(36) ‘युगे युगे‘ वाक्यांश का वास्तविक अर्थ?
“‘युगे युगे’ का असली अर्थ क्या है? | क्या भगवान हर युग में आते हैं? | ब्रह्मा कुमारीज़ द्वारा रहस्योद्घाटन”
प्रस्तावना:
हम सबने सुना है –
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकले शब्द “युगे युगे” को बहुत लोग समझते हैं कि –
भगवान हर युग में अवतरित होते हैं – सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग – सभी में।
पर क्या वास्तव में यही अर्थ है?
या इसमें कोई गूढ़, दिव्य रहस्य छुपा है?
आज हम इसका विश्लेषण करेंगे –
शास्त्रों, संस्कृत, और ब्रह्मा कुमारीज़ के ईश्वरीय ज्ञान के आधार पर।
1. ‘युग’ शब्द का विविध अर्थ – क्या एक युग या चतुर्युग?
श्लोक – भगवद गीता, अध्याय 8, श्लोक 17:
“सहस्र-युग-पर्यन्तम् अहः यद् ब्रह्मणो विदुः…”
इसका अर्थ:
1 युग = चतुर्युग (सतयुग + त्रेता + द्वापर + कलियुग)
1000 चतुर्युग = ब्रह्मा का एक दिन = 4.32 अरब वर्ष
निष्कर्ष:
यहाँ ‘युग’ का अर्थ सिर्फ सतयुग, त्रेता जैसे किसी एक युग से नहीं, बल्कि पूरे चतुर्युग चक्र से है।
2. ‘युगे युगे’ का सही अर्थ – हर चतुर्युग के अंत में
संस्कृत व्याकरण के अनुसार –
‘युगे युगे’ = प्रत्येक चतुर्युग के संगम काल में।
कविता में संक्षिप्तता के लिए ‘चतुर्युगे चतुर्युगे’ की जगह ‘युगे युगे’ कहा गया।
जैसे कोई कहे – “मैं हर सदी में जन्म लेता हूँ”, इसका अर्थ हर साल नहीं होता।
इसी प्रकार, *‘युगे युगे’ का अर्थ हर सतयुग, त्रेता में नहीं – बल्कि हर कल्प के अंत में है।
3. ब्रह्मा कुमारीज़ की मुरलियों से प्रमाण
मुरली 05 जनवरी 2023:
“मैं हर कल्प के संगम पर आता हूँ। सतयुग, त्रेता में नहीं आता।”
मुरली 15 अगस्त 2022:
“‘यदा यदा हि धर्मस्य’ का अर्थ कल्प-कल्प संगम पर है। युगे युगे = हर चतुर्युग के अंत पर।”
साफ है – परमात्मा हर युग में नहीं, बल्कि हर चतुर्युग के संगम काल में आते हैं।
4. महाभारत और गीता काल = संगम युग
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता ज्ञान,
कब दिया गया?
जब द्वापर का अंत और कलियुग की शुरुआत थी।
यही समय संगम युग है –
जब अधर्म की पराकाष्ठा होती है और परमात्मा अवतरित होते हैं।
5. ब्रह्मा कुमारीज़ द्वारा इस युग का रहस्योद्घाटन
शिव बाबा कहते हैं:
“मैं कल्प-कल्प संगम पर आता हूँ। ब्रह्मा के मुख द्वारा ज्ञान देता हूँ।”
यही समय है संगम युग,
जहाँ परमात्मा शिव निराकार रूप में आकर,
हमें ज्ञान, योग और पुनः धर्म स्थापना का कार्य कराते हैं।
निष्कर्ष:
‘युगे युगे’ का वास्तविक अर्थ – हर चतुर्युग के अंत में।
परमात्मा हर युग में नहीं, बल्कि कल्प के संगम पर एक बार आते हैं।
गीता में वर्णित ज्ञान भी इसी संगम युग का था।
आज वही संगम युग पुनः आया है, और परमात्मा ब्रह्मा के तन में प्रवेश कर रहे हैं।
“‘युगे युगे’ का असली अर्थ क्या है? | क्या भगवान हर युग में आते हैं? | ब्रह्मा कुमारीज़ द्वारा रहस्योद्घाटन”
प्रस्तावना:
प्रश्न 1:“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…” इस श्लोक को हम कैसे समझते हैं?
