(54)गीता के ज्ञान को ठीक से समझने की आवश्यकता-18
( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
गीता का असली रहस्य – श्रीकृष्ण नहीं, शिव ही हैं गीता ज्ञानदाता | मुरली और अंतिम 3 अध्याय का दिव्य अर्थ
“गीता का दिव्य रहस्य – मुरली की रोशनी में”
गीता — एक ऐसा ग्रंथ जिसे हिंदू धर्म का मूल कहा जाता है।
यह केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि परमात्मा की वाणी है — आत्मा, परमात्मा और मोक्ष का रहस्य इसी में छिपा है।
लेकिन एक प्रश्न आज भी हर साधक के मन में है:
“क्या वास्तव में गीता श्रीकृष्ण ने सुनाई?”
या
“उस ज्ञान का स्त्रोत कोई और निराकार सत्ता थी?”
मुरली का प्रकाश – रहस्योद्घाटन:
मुरली 18 जनवरी 2025 में परमात्मा शिव स्वयं कहते हैं:
“बच्चे, श्रीकृष्ण तो देवता है, लेकिन गीता ज्ञानदाता मैं परमपिता परमात्मा हूँ। मैं ब्रह्मा तन में प्रवेश करके तुम आत्माओं को ज्ञान सिखाता हूँ।”
इससे स्पष्ट है:
श्रीकृष्ण सतयुग के पहले देवता हैं।
लेकिन ज्ञानदाता — निर्गुण, निराकार परमात्मा शिव हैं, जो संगमयुग पर आते हैं।
गीता के अंतिम तीन अध्याय – मुरली की दृष्टि से
अध्याय 16: दैवासुर सम्पद्विभागयोग
श्लोक:
“दैवासुरसम्पद्विभागयोगो नाम षोडशोऽध्यायः॥”
इस अध्याय में भगवान दैवी और आसुरी गुणों की पहचान कराते हैं।
मुरली में स्पष्टीकरण:
-
आत्मा को दैवी स्वरूप बनाना है — अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह जैसी आसुरी शक्तियों से मुक्त करना ही संगमयुग की तपस्या है।
-
यही सच्चा आत्म सुधार है।
अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोग
श्लोक:
“श्रद्धात्रयविभागयोगो नाम सप्तदशोऽध्यायः॥”
यह अध्याय तीन प्रकार की श्रद्धा को वर्णित करता है — सात्विक, राजसिक और तामसिक।
मुरली अनुसार:
-
सच्ची श्रद्धा = ज्ञानयुक्त श्रद्धा
-
अंधश्रद्धा छोड़कर, आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली श्रद्धा ही श्रेष्ठ है।
अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग
श्लोक:
“मोक्ष संन्यास योगो नाम अष्टादशोऽध्यायः॥”
यह गीता का अंतिम और सबसे गूढ़ अध्याय है।
मुरली की रोशनी में:
-
मोक्ष = आत्मा की पवित्रता की स्थिति
-
यह कोई सन्यास नहीं, बल्कि राजयोग के माध्यम से कर्म में रहते हुए योगयुक्त जीवन जीना है।
निष्कर्ष: सच्चा गीता ज्ञानदाता कौन?
-
गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण ने नहीं, परमात्मा शिव ने दिया — जो संगमयुग में ब्रह्मा के मुख से ज्ञान दोहराते हैं।
-
मुरली ही आज की जीवित गीता है, जिससे आत्मा फिर से देवी-देवता बनने की राह पर चलती है।
गीता ज्ञान = आत्मा + परमात्मा + योग + कर्म
मुरली ज्ञान = वही सजीव गीता ज्ञान, जो आज पुनः प्रकट हो रहा है।
समापन संदेश:
अब समय है आत्मज्ञान को अपनाने का,
अंधश्रद्धा से निकलकर साक्षात् परमात्मा की मुरली को सुनने का।
क्योंकि यही सच्चा मोक्षमार्ग है — शिव की सजीव गीता।
गीता का दिव्य रहस्य – प्रश्नोत्तर (Q&A)
Q1. क्या गीता का ज्ञान वास्तव में श्रीकृष्ण ने दिया था?
