(18)09-03-1985 “Love for the Father and service – this is the lifeblood of a Brahmin’s life.”
09-अव्यक्त मुरली-(18)09-03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए…
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09-अव्यक्त मुरली-(18)09-03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए…
अव्यक्त मुरली-(21)02-04-1984 “बिन्दु का महत्व” (प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं) 02-04-1984 “बिन्दु का महत्व” आज भाग्य-विधाता बाप…
T.L.P 88 “इस सृष्टि की तुलना वृक्ष से क्यों की गई परमात्मा को वृक्षपति क्यों कहा गया ( प्रश्न और…