AV-12/16-11-1995-बापदादा की चाहना – डायमण्ड जुबली वर्ष को “लगाव मुक्त वर्ष” के रूप में मनाओ
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय : डायमण्ड जुबली वर्ष – लगाव मुक्त बनने का परमात्म संकल्प
अव्यक्त मुरली
तिथि: 12 जनवरी 1992 (डायमण्ड जुबली विशेष अव्यक्त बापदादा महावाक्य)
भूमिका
इस अव्यक्त महावाक्य में बापदादा सम्पूर्ण ब्राह्मण परिवार को एक विशेष लक्ष्य देते हैं—“डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव-मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ।”
बापदादा समझाते हैं कि जब हृदय परमात्म प्रेम से भर जाता है, तब संसार का कोई भी व्यक्ति, वस्तु, पद, सेवा या विशेषता आत्मा को आकर्षित नहीं कर सकती।
अध्याय 1 : अमृतवेले परमात्म प्रेम से दिल भरना
मुख्य बिंदु
- अमृतवेला पूरे दिन की नींव है।
- जो आत्मा अमृतवेले परमात्म प्रेम से भर जाती है, वह दिनभर सुरक्षित रहती है।
- खाली दिल में ही माया प्रवेश करती है।
मुरली नोट्स
“दिल में परमात्म स्नेह पूरा भर लो, फिर माया आकर्षित नहीं कर सकती।”
उदाहरण
जैसे एक गिलास पानी से पूरा भरा हो तो उसमें धूल नहीं ठहर सकती।
उसी प्रकार परमात्म प्रेम से भरा हुआ हृदय किसी अन्य आकर्षण को स्थान नहीं देता।
अध्याय 2 : हीरा और मिट्टी का उदाहरण
मुख्य बिंदु
बापदादा पूछते हैं—
यदि एक हाथ में हीरा और दूसरे हाथ में मिट्टी हो तो आत्मा किसे चुनेगी?
उत्तर—
हीरा अर्थात परमात्म प्रेम।
मिट्टी अर्थात देह, व्यक्ति और पदार्थ।
मुरली नोट्स
“व्यक्ति भी मिट्टी है, वैभव भी मिट्टी है।”
अध्याय 3 : गुणों में नहीं, दाता में लगाव
मुख्य बिंदु
किसी की विशेषता अच्छी लगे—
तो विशेषता के पीछे मत जाओ।
दाता को याद करो।
मुरली नोट्स
“विशेषता का दाता बाप है, व्यक्ति नहीं।”
उदाहरण
यदि कोई शिक्षक बहुत अच्छा पढ़ाता है—
उसकी बुद्धि और शक्ति भी परमात्मा की देन है।
इसलिए व्यक्ति नहीं,
दाता को याद करो।
अध्याय 4 : लगाव कैसे पुरुषार्थ कमज़ोर करता है
मुख्य बिंदु
लगाव हमेशा
- अलबेलेपन
- व्यर्थ संकल्प
- अपेक्षा
- निराशा
- क्रोध
को जन्म देता है।
मुरली नोट्स
“आज का छोटा लगाव कल पुरुषार्थ में रुकावट बन जाता है।”
अध्याय 5 : क्रोध का वास्तविक कारण
मुख्य बिंदु
क्रोध किसी व्यक्ति से नहीं होता।
क्रोध तब आता है—
जब हमारी इच्छा पूरी नहीं होती।
मुरली नोट्स
“इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध उत्पन्न होता है।”
उदाहरण
यदि सेवा में अपना नाम न आये—
तो मन दुखी होता है।
यह लगाव है।
अध्याय 6 : सोने से पहले बुद्धि को खाली करना
मुख्य बिंदु
बापदादा कहते हैं—
सोने से पहले
दिनभर का हिसाब
बाप को सौंप दो।
फिर बाप के साथ सोओ।
मुरली नोट्स
“अकेले मत सोओ, बाप के साथ सोओ।”
उदाहरण
जिस प्रकार मोबाइल की मेमोरी साफ करते हैं—
वैसे ही बुद्धि को भी प्रतिदिन साफ करना चाहिए।
अध्याय 7 : लगाव-मुक्त वर्ष का लक्ष्य
मुख्य बिंदु
डायमण्ड जुबली का लक्ष्य—
✔ व्यक्ति से लगाव नहीं
✔ साधनों से लगाव नहीं
✔ पद से लगाव नहीं
✔ सेवा से अहंकार नहीं
