The real secret of Navratri:-(13)

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नवरात्रि काअसली रहस्य:(13)वैष्णो माता जगदंबा सरस्वती काली माता का दिव्य संबंध 3 पिंडियों का गुप्त रहस्य/

नवरात्रि का असली रहस्य पाठ 13

वैष्णव माता आप में से कौन-कौन गए हैं वैष्णो देवी?

मैं गई हूं।
हाँ, देखा आपने वैष्णो माता को अंदर जाकर?

हाँ, हाथ भी लगा था मेरा।
हाथ लगा था। किसको हाथ लगा?

मैंने बोला, स्टार्टिंग में पास में थी तो मैंने गर्दन झुकाई नीचे, तो हाथ लग गया था पिंडी पे।
अच्छा।

वहाँ पर तीन पिंडियां रखी हैं। किसकी पिंडियां हैं वो?
हाँ।
तीन पिंडियां किसकी हैं वो?
पत्थर की रखी हैं।
हाँ जी। पत्थर की पिंड रखी हैं। हाँ, वो किसकी हैं? क्यों रखी हैं? वो क्या चीज है? वो क्या कहते हैं? दुर्गा।

भाई जी, मैंने तो सोचा कि मैं ये देखने के लिए इतना तकलीफ उठा के आई हूं।
छोटी-छोटी पिंडी रखी हुई हैं। वहाँ छोटी-छोटी पिंडी रखी हुई हैं। क्या है उसको?

भाई जी, वैसे उनको दुर्गा, काली, सरस्वती बोलते हैं।
तीन माताओं की तीन आत्माएं वहाँ पर रखी हैं। हाँ।


तीन पिंडियों का गुप्त रहस्य

1. दिव्य संबंध को समझना
मानव इतिहास में देवी स्वरूपों को अलग-अलग रूपों में पूजा गया है।
परंतु ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान कहता है कि दिव्यता एक ही है, जो भिन्न-भिन्न शक्तियों के रूप में प्रकट होती है।


नवरात्रि का असली रहस्य

उदाहरण: जैसे सूर्य की किरणें अलग-अलग रंग दिखाती हैं, परंतु प्रकाश एक ही होता है।
इसी प्रकार ये देवियां अलग-अलग हैं, परंतु इनके द्वारा सबको सुख पहुंचेगा।


वैष्णो माता और काली माता का गहरा संबंध

  • वैष्णो माता शक्ति, शांति और कल्याण का प्रतीक है।

  • काली माता परिवर्तन और आत्म विजय की शक्ति का प्रतीक है।
    दोनों एक ही ऊर्जा की अलग-अलग अभिव्यक्ति हैं।


उदाहरण द्वारा समझना

जैसे एक ही बिजली से बल्ब रोशनी देता है, हीटर गर्मी देता है, पंखा हवा देता है।
वैसे ही एक ही शक्ति अलग-अलग रूपों में कार्य करती है। परमात्मा अपना कार्य कर रहा है।


वैष्णो माता के मंदिर में तीन पिंडियों का रहस्य

मंदिर में तीन पिंडियां –

  • सरस्वती

  • लक्ष्मी

  • काली

ये एक ही शक्ति के तीन रूप हैं।
ये ज्ञान, समृद्धि और शक्ति – तीनों के संतुलन के प्रतीक हैं।


आध्यात्मिक दृष्टिकोण

  • जगदंबा सरस्वती – ज्ञान और बुद्धि की देवी।

  • लक्ष्मी माता – समृद्धि और कल्याण की देवी।

  • काली माता – परिवर्तन व निडरता का प्रतीक।

ये तीनों रूप आत्मा की पूर्णता के चरण हैं –
पहले ज्ञान (सरस्वती), फिर शक्ति (काली), और अंत में समृद्धि (लक्ष्मी)।


आत्मा के विकास का क्रम

जैसे बीज → पौधा → फल।
उसी प्रकार ज्ञान → शक्ति → समृद्धि।

मुरली (10 मई 2024):
“मां जगदंबा ज्ञान का सागर है। इसी ज्ञान से शक्तियां प्राप्त होती हैं। और वही शक्तियां आत्मा को लक्ष्मी जैसे संपूर्ण बनाती हैं।”

