिन व्रत (प्रतिज्ञा) की स्मृति से वृत्ति को श्रेष्ठ बना दो तो शक्तिशाली बन जायेंगे।
स्लोगन:- गुणमूर्त बनकर सर्व को गुणमूर्त बनाना ही महादानी बनना है।

 

ये अव्यक्त इशारे- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो”

आपस में एक दो के प्रति सच्चा स्नेह हो, तो स्नेही आत्मा के प्रति कभी अनुमान पैदा नहीं होगा। उनके स्नेह के बोल, साधारण होते भी फील नहीं होगे। उनका हल्का बोल भी ऐसे लगेगा कि इसने अवश्य कोई मतलब से कहा होगा। बेमतलब, व्यर्थ नहीं लगेगा। जहाँ स्नेह होता है, वहाँ फेथ जरूर होता है। तो ब्राह्मण परिवार में एक दो के प्रति स्नेह वा फेथ रख, सम्पूर्ण निश्चयबुद्धि बनो तब ब्रह्मा बाप की आशाओं को पूरा कर सकेंगे।

प्रश्न 1: सर्व खजानों से सम्पन्न होने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
सर्व खजानों से सम्पन्न होने का अर्थ है – आत्मा के पास ज्ञान, योग, गुण, शक्तियाँ, स्नेह और खुशी जैसे सभी आध्यात्मिक खजाने होना। ये खजाने परमात्मा द्वारा समान रूप से सभी बच्चों को प्राप्त होते हैं, लेकिन उनका उपयोग और संचय (जमा) हर आत्मा के पुरुषार्थ पर निर्भर करता है।


 प्रश्न 2: सबसे पहला और मुख्य खजाना कौन सा है?

उत्तर:
सबसे पहला खजाना है ज्ञान धन। इस ज्ञान से आत्मा सभी बंधनों से मुक्त होकर महादानी बन जाती है और दूसरों को भी ज्ञान का दान देती है।


प्रश्न 3: योग (याद) का खजाना क्या देता है?

उत्तर:
योग का खजाना आत्मा को अनेक शक्तियाँ प्रदान करता है, जैसे सहन शक्ति, निर्णय शक्ति, सामना करने की शक्ति आदि, जिससे आत्मा परिस्थितियों में अडोल रहती है।


 प्रश्न 4: संगमयुग के समय का खजाना क्यों विशेष है?

उत्तर:
संगमयुग का समय सबसे अनमोल खजाना है क्योंकि:

  • यह बहुत छोटा है, लेकिन प्राप्तियाँ अनंत हैं
  • एक-एक सेकण्ड अनेक वर्षों के समान है
  • इसी समय में भगवान का साक्षात्कार होता है
  • 21 जन्मों की पूर्ण प्राप्ति (सुख, शांति, समृद्धि) की गारंटी मिलती है

 प्रश्न 5: आत्मा के खजाने कैसे दिखाई देते हैं?

उत्तर:
आत्मा के खजाने उसके चेहरे और चलन (व्यवहार) से दिखाई देते हैं।

  • चेहरे पर शांति और खुशी की चमक
  • व्यवहार में मधुरता और स्थिरता
    यही अलौकिकता का साक्षात्कार कराते हैं।

 प्रश्न 6: केवल ज्ञान सुनाना पर्याप्त क्यों नहीं है?

उत्तर:
समय परिवर्तन के कारण भविष्य में लोगों के पास सुनने का समय नहीं होगा। इसलिए आपकी पर्सनैलिटी (चेहरा और चलन) ही संदेश देने का माध्यम बनेगी। लोग दूर से ही आपकी अलौकिकता अनुभव करेंगे।


 प्रश्न 7: समय का महत्व क्यों बताया गया है?

उत्तर:
संगमयुग में समय बहुत कीमती है।

  • 2 मिनट भी बहुत मूल्यवान हैं
  • समय का सही उपयोग करने से आत्मा तेजी से आगे बढ़ती है
    इसलिए हर सेकण्ड को श्रेष्ठ संकल्प में लगाना आवश्यक है।

 प्रश्न 8: “अभी-अभी” करने का क्या महत्व है?

