14- What is the ultimate state?

AT.GY.-14-“परम अवस्था क्या है?

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परिचय: क्या हमेशा शांति संभव है?

हर इंसान शांति चाहता है,
हर आत्मा खुशी चाहती है।

लेकिन सवाल है —
 क्या ऐसी स्थिति संभव है जहाँ हमेशा शांति, शक्ति और आनंद बना रहे?

 हाँ, यही है — परम अवस्था (Supreme Stage)


🔷 परम अवस्था की सरल परिभाषा

 परम अवस्था = आत्मा की सबसे ऊँची, स्थिर और शक्तिशाली स्थिति

मन पूरी तरह शांत
 बुद्धि एकदम स्पष्ट
 कोई नकारात्मकता नहीं

एक लाइन में:
जब आत्मा आत्म-अभिमान और परमात्मा-योग में स्थिर हो जाए


🔶 मुरली सार (Murli Essence)

 “परम अवस्था वह है जहाँ आत्मा पूर्ण शांति और शक्ति में स्थित रहती है”

 ऐसी स्थिति में आत्मा

  • परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होती
  • स्वयं में संतुष्ट रहती है
  • अंदर से आनंदित रहती है

 परम अवस्था की पहचान (Signs of Supreme Stage)

 मन में शांति और स्थिरता
 व्यर्थ विचार समाप्त
 हर परिस्थिति में संतुलन
 निर्णय लेने में स्पष्टता
 बिना कारण खुशी का अनुभव

 उदाहरण:

कोई आपको कुछ भी कहे —
 आप अंदर से अडोल (Unshaken) रहते हैं


 परम अवस्था तक पहुँचने का रास्ता

1️⃣ आत्म-अभिमान (Soul Consciousness)

“मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ”


2️⃣ देह-अभिमान समाप्त करना

 रोल निभाओ, लेकिन उसमें खोओ मत

 उदाहरण:
“यह मेरा बेटा है” = रोल
“वह आत्मा है” = सच्चाई


3️⃣ परमात्मा से योग (Connection with Supreme)

 सिर्फ बैठना नहीं, श्रीमत पर चलना ही सच्चा योग है


4️⃣ विचारों पर नियंत्रण

 नेगेटिव थॉट्स को रोकना
 पॉजिटिव थॉट्स बनाना


5️⃣ निरंतर अभ्यास (Consistency)

 रोज़ अभ्यास = ऊँची अवस्था


 साइंस और स्पिरिचुअल कनेक्शन

 मन = Mind
 बुद्धि = Intellect
 संस्कार = Sanskar

 जितना अभ्यास करेंगे,
उतने Neural Pathways बदलेंगे

 उदाहरण:

 शांत मन = सही निर्णय
 अशांत मन = भ्रम और कमजोरी


 उदाहरण से समझें

 समुद्र का उदाहरण

ऊपर लहरें (तूफान)
नीचे गहराई में शांति

परम अवस्था = गहरी शांति (Deep Ocean)


 एक्टर का उदाहरण

एक्टर रोल निभाता है
लेकिन अंदर जानता है — “मैं अलग हूँ”

 यही है आत्म-अभिमान + स्थिरता


 मेडिटेशन में परम अवस्था का अनुभव

 विचार लगभग शून्य
 गहरी शांति
 हल्कापन
आत्मा का ऊँचा अनुभव

 ऐसा लगता है जैसे
दुनिया से ऊपर उठ गए हों


 तीन अवस्थाओं का अंतर

1️⃣ सामान्य अवस्था → बहुत ज्यादा विचार
2️⃣ आत्म-अभिमानी अवस्था → स्पष्टता
3️⃣ परम अवस्था → लगभग शून्य विचार


 जीवन में उपयोग (Practical Application)

 परिस्थिति आए → स्थिर रहो

अंतर समझें:

Reaction = तुरंत प्रतिक्रिया
 Response = सोच-समझकर जवाब

 परम अवस्था में
हम हमेशा Response देते हैं


 साक्षी दृष्टा बनने की कला

 सुख में भी स्थिर
 दुख में भी स्थिर

 संकल्प: “Nothing New”


 मुरली विशेष नोट (20-01-1982)

 ऊँची अवस्था वही है जो

  • हर परिस्थिति में अडोल रहे
  • योग में स्थिर रहे
  • माया से अप्रभावित रहे

 ऐसी आत्मा ही
सच्ची योगी और विजयी आत्मा बनती है


 निष्कर्ष (Conclusion)

 परम अवस्था कोई कल्पना नहीं
 यह एक अनुभव करने योग्य स्थिति है

 हर आत्मा इसे प्राप्त कर सकती है
 अभ्यास, योग और आत्म-अभिमान से


 अंतिम संकल्प (Powerful Affirmation)

 “मैं आत्मा हूँ”
 “मैं शांति स्वरूप हूँ”
 “मैं शक्ति स्वरूप हूँ”

प्रश्न 1: क्या हमेशा शांति और खुशी में रहना संभव है?

 उत्तर:

हाँ, यह संभव है।
 इस स्थिति को ही परम अवस्था (Supreme Stage) कहा जाता है, जहाँ आत्मा सदा शांति, शक्ति और आनंद में रहती है।


 प्रश्न 2: परम अवस्था क्या है? (सरल परिभाषा)

 उत्तर:

परम अवस्था आत्मा की सबसे ऊँची, स्थिर और शक्तिशाली स्थिति है।

 इसमें:
 मन पूरी तरह शांत
 बुद्धि स्पष्ट
 कोई नकारात्मकता नहीं

 एक लाइन में:
आत्म-अभिमान और परमात्मा-योग में स्थिर रहना ही परम अवस्था है।


 प्रश्न 3: मुरली अनुसार परम अवस्था की क्या विशेषता है?