A1. नहीं। मुरली अनुसार, श्रीकृष्ण सतयुग के पहले देवता हैं, लेकिन गीता का ज्ञानदाता निराकार परमात्मा शिव हैं, जो संगमयुग में ब्रह्मा तन में प्रवेश कर आत्माओं को ज्ञान सुनाते हैं।
Q2. मुरली में गीता ज्ञान का रहस्य किस प्रकार बताया गया है?
A2. मुरली 18 जनवरी 2025 में स्पष्ट रूप से कहा गया:
“श्रीकृष्ण तो देवता है, लेकिन गीता ज्ञानदाता मैं परमपिता परमात्मा हूँ।”
इसका अर्थ है कि ज्ञान देने वाला कोई मनुष्य नहीं, बल्कि परमात्मा शिव हैं।
Q3. गीता के 16वें अध्याय में कौन-से गुणों का उल्लेख है और मुरली क्या कहती है?
A3. अध्याय 16 — दैवासुर सम्पद्विभागयोग
यह अध्याय दैवी और आसुरी स्वभावों को दर्शाता है।
मुरली अनुसार, संगमयुग पर आत्मा को दैवी गुणों से सम्पन्न बनाना ही सच्ची तपस्या है — जैसे क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार का त्याग।
Q4. गीता के 17वें अध्याय ‘श्रद्धात्रयविभागयोग’ का मुरली में क्या अर्थ है?
A4.यह अध्याय तीन प्रकार की श्रद्धा — सात्विक, राजसिक और तामसिक को वर्णित करता है।
मुरली ज्ञान अनुसार, सच्ची श्रद्धा वही है जो आत्मा को परमात्मा की पहचान और योग में स्थिर करे।
अंधश्रद्धा से बाहर आकर हमें ज्ञानयुक्त श्रद्धा अपनानी है।
Q5. मोक्ष का सही अर्थ क्या है? क्या सन्यास जरूरी है?
A5. अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग
मुरली में स्पष्ट किया गया है कि मोक्ष कोई भौतिक सन्यास नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्र और योगयुक्त अवस्था है।
राजयोग के माध्यम से कर्म में रहते हुए योगयुक्त जीवन जीना ही सच्चा मोक्ष मार्ग है।
Q6. मुरली को गीता से कैसे जोड़ा जा सकता है?
A6.मुरली ही आज की जीवित गीता है।
जिस ज्ञान को गीता में “भगवान” द्वारा अर्जुन को सुनाया गया था, वही ज्ञान आज परमात्मा शिव ब्रह्मा के मुख द्वारा दोहराते हैं।
मुरली = गीता का साक्षात पुनः प्रकट रूप।
Q7. सच्चा मोक्षमार्ग क्या है?
A7. सच्चा मोक्षमार्ग है —
-
आत्मा की पहचान
-
परमात्मा शिव की पहचान
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योग द्वारा आत्मा को शुद्ध बनाना
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कर्म करते हुए योगयुक्त जीवन जीना
Q8. आज के युग में परमात्मा से जुड़ने का उपाय क्या है?
A8.संगमयुग में परमात्मा से जुड़ने का उपाय है:
साकार मुरली को सुनना
राजयोग का अभ्यास करना
स्वधर्म में स्थित रहकर सेवा करना
Disclaimer (अस्वीकरण):
इस वीडियो का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान, मुरली शिक्षाओं और भगवद गीता के गूढ़ रहस्यों की व्याख्या करना है।
यह किसी धर्म, परंपरा या देवता का विरोध नहीं करता, बल्कि आत्मा और परमात्मा की सच्ची पहचान कराने का एक प्रयास है।
यह ज्ञान ब्रहमाकुमारीज़ संस्थान की मुरली पर आधारित है और सभी दर्शकों से अनुरोध है कि इसे खुले मन और निष्पक्ष दृष्टि से ग्रहण करें।
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