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Creaate YouTube वीडियो & disclamer, डिस्क्रिप्शन और हैशटैग्स “तीसरा विश्व युद्ध

सृष्टि परिवर्तन।

आज उसका चौथा पाठ करेंगे। युद्ध के साथ-साथ

प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी।
प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी।

क्या युद्ध के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी?

मुरली से स्पष्ट उत्तर

वार एंड नेचुरल डिजास्टर — युद्ध होगा तो उसके साथ-साथ प्राकृतिक आपदाएं भी आएंगी।

इनका क्या संबंध होगा?
सृष्टि परिवर्तन के संकेत

मुरली क्या कहती है?

डिस्क्लेमर है। यह वीडियो आध्यात्मिक अध्ययन और चिंतन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक समझ को बढ़ाना है।

इसमें व्यक्त विचार ब्रह्मा कुमारी शिक्षाओं, मुरलियों और वक्ता की आध्यात्मिक समझ पर आधारित हैं।

इस वीडियो का उद्देश्य किसी भी प्रकार की भय उत्पन्न करने वाली भविष्यवाणी करना या किसी देश, समाज या राजनीतिक घटना पर टिप्पणी करना नहीं है।

युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विश्व परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाने के लिए किया गया है।

क्या युद्ध के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी?

आज की दुनिया में बढ़ती हुई घटनाएं।
आज की दुनिया में बढ़ती हुई घटनाएं।

आज हम समाचारों में लगातार देखते हैं। कहीं युद्ध का तनाव है, कहीं भूकंप है, तो कहीं बाढ़ है, कहीं भीषण गर्मी है तो कहीं महामारी है।

आज पूरे विश्व में यदि देखें तो कहीं इतनी बर्फ गिर रही है कि कई सालों के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। उसी समय दूसरी जगह इतनी भीषण आग लगी हुई है कि कई गांव और शहर खाली कराए जा रहे हैं और आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा रहा।

कहीं बाढ़ आई हुई है — ऐसी बाढ़ कि शहर के शहर डूबे पड़े हैं।

अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग प्रकार की समस्याएं दिखाई दे रही हैं और चारों तरफ संसार युद्ध के तनाव में फंसा हुआ है।

कई देशों को देखकर ऐसा लगता है जैसे तीसरा विश्व युद्ध या अंतिम विश्व युद्ध शुरू हो गया हो।

जैसे पूरी दुनिया एक साथ कई प्रकार के संकटों से गुजर रही है।

इसलिए बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है — क्या युद्ध के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ेंगी?
और क्या यह सब सृष्टि परिवर्तन का संकेत है?

आज हम इस प्रश्न को ब्रह्मा कुमारी ज्ञान और मुरली के आधार पर समझने का प्रयास करेंगे।

सृष्टि परिवर्तन का आध्यात्मिक सिद्धांत

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार यह संसार एक नियत चक्र के अनुसार चलता है।

चार युगों का चक्र —
सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग।

जब यह चारों युग पूरे हो जाते हैं तो एक नया कल्प शुरू होता है।

इन दोनों कल्पों के बीच एक संगम युग आता है।

यह वही समय है जब पुरानी दुनिया समाप्त होकर नई दुनिया की स्थापना होती है।

पुराना कल्प समाप्त होता है और नया कल्प शुरू होता है।

यह चक्र लगातार चलता रहता है। यह कभी भी रुकता नहीं।

इसलिए हमें यह बात अच्छी तरह समझनी चाहिए कि यह कल्प का चक्र हूबहू चलता रहता है।

सतयुग → त्रेता → द्वापर → कलयुग → फिर से सतयुग।

लेकिन इसके बीच में लगभग 100 वर्ष का समय आता है जिसे संगम युग कहा जाता है।

यह वही समय है जब एक कल्प समाप्त होता है और दूसरा कल्प शुरू होने वाला होता है।

जैसे रात से दिन होने के समय को अमृतवेला कहा जाता है, उसी प्रकार यह भी परिवर्तन का समय है।

आज हम वही संगम युग का समय देख रहे हैं।

नई दुनिया की स्थापना

ब्रह्मा कुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अनुसार परमपिता परमात्मा ने बताया कि यह पुरानी दुनिया समाप्त होकर नई दुनिया की स्थापना होगी।