मुरली (21 मार्च 2023):
“माता का रूप एक ही है परंतु शक्तियां अनेक हैं। एक मां से ही ज्ञान, शक्ति और संपन्नता प्राप्त होती है।”


निष्कर्ष

  • एक ही दिव्य ऊर्जा अनेक रूपों में व्यक्त होती है।

  • देवी के रूप अलग हो सकते हैं, पर शक्ति एक ही – शिव शक्ति है।

  • वास्तविक पूजा है उस ज्ञान और शक्ति को जीवन में उतारना, जिससे हम भी दिव्य बन सकें।

  • वैष्णो माता – जगदंबा सरस्वती – काली माता का दिव्य संबंध | तीन पिंडियों का गुप्त रहस्य


    प्रश्न 1: वैष्णो माता के मंदिर में तीन पिंडियां क्यों रखी हैं?

    ✅उत्तर: ये तीन पिंडियां सरस्वती, लक्ष्मी और काली माता का प्रतीक हैं।

    • सरस्वती = ज्ञान और बुद्धि की देवी

    • लक्ष्मी = समृद्धि और कल्याण की देवी

    • काली = विकार-विनाश और निडरता की शक्ति

    ये तीनों पिंडियां वास्तव में एक ही शक्ति के तीन रूप हैं।


    प्रश्न 2: क्या सरस्वती, दुर्गा, लक्ष्मी और काली अलग-अलग देवियां हैं?

     उत्तर: नहीं, ये सब एक ही शक्ति की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं।
    उदाहरण: जैसे सूर्य की रोशनी से अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं, वैसे ही एक ही दिव्य शक्ति अलग-अलग रूपों में कार्य करती है।


    प्रश्न 3: वैष्णो माता और काली माता का आपस में क्या संबंध है?

     उत्तर: वैष्णो माता शांति, शक्ति और कल्याण की प्रतीक हैं,
    जबकि काली माता परिवर्तन और आत्म-विजय की प्रतीक हैं।
    दोनों एक ही ऊर्जा की अलग-अलग अभिव्यक्ति हैं।


    प्रश्न 4: इन तीन पिंडियों का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

     उत्तर:

    • जगदंबा सरस्वती – ज्ञान और बुद्धि देती हैं।

    • काली माता – विकारों का नाश कर आत्मा को निडर बनाती हैं।

    • लक्ष्मी माता – आत्मा को समृद्धि और पूर्णता का आशीर्वाद देती हैं।

    ये आत्मा की आध्यात्मिक यात्रा के तीन चरण हैं:
    ज्ञान → शक्ति → समृद्धि।


    प्रश्न 5: मुरली में तीन शक्तियों को कैसे समझाया गया है?

     उत्तर:

    • मुरली (10 मई 2024): “मां जगदंबा ज्ञान का सागर है। इसी ज्ञान से शक्तियां प्राप्त होती हैं। और वही शक्तियां आत्मा को लक्ष्मी जैसा संपूर्ण बनाती हैं।”

    • मुरली (21 मार्च 2023): “माता का रूप एक ही है, परंतु शक्तियां अनेक हैं। एक मां से ही ज्ञान, शक्ति और संपन्नता प्राप्त होती है।”


    प्रश्न 6: वास्तविक पूजा क्या है?

     उत्तर: असली पूजा पिंडियों को छूना या फूल चढ़ाना नहीं है, बल्कि उस ज्ञान और शक्ति को अपने जीवन में धारण करना है।
    जब हम विकारों का नाश कर आत्मा को पवित्र बनाते हैं, तभी देवी पूजा सफल होती है।

  • Disclaimer :(डिस्क्लेमर)इस वीडियो का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। यह केवल आध्यात्मिक ज्ञान और ब्रह्माकुमारीज मुरली में वर्णित गहन रहस्यों की व्याख्या है। देवी-देवताओं और शास्त्रों के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाने का प्रयास किया गया है। हम सबके अपने-अपने विश्वास का सम्मान करते हैं।
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