RAJYOGA (04) — Self-Respect Alone Is True Rajyoga | The True State of the Soul

RAJYOG(04)-स्वमान ही सच्चा राजयोग | आत्मा की वास्तविक स्थिति

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सही रोज राजयोग क्या है?
सही राजयोग क्या है? आज हम इसका चौथा पाठ कर रहे हैं। स्वमान — आत्मा की वास्तविक स्थिति। क्योंकि हम इसके बाद रोजाना का एक स्वमान आपको देंगे करने के लिए। उसके लिए यह ग्राउंड बनाया है। चार, पांच, छह वीडियो हैं ये।

स्वमान क्या होता है? आत्मा की वास्तविक स्थिति।
स्वमान है सच्चा राजयोग।

कब होगा स्वमान? सच्चा राजयोग?
जब हम स्वमान को ठीक रीति से अनुभव करेंगे।

स्वमान को रोजाना अपने जीवन में धारण करने के लिए यह कुछ बातें बेसिक रूप से हमें जानना जरूरी है। जैसे पहली बात है कि मैं आत्मा हूं।

जैसे उसके लिए स्वमान दिया है कि चैतन्य शक्ति का स्वरूप हूं।

स्वाभिमान और आत्म गौरव — अपने आप को स्वाभिमानी समझना, स्वयं का अभिमान करना, अपने आत्म गौरव को महसूस करना।

स्थिरता, शांति।

चौथा आता है विचारों और भावनाओं पर मास्टर, क्योंकि हम फिर अपने विचारों और भावना के मास्टर बनते हैं।

जीवन में सफलता और सकारात्मकता — ये पांच अवस्थाएं होती हैं जो हमें रोजाना ध्यान रखनी हैं।

स्वमान खोया तो शांति भी गई, मान भी गया और बुद्धि भी गई। साथ-साथ सारे गुण ऑटोमेटिक एक-एक करके चले जाते हैं।

स्वमान क्या है? आत्मा की वास्तविक शक्ति है।
बाबा बार-बार कहते हैं अपने को आत्मा समझो।

यही स्वमान है।
स्वमान क्या है? आत्मा की ओरिजिनल पहचान।

जैसे —
मैं शांत स्वरूप हूं।
मैं शक्ति स्वरूप हूं।
मैं पवित्र हूं।

ये कोई कल्पना नहीं। ये आत्मा की सच्चाई है।

मुरली का सार — जैसा सिमरन वैसा सोचो। जैसा सोचोगे वैसा बन जाएगा।

यदि देह का स्मरण — कमजोरी।
आत्मा का स्मरण — शक्ति।

स्वमान का प्रभाव होने पर आत्मा का स्मरण शक्ति देता है।

जब आत्मा स्वमान में रहती है, मन स्थिर होता है। निर्णय शक्तिशाली होते हैं। माया का प्रभाव कम होता है।

निष्कर्ष: स्वमान राजयोग की नींव है।
स्वमान क्या है? राजयोग की नींव है।

बिना स्वमान के योग स्थिर नहीं हो सकता।
बिना स्वमान के योग स्थिर नहीं हो सकता।

अच्छा। ओम शांति।

और विस्तार से जानने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के किसी भी सेवा केंद्र पर संपर्क करें।

यदि कोई प्रश्न है तो 9213106986 पर टेलीग्राम करें।
96506970 पर केवल WhatsApp करें।

ओम शांति।

सही राजयोग।

अगला विषय है — सही राजयोग क्या? परमात्मा से संबंध।

जब हम परमात्मा से संबंध जोड़ते हैं, तो वह शक्ति का स्रोत है। परमात्मा से हमको शक्तियां मिलती हैं।

सही राजयोग जीवन बदलने की कुंजी है।

मन की शांति, असीम शांति और सुंदर निरंतर सुख।

निरंतर सुख, जीवन का लक्ष्य स्पष्ट।

कोई भ्रम नहीं। भ्रम कौन सा होता है?
केवल भाग्य, पूजा-पाठ, कर्म से मुक्ति नहीं।

मैं और परमात्मा — दो चीजें। दोनों का संबंध जुड़ा तो शक्ति मिलेगी।

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