Avyakt Murli”18 जनवरी 1969 (13)

Short Questions & Answers Are given below (लघु प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

आज जब मैं वतन में गई तो बाप और दादा दोनों सामने खड़े थे। और जाते ही नयनों की मुलाकात से सभी की जो यादप्यार ले गई थी वह दी। जैसे ही मैं याद दे रही थी तो साकार बाबा ने मेरा हाथ पकड़ा। उस हाथ पकड़ने में ना मालूम क्या जादू था – ऐसे अनुभव हुआ जैसे सागर में कोई स्नान करता है, ऐसे थोड़े समय के लिए मैं प्रेम के सागर में लीन हो गई। उसके बाद हमने आलमाइटी बाबा की तरफ देखा। तो बाबा ने कहा बच्ची-बाप में मुख्य दो गुण जो हैं वह बच्चों ने साकार रूप में अनुभव किया है। वह दो गुण कौन से हैं? जितना ही ज्ञान स्वरूप उतना ही प्रेम स्वरूप। तो बच्चों को भी यह दो गुण अपने हर चलन में धारण करने हैं। फिर मैंने बाबा से पूछा कि पहले वतन में जो गये हुए बच्चों का इतना संगठन था इसका रहस्य क्या था! बाबा ने कहा पूरा राज तो बाद में चलकर सुनायेंगे लेकिन साकार रूप से जो कोई सर्विस अर्थ या कुछ हिसाब किताब चुक्तू करने अर्थ चले गये हैं उन बच्चों से मुलाकात करने के लिए बुलाया था। बाबा उनसे हालचाल पूछ रहे थे कि कौन-कौन, किस रीति से किस रूप से क्या-क्या कर रहे हैं। हमने कहा बाबा, यह किस रूप से स्थापना के कार्य में बिजी हैं? तो बाबा बोले बच्ची यह आगे चलकर स्पष्ट करेंगे, फिर भी शार्ट में सुनाते हैं। बाबा ने कहा – बच्ची जब लड़ाई होती है तो किसी भी लश्कर को जब जीतना होता है तो सिर्फ एक तरफ से नहीं चारों तरफ से लश्कर भेजकर पूरा घेराव डाल देते हैं। इस संगठन से यह मालूम हुआ कि जो भी बच्चे गये हैं वह चारों और फैल गये हैं। अभी चारों तरफ स्थापना की नीव पड़ गई है। बाकी अब आर्डर देने की जरूरत है।

फिर बाबा ने चार स्टेजेस की एक सीढ़ी दिखाई। पहली स्टेज दिखाई – ज्ञान सुनना, सोचना- समझना और निश्चय करना। कोई सोच करता है, कोई मंथन करता है। दूसरी स्टेज बताई – कि अन्त समय कैसे विनाश हो रहा है। कहाँ बाढ़ से डूब रहे हैं, कहाँ क्या हो रहा है लेकिन शक्ति दल और पाण्डव बिल्कुल अडोल खड़े थे। तीसरी स्टेज दिखाई कि आत्मायें जैसे निकल कर परमधाम में गुब्बारे माफिक जा रही हैं। फिर परमधाम की सीन भी बाबा ने दिखाई। चौथी सीन – स्वर्ग की दिखाई। स्वर्ग में आत्मायें कैसे छोटे-छोटे बच्चों में प्रवेश हो रही हैं। तो यह सभी स्टेजेस सीढ़ी के चित्र के रूप में दिखाई। यह सीढ़ी दिखाने का रहस्य बताते हुए बाबा ने कहा, बच्चों की बुद्धि में यह घूमता रहे कि अब हमारी क्या स्टेज है। जो अन्तिम स्टेज धारण करनी है वह लक्ष्य पहले से ही बुद्धि में रखेंगे तो पुरूषार्थ तेज चलेगा। विनाश के समय की जो सीन दिखाई उसमें आप बच्चों की अडोल अवस्था रहे। फिर बाबा ने हमें ढेर हीरे हाथ में दिये और कहा इन हीरों का टीका सभी बच्चों को लगाना। यह हीरे क्यों दे रहा हूँ? क्योंकि हीरे मिसल आत्मा मस्तक में रहती हैं। तो हरेक आत्मा सच्चा हीरा बन चमकती रहे।

Title: “बाबा का संदेश: ज्ञान और प्रेम के दो गुण”

Questions and Answers:

  1. प्रश्न: आज वतन में जाते समय क्या अनुभव हुआ था?
    • उत्तर: जब मैं वतन में गई, बाप और दादा सामने खड़े थे। जैसे ही मैंने याद दी, साकार बाबा ने मेरा हाथ पकड़ा। उस हाथ में ऐसा अनुभव हुआ जैसे मैं प्रेम के सागर में लीन हो गई।
  2. प्रश्न: बाबा ने दो मुख्य गुणों के बारे में क्या कहा?
    • उत्तर: बाबा ने कहा कि बच्चों ने साकार रूप में दो मुख्य गुण अनुभव किए हैं: जितना ज्ञान स्वरूप उतना ही प्रेम स्वरूप। यह दोनों गुण बच्चों को अपने हर चलन में धारण करने हैं।
  3. प्रश्न: वतन में गए बच्चों के संगठन का रहस्य क्या था?
    • उत्तर: बाबा ने बताया कि जब कोई लड़ाई होती है, तो लश्कर चारों तरफ फैलकर घेराव डालता है। वतन में गए बच्चों का संगठन इसी तरह चारों दिशा में फैल चुका है, जिससे स्थापना की नींव पड़ी है।
  4. प्रश्न: बाबा ने चार स्टेजेस के बारे में क्या बताया?
    • उत्तर: बाबा ने चार स्टेजेस की सीढ़ी दिखाई: 1) ज्ञान सुनना और निश्चय करना, 2) विनाश के समय की स्थिति, 3) आत्मायें परमधाम की ओर जा रही हैं, 4) स्वर्ग में आत्मायें बच्चों में प्रवेश कर रही हैं।
  5. प्रश्न: बाबा ने बच्चों को क्या सिखाया और क्या दिया?
    • उत्तर: बाबा ने बच्चों को हीरों का टीका लगाने का आदेश दिया और बताया कि ये हीरे मिसल आत्मा मस्तक में रहते हैं। हरेक आत्मा सच्चा हीरा बनकर चमकती रहे, यह उद्देश्य है।

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