 उत्तर:

मुरली अनुसार परम अवस्था में आत्मा:
✔️ पूर्ण शांति और शक्ति में रहती है
✔️ परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होती
✔️ स्वयं में संतुष्ट रहती है
✔️ अंदर से आनंदित रहती है


 प्रश्न 4: परम अवस्था की पहचान क्या है?

 उत्तर:

✔️ मन सदा शांत और स्थिर
✔️ व्यर्थ विचार समाप्त
✔️ हर परिस्थिति में संतुलन
✔️ निर्णय लेने में स्पष्टता
✔️ बिना कारण खुशी

उदाहरण:
कोई कुछ भी कहे —
 आप अंदर से अडोल (Unshaken) रहते हैं।


 प्रश्न 5: परम अवस्था तक पहुँचने का पहला कदम क्या है?

उत्तर:

आत्म-अभिमान (Soul Consciousness)

“मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ” — यह सच्ची पहचान ही शुरुआत है।


 प्रश्न 6: देह-अभिमान से कैसे मुक्त हों?

उत्तर:

 रोल निभाओ, लेकिन उसमें खोओ मत

उदाहरण:
“यह मेरा बेटा है” = रोल
“वह आत्मा है” = सच्चाई


 प्रश्न 7: सच्चा योग क्या है?

उत्तर:

 सिर्फ बैठना योग नहीं है
परमात्मा की श्रीमत पर चलना ही सच्चा योग है


 प्रश्न 8: विचारों पर नियंत्रण क्यों जरूरी है?

उत्तर:

क्योंकि विचार ही अवस्था बनाते हैं।

✔️ नेगेटिव थॉट्स → अशांति
✔️ पॉजिटिव थॉट्स → शांति

 इसलिए विचारों को नियंत्रित करना आवश्यक है।


 प्रश्न 9: क्या बिना अभ्यास के परम अवस्था मिल सकती है?

उत्तर:

नहीं।

निरंतर अभ्यास (Consistency) से ही आत्मा ऊँची अवस्था को प्राप्त करती है।


 प्रश्न 10: साइंस और स्पिरिचुअल का क्या संबंध है?

उत्तर:

 मन = Mind
 बुद्धि = Intellect
 संस्कार = Sanskar

✔️ अभ्यास से Neural Pathways बदलते हैं

उदाहरण:
✔️ शांत मन = सही निर्णय
✔️ अशांत मन = भ्रम


 प्रश्न 11: परम अवस्था को समझने का सबसे सरल उदाहरण क्या है?

उत्तर:

 समुद्र का उदाहरण:

ऊपर लहरें (तूफान)
नीचे गहराई में शांति

परम अवस्था = गहरी शांति (Deep Ocean)


 प्रश्न 12: आत्म-अभिमान को कैसे समझें?

उत्तर:

 एक्टर का उदाहरण:

एक्टर रोल निभाता है
लेकिन जानता है — “मैं अलग हूँ”

 वैसे ही आत्मा शरीर से अलग है।


 प्रश्न 13: मेडिटेशन में परम अवस्था का अनुभव कैसा होता है?

उत्तर:

✔️ विचार लगभग शून्य
✔️ गहरी शांति
✔️ हल्कापन
✔️ ऊँचा अनुभव

 ऐसा लगता है जैसे दुनिया से ऊपर उठ गए हों।


 प्रश्न 14: तीन अवस्थाओं में क्या अंतर है?

उत्तर:

1️⃣ सामान्य अवस्था → बहुत ज्यादा विचार
2️⃣ आत्म-अभिमानी अवस्था → स्पष्टता
3️⃣ परम अवस्था → लगभग शून्य विचार


 प्रश्न 15: परम अवस्था का जीवन में उपयोग कैसे करें?

उत्तर:

 हर परिस्थिति में स्थिर रहना

✔️ Reaction नहीं, Response देना

 सोच-समझकर जवाब देना ही परम अवस्था का अभ्यास है।


 प्रश्न 16: साक्षी दृष्टा बनना क्या है?

उत्तर:

 हर स्थिति को दर्शक बनकर देखना

✔️ सुख में भी स्थिर
✔️ दुख में भी स्थिर

 संकल्प: “Nothing New”


प्रश्न 17: मुरली अनुसार सच्ची ऊँची अवस्था क्या है?

उत्तर:

(20-01-1982)

✔️ हर परिस्थिति में अडोल रहना
✔️ योग में स्थिर रहना
✔️ माया से अप्रभावित रहना

 ऐसी आत्मा ही सच्ची योगी और विजयी आत्मा है।


 प्रश्न 18: क्या परम अवस्था सभी के लिए संभव है?

उत्तर:

हाँ, हर आत्मा इसे प्राप्त कर सकती है।

 अभ्यास, योग और आत्म-अभिमान से यह संभव है।

Disclaimer (डिस्क्लेमर)यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की मुरली शिक्षाओं और आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मिक ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। यह किसी भी धार्मिक मान्यता या व्यक्तिगत विचारों का विरोध नहीं करता। दर्शक अपने विवेक से इस ज्ञान को ग्रहण करें।

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