✔ केवल परमात्म प्रेम
मुरली नोट्स
“यूज़ करना अलग बात है, लगाव रखना अलग बात है।”
अध्याय 8 : विभिन्न वर्गों के लिए बापदादा की प्रेरणा
टीचर्स
- स्वयं उदाहरण बनें।
- लगाव-मुक्त जीवन जिएँ।
कुमारियाँ
- निर्बन्धन बनें।
- मन और संबंध दोनों से मुक्त रहें।
कुमार
- दिव्य गुणों वाले युवा बनें।
- समाज के लिए प्रेरणा बनें।
प्रवृत्ति वाले
- बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार दें।
- परिवार को आध्यात्मिक आदर्श बनायें।
अध्याय 9 : पवित्रता ही विश्व परिवर्तन का आधार
मुख्य बिंदु
- पवित्रता सबसे बड़ी शक्ति है।
- पवित्रता ही ब्राह्मण जीवन की पहचान है।
- पवित्रता का प्रकाश विश्व को आकर्षित करेगा।
मुरली नोट्स
“पवित्रता का पिल्लर ही लाइट हाउस बनेगा।”
मुख्य शिक्षाएँ
अमृतवेले दिल को परमात्म प्रेम से भरें।
व्यक्ति नहीं, दाता को देखें।
गुणों से नहीं, भगवान से प्रेम करें।
सेवा करें लेकिन सेवा में अहंकार न हो।
सोने से पहले बुद्धि को परमात्मा को सौंप दें।
डायमण्ड जुबली वर्ष को वास्तव में “लगाव-मुक्त वर्ष” बनाएं।
जीवन में अपनाने योग्य संकल्प
“मैं परमात्म प्रेम से सम्पूर्ण भरी हुई आत्मा हूँ। मेरा किसी व्यक्ति, वस्तु, पद या परिस्थिति से कोई लगाव नहीं। मेरा एकमात्र स्नेह और सहारा शिवबाबा हैं।”
Disclaimer
यह वीडियो केवल आध्यात्मिक अध्ययन, आत्म-परिवर्तन एवं राजयोग शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत विचार ब्रह्माकुमारीज़ की अव्यक्त मुरली शिक्षाओं पर आधारित हैं। किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, संस्था या व्यक्ति की आलोचना अथवा भावनाओं को आहत करना इसका उद्देश्य नहीं है। मूल मुरली एवं शिक्षाओं के सभी अधिकार ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के हैं। यह प्रस्तुति केवल अध्ययन, चिंतन और आध्यात्मिक प्रेरणा के लिए है।
डायमण्ड जुबली वर्ष – “लगाव-मुक्त वर्ष” के रूप में मनाओ | अव्यक्त बापदादा मुरली (12 जनवरी 1992)
प्रश्न 1: बापदादा डायमण्ड जुबली वर्ष किस रूप में मनाने की प्रेरणा देते हैं?
उत्तर: बापदादा चाहते हैं कि सम्पूर्ण ब्राह्मण परिवार डायमण्ड जुबली वर्ष को “लगाव-मुक्त वर्ष” के रूप में मनाए और व्यक्ति, वैभव तथा साधनों के लगाव से मुक्त बने।
प्रश्न 2: अमृतवेले का विशेष महत्व क्या है?
उत्तर: अमृतवेला पूरे दिन की नींव है। यदि आत्मा उस समय परमात्म प्रेम से अपने हृदय को भर लेती है, तो दिनभर माया का आकर्षण प्रभाव नहीं डालता।
प्रश्न 3: माया आत्मा को कब आकर्षित करती है?
उत्तर: जब हृदय परमात्म प्रेम से पूर्ण नहीं होता और उसमें व्यक्ति, वैभव या इच्छाओं के लिए स्थान बचा रहता है, तब माया विभिन्न रूपों में आकर्षित करती है।
प्रश्न 4: बापदादा ने हीरे और मिट्टी का उदाहरण क्यों दिया?
उत्तर: यह समझाने के लिए कि परमात्म प्रेम हीरे के समान अमूल्य है और संसार का आकर्षण मिट्टी के समान नश्वर है। बुद्धिमान आत्मा हमेशा हीरे को चुनती है।
प्रश्न 5: किसी व्यक्ति के गुण देखकर हमें क्या स्मृति रखनी चाहिए?
