(13) Know the power of 84 hours. Its deep meaning and experience

(13)84 घंटों वाली शक्ति जानिए।इसका गहरा अर्थ और अनुभव

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साक्षात्कार मूरत कैसे बने? – 84 घंटों वाली शक्ति का रहस्य

Murli Reference:

  • अव्यक्त मुरली – 13 जून 1969

  • साकार मुरली – 18 जुलाई 1969

  • अव्यक्त वाणी – 12 मार्च 1970


प्रस्तावना

आज हम जानेंगे 84 घंटों वाली शक्ति क्या है और इसे आत्मा अपने जीवन में कैसे अनुभव कर सकती है
बाप ने मुरली में इसे सभी देवियों की महिमा और ऊर्जा का प्रतीक बताया है।

मुख्य विचार:

  • यह शक्ति साक्षात्कार मूरत बनने की आधारशिला है।

  • आत्मा में परमात्मा का अनुभव कराती है।


1. 84 घंटों वाली शक्ति का अर्थ

  • क्या है?

    • 84 घंटे = 7 दिन × 12 घंटे ध्यान, अध्ययन और पवित्रता का अभ्यास।

    • यह राजयोग की बुनियादी साधना (बेसिक कोर्स) है।

  • लाभ:

    • आत्मा में अद्भुत जागरण

    • परमात्मा का अनुभव।

    • आत्मा को पक्का विश्वास कि यही परमात्मा शिव हैं।

Murli Notes:

  • 13 जून 1969: “बच्चे, 84 घंटों का कोर्स करना है।”

  • 18 जुलाई 1969: “84 घंटों का कोर्स करने से आत्मा को नशा चढ़ता है कि परमात्मा वास्तव में हमको सिखा रहे हैं।”

  • 12 मार्च 1970: “84 घंटों की तपस्या आत्मा को नए जन्म का अनुभव कराती है।”


2. 84 घंटों वाली शक्ति का अनुभव कैसे करें

  1. निरंतर अभ्यास: सात दिन, रोज़ाना 12 घंटे ध्यान, मुरली अध्ययन और पवित्रता।

  2. अनुभव पर ध्यान दें: यह शक्ति केवल सुनने या पढ़ने से नहीं, बल्कि अनुभव और साक्षात्कार से मिलती है।

  3. आध्यात्मिक मनन और ध्यान: आत्मा लगातार ध्यान और अनुभव करके श्रेष्ठ योगी और महा तपस्वी बन सकती है।

  4. अनन्य सेवा और ईश्वरीय पालन: जीवन के हर क्षेत्र में परमात्मा की याद में रहना।

Example:

  • जैसे सूरज अपनी पूरी ऊर्जा 24 घंटे में धरती पर फैलाता है।

  • वैसे ही 84 घंटों वाली शक्ति आत्मा को पूर्ण प्रकाश और ऊर्जा देती है।

  • बैटरी जैसे चार्ज होने पर उपकरण को पूरी क्षमता से चलाती है, वैसे ही 84 घंटे आत्मा को पूर्ण पुरुषार्थ देते हैं।


3. अनुभव का महत्व

  • केवल ज्ञान या जानकारी से शक्ति नहीं मिलती।

  • अनुभव, साधना और साक्षात्कार से आत्मा उच्चतम पुरुषार्थ प्राप्त करती है।

  • आत्मा सहज योगी से श्रेष्ठ योगी, तपस्वी से महा तपस्वी बनने की क्षमता प्राप्त करती है।


4. निष्कर्ष

  • 84 घंटों वाली शक्ति = उच्चतम ऊर्जा, पुरुषार्थ और साक्षात्कार का प्रतीक

  • इसे अनुभव करके आत्मा बन सकती है:

    • साक्षात्कार मूरत

    • श्रेष्ठ योगी

    • महा तपस्वी

एंडिंग Thought:

“आइए हम अपनी आत्मा को 84 घंटों वाली शक्ति में लाएं और अनुभव करें। पूर्ण ऊर्जा, पूर्ण पुरुषार्थ और पूर्ण साक्षात्कार।”

प्रश्न 1: 84 घंटों वाली शक्ति क्या है?

उत्तर:
84 घंटों वाली शक्ति राजयोग की बुनियादी साधना (बेसिक कोर्स) है। यह 7 दिन × 12 घंटे ध्यान, मुरली अध्ययन और पवित्रता का अभ्यास है। यह शक्ति आत्मा को परमात्मा का अनुभव कराती है और उसे साक्षात्कार मूरत बनने की क्षमता देती है।


प्रश्न 2: इस शक्ति का आत्मा के लिए महत्व क्या है?

उत्तर:

  • आत्मा में अद्भुत जागरण।

  • परमात्मा का वास्तविक अनुभव।

  • आत्मा में अचल विश्वास कि यही परमात्मा शिव हैं।

  • आत्मा सहज योगी से श्रेष्ठ योगी, तपस्वी से महा तपस्वी बनने की क्षमता प्राप्त करती है।


प्रश्न 3: 84 घंटे का अभ्यास कैसे किया जाता है?

उत्तर:

  • सात दिन, रोज़ाना 12 घंटे ध्यान, मुरली अध्ययन और पवित्रता।

  • ध्यान में अनुभव और साक्षात्कार पर ध्यान देना।

  • अनन्य सेवा और ईश्वरीय पालन में रहना।

  • लगातार मनन और ध्यान करके आत्मा इस शक्ति तक पहुँचती है।


प्रश्न 4: क्या केवल पढ़ने और सुनने से यह शक्ति मिल सकती है?

उत्तर:
नहीं। 84 घंटों वाली शक्ति केवल अनुभव और साक्षात्कार से मिलती है। ज्ञान या जानकारी मात्र आत्मा को शक्ति नहीं देती।


प्रश्न 5: इस शक्ति का अनुभव किसी उदाहरण से समझाएँ।

उत्तर:

  • जैसे सूरज अपनी पूरी ऊर्जा 24 घंटे में धरती पर फैलाता है।

  • वैसे ही 84 घंटों वाली शक्ति आत्मा को पूर्ण प्रकाश और ऊर्जा देती है।

  • जैसे चार्ज बैटरी उपकरण को पूरी क्षमता से चलाती है, वैसे ही यह शक्ति आत्मा को पूर्ण पुरुषार्थ देती है।


प्रश्न 6: इस शक्ति से आत्मा क्या प्राप्त करती है?

उत्तर:

  • पूर्ण ऊर्जा और पुरुषार्थ।

  • परमात्मा का साक्षात्कार।

  • सहज योगी से श्रेष्ठ योगी और तपस्वी से महा तपस्वी बनने की क्षमता।

  • जीवन में अनुभव, शक्ति और आत्मविश्वास।


प्रश्न 7: इसे आत्मा अपने जीवन में कैसे अनुभव कर सकती है?

उत्तर:

  • प्रत्येक दिन 84 घंटों वाली शक्ति का अभ्यास।

  • अनुभव और ध्यान में आत्मा को संलग्न करना।

  • अनन्य सेवा और ईश्वरीय पालना में रहना।

  • मनन और ध्यान के माध्यम से आत्मा पूर्ण पुरुषार्थ और ऊर्जा तक पहुँचती है।

Disclaimer

यह वीडियो आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए है।
इसमें दी गई जानकारी Brahma Kumaris मुरली और teachings पर आधारित है।
व्यक्तिगत निर्णय और अनुभव के लिए आत्मा स्वयं जिम्मेदार है।

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