उत्तर:
ब्राह्मण जीवन में “कभी-कभी” नहीं, बल्कि “अभी-अभी” करना चाहिए।

  • जो संकल्प लिया, उसे तुरंत कर्म में लाना
  • टालमटोल (delay) से प्रगति रुक जाती है

 प्रश्न 9: रात को चार्ट चेक करने का क्या लाभ है?

उत्तर:
रोज़ रात को अपने पूरे दिन का चार्ट (स्व-निरीक्षण) करने से:

  • गलतियों का सुधार होता है
  • मन हल्का हो जाता है
  • नींद अच्छी आती है
  • अगले दिन के लिए जागरूकता बढ़ती है

 प्रश्न 10: “गेस्ट हाउस” की भावना क्या है?

उत्तर:
इस दुनिया को गेस्ट हाउस समझना है, अपना स्थायी घर नहीं।

  • इससे वैराग्य आता है
  • आसक्ति खत्म होती है
  • आत्मा परमधाम की याद में रहती है

 प्रश्न 11: माया से बचने का सरल तरीका क्या है?

उत्तर:
दो शब्द याद रखें:
माया को कहो – “गेट आउट”
खुद को समझो – “गेस्ट”
इससे मन स्थिर रहेगा और माया के प्रभाव से बचाव होगा।


 प्रश्न 12: सच्चा महादानी कौन है?

उत्तर:
जो स्वयं गुणमूर्त बनकर दूसरों को भी गुणमूर्त बनाता है, वही सच्चा महादानी है।


 प्रश्न 13: श्रेष्ठ वृत्ति का क्या प्रभाव होता है?

उत्तर:
यदि आत्मा की वृत्ति श्रेष्ठ है तो:

  • वातावरण (वायुमंडल) स्वतः शुद्ध हो जाता है
  • आत्मा परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होती
  • वह सदा शक्तिशाली बनी रहती है

 प्रश्न 14: ब्राह्मण परिवार में एकता का आधार क्या है?

उत्तर:
ब्राह्मण परिवार की एकता का आधार है:

  • सच्चा स्नेह (Love)
  • विश्वास (Faith)
    जहाँ स्नेह होता है, वहाँ कभी संदेह नहीं होता।
  • सर्व खजानों से सम्पन्न, अलौकिक जीवन, ब्रह्माकुमारी ज्ञान, मुरली ज्ञान, राजयोग मेडिटेशन, आत्मा की शक्ति, परमात्मा का ज्ञान, संगमयुग रहस्य, समय का महत्व, डबल पुरुषार्थ, आत्मिक जीवन, आध्यात्मिक ज्ञान, आत्मा और परमात्मा, योग की शक्ति, ब्राह्मण जीवन, माया पर विजय, गेस्ट हाउस जीवन, वैराग्य जीवन, पॉजिटिव थिंकिंग, इनर पीस, स्पिरिचुअल मोटिवेशन, मेडिटेशन पावर, शिवबाबा ज्ञान, बीके ज्ञान, मधुबन अनुभव, आत्मिक खुशी, दिव्य गुण, शक्तिशाली आत्मा, आत्मा जागृति, परमात्म प्यार, सच्चा सुख, जीवन परिवर्तन, श्रेष्ठ संकल्प, आत्मिक उन्नति, आध्यात्मिक जागृति, BK Murli, BK Knowledge, God Shiva, Om Shanti,Full of all treasures, supernatural life, Brahma Kumari knowledge, Murli knowledge, Rajyoga meditation, power of the soul, knowledge of God, Confluence Age mystery, importance of time, double effort, spiritual life, spiritual knowledge, soul and God, power of yoga, Brahmin life, victory over Maya, guest house life, life of renunciation, positive thinking, inner peace, spiritual motivation, meditation power, Shivbaba knowledge, BK knowledge, Madhuban experience, spiritual happiness, divine qualities, powerful soul, soul awakening, divine love, true happiness, life transformation, noble resolution, spiritual progress, spiritual awakening, BK Murli, BK Knowledge, God Shiva, Om Shanti,