उत्तर: गुणों के दाता परमात्मा हैं। इसलिए व्यक्ति से नहीं, बल्कि गुणों के दाता शिवबाबा से प्रेम और कृतज्ञता रखनी चाहिए।
प्रश्न 6: लगाव पुरुषार्थ को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: लगाव आत्मा को अलबेलेपन, व्यर्थ संकल्प, अपेक्षा, निराशा और अंततः क्रोध की ओर ले जाता है।
प्रश्न 7: क्रोध का मूल कारण क्या है?
उत्तर: जब हमारी इच्छा, अपेक्षा या संकल्प पूरे नहीं होते, तब क्रोध उत्पन्न होता है।
प्रश्न 8: सोने से पहले बापदादा क्या करने की शिक्षा देते हैं?
उत्तर: पूरे दिन का पोतामेल बाप को सौंपकर बुद्धि को हल्का करें और परमात्म स्मृति में सोएँ, ताकि व्यर्थ या विकारी स्वप्न न आएँ।
प्रश्न 9: “यूज़ करना और लगाव रखना” में क्या अंतर है?
उत्तर: साधनों का सेवा के लिए उपयोग करना उचित है, लेकिन उनके प्रति मोह या आसक्ति रखना आध्यात्मिक प्रगति में बाधा है।
प्रश्न 10: टीचर्स के लिए बापदादा का विशेष संदेश क्या था?
उत्तर: टीचर्स स्वयं लगाव-मुक्त जीवन का श्रेष्ठ उदाहरण बनें और दूसरों को भी इस दिशा में प्रेरित करें।
प्रश्न 11: कुमारियों को कौन-सा विशेष लक्ष्य दिया गया?
उत्तर: मन और संबंधों के बन्धनों से मुक्त होकर निर्बन्धन जीवन जीते हुए ईश्वरीय सेवा में निमित्त बनना।
प्रश्न 12: कुमारों के लिए बापदादा की क्या अपेक्षा थी?
उत्तर: ऐसे चरित्रवान, पवित्र और सेवा-भावी युवा बनें जो समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करें।
प्रश्न 13: प्रवृत्ति वालों को क्या विशेष जिम्मेदारी दी गई?
उत्तर: अपने परिवार और बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार देकर ऐसा आदर्श बनाना कि वे समाज के लिए जीवंत प्रमाण बनें।
प्रश्न 14: पवित्रता को लाइटहाउस क्यों कहा गया?
उत्तर: क्योंकि पवित्र जीवन का प्रकाश स्वयं भी मार्गदर्शन करता है और अनेक आत्माओं को भी परमात्म मार्ग की ओर आकर्षित करता है।
प्रश्न 15: इस मुरली का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: परमात्म प्रेम से हृदय को पूर्ण भरकर व्यक्ति, वस्तु, पद और परिस्थिति के सभी लगावों से मुक्त बनें। यही सच्ची पवित्रता, योगयुक्त जीवन और विश्व-परिवर्तन का आधार है।
लगाव मुक्त, डायमण्ड जुबली, अव्यक्त मुरली, बापदादा, ब्रह्माकुमारीज, शिवबाबा, राजयोग, राजयोग मेडिटेशन, परमात्म प्रेम, पवित्रता, आत्मचेतना, आत्मज्ञान, ईश्वरीय ज्ञान, मधुबन, मुरली क्लास, ओम शांति, बीके मुरली, आध्यात्मिक ज्ञान, योग शक्ति, विश्व परिवर्तन, दिव्य जीवन, आत्म परिवर्तन, ब्रह्माकुमारी, BK, Murli, Avyakt Murli, BapDada, Brahma Kumaris, Rajyoga, Om Shanti,Attachment Free, Diamond Jubilee, Avyakt Murli, BapDada, Brahma Kumaris, Shivbaba, Rajyoga, Rajyoga Meditation, Divine Love, Purity, Self-Consciousness, Enlightenment, Divine Knowledge, Madhuban, Murli Class, Om Shanti, BK Murli, Spiritual Knowledge, Yoga Shakti, World Transformation, Divine Life, Self Transformation, Brahma Kumari, BK, Murli, Avyakt Murli, BapDada, Brahma Kumaris, Rajyoga, Om peace,