इसका अर्थ है कि परिवर्तन निश्चित है।

हमारी घड़ियां आगे-पीछे हो सकती हैं, लेकिन ड्रामा का समय कभी आगे-पीछे नहीं होता।

परिवर्तन अपने सटीक समय पर ही होगा।

लेकिन यह परिवर्तन किस प्रकार होगा, यह समझना भी आवश्यक है।

मुरली में युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं का संकेत

मुरलियों में कई स्थानों पर बताया गया है कि पुरानी दुनिया के अंत में कई प्रकार की घटनाएं होंगी।

आपस की लड़ाई भी होगी और प्राकृतिक आपदाएं भी होंगी।

इससे स्पष्ट होता है कि परिवर्तन केवल एक घटना से नहीं होगा, बल्कि कई प्रकार की घटनाओं के माध्यम से होगा।

इतिहास हमें क्या सिखाता है

यदि हम इतिहास देखें तो पाएंगे कि बड़े युद्धों के समय अक्सर प्राकृतिक संकट भी बढ़ जाते हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय कई देशों में भुखमरी और महामारी फैली और पर्यावरण को भी भारी नुकसान हुआ।

इससे पता चलता है कि मानव संघर्ष और प्राकृतिक संकट अक्सर साथ-साथ दिखाई देते हैं।

प्रकृति क्यों प्रतिक्रिया देती है

जब मनुष्य प्रकृति का संतुलन बिगाड़ता है तब प्रकृति प्रतिक्रिया करती है।

जैसे —
जंगलों की कटाई,
अत्यधिक औद्योगिक गतिविधियां,
प्रदूषण,
वाहनों की बढ़ती संख्या।

इन सबका प्रभाव पृथ्वी के संतुलन पर पड़ता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति का संबंध

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार प्रकृति और मनुष्य की चेतना का गहरा संबंध है।

जब मनुष्य की चेतना शुद्ध होती है तो प्रकृति भी संतुलित रहती है।

लेकिन जब मनुष्य विकारों में आ जाता है तो प्रकृति भी असंतुलित हो जाती है।

क्या यह घटनाएं सृष्टि परिवर्तन का संकेत हैं?

संगम युग वह समय है जब पुरानी दुनिया समाप्त होकर नई दुनिया की स्थापना होती है।

इस समय दुनिया में कई प्रकार के परिवर्तन दिखाई देते हैं।

लेकिन हमें इन्हें डर के रूप में नहीं देखना चाहिए।

ब्रह्मा कुमारीज के लिए इसका क्या अर्थ है

एक राजयोगी के लिए इन घटनाओं का अर्थ है आत्मिक तैयारी।

राजयोग हमें सिखाता है —
आत्म चेतना,
परमात्म स्मृति,
मानसिक स्थिरता।

अंत समय में बाप की याद ही पार लगाएगी।

नॉन-बीके लोगों को कैसे समझाएं

यदि हम लोगों को केवल विनाश की बातें बताएंगे तो वे डर जाएंगे।

इसलिए हमें संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण देना चाहिए।

उन्हें बताना चाहिए कि दुनिया परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।

सबसे बड़ा पुरुषार्थ

सबसे बड़ा पुरुषार्थ है आत्मा की पहचान।

हम यह नश्वर शरीर नहीं हैं।
हम अजर-अमर अविनाशी आत्माएं हैं।

निष्कर्ष

इसलिए यह संभव है कि युद्ध और प्राकृतिक आपदाएं एक साथ दिखाई दें।

लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि सृष्टि परिवर्तन एक बहुत बड़ी प्रक्रिया है।

इसमें शामिल हैं:
• सामाजिक परिवर्तन
• प्राकृतिक घटनाएं
• मानव संघर्ष

लेकिन सबसे बड़ा परिवर्तन है — मनुष्य की चेतना का परिवर्तन।

अंतिम संदेश

यदि हमें आने वाले समय के लिए तैयार होना है तो हमें डरने की आवश्यकता नहीं है।

हमें करना है:
ज्ञान को समझना,
राजयोग का अभ्यास करना,
और विश्व में शांति का संदेश फैलाना।

क्योंकि

सृष्टि परिवर्तन अंत नहीं है।
यह एक नई दिव्य दुनिया की शुरुआत है।

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