(18)09-03-1985 “Love for the Father and service – this is the lifeblood of a Brahmin’s life.”
09-अव्यक्त मुरली-(18)09-03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए…
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09-अव्यक्त मुरली-(18)09-03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए…
(01)आंखें ही बनाती हैं क्रिमिनल – पवित्रता का असली राज प्रस्तावना आंखें आत्मा का दर्पण हैं। इन्हीं से सुख-दुख, मोह…