उत्तर:अधिकांश लोग मानते हैं कि इसका अर्थ है – भगवान हर युग में आते हैं: सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग – सभी में।
लेकिन शास्त्र, संस्कृत व्याकरण और ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान से स्पष्ट होता है कि इसका अर्थ कुछ और, बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है।
1. ‘युग’ शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है?
प्रश्न 2:क्या ‘युग’ का अर्थ एक युग (जैसे सतयुग) होता है या पूरा चतुर्युग?
उत्तर:गीता अध्याय 8, श्लोक 17 में स्पष्ट किया गया है –
“सहस्र-युग-पर्यन्तम् अहः यद् ब्रह्मणो विदुः…”
इसमें कहा गया कि ब्रह्मा का एक दिन = 1000 युग = 1000 चतुर्युग = 4.32 अरब वर्ष।
इससे स्पष्ट है कि ‘युग’ का प्रयोग कभी-कभी पूरे चतुर्युग चक्र के लिए होता है, न कि किसी एक युग के लिए।
2. ‘युगे युगे’ का वास्तविक अर्थ क्या है?
प्रश्न 3:क्या ‘युगे युगे’ का अर्थ है – हर युग में भगवान आते हैं?
उत्तर:नहीं।
संस्कृत में ‘युगे युगे’ का अर्थ होता है –
प्रत्येक चतुर्युग के अंत पर यानी कल्प-कल्प के संगम युग में।
जैसे कोई कहे “मैं हर सदी में जन्म लेता हूँ” तो इसका मतलब हर साल नहीं होता।
उसी प्रकार, ‘युगे युगे’ = हर कल्प के अंत में परमात्मा का अवतरण।
3. मुरली प्रमाण क्या कहते हैं?
प्रश्न 4:क्या ब्रह्मा कुमारीज़ की मुरलियों में इसका उल्लेख है?
उत्तर:जी हाँ, स्पष्ट प्रमाण हैं:
मुरली 05 जनवरी 2023:
“मैं हर कल्प के संगम पर आता हूँ। सतयुग, त्रेता में नहीं आता।”
मुरली 15 अगस्त 2022:
“‘यदा यदा हि धर्मस्य’ का अर्थ कल्प-कल्प संगम पर है। ‘युगे युगे’ = हर चतुर्युग के अंत पर।”
इनसे सिद्ध होता है कि परमात्मा सत, त्रेता, द्वापर, कलियुग में नहीं आते –
वे हर चतुर्युग के संगम युग में ही अवतरित होते हैं।
4. गीता का ज्ञान और महाभारत काल कब था?
प्रश्न 5:क्या गीता का ज्ञान भी संगम युग में ही दिया गया?
उत्तर:जी हाँ।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान द्वापर के अंत और कलियुग की शुरुआत में दिया था –
यही समय संगम युग कहलाता है।
जब अधर्म चरम पर होता है, तब परमात्मा अवतरित होते हैं – यही गीता का सन्देश है।
5. ब्रह्मा कुमारीज़ क्या कहती हैं?
प्रश्न 6:परमात्मा शिव इस युग में कैसे आते हैं?
उत्तर:ब्रह्मा कुमारीज़ के अनुसार –
शिव बाबा (परमात्मा) हर कल्प के संगम युग में ब्रह्मा के तन में प्रवेश करते हैं।
वे ज्ञान, योग और धर्म स्थापना के कार्य हेतु अवतरित होते हैं।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारीज़ संस्थान द्वारा दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित है। इसमें प्रस्तुत विचार शास्त्रों, मुरली ज्ञान, और संस्कृत व्याकरण के आधार पर ‘युगे युगे’ के गूढ़ अर्थ का विश्लेषण करते हैं। यह वीडियो किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति की आस्था को ठेस पहुँचाने हेतु नहीं है, बल्कि आत्मिक जागृति और सत्य ज्ञान को साझा करने हेतु है।
कृपया खुले मन से देखें और स्वयं अनुभव करें।
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